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विश्व पर्यावरण दिवस पर पैलेट प्लांट में 200 पौधों का रोपण

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दल्लीराजहरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भिलाई इस्पात संयंत्र की शाखा दल्ली माईन्स स्थित पैलेट प्लांट परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 200 पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान आकर्षक, फूलदार, छायादार एवं सघन प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिल सके।कार्यक्रम में एसजेएसपीएल प्लांट हेड रामशरण अग्रवाल ने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए वृक्षारोपण समय की आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने बताया कि प्लांट परिसर एवं आसपास की खाली भूमि पर आगामी दिनों में भी सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा, ताकि क्षेत्र को अधिक हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।इस अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र दल्ली माईन्स के जीएम सुकान्तो मंडल, फैक्ट्री मैनेजर पी.सी.एस. राव, प्लांट के कर्मचारी, श्रमिक तथा स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए लगाए गए पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का उदाहरण प्रस्तुत किया।

संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत बकावंड ब्लॉक के सोलह गांवों का होगा सर्वांगीण विकास

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जनजातीय समाज के समग्र विकास पर केंद्रित है यह परियोजना

बकावंड बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप की पहल पर ‘संसदीय संकुल विकास परियोजना’ का क्रियान्वयन शुरू हो गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनजाति समाज के आर्थिक, सामाजिक और सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। इसी तारतम्य में बकावंड ब्लॉक के ग्राम पाथरी कोलावल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में संसदीय संकुल विकास परियोजना के विकास सहयोगी पप्पू चालकी ने ग्रामीणों को परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विशेष परियोजना के तहत बकावंड ब्लॉक की कुल सोलह ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जहाँ विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। बैठक के साथ साथ विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय स्कूल परिसर में पौधरोपण का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।इस दौरान ग्राम पंचायत पाथरी कोलावल के सरपंच समदू राम कश्यप, रोहन घोष, पूर्व सरपंच मंगलू राम कश्यप, समस्त पंच, आराम पुजारी, ईश्वर कश्यप, नेहरू नेताम, सुदर्शन कश्यप, जयसिंह, डमरू, जयराम, पासरुराम, पुरसो कश्यप, फूलसिंह नेताम सहित ग्राम पंचायत सचिव, वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

हाथियों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा: केदार कश्यप

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राष्ट्रीय कार्यशाला का वन मंत्री ने किया वर्चुअल शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में बढ़ी हाथियों की संख्या, विचरण क्षेत्र अब दुर्ग संभाग तक

रायपुर छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वन्यजीव विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में प्रदेश में हाथियों की संख्या लगभग 240 थी, जो बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 तक पहुंच गई है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार जनभागीदारी, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हाथियों के संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन के माध्यम से वन्यजीव प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अधिकारियों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराती हैं,

जिससे संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिलती है।कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली तथा देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों के संरक्षण, परीक्षण की प्रक्रिया, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव प्रदेश में हाथियों के संरक्षण, उनकी सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है। वनमंत्री केदार कश्यप ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में और बेहतर कार्य करने के लिये प्रेरित किया।

जनजागरण साइकिल रैली 7 को

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स्वास्थ्य, पर्यावरण और जागरूकता का संदेश

जगदलपुर कलेक्टर बस्तर की पहल एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में 7 जून रविवार को प्रातः 7 बजे विशाल जनजागरण साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना तथा दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। रैली का शुभारंभ लालबाग मैदान से होगा। इसके पश्चात प्रतिभागी कोतवाली चौक, चांदनी चौक, संजय मार्केट चौक, मां दंतेश्वरी मंदिर, दामोदर पेट्रोल पंप, दलपत सागर, समुंद चौक होटल ग्रैंड शिल्पी, सर्किट हाउस रोड एवं पंच चौक होते हुए पुनः लालबाग मैदान पहुंचेंगे। रैली के दौरान शहरवासियों को स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा साइकिल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा।

