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रेत माफियाओं और लोहा चोरों के वाहनों ने निकाला सड़क का कचूमर

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ओवर लोडेड गाड़ियों की वजह से सड़क की दुर्गति

अर्जुन झा

बकावंड विकासखंड के दर्जनों गांव से होकर गुजर कर जगदलपुर से ओड़िशा को जोड़ने वाली सड़क रेत माफियाओं के ओवर लोडेड ट्रकों, डंपरों और टिप्परों की वजह से बुरी तरह खस्ताहाल हो गई है। सड़क की दुर्दशा ग्रामीणों के लिए परेशानी की वजह बन गई है। यह सड़क नगरनार स्टील प्लांट, विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत बनियागांव के आश्रित ग्राम बेलगांव से होती हुई उड़ीसा सीमा पर समाप्त होती है। ओड़िशा और जिला मुख्यालय जगदलपुर जाने के लिए यही सड़क सबसे महत्वपूर्ण है। फिर भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारी इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सड़क से गुजरने वाली भारी वाहन हाइवा और ट्रक जब तीस से ज्यादा टन का बोझ लेकर गुजरते हैं। इन वाहनों के दबाव से सड़क का कचूमर निकल गया है। सड़क जगह जगह से टूट फूट गई है। रेत माफियाओं के ट्रक और नगरनार स्टील प्लांट से निकलने वाले लोहा चोरी करने वालों के वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।

इन्ही अवैध वाहनों ने सड़क का बेड़ागर्क कर डाला है।निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक इस सड़क का सुधार नहीं हो पा रहा है।बकावंड ब्लॉक के तारापुर, बनियागांव, बेलगांव से निकलने वाले रेत से भरे हैवी ट्रक टिप्पर से सड़क की दुर्दशा हो गई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड ट्रकों पर तुरंत रोक लगाने और सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि ध्यान दें तो तत्काल कार्रवाई हो सकती है। अभी ध्यान न देने की वजह से आम जनता परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि बकावंड एसडीएम और लोक निर्माण विभाग को मौके का निरीक्षण करके सड़क मरम्मत का प्रस्ताव भेजना चाहिए। साथ ही परिवहन विभाग को ओवरलोड वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में सड़क फिर से खराब न हो।

बस्तर संभाग में 1.62 करोड़ का धान घोटाला

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छिंदगढ़ के आधा दर्जन खरीदी केंद्रों से 3 हजार क्विंटल धान गायब

मैनेजर एवं खरीदी प्रभारी से होगी एक करोड़ से अधिक की रिकवरी == डीएमओ की भी साठगांठ की हो रही है चर्चा

-अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग में धान घोटाला का बड़ा मामला सामने आया है। संभाग के सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के आधा दर्जन धान खरीदी केंद्रों में एक करोड़ 62 लाख रूपये अधिक का धान गायब कर दिया गया है। इस धान की मात्रा सवा तीन हजार क्विंटल से भी अधिक है। मामले की जांच रिपोर्ट तहसीलदार अमर गुप्ता कलेक्टर सुकमा को सौंप चुके हैं। अब आगे की कार्रवाई कलेक्टर के पाले में है।

खबर है कि अब इस मामले में मैनेजर एवं खरीदी प्रभारी पर एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। सुकमा जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों की जांच कराई गई है। जांच में 8 करोड़ रुपए से अधिक की घपलेबाजी उजागर होने की चर्चा है। सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक के धान खरीदी में धान घोटाले बड़ा खुलासा हुआ है। कलेक्टर के आदेश पर आधा दर्जन धान खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन किया गया। इस दौरान सवा 3 हजार क्विंटल धान गायब होने की बात सामने आई है और सैकड़ों बोरा धान सड़ा हुआ पाया गया है। केंद्रों से गायब धान का मूल्य 1 करोड़ 62 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है।तहसीलदार श्री गुप्ता ने बताया कि कलेक्टर के आदेश पर दो सदस्यीय जांच दल द्वारा खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन किया गया है, जहां 1 करोड़ 62 लाख से अधिक का धान कम होना पाया गया है। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिले के कोंटा इलाके के खरीदी केंद्रों में भी बड़ा घालमेल किया गया है। इसकी जांच हुई तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। छिंदगढ़ के आधा दर्जन खरीदी केंद्रों की जांच में अनियमिता के खुलासे के बाद प्रबंधक एवं खरीदी प्रभारी पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। इस घालमेल मामले में डीएमओ की भी सांठगांठ की चर्चा है।*वर्सन**दोषियों पर होगी कार्रवाई* शिकायत के आधार पर जिले के तीनों विकासखंडों के धान खरीदी केंद्रों की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दूर हुआ लाल आतंक का स्याह अंधकार, अब शुरू हो गई विकास के उजाले की रफ्तार

