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धान खरीदी में अव्यवस्था और किसानों की प्रताड़ना के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

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कलेक्टर को दी चेतावनी- समस्या का समाधान नहीं हुआ तो रोक देंगे परिवहन

बालोद जिले में धान खरीदी के दौरान किसानों को आ रही समस्याओं और प्रशासनिक सख्ती के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी के नेतृत्व में जिले के तीनों विधायकों अनिला भेड़िया डौंडी लोहारा, कुंवर सिंह निषाद गुंडरदेही एवं संगीता सिन्हा बालोद ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। चर्चा के दौरान विधायकों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन द्वारा किसानों के घरों में जाकर धान का स्टॉक चेक करने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। नेताओं ने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ अपराधी की तरह ट्रीट करना और स्टॉक चेक कर टोकन प्रदान करने में देरी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस ने इसे तत्काल बंद करने की मांग की है। कहा गया कि धान खरीदी के मात्र 11 दिन शेष हैं, जबकि जिले के हजारों किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा जा सका है। खरीदी केंद्रों की सीमा को तुरंत बढ़ाने की मांग की गई है ताकि किसान तय समय के भीतर अपना धान बेच सकें। टोकन वितरण में हो रही देरी और अनावश्यक नियमों से किसानों को मुक्त करने की बात कही गई।

दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी एवं विधायकों ने कलेक्टर को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का निदान नहीं किया गया और किसानों को राहत नहीं मिली, तो कांग्रेस पार्टी बालोद जिले में धान का परिवहन रोकने जैसे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, प्रदेश पदाधिकारी कृष्णा दुबे, मिथलेश निरोटी, गुलशन चंद्राकर, भोला देशमुख, राजू प्रभाकर, धनेश्वरी सिन्हा, पीयूष सोनी, रतीराम कोसमा, अंचल साहू, डॉ. किशोर साहू, सादिक अली, नरेंद्र सिन्हा, कुलदीप नौम्हारे, देवेंद्र साहू, कमलेश श्रीवास्तव, मोनू ठाकुर, यशवंत पुरी गोस्वामी, संदीप साहू, वैभव साहू, दाउद खान, जमील बख्श, जितेंद्र यादव, भूषण साहू, तुल्लेस सिन्हा, हिमांशु सागर साहू सहित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बस्तर की बेटी वैष्णवी राज्य के खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा

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पुणे में होने वाली राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में दिखाएगी जौहर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य (क्लासिक) बेंच प्रेस एवं डेडलिफ्ट सब जूनियर, जूनियर, सीनियर एवं मास्टर 1-2-3 महिला एवं पुरुष पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन 30 और 31 जनवरी को पुणे, महाराष्ट्र में किया जाना है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से मास्टर पावर लिफ्टिंग नेशनल चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। राज्यभर के प्रतिभावान खिलाड़ी इस आयोजन में अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले वर्ष 2025 में श्रीलंका के सिड़वा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेंच प्रेस एवं डेडलिफ्ट प्रतियोगिता में विजयी खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया था। इस सम्मान समारोह में बस्तर जिले की बेटी कुमारी वैष्णवी प्रजापति ने भी सहभागिता की थी, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन के बल पर बेंच प्रेस स्पर्धा में प्रथम स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया। वैष्णवी की सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। उनके पिता संतोष प्रजापति दिव्यांग हैं ।

और आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की खेल प्रतिभा पर भरोसा किया। सीमित संसाधनों के बीच भी उन्होंने वैष्णवी को देश के बाहर खेलने का अवसर दिलाया, जो आज बस्तर के लिए गर्व का विषय बन गया है। यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उन तमाम प्रतिभाओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पातीं। बस्तर जैसे क्षेत्रों में कई होनहार खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक कमजोरी और सहयोग के अभाव में वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुंच पाते। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक सहयोग की कमी के कारण अनेक प्रतिभावान खिलाड़ी बाहर जाकर प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पा रहे हैं। यदि ऐसे खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक और संस्थागत सहयोग मिले, तो बस्तर के खिलाड़ी देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी पहचान बना सकते हैं। वैष्णवी प्रजापति की सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर सीमित साधनों के बीच भी असाधारण प्रतिभाएं उभर सकती हैं। आने वाली राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बस्तर के एकबार फिर गौरवान्वित होने की उम्मीद की जा रही है।

