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अंतागढ़ से रायपुर चलने वाली ट्रेन में बोगियों की संख्या बढ़ाई गई – सांसद भोजराज नाग एवं भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख के प्रयासों का प्रतिफल

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कांकेर लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद श्री भोजराज नाग एवं भाजपा जिला अध्यक्ष  चेमन देशमुख (रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति सदस्य) के संयुक्त प्रयासों से अंतागढ़ से रायपुर के बीच चलने वाली ट्रेन में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बोगियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

दिनांक 23-08-2024 को सांसद भोजराज नाग जी ने एस आर डीसीएम व एस सी ई आर को अपने लेटर पैड में व जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख जी ने 27-02-2025 को रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति बैठक में बालोद एवं कांकेर जिले के अंतर्गत भानुप्रतापपुर रेलवे स्टेशन की समस्याओं और यात्रियों की कठिनाइयों से अवगत कराया था।

पत्र में उल्लेख किया गया था कि स्टेशन पर सिर्फ एक ही प्लेटफार्म है, जबकि ट्रेन दूसरी पटरी पर रुकती है, जिससे यात्रियों को बिना प्लेटफार्म के चढ़ने-उतरने में जोखिम उठाना पड़ता है। साथ ही, स्टेशन में महिलाओं के लिए पृथक कक्षों की अनुपलब्धता, वेटिंग एरिया की कमी एवं जनसुविधाओं की जरूरत पर भी बल दिया गया।

सबसे बड़ी मांग अंतागढ़ से रायपुर चलने वाली ट्रेन में अत्यधिक भीड़ को देखते हुए बोगियों की संख्या बढ़ाने की थी, क्योंकि यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही थी।

इस पत्र के जवाब में रायपुर मंडल के डीआरएम एवं बिलासपुर जोन के जीएम ने त्वरित संज्ञान लेते हुए 12 बोगियों वाली ट्रेन संचालन की मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार की सहमति के पश्चात इस प्रस्ताव को रेल मंत्रालय को भेजा गया है, और 31 जुलाई 2025 तक अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है।

गौरतलब है कि 2017-18 से 2022-23 तक 6 जिलों में 59 किलोमीटर रेलवे लाइन का विस्तार किया गया है। पहले ट्रेन दल्ली राजहरा से रायपुर तक चलती थी, लेकिन अब यह सेवा अंतागढ़ तक विस्तारित हो चुकी है।

इस निर्णय से बालोद, दल्ली राजहरा, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, कांकेर सहित चार जिलों के यात्रियों को लाभ मिलेगा। आम जनता, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सांसद भोजराज नाग एवं भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख के प्रति आभार प्रकट किया है।यह कदम आम जनता की सुविधा और रेल सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

 

 

सुकमा में करोड़ों के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण में भ्रष्टाचार: दुर्गेश राय

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  •  बिना मटेरियल के किया गया अग्रिम भुगतान
  • ईएनसी की सह पर चल रही है गड़बड़ी: दुर्गेश राय 

जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिला मुख्यालय में लोक निर्माण विभाग द्वारा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद से बनाए जा रहे स्विमिंग पूल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण कार्य में व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत मिली है। कांग्रेस सचिव दुर्गेश राय ने विभाग के सब इंजीनियर और एसडीओ पर ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए बिना मटेरियल डंप कराए ही अग्रिम भुगतान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि विभाग के ईएनसी भतपहरी के संरक्षण में यह गड़बड़ी चल रही है।

जानकारी के अनुसार सुकमा में कलेक्टर कार्यालय के ठीक बगल में करोड़ों की लागत से यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। कांग्रेस नेता दुर्गेश राय का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही ठेकेदार को अग्रिम भुगतान कर दिया गया, जबकि नियमानुसार मटेरियल मौके पर आने के बाद ही भुगतान किया जाना चाहिए। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों को लेकर आवाज उठाई। इसके लगभग एक महीने बाद ठेकेदार ने निर्माण स्थल पर मटेरियल डंप कराया। प्रदेश कांग्रेस सचिव दुर्गेश राय ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभागी के एसडीओ शर्मा से बात की तो उन्होंने कार्यस्थल पर मटेरियल सरिया डंप होना बताया, लेकिन जितना सरिया का मूल्यांकन सब इंजीनियर द्वारा किया जाना बताया गया है उतना कार्य स्थल पर था ही नही। मामला तूल पकड़ता देख 14 जुलाई को सरिया पहुंचाया गया। इससे पता चलता है कि ठेकेदार पर इंजीनियर और एसडीओ मेहरबान किस कदर मेहरबान हैं। कांग्रेस नेता श्री राय विभाग पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि कलेक्टर कार्यालय के इतनी करीब और करोड़ों की लागत से बन रहे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में भी इस तरह की अनियमितताएं कैसे हो सकती हैं? प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव दुर्गेश राय ने कहा है कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार रायपुर में बैठे लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ श्री भतपहरी की सहमति के बिना संभव नहीं है। उन्होंने इस मामले की उच्चcस्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। दोनों मैदानी अधिकारियों ने मिलकर कई ऐसे कारनामें किए हैं, जिन्हें बहुत जल्द उजागर किया जाएगा। अब