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ककनार घाटी के सुदूर गांवों तक ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ की सौगात

जहां पैदल चलना भी था जोखिम भरा, वहां फर्राटे से दौड़ रही है यात्री बस

नक्सल प्रभावित गांवों में आई तरक्की की बयार

जगदलपुर बस्तर की जिन दुर्गम पहाड़ियों, संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर कभी बारूद की गंध और लाल आतंक का खौफ हुआ करता था, आज वहां विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन मानी जाती थी। बस्तर की कठिन भौगोलिक विषमताओं और माओवाद के साये को पीछे धकेलते हुए ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र आज विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ चुके हैं। कभी वामपंथी आतंक का गढ़ माने जाने वाले कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जैसे गांवों के निवासियों के लिए पक्की सड़क का निर्माण एक ऐसा सपना था जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और वामपंथी समस्या के कमजोर पड़ने से सड़कों का जाल बिछना संभव हो पाया है, और इन चमचमाती सड़कों पर बस का दौड़ना बदलते बस्तर की सबसे सशक्त तस्वीर पेश कर रहा है।

बस्तर जिले में विकास की इस रफ्तार को बढ़ाने के लिए बीते 4 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरूआत की थी। इसके तहत वर्तमान में जिले के चार चयनित मार्गों पर बस सेवा का निरंतर संचालन किया जा रहा है। इसी योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारिणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोंडागांव जिले के मर्दापाल से यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गांवों को आपस में जोड़ती है जहां कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा काम था। घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए यह बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर सीधे संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुंचती है, जिससे उन ग्रामीणों का सफर अब बेहद सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सड़क और बस का इंतजार किया था। यह निरंतर बस सेवा केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि शासन के प्रति ग्रामीणों के विश्वास और खुशहाली की एक अटूट कड़ी बन चुकी है। पक्की सड़क और नियमित बस सेवा ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से बरसों पुराने अलगाव के डर को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। विकास की इस बदलती बयार को लेकर चंदेला के सरपंच तुलाराम नाग बताते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस इलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास पूरी तरह थम सा गया था, ।

लेकिन आज सड़क बन जाने के साथ ही इसे एक नई दिशा मिल चुकी है। अब इस पूरे क्षेत्र में स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं के साथ-साथ उचित मूल्य की दुकानों में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्रियां बेहद आसानी से सुलभ हो रही हैं, वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में लगने वाले साप्ताहिक बाजार की रौनक भी अब देखते ही बनती है। इसी तरह ककनार के सरपंच बलीराम बघेल भी अपनी खुशी साझा करते हुए कहते हैं कि पहले उन्हें अपने तहसील मुख्यालय लोहंडीगुड़ा और जिला मुख्यालय जगदलपुर तक जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब इस बारहमासी सड़क के बन जाने से आवागमन की बेहतरीन सुविधा मिल रही है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं का संदेश पहुंचाने वाली यह बस सेवा इस बात का जीवंत प्रतीक है कि बस्तर का जो हिस्सा कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, वह अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति के उजाले की राह पर अग्रसर है।

वार्ड-16 के उप चुनाव में भाजपा ने मनोहर दत्त तिवारी होंगे भाजपा प्रत्याशी

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जगदलपुर नगर निगम जगदलपुर के इंदिरा वार्ड क्रमांक-16 में होने वाले पार्षद पद के उप चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मनोहर दत्त तिवारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा जिला कार्यालय, जगदलपुर से जारी पत्र के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की अनुमति से मनोहर दत्त तिवारी को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया है। यह घोषणा भाजपा जिला अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय द्वारा की गई है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