नक्सलमुक्त होने की राह पर गोगुंड़ा गांव

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40 साल से नक्सलियों का राज चल रहा था यहां

गोगुंड़ा के 29 नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले का सबसे संवेदनशील और पिछले चार दशकों से नक्सलियों का गढ़ बना रहा गोगुंड़ा गांव अब नक्सल मुक्ति की राह पर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इस गांव और आसपास के गांवों के 29 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर गोगुंड़ा गांव के नक्सल मुक्त होने का रास्ता साफ कर दिया। कोंटा एरिया कमेटी सचिव मंगडू की मौत के बाद गोगुंड़ा गांव और आसपास इलाके में सक्रिय रहे 29 नक्सली आज 14 जनवरी को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ गए। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही नक्सल संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। जहां एक ओर एंटी नक्सल आपरेशन में नक्सली मारे जा रहे हैं, वहीं दूसरी और केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं तथा छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पुष्टि करते हुए कहा कि सुकमा जिला तेजी से माओवादमुक्ति की ओर बढ़ रहा है। जो माओवादी अभी भी शेष हैं, उनसे अपील है कि वे आत्म समर्पण कर शासन की योजनाओं का लाभ लें और देश, राज्य तथा बस्तर के विकास में भागीदार बनें। आज जिन नक्सलियों ने सरेंडर किया है वे केरलापाल इलाके में सक्रिय रहे हैं।

इन्होंने किया सरेंडर

बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गोगुंड़ा गांव के 29 नक्सली आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पहुंचे। जहां पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ अधिकारी हिमांशु लोहानी के समक्ष उन्होंने आत्मसमर्पण किया। जिसमें पोड़ियामी बुधरा दो लाख का इनामी, हेमला मंगडू, मड़कम हिड़मा, हेमला हिड़मा, माड़वी देवा, हेमला नंदा, मड़कम बुधरा, मुचाकी सोमा, मुचाकी गुट्टा, पोड़ियामी देवा, मुचाकी बुधरा, पोड़ियामी सोमड़ा, मुचाकी मुड़ा, सोढ़ी देवा, मुचाकि हिड़मा, वेट्टी देवा, मुचाकि नंदा, माड़वी राजा, पोड़ियामी बुधरी, सोड़ी नंदा, मड़कम कोसा, सोढ़ी बुधरा, मुचाकी आयता, मुचाकी नंदा, मुचाकी मुका, माड़वी सुक्का, माड़वी देवा, मुचाकी हिड़मा, मुचाकी लक्मा ने आत्म समर्पण किया। सभी आत्म समर्पण को सहयोग राशि के अलावा शासन की योजना का लाभ दिया जाऐगा। इस दौरान आईपीएस एएसपी रोहित शाह, मनीष रात्रे समेत पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारी मौजूद रहे।

पहाड़ की चोटी पर है गोगुंड़ा गां

गोगुंड़ा गांव की भागौलिक स्थिति बेहद जटिल है। इस गांव पर चार दशकों नक्सली काबिज रहे हैं। जिले का सबसे अति संवेदनशील गांव गोगुंड़ा पूरी तरह पहाड़ पर बसा हुआ है। आपरेशन करने के लिए जवानों को खड़ी पहाड़ी पर करीब 8 किमी. पैदल चलना पड़ता था। घने जंगल और उंची पहाड़ की चोटी माओवादियों के लिए सेफ जोन हुआ करती थी। लेकिन दो माह पहले पुलिस और सुरक्षा बलों ने वहां नया कैंप खोल दिया है और पहाड़ को काटकर एक सड़क भी बना ली गई है। जिसके बाद यहं छुपे माओवादी भागने लगे। कुछ दिन पहले इसी गांव का रहने वाला कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू मुठभेड़ में मारा गया था। वहीं पिछले दो माह से लगातार प्रशासन वहां पहुंच रहा है। कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण पूरी टीम के साथ वहां पहुंचे थे। जिसके बाद ग्रामीण भी प्रभावित हुए और माओवाद संगठन के लिए स्थानीय स्तर में काम करने वालों ने आत्म समर्पण किया।

