जगदलपुर. 600 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार गुरुवार को बाहुड़ा गोंचा पर्व मनाया गया. भगवान जगन्नाथ स्वामी सुभद्रा जी वह बलभद्र जी समेत अपने धाम को वापस पहुंचे. रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का सैलाब देखा गया. भगवान को हजारों तूपकियों की सलामी दी गई. सिरासर चौक स्थित गुंडिचा मंडप पर विराजित महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी,बलभद्र व सुभद्रा जी की प्राचीन प्रतिमा को सुसज्जित रर्थों में आरुढ़ करवा कर श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचाया गया।

परंपरा में बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद देव ने भी हिस्सा लिया. भगवान के विग्रहो को आरुढ़ करवा रथ यात्रा गोल बाजार, जय स्तम्भ चौक, मिताली चौक व दंतेश्वरी मंदिर चौक तक श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा। युवा व बच्चों ने तुपकी चलाकर महापर्व का आनंद लिया. परम्परानुसार यहां गुंडीचा मंडप में पूरे नौ दिनों तक भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और भगवती शुभद्रा के दर्शन का लाभ भक्तों ने लिया. ओडिशा से पहुंचे धार्मिक सांस्कृतिक दल ने प्रस्तुति दी.बॉक्स 619 वर्ष से मना रहे पर्वइतिहासकारों के अनुसार महाराज पुरुषोत्तम देव पैदल जगन्नाथ पुरी गए थे। पुरी के तत्कालीन महाराजा गजपति ने बस्तर के राजा को रथपति की उपाधी दी थी। महाराजा पुरुषोतम देव को उनकी भक्ति के फलस्वरूप देवी सुभदा का रथ दिया था। वहां से रथ व प्रभु जगन्नाथ की मूर्तियां लेकर आप थे, जिसे जगदलपुर के जगन्नाथ मंदिर में स्थापित किया गया है। जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर ही यहां रथ यात्रा निकाली जाती है।





