मध्य क्षेत्र बैठक से बस्तर को विकास की नई गति मिलने की उम्मीद: मंत्री केदार कश्यप

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शाह का बस्तर दौरा विकास और विश्वास का मजबूत संदेश: कश्यप

डबल इंजन सरकार में संवर रहा है बस्तर

जगदलपुर मध्य क्षेत्रीय परिषद बैठक के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के बस्तर आगमन को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे बस्तर के विकास, सुरक्षा और विश्वास के नए दौर का प्रतीक बताया है। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बीते दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास की नई धारा प्रवाहित हुई है। अब बस्तर नक्सल चुनौती की पहचान नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी और गृह मंत्री अमित शाह बस्तर आने वाले सबसे सक्रिय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे हैं। दोनों शीर्ष नेताओं ने बार-बार बस्तर पहुंचकर यहां के लोगों का मनोबल बढ़ाया, विकास कार्यों की समीक्षा की और यह संदेश दिया कि केंद्र सरकार बस्तर के साथ मजबूती से खड़ी है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से बस्तर में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और संचार सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। दूरस्थ गांवों तक सड़कें पहुंच रही हैं, नए पुल, पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्र भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी भय और बंदूक का माहौल था, वहां अब स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और बाजार विकसित हो रहे हैं। युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार, खेल और कौशल विकास के नए अवसर मिल रहे हैं। वन मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने आदिवासी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। तेंदूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों, किसानों और महिलाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखाई दे रहा है। वनमंत्री केदार कश्यप ने विश्वास जताया कि अमित शाह के बस्तर दौरे और मध्य क्षेत्र बैठक से क्षेत्र में विकास कार्यों को और गति मिलेगी तथा बस्तर देश के सबसे तेज़ी से आगे आदिवासी अंचलों में अपनी नई पहचान स्थापित करेगा।

अमित शाह बताएं कि मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक वर्चुअल क्यों नहीं की: दीपक बैज

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परिषद की बैठक बस्तर में बुलाना भाजपा का पॉलिटिकल प्रोपोगंडा

बस्तर के विकास के लिए विशेष पैकेज कब देंगे

पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर कुछ कहेंगे गृहमंत्री: बैज

जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि प्रधानमंत्री पूरे देश से आह्वान कर रहे हैं कि वर्क फ्रॉम होम करें, पेट्रोल, डीजल बचाएं, वहीं दूसरी ओर उनके ही गृहमंत्री मुख्यमंत्री उनकी बात का माखौल उड़ा रहे हैं। मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक वर्चुअल क्यों नहीं की गई?जबकि सभी मुख्यमंत्री सचिवालय तथा गृह मंत्रालय के पास वीडियो कान्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज ने कहा है कि मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, चार राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि बस्तर आएंगे। सब अलग-अलग विशेष विमान से आयेंगे, लाखों रू. खर्च होगा, डीजल-पेट्रोल तथा विमान का ईंधन खर्च होगा। यह बैठक तो वर्चुअल हो सकती। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मध्यक्षेत्र परिषद की बैठक बस्तर में बुलाना भारतीय जनता पार्टी का पॉलिटिकल प्रोपोगंडा है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक ने दावा किया था 31 मार्च के बाद नक्सलवाद समाप्त हो गया है। कांकेर में पिछले हफ्ते हमारे 4 जवान शहीद हो गए।

उसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजनैतिक प्रोपोगंडा करना बंद नहीं किया है। मध्यक्षेत्र की बैठक पहली बार बस्तर में करवाने पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। मध्यक्षेत्र परिषद की बैठक बस्तर ले जाकर साबित करना चाहते हैं?हमने यहां पर सारी चीजे सही कर दिया है? जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पिछले हफ्ते हमारे 4 जवान शहीद हुये है। मध्यक्षेत्र की बैठक को बस्तर में करने का दूसरा उद्देश्य है कि वहां पर अडानी के लिये रेड कार्पेट बिछाना चाहते है। वहां पर बैठक करने सरकार का मूल उद्देश्य है कि अपना पॉलिटिकल प्रोपोगंडा करना और अडानी के आर्थिक हितों का संवर्धन करना।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि शाह बताये बस्तर के लिए कुछ विशेष पैकेज लेकर आये है या इस बार भी खाली हाथ आने वाले है। डबल इंजन की सरकार में बस्तर के विकास, बस्तर में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार 50 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की घोषणा कब करेगी? बस्तर संभाग के हर नक्सलमुक्त पंचायत को 1 करोड़ की घोषणा कब करेंगे? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जबसे प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल बचाये, खाद्य तेल का उपयोग कम करें, वर्क फ्राम होम करे, इसके कारण पूरे देश में भय का माहौल बना, लोग पेट्रोल-डीजल की कभी की आशंका से पंपों के सामने कतारों पर खड़े हो गए। देश के आधे पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं। बस्तर में भी पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत है। मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 रू. से अधिक की बढ़ोतरी कर दी है। मोदी के आह्वान के बाद खाद्य सामाग्री, अनाज, सब्ज्यिों के दाम बढ़ गए हैं। मोदी यदि अपील नहीं करते तो यह अफरा-तफरी नहीं होती। अमित शाह बताएं कि मोदी निर्मित इस आपदा पर आप क्या कहना चाहेंगे?

वीर योद्धा शहीद गुंडाधुर के वंशजों ने छोड़ दी हैं आदिवासी संस्कृति और परपराएं

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कहां गए वो नेता, जो दावा करते थे बस्तर में एक भी धर्मांतरण न होने का

मतांतरित हो चुके हैं आदिवासी योद्धा गुंडाधुर के सारे वंशज

-अर्जुन झा-

जगदलपुर जिस वीर आदिवासी योद्धा शहीद गुंडाधुर की प्रतिमा को नमन करने देश के गृहमंत्री अमित शाह मई को बस्तर आ रहे हैं, उस वीर के सारे वंशज आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को त्याग चुके हैं।ये लोग ईसाई धर्म अपना चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित बस्तर प्रवास को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस तैयारी का नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में नव संचालित शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा का वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव तथा सांसद महेश कश्यप ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने नेतानार स्थित शहीद गुंडाधुर प्रतिमा स्थल एवं बेस कैंप परिसर में संचालित सेवा सेतु केंद्र का अवलोकन किया। इस सेवा डेरा के माध्यम से ग्रामीणों और महिलाओं को विभिन्न सेवाएं एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने आधार सेवा केंद्र, बैंक सखी केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र, इमली प्रोसेसिंग यूनिट तथा राइस ढेंकी की प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण कर वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रखने तथा स्थानीय हितग्राहियों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर सीसीएफ स्टायलो मंडावी, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, डीएफओ उत्तम गुप्ता, जनपद पंचायत सीईओ श्री भाटिया सहित क्षेत्र के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।*बॉक्स**कन्वर्ट हो चुके हैं गुंडाधुर के वंशज*बस्तर के आदिवासियों के लिए यह निहायत ही दुखद बात है कि जिस आदिवासी वीर योद्धा गुंडाधुर ने आदिवासियों की अस्मिता और आदिम संस्कृति की रक्षा के लिए अंग्रेजों तथा विदेशी आक्रांताओं से लोहा लिया था, उनके ही वंशज आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को त्याग कर ईसाई धर्म अपना लिया है।

जो वीर योद्धा आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और पूजा पद्धति को जिंदा रखने के लिए आजीवन लड़ता रहा, उनके ही वंशज विदेशी धर्म के आगे आश्चर्यजनक रूप से झुक गए। शहीद गुंडाधुर के नाम पर राजनीति चमकाने वाले नेता उनके परिजनों को ईसाइयत के मोहजाल में फंसने से नहीं बचा पाए। बस्तर के उन आदिवासी नेताओं की आंखों में तुष्टिकरण की ऎसी कौन से पट्टी बंधी है कि, वे विधानसभा में बड़ी दमदारी से दावा करते रहे हैं कि बस्तर में एक भी धर्मांतरण नहीं हुआ है। यह समूचे बस्तर के लिए शर्मनाक है।