वर्सन

कम हो जाएगी माओवादी गतिविधि

जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा लगातार कैंप खोले जा रहे हैं और आपरेशन चलाए जा रहे हैं, जिसके कारण माओवादी संगठन पर दबाव बना है। 29 माओवादी गांव में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले 29 माओ वादियों ने शासन की योजनाओं से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। आने वाले समय में उस इलाके में माओवाद गतिविधि कम हो जाएगी।

खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना

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बालोद, 14 जनवरी 2026 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के शुभंकर ’मोर वीर’ का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिले में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के व्यापक प्रचार-प्रसार और आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए पहुँचे ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में ’खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का प्रथम संस्करण का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष आयोजन के व्यापक प्रचार-प्रसार और आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए ’मशाल गौरव यात्रा’ वाहन पूरे प्रदेश का भ्रमण कर नागरिकों को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के महत्व की विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहा है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे।

बालिका दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम

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जगदलपुर कलेक्टर हरिस एस. तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय बसाक के निर्देशानुसार एव जिला शहरी कार्यक्रम प्रबंधक पीडी बस्तिया के मार्गदर्शन मे दिनांक 13 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर महारानी लक्ष्मी बाई गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल जगदलपुर में एनीमिया उन्मूलन अभियान कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग की सहभागिता से आयोजित किया गया।

राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी 2026 को मनाया जाता है बालिका दिवस के अवसर पर दिनांक 12 से 30 जनवरी तक एक विशेष स्वास्थ्य कैंप एवं जन जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है।इस अभियान का उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनभागीदारी को सुदृढ़ करना है।

जगदलपुर शहरी स्वस्थ्य केंद्र से आए महिला चिकित्सक डॉ. मौमिता बसाक ने इस विशेष अभियान के अंतर्गत बालिका भ्रूण हत्या की रोकथाम, एनीमिया से बचाव, मासिक धर्म में स्वच्छता, सिकलीन, आयरन फोलिक ऐसिड गोली के उपयोग की विधि के बारे मे विस्तार से बताने के साथ स्वास्थ्य जांच, 110 बालिकाओं का हीमोग्लोबिन परीक्षण कर लक्षणों के आधर उप उपचार किया। महिला एवं बाल विकास विभाग से परियोजना अधिकारी अर्चना सैमसंग ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन, संतुलित पोषण, बाल विवाह उन्मूलन तथा रेडी-टू-ईट पोषण आहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। वहीं, बालिका शिक्षा को सशक्त करने, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को दूर करने की सपथ दिलाई गई। इस मौके पर प्रमुख रूप से जिला मिशन समन्वयक निशा पटेल, प्राचार्य वंदना मदनकर वित्तीय साक्षरता एवं समन्वयक विशेषज्ञ मीना बघेल एवं स्वास्थ,विभाग से प्रशांत श्रीवास्तव, यशोधरा, मोहन कश्यप एवं स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

ग्राम पंचायत बिरगाली में वार्डों की समस्याएं दूर करने नई पहल

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पंचायत प्रतिनिधियों की हुई अहम बैठक, सर्वें कर बनाई जाएगी विकास कार्यों की योजना

जगदलपुर बस्तर जिले के बस्तानार विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरगाली में पंचायत प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता उप सरपंच महेश पॉयम ने की। बैठक में पंचायत के सभी वार्ड पंच एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल संकट, सड़क मरम्मत, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन प्रकरण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

उप सरपंच महेश पॉयम ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंचायत के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए तथा विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। बैठक में उपस्थित पंचायत सदस्यों ने भी अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को सामने रखते हुए समाधान के सुझाव दिए और ग्राम विकास में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

पंचायत स्तर पर सर्वे के निर्देश

बैठक के दौरान डिप्टी सरपंच महेश पॉयम ने पंचायत के सभी वार्ड पंचों को अपने-अपने वार्ड में व्यापक सर्वे कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे के माध्यम से ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं, आवश्यकताओं एवं मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जानकारी एकत्र की जाएगी, ताकि भविष्य की विकास योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

महात्मा गांधी के नाम से ही चिढ़ती है भाजपा: का द्वेष उजागर, मनरेगा को खत्म कर काम के अधिकार पर हमला-विधायक लखेश्वर बघेल

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मनरेगा को खत्म करना, काम के हक पर हमला