यह साइकिल रैली केवल एक खेल गतिविधि नहीं बल्कि एक सामाजिक जनजागरण अभियान है, जिसके माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम करने तथा पर्यावरण के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के इस दौर में साइकिल का उपयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। रैली में जिले के खिलाड़ी, युवा, विद्यार्थी, विभिन्न सामाजिक संगठन, खेल प्रेमी एवं आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। आयोजन के माध्यम से सड़क सुरक्षा, फिटनेस और जनसहभागिता का संदेश भी दिया जाएगा। जिला खेल अधिकारी सुशांत पॉल ने बताया कि जनजागरण साइकिल रैली का उद्देश्य केवल साइकिल चलाना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना है। साइकिल एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से साइकिल चलाने से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। उन्होंने जिले के सभी युवाओं, खिलाड़ियों, छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस रैली में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही ऐसे अभियान सफल होते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। “स्वस्थ शरीर, स्वच्छ पर्यावरण और जागरूक समाज” के संदेश के साथ आयोजित यह जनजागरण साइकिल रैली शहरवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी तथा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार करेगी।

जिससे अंग्रेज भी खार खाते थे, वह दुर्लभ पेड़ मिला बस्तर के जंगलों में

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आदिवासी लड़ाकों के लिए संजीवनी था यह पेड़

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में एक ऐसा दुर्लभ पेड़ मिला है, जिससे अंग्रेज खार खाते थे और उस प्रजाति के सारे पेड़ों को नष्ट करने पर वे आमादा हो गए थे। इस पेड़ में एक नहीं अनेक खासियतें हैं और इन्हीं खासियतों की वजह से यह पेड़ अंग्रेजों की आंखों में चुभता था। गुस्से में आकर अंग्रेजों ने ऐसे तमाम पेड़ों को नष्ट कर देने का फरमान जारी किया था, लेकिन बस्तर के आदिवासी योद्धा इस प्रजाति के कुछ पौधे चोरी छुपे यहां ले आए थे।

ब्रिटिश शासनकाल में सतपुड़ा के जंगलों में ब्रिटिश सैनिकों से गोंड व कोरकू जनजाति के लड़ाकों की अक्सर भिड़ंत होती रहती थी। लड़ाई में घायल होेने के बावजूद इस जनजाति के लोग जंगली मिली जड़ी बूटियों के उपयोग से अपने घाव को भर कर युद्ध के लिए फिर तैयार हो जाते थे। इससे परेशान ब्रिटिश सैनिकों ने जब स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि दहिमन नाम के पौधे की पत्तियां इन लड़ाकों के लिए संजीवनी है, वे इससे अपनी चोट का उपचार कर लेते हैं।इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने अपनी एक पूरी रेजीमेंट को इस काम पर लगा दिया कि सतपुड़ा के जंगल में जहां -जहां यह पौधा दिखे इसे समूल नष्ट कर दिया जाए। नतीजा यह हुआ कि दहिमन नाम के इस पौधे के अस्तित्व पर संकट आ गया। उसी कालखंड में कुछ जानकार इस पौधे को छिपाकर अन्य जगह पर ले गए और इसका रोपण कर इसे बचाने का प्रयास किया। इसी प्रक्रिया में इस प्रजाति के पौधे बस्तर तक भी आ पहुंचे और आज विशाल पेड़ बनकर खड़े हैं।

ये हैं दहिमन की खासियतें

दहिमन पेड़ के पत्ते रक्त स्त्राव, सर्पदंश व नशा उतारने में असरदार माने जाते हैं। बस्तर के ग्रामीण इस पौधे को दहिमन, दही पलाश व ढेंगन के नाम से जानते पहचानते हैं। वे पत्तों पर रेंगने वाली चीटियों को सूखाकर, भूनकर और चूर्ण बनाकर मिर्गी, माइग्रेन व सुरक्षित प्रसव के लिए उपयोग में लाते हैं। यह जख्म को सुखाने के साथ ही सर्पदंश व नशा उतारने में भी कारगर माना जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस घर में शराब बन रही हो, उस घर की छप्पर पर यदि इसकी डंगाल डाल दी जाए तो शराब नहीं पकती है। इसके अलावा इस पेड़ की छांव में बैठकर शराब पीने से नशा काफूर हो जाता है।