खबर छपने पर ही जागता है बस्तर का खनिज विभाग, रेत का अवैध परिवहन करते 4 वाहन जप्त

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कलेक्टर के निर्देश पर खनिज जांच दल की बड़ी कार्रवाई

अर्जुन झा

बकावंड बस्तर का खनिज महकमा शायद क्षेत्र का दौरा नहीं करता या फिर जानबूझ कर खामोशी अख्तियार किए रहते है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जब जब हमने खबर प्रसारित की तब तब ही खनिज विभाग की नींद टूटी और उसने रेत माफियाओं पर एक्शन लिया है। एक बार फिर हमारी खबर ने विभाग की नींद तोड़ी है। विभाग ने रेत का अवैध परिवहन कर रहे चार ट्रक पकड़े हैं।

बस्तर जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार और खनि अधिकारी शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में जिला खनिज जांच दल ने बेलगांव रेत घाट एवं बजावंड क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। दल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान गौण खनिज रेत का अवैध परिवहन कर रहे 4 वाहनों को रंगे हाथों पकड़ा गया, जिन्हें तत्काल पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया। जब्त किए गए वाहनों में दो ट्रैक्टर और दो हाईवा शामिल हैं, जो बिना वैध दस्तावेजों के रेत का परिवहन कर रहे थे। इन सभी वाहनों को खनिज सहित जप्त कर वाहन मालिकों के विरूद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 के नियम 71 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के अंतर्गत कड़ी दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जावेगी। इस सफल औचक कार्रवाई में जिला खनिज जांच दल के प्रभारी व खनिज निरीक्षक अंकित पुरी, खनिज सिपाही डिकेश्वर खरे, नगर सैनिक देवीराम बघेल और सहदेव बघेल मुख्य रूप से मौजूद थे। खनिज विभाग ने इस कार्रवाई के माध्यम से जिले के सभी खनिज ठेकेदारों और परिवहनकर्ताओं को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है कि बिना अभिवहन पास के खनिजों का परिवहन करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अवैध परिवहनकर्ताओं एवं उत्खननकर्ताओं के विरुद्ध दोबारा ऐसा कृत्य करने पर और भी कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही कलेक्टर श्री छिकारा के निर्देशानुसार जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए खनिज अमले द्वारा आगे भी ऐसा विशेष अभियान चलाकर निरंतर जांच की जाती रहेगी।

जिले से होगी चेरपा की छुट्टी

इधर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला खनिज अधिकारी शिखर चेरपा की बस्तर जिले से जल्द छुट्टी हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि बस्तर जिले, खासकर बकावंड विकासखंड में धड़ल्ले से चल रहे रेत के अवैध कारोबार ने राज्य की भाजपा सरकार और स्थानीय भाजपा नेताओं की बड़ी किरकिरी करा दी है। मीडिया में बार बार मामला सामने आने के बावजूद जिला खनिज अधिकारी शिखर चेरपा ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।. इससे नाराज एक प्रभावशाली बड़े भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री और खनिज विभाग के सचिव के पास चेरपा के खिलाफ तल्ख लहजे में शिकायत की है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि शिखर चेरपा की बस्तर जिले से जल्द विदाई हो सकती है।

बस्तर में रेत का अवैध परिवहन करते 4 वाहन जब्त

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कलेक्टर के निर्देश पर खनिज जांच दल की बड़ी कार्रवाई