बकावंड में मनरेगा बचाओ संग्राम का हुआ आगाज

बकावंड: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बकावंड द्वारा ग्राम पंचायत बजावंड में मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस के निर्देशानुसार एवं जिला कांग्रेस की अनुशंसा पर आयोजित हुआ, जिसमें बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक बघेल ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से संचालित योजना को समाप्त करने की कोशिश कर भाजपा ने एकबार फिर गांधी जी के प्रति अपना द्वेष उजागर कर दिया है।

मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि देश के करोड़ों गरीब मजदूरों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे खत्म करने की साजिश केंद्र सरकार कर रही है। श्री बघेल नें कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना लागू कर गरीबों को काम का अधिकार दिया था, लेकिन आज भाजपा सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को खुश करने के लिए इस योजना को कमजोर कर रही है मनरेगा के बहाने केंद्र सरकार काम के अधिकार को ही समाप्त करना चाहती है। बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को खत्म कर दिया है। अब केंद्र की मर्जी से चुनिंदा राज्यों और जिलों में ही काम दिया जाएगा इसके साथ ही राज्यों को मिलने वाली राशि में कटौती कर दी गई है। अब 40 प्रतिशत राशि राज्यों को स्वयं वहन करनी पड़ेगी। इससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों की कमर टूट जाएगी। बस्तर जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला ने कहा कि मनरेगा योजना को सीएजी समेत लगभग 200 से अधिक रिपोर्टों में बेहतरीन योजना बताया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान यह योजना देश के गरीब मजदूरों के लिए जीवन रेखा साबित हुई थी।

इस योजना की सफलता ने केंद्र सरकार के दुष्प्रचार की पोल खोल दी है। शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी काम के अधिकार के साथ-साथ पंचायतों की शक्ति बहाली की मांग कर रही है तथा मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग भी कर रही है। उन्होंने मनरेगा बचाओ संग्राम की चार प्रमुख मांगों की जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह योजना समाप्त होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों पर भारी दबाव पड़ेगा। कार्यक्रम के दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ने मनरेगा बचाओ संग्राम के अन्य बिंदुओं से भी ग्रामीणों को अवगत कराया और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। इस दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ग्रामीण जिला अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, ब्लॉक अध्यक्ष शिवराम बिसाईं, ब्लॉक प्रभारी हेमराज बघेल, आयतू राम भारती, जगमोहन बघेल, तुलाराम सेठिया, जानकी राम भारती, वीरेंद्र सेठिया, रियाज खान, मोहन झाली, नारायण बघेल, भगवान भारती, कार्तिक बघेल, सुरेश बघेल, निर्मला कश्यप, पूरन गोयल, गुड्डू, अनश खान, कृपालु कश्यप, जितेंद्र तिवारी, राजेश कुमार, तुलसी राम ठाकुर, बल्लू बघेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

संजय बैस (पूर्व जनपद सदस्य) ने की पेश की मानवता की मिसाल दूसरे चरण में लेकर गए 40 लोगों को नेत्र ऑपरेशन के लिए

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जन्म देने वाले मां पिताजी को मृत्यु उपरांत याद करना तो कई बेटे और बेटियां करते हैं। लेकिन अपने पिता की पुण्यतिथि पर सैकड़ो की संख्या में लोगों को रोशनी देने का कार्य बिरले ही लोग करते हैं । उनके द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा मानव तो करते ही हैं लेकिन देवताओं के द्वारा भी उनके कार्य की प्रशंसा किए बिना नहीं रह जा सकता । ऐसे ही बिरले लोगों में है कुसुमकसा के पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस पिता की प्रथम पुण्य स्मृति पर उन्होंने श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया था ।