यह देखना होगा कि इस गंभीर आरोप पर विभाग और जिला प्रशासन क्या कदम उठाते हैं। अब तो लोगो का विश्वास भी इस सरकार से उठता जा रहा है विष्णु के सुशासन में अधिकारी खुलकर भ्रष्टाचार कर सरकार को बदनाम करने पर तुल गए हैं।

जनसेवा की मिसाल पेश कर रहे हैं युवा सरपंच नीलम कश्यप

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  • दीपक बैज के जन्मदिन पर की मरीजों की सेवा 

बकावंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के जन्मदिन पर कांग्रेस नेता नीलम कश्यप के नेतृत्व में शासकीय अस्पताल बकावंड में मरीजों को फल और सहानुभूति का उपहार दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के जन्मदिन पर नीलम कश्यप ने समाज सेवा में प्रेरक भूमिका निभाई।दीपक बैज के जन्मदिन के अवसर पर बकावंड अस्पताल में एक सेवा भावना से परिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व बस्तर जिला एनएसयूआई के ग्रामीण जिलाध्यक्ष एवं कोसमी पंचायत के युवा सरपंच नीलम कश्यप ने किया। इस दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरण कर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीपक बैज के प्रति शुभकामनाओं और सेवा संकल्प के साथ हुई। फल वितरण के इस आयोजन में नीलम कश्यप ने यह संदेश दिया कि व्यक्तिगत खुशी के अवसरों को जनसेवा में बदलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। अस्पताल में मरीजों को फल बांटते समय युवाओं की ऊर्जा और संवेदनशीलता साफ झलक रही थी। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी इस कार्य की सराहना की और कांग्रेस संगठन की समाज के प्रति प्रतिबद्धता को महसूस किया। इस अवसर पर कई स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता, जनपद सदस्य, तुंगापाल सरपंच, पंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने दीपक बैज की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए उनके नेतृत्व की प्रशंसा की। नीलम कश्यप द्वारा किया गया यह आयोजन न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि युवाओं को समाज सेवा की दिशा में सक्रिय होने का संदेश भी दे गया। यह कार्यक्रम कांग्रेस की जनसेवा और संवेदनशीलता की पहचान बनकर सामने आया। एक आदिवासी नेता ही आदिवासी समाज के काम से नाम कमा सकता है। विकासखंड के युवा नेता नीलम कश्यप भी दीपक बैज से खासे प्रभावित हैं और उनकी ही तर्ज पर लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। नीलम कश्यप अपनी ग्राम पंचायत के विकास के लिए भी लगातार सक्रिय रूप से काम करते आ रहे हैं। ग्रामीणों को बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर वे ज्यादा फोकस कर रहे हैं।

अटल जी की स्मृति को अटल परिसर में अटल बना रहे हैं महापौर संजय पाण्डेय

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  •  जगदलपुर में बन रहा है भव्य पार्कयुक्त परिसर 

जगदलपुर नगर के लालबाग में निर्माणाधीन अटल परिसर का निरीक्षण मंगलवार को महापौर संजय पांडे ने किया। अटल परिसर को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश उन्होंने अधिकारियों को दिए।

 