ढूंढा बॉयो साइंटिस्ट ने

जगदलपुर से सटे माचकोट रेंज के जंगल में बॉयोसाइंस के प्रोफेसर डॉ. एमएल नायक, पीजी कॉलेज के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील दत्ता, डॉ. राजेंद्र सिंह व डॉ. पीआरएस नेगी ने ग्रामीणों से इस पौधे के संबंध में सुना था। टीम ने अपने अनुसंधान के दौरान माचकोट के जंगल में दहिमन पौधे को खोज निकाला। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगभग नष्ट होने के कगार पर इस पौधे के संरक्षण व संवर्धन के लिए वे प्रयास कर रहे हैं। प्रोफेसर्स ने बताया कि इस पौधे का बॉटनीकल नाम कार्डिया मेकलियोडी है। यह एंटी वेनम, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल एंटी एलरगेसिक, एंटी ऑक्सीडेंट व एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। दहिमन की पत्तियां, छाल व जड़ का उपयोग कई तरह की बीमारियों में बेहद कारगर है। दहिमन के अनुसंधान में शामिल डॉ. सुशील दत्ता ने बताया कि माचकोट में इसका पाया जाना बेहद आश्चर्यजनक है। ऐसे पौधों को बचाना जरूरी है।

बस्तर आईटीआई में विभिन्न ट्रेडों के लिए ऑनलाइन प्रवेश शुरू, 15 जून तक कर सकते हैं आवेदन

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जगदलपुर युवाओं को तकनीकी शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बस्तर ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 एवं 2027-28 के लिए विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक ट्रेडों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। संस्थान द्वारा जारी सूचना के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

संस्थान प्रबंधन ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष भी संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। अभ्यर्थी घर बैठे अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें छत्तीसगढ़ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट cgiti.admission.nic.in पर जाकर पंजीयन करना होगा। आईटीआई बस्तर में युवाओं की रुचि और उद्योगों की मांग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तकनीकी एवं रोजगारपरक ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं। इन ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा स्वरोजगार के साथ-साथ निजी एवं सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी आईटीआई में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को नई दिशा देते हैं।

संस्थान प्रशासन ने बताया कि आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत जानकारी एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार मेरिट सूची जारी की जाएगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। प्रबंधन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें तथा समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। अंतिम दिनों में सर्वर पर अधिक दबाव या तकनीकी समस्याओं की संभावना को देखते हुए पहले ही आवेदन करना हितकर रहेगा। बस्तर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों युवाओं के लिए आईटीआई में प्रवेश का यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए संस्थान से प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रोजगार और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए यह प्रवेश प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संस्थान ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से समय सीमा के भीतर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

बीईओ ऑफिस कैंपस में किया गया पौधारोपण

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बकावंड विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर बकावंड में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर यादव तथा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। उपस्थितजनों को पौधों के संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प भी दिलाया गया।

भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने किया कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद तिवारी का स्वागत

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जगदलपुर नगर के इंदिरा गांधी वार्ड से उप चुनाव में विजयी कांग्रेस पार्षद रामकृष्ण तिवारी का भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने किया स्वागत कर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को बड़ा संदेश दिया है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विरोधी पक्ष के नेताओं का भी सम्मान करना, सुख दुख में साथ खड़े हो जाना एक उत्कृष्ट राजनैतिक संकेत माना जाता है।