साथ ही उन्होंने विशाल निशुल्क नेत्र शिविर का भी आयोजन किया था । उस नेत्र शिविर में डॉक्टरो के द्वारा चिन्हांकित 168 लोगों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने के लिए वह तीन भागों में अपने खर्चों पर रायपुर ले जा रहे हैं । आज उनके द्वारा दूसरा भाग में 40 लोगों को नेत्र आपरेशन के लिए गणेश विनायक आई हॉस्पिटल रायपुर लेकर गए इसके पूर्व सभी लोगों का कुसुमकसा रेलवे स्टेशन पर ही सभी लोगों का महावीर पैथोलॉजी के सौजन्य से निःशुल्क बीपी शुगर की जांच उनके प्रशिक्षित डाक्टरों की टीम द्वारा किया गया ताकि आपरेशन में किसी भी प्रकार की समस्या ना हो । स्व. जयपाल सिंह जी के प्रथम पुण्यतिथि पर विशाल नेत्र जांच शिविर कराया गया था जिसमें 700 लोगों का निःशुल्क नेत्र जांच किया गया था जिसमें 250 लोगों को निःशुल्क चश्मा वितरण और 168 लोगो का आपरेशन होना है।जिसमें प्रथम चरण में 60 लोगों का आपरेशन सफल रहा और दूसरे चरण के आपरेशन के लिए 40 लोगों को संजय बैंस की माता जी श्रीमती कमला बैंस द्वारा लोगो को अभिन्नदन कर रायपुर के लिए रवाना किया गया ।

जनपद सदस्य मंजू बैंस द्वारा सभी लोगों को आई कार्ड पहनाकर सभी की कुशलता पूर्वक नेत्र आपरेशन के लिए भेजा गया । इस आयोजन के केयर टेकर राहुल जैन विनोद सोनी पंकज जेठवानी द्वारा बताया गया हम सभी प्रबुद्ध जनों को आपरेशन के लिए गणेश विनायक आई हॉस्पिटल रायपुर लेकर जा रहे है । जिसमें सभी लोगों की जिम्मेदारी पूर्वक हम घर जैसे माहौल प्रदान करते है । जिसमें चाय नाश्ता भोजन लाना ले जाना हमारे बड़े भैया जिन्होंने इस नेत्र शिविर का जिम्मा उठाए है उनके द्वारा किया जाता है हमारे गांव के प्रतिष्ठित समाजसेवी संजय बैंस के इस पुण्य आयोजन में हम सहभागिता निभा रहे उनके परिवार द्वारा आपरेशन से लेकर लाना ले जाना भोजन की व्यवस्था निःशुल्क किया जाता है । आज दूसरे दल को बिदा करने के लिए पूरे कुसुमकसा के व्यापारी जनप्रतिनिधि राम जानकी सेवा समिति के सभी लोगों की उपस्थित रहे । इस अवसर पर राम जानकी सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष जैन उप सरपंच नितिन जैन महावीर पैथोलॉजी के प्रोपाइटर अन्वी जैन देवराज जैन कमलकांत साहू मोती कुचेरिया दिनेश जैन संजय रस्तोगी मनीष जेठवानी किशोर सेन ड्राक्टर नसीम खान जी सहित गणमान्य जन उपस्थित रहे ।

अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में पहली बार हुई किसी विधायक की आमद, विक्रम मंडावी को देख खुशी से झूम उठे ग्रामीण

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शेष दुनिया से कटी अबूझमाड़ियों की दुनिया में पहली बार पड़े किसी जनप्रतिनिधि के कदम

ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं की रखी मांग

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग का अबूझमाड़ क्षेत्र हालांकि सुरक्षा बलों के लगातार कैंप बनाने के बाद उतना अबूझ नहीं रह गया है, फिर भी बड़े जनप्रतिनिधियों की आमद रफ्त से यह क्षेत्र अब तक अछूता रहा है। पहली बार अबूझमाड़ के सुदूर एवं अति दुर्गम गांवों बीजापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक विक्रम मंडावी ने कदम पड़े। अपने विधायक को अपने सामने साक्षात देख इन गांवों के ग्रामीण न सिर्फ हैरान हो उठे, बल्कि खुशी के मारे झूमने भी लगे।