मालूम हो कि लालबाग में अटल परिसर का निर्माण किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 9 फीट की ऊंची प्रतिमा यहां लगाई जाएगी। दरअसल संजय पाण्डे अटल परिसर निर्माण का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उनके साथ नगर निगम के अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पाणिग्रही, लक्ष्मण झा, त्रिवेणी रंधारी, पार्षद आशा साहू, पूनम सिन्हा सहित नगर निगम के इंजीनियर मौजूद रहे। संजय पाण्डे ने बताया अटल परिसर के अंदर अटल बिहारी वाजपेयी की 9 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जाएगी। मूर्ति बनकर तैयार है, जैसे ही अटल परिसर का निर्माण कार्य पूर्ण होता है वैसे ही मूर्ति का लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। निरीक्षण के दौरान निगम के इंजीनियर व तकनीकी स्टाफ को जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। अटल परिसर के अंदर लाइटिंग की जाएगी वहीं पार्क के रूप में भी इस परिसर को विकसित किया जाएगा। इंजीनियर दीपांशु देवांगन व अमर सिंह ने महापौर को बताया कि कार्य प्रगति पर है व जल्द ही इसका निर्माण पूर्ण कर लिया जाएगा। बेहतर तरीके से अटल परिसर का निर्माण किया जा रहा है।

आदिवासियों की आजीविका और उनके बच्चों की शिक्षा के दुश्मन बन गए हैं नक्सली

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  •  मुखबिरी के आरोप में फिर दो शिक्षादूतों को उतार दिया मौत के घाट
  • मुखबिरी का आरोप लगा मार डाला शिक्षादूतों को

अर्जुन झा

जगदलपुर जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सलियों का दोहराचरित्र लगातार उजागर हो रहा है। असल बात तो यह है कि नक्सली आदिवासियों की आजीविका के साधन और उनके बच्चों की शिक्षा के दुश्मन बन गए हैं। दो दिन पहले आईईडी ब्लास्ट में तीनआदिवासियों को गंभीर रूप से घायलकर चुके नक्सलियों ने बीती रात दो शिक्षादूतों को मुखबिरी का आरोप लगाकर मार डाला। ये दोनों शिक्षादूत भी आदिवासी युवा थे और आदिवासी बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हुए थे।

सुरक्षा बलों से करारी मात खाने के बाद नक्सली निरीह आदिवासियों, आदिवासी युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाने लगे हैं। नक्सलियों की ऎसी ही कार्यरना करतूत बीजापुर जिले से सामने आई है। जिले के भोपालपटनम ब्लाक के दो शिक्षादूतों को मुखबिरी के आरोप में 14 जुलाई की रात नक्सलियों ने मार डाला और उनके शवों को गांव के समीप डाल दिया। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों शिक्षादूतों को एक दिन पहले शाम को नक्सलियों ने घर से अगवा किया था। इस घटना से शिक्षादूत संघ काफी आहत है। ब्लॉक भोपालपटनम की टेकमेटा प्राथमिक शाला के शिक्षादूत सुरेश मेट्टा और पीलूर की प्राथमिक शाला के शिक्षादूत विनोद मडे़ सन् 2019 से कार्यरत थे। सूत्रों ने बताया कि शिक्षादूतों का गांव से ब्लाक मुख्यालय जाना आना लगा रहता था। इससे नक्सलियों को शक हुआ कि ये शैक्षिक काम के साथ पुलिस की मुखबिरी भी करते हैं। सूत्रों ने ग्रामीणों के कथन अनुसार बताया कि नक्सलियों ने इन्हें पहले भी मुखबिरी न करने की चेतावनी भी दी गई थी। दोनों स्कूल भोपालपटनम क्षेत्र के हैं। फरसेगढ़ थाने में इस मामले की एफआईआर दर्ज हुई है। बीजापुर जिला पुलिस द्वारा इस घटना की अभी तक पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना की शिक्षादूत संघ ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि हम अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। बंद शालाओं का संचालन करने में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षादूत अपनी सेवा सुरक्षा की मांग करते आ रहे हैं। महज दस हजार रुपए मासिक मानदेय पर स्कूल संचालन कर शिक्षादूत बस्तर संभाग में आदिवासी बच्चों का भविष्य संवारने काम करते आ रहे हैं।