कुछ ऐसा ही बड़ा संदेश और भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिला स्तर की नेत्री दीप्ति पांडेय ने दिया है।इंदिरा वार्ड के उप चुनाव में विजयी हुए कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी अचानक दीप्ति पांडेय के घर पहुंचे।. दीप्ति पांडेय ने श्री तिवारी की आरती उतार कर उनका स्वागत किया। हालांकि कुछ मौका परस्त लोग इसकी राजनीतिक रूप से आलोचना कर सकते हैं, मगर सार्वजनिक जीवन में विरोधी का भी सम्मान करने की परंपरा भारतीय जनता पार्टी में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से चली आ रही है। विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी विरोधी दल के सम्मान में कोई कसर बाकी नहीं रखते थे। वे हमेशा विरोधी दलों के नेताओं के भी सुख दुख में साथ खड़े नजर आते थे। यही वजह है कि प्रखर विरोधी नेता भी व्यक्तिगत तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी जी का सम्मान करते थे। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी पार्टी की इसी परंपरा पर चल रहे हैं। हाल के दिनों में हमने देखा कि कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी जब बीमार होकर अस्पताल में भर्ती थीं, तब प्रधानमंत्री श्री मोदी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। जगदलपुर की भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने भी पार्टी की इसी परंपरा का अनुसरण किया है।

पॉलीटेक्नीक कॉलेज के “यातना गृह” की दशा सुधारने नहीं हुई पहल, अब हॉस्टल के भोजन में निकली इल्लियां

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गर्ल्स पॉलीटेक्नीक कॉलेज के हॉस्टल की छात्राएं परेशान

मिलता है घाटिया भोजन, बाहर से टिफिन मंगवाने मजबूर हो गईं हैं छात्राएं

वार्डन धमकी देते हुए कहती हैं- मंगवा लो अपने बाप से

अर्जुन झा

जगदलपुर महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज जगदलपुर की छात्राओं को छात्रावास की नारकीय त्रासदी से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। प्राचार्य के आश्वासन और जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी छात्रावास की बदहाली दूर नहीं हो पा रही है। उल्टे अब छात्राओं को जो भोजन परोसा जा रहा है, उसमें मरी हुई इल्लियां निकल रही हैं। शिकायत करने पर वार्डन छात्राओं से धमकी भरे अंदाज में कहती हैं- मंगवा लो अपने बाप से अच्छा खाना। मजबूर छात्राएं अब बाहर से टिफिन मंगवाने लगी हैं।

जगदलपुर के धरमपुरा स्थित महिला पॉलीटेक्नीक छात्रावास में पचासों छात्राएं रह कर अध्ययन करती हैं। इस हॉस्टल में अधीक्षिका की लापरवाही के कारण भीषण गर्मी के इस दौर में पीने, नहाने और कपड़े धोने के पानी के लिए छात्राओं को बुरी तरह परेशान होना पड़ रहा है। छात्राएं पीने के पानी से लेकर अपने नित्यकर्म के पानी के लिए घंटों टैंकर का इंतजार करती रहती हैं। छात्राएं बताती हैं कि छात्रावास की पानी टंकी की सफाई कई माह से नहीं की गई है, नतीजतन टंकी से गंदा और बेहद बदबूदार पानी आता है। इस पानी का उपयोग करने से छात्राएं रोगग्रस्त हो रही हैं। कभी कभी हॉस्टल अधीक्षिका जो दवाइयां देती है वह भी एक्सपायरी होती हैं। भोजन की व्यवस्था भी रामभरोसे है। अधीक्षिका द्वारा प्रतिमाह रसोई खर्च करीब 2 हजार हजार रुपए प्रति छात्रा लिए जाते हैं। बदले में मिलता है स्तरहीन और बेस्वाद भोजन।