दरअसल बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले और बीजापुर जिले की सीमाओं में फैला अबूझमाड़ क्षेत्र अपने नाम के अनुरूप ही अबूझ माना जाता रहा है। अबूझमाड़ियों की अपनी अलग ही दुनिया है, जहां वे अपने आप में मस्त और मगन रहते हैं। दैनिक जरूरत का सामान वे नजदीकी बड़े गांव में लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार से खरीद ले जाते हैं, बाकी जरूरतें वे वनोपजों से पूरी कर लेते हैं। शेष दुनिया से अबूझमाड़ियों को कोई वास्ता ही नहीं है। वे आज भी रोजी रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी, सड़क जैसी मौलिक सुविधाओं से वंचित हैं। मगर अब धीरे धीरे ही सही उन तक ये सुविधाएं पहुंचने लगी हैं। अबूझमाड़ नक्सलियों का गढ़ रहा है। सुरक्षा बलों ने इस गढ़ को ढाहते हुए अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों तक पहुंच बना ली है। कई गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं, जिनके जरिए वहां के लोगों को कुछ हद तक सड़क, पानी और इलाज की थोड़ी बहुत सुविधा मिलने लगी है। बीजापुर के कांग्रेस विधायक विक्रम शाह मंडावी ने बीते मंगलवार 13 जनवरी को इंद्रावती नदी पार अबूझमाड़ के घने जंगलों से सटे बीजापुर जिले के अत्यंत दुर्गम और दूरस्थ आदिवासी गांवों का ऐतिहासिक दौरा किया। यह दौरा विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ इन क्षेत्रों के लिए पूरी तरह से ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि अब तक किसी भी विधायक ने इन गांवों तक पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे मुलाकात नहीं की थी और उनकी समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से नहीं सुना था।

इन गांवों में पहुंचे मंडावी

विधायक विक्रम मंडावी ने ग्राम बांगोली, सतवा, बेलनार, चिडंगेर, पोनोडवाया, पल्लेवाया, ताकिलोड, बोडगा, रेखावाया, जाडका, करकावाया, ईतामपार छोटेपल्ली, बड़ेपल्ली, गुडरा किसकेल, कोलनार, ताडवला, मरामेटा, मिरदीनपल, डूंगा, बेड़मा, बैल, धर्मा और मरकापाल सहित कई अन्य गांवों का भ्रमण किया। ये गांव अबूझमाड़ के सबसे दुर्गम इलाकों में बसे हुए हैं, जहां पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है। यहां आज भी सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं लगभग नहीं हैं। दौरे के दौरान ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी से खुले दिल से अपनी पीड़ा साझा की। ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी से बच्चों के लिए स्थायी स्कूल भवन और नियमित शिक्षकों की उपलब्धता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, ताकि बीमारियों से जूझते ग्रामीणों को दूर-दराज अस्पताल न जाना पड़े। घने जंगलों में सड़कों का अभाव होने से स्कूल, बाजार और अस्पताल तक पहुंच बेहद कठिन है। इसलिए पक्की सड़कों का निर्माण किया जाए। नदी-नालों के दूषित पानी पर निर्भरता खत्म करने के लिए हैंडपंप, ट्यूबवेल और जल स्रोतों की व्यवस्था की जाए। गांवों में बिजली पहुंचाई जाए। स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक रोजगार सृजन, ताकि युवा पलायन न कर सकें। आदि मांगे प्रमुख है।

विक्रम ने किया वादा*विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों को पूरा भरोसा दिया कि वे जिला प्रशासन बीजापुर और सरकार से तत्काल संपर्क करेंगे और इन सभी मांगों को प्राथमिकता से पूरा करवाने के लिए ठोस प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ के ये गांव सालों से विकास से वंचित रहे हैं। अब समय आ गया है कि सरकार की सभी योजनाएं और सुविधाएं इन गांवों तक पहुंचें। मैं ग्रामीणों की हर समस्या का समाधान करवाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

खुशी से नाचने लगे ग्रामीण

इससे पहले विधायक के गांवो में पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने जगह-जगह बाजे बजाकर, नाच गाकर और फूल-मालाओं से विधायक मंडावी का स्वागत किया। और पारंपरिक नृत्य-गान से उनका अभिनंदन किया। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी उत्साहित नजर आए। कई ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा- पहली बार कोई विधायक हमारे गांव आया है, हमारी बात सुनी है। अब उम्मीद जगी है कि हमारे गांव का विकास होगा और हम मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे।दौरे के समापन पर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा- ये गांव अबूझमाड़ के दिल में बसे हैं। यहां के आदिवासी भाई-बहन सालों से मुख्यधारा से कटे हुए हैं। मैंने ग्रामीणों से वादा किया है कि उनकी हर समस्या का समाधान करवाऊंगा। विकास की रफ्तार अब इन गांवों तक जरूर पहुंचेगी।यह दौरा न केवल विधायक विक्रम मंडावी की जन-कल्याण और आदिवासी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि अबूझमाड़ के आदिवासियों के लिए एक नई उम्मीद की किरण भी लेकर आया है। जल्द ही इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विकास कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। विधायक विक्रम मंडावी के इस दौरान जिला पंचायत सदस्य लच्छू राम मौर्य, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुखदेव नाग, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भैरमगढ़ के अध्यक्ष नकुल ठाकुर, सहदेव नेगी, मोहित चौहान सहित अन्य स्थानीय नेता और कार्यकर्ता साथ रहे।