कर चुके हैं 7 शिक्षादूतों की हत्या

शिक्षादूत संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश कोरम ने बताया कि इस तरह की घटना से शिक्षादूतों में दहशत है। कोरम ने यह भी बताया कि अब तक बीजापुर में 5 और सुकमा में 2 शिक्षादूतों की हत्या नक्सली कर चुके हैं। बीजापुर जिले की 299 प्राथमिक शालाओं में 332 शिक्षादूत विभिन्न कठिन परिस्थितियों में रहकर भी सेवा दे रहे हैं। संघ के जिलाध्यक्ष व सचिव ने बताया कि शासकीय काम से भी शिक्षादूतों के ब्लाक व जिला मुख्यालय जाने को माओवादी शक की नजर से देख रहे हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इस घटना की सूचना मिलने पर फरसेगढ़ व भोपालपटनम से सुरक्षा बलों को पीलूर के लिए रवाना किया गया है। दोनों शिक्षादूतों के शवों को सुरक्षित लाने की चुनौती फोर्स के सामने बनी हुई। इन दोनों शिक्षादूतों की हत्या गला घोंटकर या धारदार हथियार हुई इसकी जानकारी मिलना शेष है।

संजय पांडे के हाथों से मच्छरदानी व बुजुर्ग महिला को वाकर दिया

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मच्छरदानी वितरण के साथ शासन की योजना के अंतर्गत बुजुर्ग महिला को महापौर संजय पाण्डे व अन्य जनप्रतिनिधियों के हाथों माँ दंतेश्वरी वार्ड की बुजुर्ग महिला को वाकर दिया गया। वही महापौर संजय पाण्डे ने स्वच्छता सम्बन्धी शपथ भी दिलवाई। बारिश अक्सर मच्छर जनित बीमारियों की आशंका को प्रबल बना देती है, इस मौसम में मच्छर से होने वाली बीमारियों से बचाव हेतु आज शहर के मां दंतेश्वरी वार्ड में मच्छरदानी का वितरण कर लोगों को इस मौसम में सजग रहने की अपील की।

इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पानीग्राही, लक्ष्मण झा, योगेंद्र पाण्डे, संजय विश्वकर्मा, कलावती कसेर, त्रिवेणी रंधारी, पार्षद पूनम सिन्हा, आशा साहू, वरिष्ठ कार्यकर्ता उमाकांत सिंह, धर्मपाल महावर, आरयेंन्द्र सिंह आर्य, मंडल अध्यक्ष प्रकाश झा, सुधा मिश्रा, लक्ष्मी कश्यप, रंजीता पानीग्राही, महामंत्री संजय चंद्राकर, अतुल सिम्हा, ब्रिजेश शर्मा, दिलीप सुंदरानी, रितेश सिन्हा, सूर्यभूषण सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

बकावंड तहसील में दिखने लगा साय का सुशासन, सालों से लंबित मामले निपटा रही हैं तहसीलदार

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  •  लोगों को मिली बड़ी राहत, कलेक्टर और तहसीलदार की हो रही है तारीफ

बकावंड  विकासखंड में सुशासन दिखने लगा है मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश पर अब राजस्व विभाग लगातार लोगो को अपने त्वरित कार्यों से प्रभावित कर रहा है। बस्तर कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में बकावंड की युवा और महिला तहसीलदार श्रीमती जागेश्वरी गावड़े ने सूझबूझ से सभी राजस्व प्रकरण निपटने में तेजी लाई है। इसका फायदा आम लोगों को मिलने लगा है। इससे लोगों में खुशी की लहर है और वे कलेक्टर तथा तहसीलदार की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।

बकावंड तहसीलदार श्रीमती गावड़े कई सालौं से लबिंत भूमि संबंधित प्रकरण एवं जाति निवास प्रमाण पत्र के कार्य बड़ी तेजी से निपटा रही हैं। तहसीलदार की इस पहल से यहां के लोग बहुत खुश हैं और कलेक्टर हरिस एस एवं तहसीलदार जागेश्वरी गावड़े की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं। बस्तर कलेक्टर हरिस एस के निर्देशानुसार बकावंड तहसीलदार जागेश्वरी गावड़े राजस्व संबंधित विवादित भूमि एवं जाति निवास या तहसील संबंधित मामले को जल्द निपटाने का प्रयास कर रही हैं। ताकि किसानों को बकावंड तहसील कार्यालय के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े और वे ताकि किसान अपने अपनी खेती किसानी में ज्यादा समय दे सकें। किसानों का बंटवारा, नामांतरण, किसान किताब में नाम जोडने एवं मृत किसानों के नाम काटने कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश तहसीलदार श्रीमती गावड़े ने हल्का पटवारियों को दिए हैं। उन्होंने लोक सेवा केंद्र को भी जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र के मामलों का निराकरण करने कहा है ताकि छात्र छात्राओं को सहीं समय स्कूल कॉलेज दाखिला मिल सके। बकावंड तहसील अंतर्गत कुल दर्ज केस 7580 रहे हैं, जिनमें 7489 का निराकारण कर दिया गया है। कुल 91 प्रकरण मूल न्यायलय में लबिंत हैं और 87 दर्ज हैं। बकावंड तहसील अंतर्गत ग्रामीणों की समस्याओं निराकरण तेजी से किया जा राहा है।