जल संकट और अन्य दिक्कतों के चलते गर्मी प्रारंभ होते ही दर्जनों छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया है, क्योंकि गर्मी से राहत के लिए हॉस्टल में कूलर तो दूर की बात, पंखे तक नहीं हैं और पानी की तंगी अलग से परेशान किए हुए है। सुशासन सरकार में शिक्षा के साथ उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं पर विभागीय अत्याचार इतना बढ़ गया है कि वे छात्रावास को यातना गृह समझने लगी हैं। कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य संजय त्रिवेदी ने पूर्व में भरोसा दिलाया था कि स्वच्छ पानी की व्यवस्था हेतु टंकी की सफाई कराई गई है। वाटर प्यूरीफायर मशीन को ठीक कराया गया है। कॉलेज आदिम जाति कल्याण विभाग से संबंधित नहीं है अतः छात्राओं को मेस चार्ज वहन करना पड़ता है, एक्सपायरी दवाई की जानकारी मुझे अभी मिली है मै दो दिन के भीतर ही अधीक्षिका के साथ बैठक कर व्यवस्था दुरुस्त करवा दूंगा। मगर आज तक व्यवस्था दुरुस्त होना तो दूर अब छात्राओं को जो भोजन दिया जा रहा है, उसमें मरे हुए कीड़े मकौड़े निकलने लगे हैं। दो दिन पूर्व ही हॉस्टल में परोसे गए भोजन में मरी हुई इल्लियां निकलने की घटना सामने आई है। रोजाना की तरह छात्राएं अपनी थाली में भोजन लेकर आई थीं, और खाते खाते उन्होंने मरे हुए कीड़े को देखा।जब छात्राओं ने इसकी शिकायत हॉस्टल की केयर टेकर सुश्री कश्यप से की तो उन्होंने छूटते ही कहा कि तुम लोग षडयंत्र पूर्वक छात्रावास को बदनाम करने की कोशिश कर रही हो, मैं अब तुम लोग को देखती हूं। उन्होंने छात्राओं से यहां तक कह डाला कि अपने बाप के घर से अच्छा खाना लेकर आओ। जानकारी तो यह भी सामने आई है कि छात्राओं को दोनों समय केवल चावल ही परोसा जाता है, रोटी मांगने पर कश्यप मैडम टिफिन बंधवा कर खाना मंगवाने की बात कहती हैं। कुछ पीड़ित छात्राएं बाहर से टिफिन मंगवाने लगी हैं।

खड़गांव थाना प्रभारी संजय यादव की अनूठी पहल: वर्दी के साथ प्रकृति की सेवा भी

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खड़गांव,मई 2026:थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार यादव ने जनवरी 2025 से मई 2026 तक अपने कार्यकाल में कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाई। प्रकृति के प्रति उनका लगाव क्षेत्र में मिसाल बना हुआ है।दुर्ग से लाए 20 बरगद-पीपल के पौधे जिले में बरगद-पीपल के पौधे न मिलने पर यादव ने दुर्ग नर्सरी से 20 पौधे मंगवाए। वर्ष 2025 में उन्होंने खड़गांव NH-930 के किनारे और आसपास के तालाबों के पार इनका रोपण किया।

रोपण के बाद भी निभाई पूरी जिम्मेदारी पौधे लगाने के बाद उन्होंने थाना स्टाफ की मदद से प्रत्येक पौधे के चारों ओर मजबूत घेरा बनवाया। इतना ही नहीं, हर सप्ताह स्वयं पानी और खाद डालकर उनकी देखभाल करते रहे। जन-जागरूकता भी फैलाई यादव ने थाना स्टाफ, युवराज एवं स्कूली बच्चों को लगातार वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से क्षेत्र में हरियाली के प्रति जागरूकता बढ़ी।अब सीतागांव थाना प्रभारी के रूप में वे इस नेक कार्य को आगे भी जारी रखेंगे।

क्या बोले अधिकारी:”थाना प्रभारी का यह कार्य पुलिस की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करता है। कानून के साथ प्रकृति की सेवा भी जरूरी है।”

– वरिष्ठ अधिकारी

निरीक्षक संजय कुमार यादव- कार्यकाल: जनवरी 2025 – मई 2026, थाना प्रभारी खड़गांव- कार्य: 20 बरगद-पीपल पौधों का रोपण, NH-930 व तालाब पार- विशेष: दुर्ग से पौधे लाए, साप्ताहिक देखभाल, ट्री-गार्ड लगवाए- वर्तमान: थाना प्रभारी, सीतागांव में भी जारी रहेगा अभियान

निरीक्षक संजय कुमार यादव पौधों की देखभाल करते हुए।

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