अपने कामकाज से गांव में राम-राज ला रही हैं कलियुग की “सुमित्रा

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बड़े देवड़ा सरपंच सुमित्रा कश्यप जुटी हैं ग्राम विकास और नारी उत्थान मेंअर्जुन झा-

बकावंड त्रेता युग में एक माता थी कैकेयी जिन्होंने पुत्र मोह में सौतेले पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को वनवास दिला दिया और एक माता थी सुमित्रा जिन्होंने श्रीराम के वन गमन में अपने पुत्र लक्ष्मण जी के भी साथ जाने की मंशा को आत्मसात करते हुए उन्हें श्रीराम के साथ जाने की सहृदय अनुमति दे दी थी। कलियुग में भी एक सुमित्रा है जिन्होंने स्वहित की चिंता न कर पर हित को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। त्रेता युग की माता सुमित्रा की तरह ही कलियुग की यह सुमित्रा भी लोक कल्याण की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। यह सुमित्रा आज अपनी पंचायत में अपने काम काज के माध्यम से राम राज लाने की शानदार पहल कर रही हैं। आप भी कलियुग की इस सुमित्रा की बेमिसाल पहल के बारे में जानिए-

यह कहानी बस्तर जिले के बकावंड अंतर्गत करपावंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा से सामने आई है। कल तक जो सुमित्रा साधारण सी गृहिणी थी, आज नारी कल्याण और ग्राम विकास की पुरोधा बन गई हैं। सुशासन सरकार में महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सहायता और शासन की योजनाओं ने महिलाओं को केवल उनके स्वरोजगार तक ही सीमित नहीं रक्षा है, बल्कि राजनीति और ग्राम सुराज नीति में भी सफलता दिला रही हैं। इसका जीता जगता उदाहरण हैं ग्राम पंचायत बड़े देवड़ा की सरपंच सुमित्रा कश्यप। आम गृहिणी रहते सुमित्रा कश्यप ने अपने कृषक पति सुरेंद्र कश्यप के प्रोत्साहन पर आजीविका मिशन के तहत समूह से जुड़ कर ग्राम सेवा का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने गांव की महिलाओं को शासन की योजनाओं के तहत स्वावलंबी बनाने और स्व रोजगार की ओर उन्मुख करने का कार्य किया। भाजपा की रीति नीतियों और देशहित की भावना से प्रभावित होकर सुमित्रा कश्यप धीरे धीरे भारतीय जनता पार्टी की ओर आकर्षित होती चली गईं और भाजपा से जुड़ गईं।अपने नेताओं के सहयोग से उन्होंने सरपंच पद तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। ग्राम पंचायत में बैठ कर सुमित्रा राम राज और काम काज की बातें करती हैं। महिलाओं को स्वालंबी बनाने और शिक्षित करने हेतु लगातार पहल करती हैं। आज जब सनातनियों को क्रिश्चियनिज्म में मंतांतरित करने की मुहिम चल रही है, तो सुमित्रा कश्यप महिलाओं के बीच धर्म के प्रति जागरण फैला रही हैं। उड़ीसा सीमा क्षेत्र से जुड़ी पंचायत की सरपंच बन कर वह विकास के कार्य के साथ महिलाओं के प्रति काफी जागरूक होकर उनके हक हेतु प्रतिबद्ध हैं। सुमित्रा कश्यप खुद तो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, बावजूद वे अपनी पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ मुहिम पर बेहतरीन काम कर रही हैं। उनकी मंशा कि कोई भी बेटी अशिक्षित न रहे। इसके साथ ही सरपंच सुमित्रा कश्यप पंचायत की मुखिया होने का अपना धर्म भी बखूबी निभा रही हैं।

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