इस कीचड़ में इसीलिए तो नहीं खिल पा रहा है कमल

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  • +25 साल से घुटने तक कीचड़ भरे रास्ते पर चल रहे हैं रूद्रारम पंचायत के लोग
  • कांग्रेस के गढ़ बीजापुर में है यह गंभीर समस्या
  • 91 लाख खर्च होने के बाद भी नहीं बन पाई सड़क

अर्जुन झा

जगदलपुर गत लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बस्तर संभाग में बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाया, मगर बीजापुर जिले के कीचड़ में वह कमल नहीं खिला पाई। वजह है ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी। हर साल बरसात का मौसम एक ग्राम पंचायत की तीन बस्तियों के लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। इन बस्तियों में भरपूर कीचड़ है, पर उस कीचड़ में भाजपा का कमल नहीं खिल पा रहा है।

यह दुखभरी कहानी है बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड की ग्राम पंचायत रूद्रारम की। यहां वर्षों से आवागमन की सुविधा के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्राम पंचायत में गुहार लगाई, शिविरों में भी आवेदन दिया, मगर अब तक कोई भी समाधान नहीं निका ल गया। रूद्रारम के पंचायत सचिव और पूर्व सरपंच की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। पंचायत के तीन वार्ड गेर्रागुड़ा, यालमपारा और सोढ़ीपारा की बस्तियां बीते करीब 25 वर्षों से कीचड़ से लबरेज हैं। रास्तों पर कीचड़ का सैलाब आया हुआ है। इन रास्तों पर बारिश में एक फीट तक कीचड़ भरा रहता है, जिससे गांव वालों को आवागमन में तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

सचिव–सरपंच बने रहे बेपरवाह

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर उन्होंने ग्रामसभा बैठकों, पंचायत स्तर की चर्चाओं और प्रशासनिक शिविरों में कई बार आवेदन दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। सीसी रोड तो दूर, मुरमीकरण तक का नामोनिशान नहीं है। हर बार सचिव और पूर्व सरपंच ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन न काम शुरू हुआ, न सड़क बनाई।

बच्चों की पढ़ाई चौपट, मरीज त्रस्त

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में सड़कें एक फीट कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों का अस्पताल पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है। एम्बुलेंस यहां तक नहीं पहुंचती, मरीजों को कंधे पर उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं बच्चे स्कूल पहुंचते तक कीचड़ से लथपथ हो जाते हैं। कीचड़ भरे रास्ते को पार करने में जो मेहनत लगती है, उसकी थकावट के कारण बच्चे न स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई कर पाते हैं और न घर लौटकर। कुल मिलाकर इन बच्चों का भविष्य कीचड़ में समाता जा रहा है।

डकार गए 91 लाख रुपए

खबर है कि सड़क निर्माण के नाम पर रूद्रारम पंचायत में 91 लाख रुपए की हेराफेरी हुई है। जब ग्रामीणों ने सचिव से सवाल किया कि सड़क क्यों नहीं बनी, तो सचिव ने साफ कहा कि फंड नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त से बीते 4 वर्षों में लगभग 91 लाख की राशि पंचायत को मिली, जिसे कहां खर्च किया गया इसका कोई हिसाब नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को जब भी गांव की बैठकों में बुलाया जाता है, वह या तो आते नहीं हैं, और अगर आते हैं तो कुछ देर बैठकर बिना जवाब दिए चले जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि सचिव और पंचायत का रवैया जनसमस्याओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है।वहीं जब दलदल भरी सड़क के मुद्दे को लेकर जनपद सीईओ सुरेश देवांगन के पास पहुंचे तो उन्होंने कोई भी बयान देने से साफ इंकार कर दिया। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आए।