जगदलपुर, 17 मई 2026/ बस्तर जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार और खनि अधिकारी श्री शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में जिला खनिज जांच दल ने बेलगांव रेत घाट एवं बजावण्ड क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। दल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान गौण खनिज रेत का अवैध परिवहन कर रहे 4 वाहनों को रंगे हाथों पकड़ा गया, जिन्हें तत्काल पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया। जब्त किए गए वाहनों में दो ट्रैक्टर और दो हाईवा शामिल हैं, जो बिना वैध दस्तावेजों के रेत का परिवहन कर रहे थे। इन सभी वाहनों को खनिज सहित जप्त कर वाहन मालिकों के विरूद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 के नियम 71 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के अंतर्गत कड़ी दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जावेगी। इस सफल औचक कार्रवाई में जिला खनिज जांच दल के प्रभारी व खनिज निरीक्षक अंकित पुरी, खनिज सिपाही डिकेश्वर खरे सहित नगर सैनिक देवीराम बघेल और सहदेव बघेल मुख्य रूप से मौजूद थे। खनिज विभाग ने इस कार्रवाई के माध्यम से जिले के सभी खनिज ठेकेदारों और परिवहनकर्ताओं को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है कि बिना अभिवहन पास के खनिजों का परिवहन करना एक गंभीर और दण्डनीय अपराध है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अवैध परिवहनकर्ताओं एवं उत्खननकर्ताओं के विरुद्ध दोबारा ऐसा कृत्य करने पर और भी कठोर दण्डात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही कलेक्टर श्री छिकारा के निर्देशानुसार जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए खनिज अमले द्वारा आगे भी ऐसा विशेष अभियान चलाकर निरंतर जांच की जाती रहेगी।

तारापुर पेट्रोल पंप के पास धू-धू कर जली बाइक, सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल

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बकावंड विकासखंड बकावंड के पेट्रोल पंप संचालक न सिर्फ आग से खेल रहे हैं, बल्कि अपने उपभोक्ताओं की जान से भी खुलकर खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां के पेट्रोल पंपों में अग्नि दुर्घटना रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं खाद्य विभाग और अन्य संबंधित विभाग इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। ऎसी ही एक बड़ी घटना विकासखंड के तारापुर स्थित शुक्ला पेट्रोल पंप के पास हो गई, जहां एक बाईक अचानक धू धू जल उठी, लेकिन पेट्रोल पंप में कोई व्यवस्था न रहने के कारण आग बुझाई नहीं जा सकी।

मिली जानकारी के अनुसार पल्सर बाईक चालक कनिया सेठिया तारापुर के पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवा कर अपने घर बनियागांव लौट रहा था। वह पेट्रोल पंप से निकला ही था कि उसकी बाईक में अचानक आग लग गई। कनिया सेठिया ने बाईक से कूदकर अपनी जान बचा ली, उसका पैर मामूली रूप से झुलसा है। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाई, मगर आग से बाईक को काफी नुकसान पंहुचा है। अगर ग्रामीणों ने समय रहते ततपरता नहीं दिखाई होती, तो आग पेट्रोल पंप तक भी पहुंच सकती थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि पेट्रोल पंप से बमुश्किल 20 मीटर की दूरी पर हुई इस अग्नि दुर्घटना को रोकने के लिए पेट्रोल पंप में कोई व्यवस्था नजर आई।. पंप में न तो फायर इंग्यूसर है और न ही रेत भरी बाल्टियां। अब सवाल यह उठता है कि बिना जरूरी इंतजामों के पेट्रोल पंप संचालन की अनुमति कैसे मिल गई? खाद्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच क्यों नहीं करते?तारापुर पेट्रोल पम्म शुक्ला हैं मालिक बता रहा जैसे ही पेट्रोल पम्प से भरा क़र अपने घर बनिया गांव आते समय 20 मीटर दूरी पेट्रोल पम्प के अचानक मोटर साईंकिल में आग लगी जैसे आग लगी गाडी चालक गाडी से उत्तर क़र भग गया अल्का सा पैर आग लगी हैं कनिया सेठिया कोके ग्राम पंचायत में कई पेट्रोल पंप संचालित है लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था का कोई गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता है कल की घटना ही बड़ा हादसा बन सकती थी, लेकिन आग लगने के बावजूद किसी तरह उसे ग्रामीणों ने बुझा दिया, दूसरी बात यह कि पेट्रोल पंप पर भीड़ नहीं थी वरना गंभीर घटना घट सकती थी

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