संवाददाता सुनील कथूरिया
नारायणपुर काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार मालक परिवहन संघ को अपनी नई कार्यकारिणी मिल गई है। मालक परिवहन संघ के सदस्य काफी लंबे समय से पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के रवैये से काफी परेशान और नाराज चल रहे थे। इसके बाद 25 जून को संघ के 171 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद भी पूर्व पदाधिकारी किसी भी कीमत पर पद छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसके बाद सदस्यों ने 17 जुलाई को विशेष आमसभा बुलाकर नई कार्यकारिणी का गठन किया, जिसमें सभी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित हुए। मनीष राठौर अध्यक्ष,मनीष शोरी उपाध्यक्ष,अमित भद्र सचिव मंतोष साहू सहसचिव,अभिजीत साहा कोषाध्यक्ष,शेख जमालूद्दीन और देवव्रत श्रीवास्तव कार्यकारिणी सदस्य चुने गए।साथ ही गोपाल बघेल कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गए। निर्वाचन अधिकारी की भूमिका शादान फारुकी ने निभाई। बता दें पूर्व कार्यकारिणी 31 मार्च के बाद अब तक अपने हिसाब का लेखा-जोखा सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाई है,जबकि वर्ष में एक बार आम सभा कर सदस्यों को हिसाब देने का नियम है। मिली जानकारी के अनुसार जुलाई 2025 में संघ के खाते में 46,60,000 रूपये थे,जबकि आज की तारीख में 50,19,107 रूपये ही हैं। संघ के सभी सदस्य बीते एक वर्ष में पुरानी कार्यकारिणी के कामचोरी और बहाने बाजी से भी काफी परेशान रहे। *टूटी किस्त,खींचा ट्रक,कर्ज में डूबे मालिक* किसी भी परिवहन संघ के विकास का पैमाना ट्रकों की बढ़ती संख्या और मालिकों के बेहतर आर्थिक स्थिति से आंका जाता है,लेकिन मालक परिवहन संघ नारायणपुर में ट्रकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। ऐसे में संघ के विकास की बात करना बेमानी होगी,क्योंकि संघ विकास की ऊंचाइयों को छूने की बजाय लगातार गर्त में जाता नजर आ रहा है। संघ के अधिकतर मालिकों का सिविल स्कोर बद से बदतर हो चूका है। ट्रकों की किस्तें टूट रही हैं और संघ के बहुत से ट्रक फाइनेंस कंपनियों के यार्ड में खड़े नजर आ रहे हैं।*तानाशाही रवैये के कारण बना जीपीएस* मालक परिवहन संघ के पूर्व पदाधिकारियों के तानाशाही रवैये के कारण छोटे से जिले नारायणपुर में दूसरे परिवहन संघ का उदय हुआ,जो आज ग्रामीण परिवहन संघ के नाम से जाना जाता है। उस वक्त संघ के पदाधिकारी अपने खास लोगों को एक साथ तीन-चार गाड़ियों के खरीदी का परमिशन देने को तैयार थे,लेकिन नए सदस्यों को एक-एक ट्रक का परमिशन देने में भी इन्हें दर्द हो रहा था,जिसमे संघ के तत्कालीन सचिव रुपेश कुमार देवांगन नए सदस्यों को गाड़ी देने के पक्ष में अडिग रहे,जिसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई और 4 महीने तक उनकी गाड़ी को लोडिंग भी नहीं दिया गया,इसी बीच संघ के पूर्व पदाधिकारियों के गलत नीतियों के कारण ग्रामीण परिवहन संघ का गठन हुआ । मालक परिवहन संघ हमेशा से ही दो हिस्सों में बंटा रहा है। पहला धड़ा जो राजनीति,व्यापार और रसूखदारी से जुड़ा हुआ दिखता है,वहीं दूसरा धड़ा गरीब और मध्यम वर्गीय मालिकों का है। पदाधिकारियों के गलत नीतियों की परिणिति यह रही कि अमीर और अमीर,जबकि गरीब और गरीब होते चले गए। संघ के मालिकों की सूची पर नजर डाली जाए तो स्पष्ट दिखता है,कि एक-एक रसूखदार के पास आज भी 6 से 10 ट्रक हैं,वहीं गरीब और मध्यम वर्गीय मालिकों के पास महज एक-दो ट्रक ही हैं,वो भी अब खींचने के बाद यार्ड में खड़ी हो गई या फिर वो स्वयं ट्रकों को बेचने के लिए मजबूर हो गए,जिनकी ट्रक बची हैं,वो कर्ज में डूबे नजर आ रहे हैं। ऐसे मालिकों के लिए पर्ची फाइनेंस और गोल्ड लोन ही अब तिनके का सहारा है।*नई कार्यकारिणी के सामने कड़ी चुनौती* फिलहाल नई कार्यकारिणी के सामने कड़ी चुनौतियां साफ नजर आ रही है। खराब सड़कों पर ट्रकों को चलाकर सिर्फ निकों जायसवाल कम्पनी और ट्रांसपोर्टर को ही फायदा हो रहा है,वहीं ट्रक मालिक ट्रकों के टायर बदल-बदल कर परेशान है। लोडिंग से लेकर ट्रक खाली होने तक हर कदम पर चुनौतियाँ हैं, आने वाला समय बताएगा की नई कार्यकारिणी इन चुनौतियों का सामना किस तरह से करती है।*संघ के हर सदस्य को साथ लेकर चलने का रहेगा प्रयास- राठौर* संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनीष राठौर ने कहा कि हमने सदस्य रहकर सदस्यों को होने वाली परेशानियों को बहुत करीब से समझा है। हमारा पूरा प्रयास रहेगा की संघ के सभी सदस्यों के साथ खड़े रहकर उनकी हर मुसीबत में उनका साथ दें।