कलेक्टर से मिलेंगे ग्रामीण

ग्रामीण इस पूरे मामले की जांच करवाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए जल्द ही जिला कलेक्टर में आवेदन देने की बात कर रहे हैं। साथ ही जल्द से जल्द इन तीनों वार्डों की सड़कों का निर्माण कराने की मांग की जायेगी, ताकि लोगों को इस बदहाली से राहत मिल सके। वहीं यह बताना भी लाजिमी है कि बीजापुर विधानसभा सीट को भाजपा ऎसी ही जन समस्याओं के चलते नहीं जीत पा रही है। भाजपा को अगर बीजापुर में कमल खिलाना है, तो उसे ग्रामीणों को ऎसी समस्याओं के दलदल से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस पहल करनी होगी।

नगरी निकाय कर्मचारी अपनी तीन सूत्री महत्वपूर्ण मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से किये मुलाकात

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बालोद नगरी निकाय कर्मचारी अपनी तीन सूत्री महत्वपूर्ण मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से किये मुलाकात।। पूरे प्रदेश भर के नगरी निकाय कर्मचारी अपनी तीन सूत्री मूलभूत महत्वपूर्ण मांगों को लेकर लगातार पिछले एक सप्ताह भर से अपने-अपने स्थानीय निकायों में काली पट्टी लगाकर फील्ड और कार्यालयीन कार्यों को कर रहे थे और अपनी मांगों को लेकर नारा लगाते हुए आवाज बुलंद कर शासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का लगातार प्रयास कर रहे थे। नवयुक्त अधिकारी कर्मचारी नगरी निकाय कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने बताया कि निकाय कर्मचारियों की बहुत ही महत्वपूर्ण और जमीनी स्तर की तीन मांगे जिसमें महीने के पहली तारीख को वेतन का भुगतान करने, शासन के अन्य विभागों की भांति पुरानी पेंशन योजना लागू करने, और समय पद पदोन्नति प्रदान करने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर हम लगातार संघर्षरत है और लगातार शासन को अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रयास कर रहे थे इसी बीच शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से संघ के पदाधिकारीयो को मुलाकात के लिए बुलावा आया था। संघ के प्रदेश पदाधिकारीयो द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी से उनके निवास में भेंट मुलाकात कर अपनी गंभीर और महत्वपूर्ण मांगों और समस्याओं से उनको अवगत कराया गया। जिस पर माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी द्वारा निकाय कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अति शीघ्र मांगों पर विचार कर पूर्ण करने का आश्वासन दिया गया। श्री सोनी ने बताया कि चर्चा सकारात्मक और सार्थक रही और आने वाले समय पर निश्चित रूप से कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले में प्रमुख रूप से कर्मचारी संघ के संरक्षक संजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी, प्रदेश महामंत्री सुभाष सोनकर, वरिष्ठ सलाहकार श्रवण ठाकुर, और कर्मचारी ललित साहू उपस्थित थे।

राहुल गांधी की आदिवासी नेताओं से मुलाकात पर भाजपा के यक्ष प्रश्न

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  • दीपक बैज ये पूछने की हिम्मत दिखा पाए कि छत्तीसगढ़ से कांग्रेस ने किसी आदिवासी को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा:केदार कश्यप
  • कांग्रेस ने 3 राज्यसभा सांसद गैर राज्यों से बनाए एक भी आदिवासी को लायक क्यों समझा:केदार कश्यप

रायपुर छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व अध्यक्ष मोहन मरकाम समेत अन्य लोग भी गांधी से मिले तो क्या इस मेल-मुलाकात के दौरान वे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के हक में बात कर पाए या परम्परानुसार गांधी-परिवार की चरण वंदना और चाटुकारिता करके ही लौट आए?

वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि भूपेश सरकार के शासनकाल में प्रदेश के आदिवासियों के साथ तो छलावा और धोखाधड़ी का एक पूरा सिलसिला चला, लेकिन बैज और मरकाम मुँह में दही जमाए बैठे रहे। मरकाम को तो फिर भी विधानसभा में कोंडागाँव जिले के डीएमएफ फण्ड पर सवाल उठाने की कीमत अध्यक्ष पद खोकर चुकानी पड़ी, पर अभी हाल ही कांग्रेस की पोलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में सबके सामने अपने नेतृत्व पर किए गए हमले के बाद भी बैज ‘मौनी बाबा’ बने बैठे हैं! श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के हक और कल्याण की सोच और दृष्टि से जिस कांग्रेस का दूर-दूर तक कोई रिश्ता ही नहीं है, उस कांग्रेस के नेता राहुल गांधी आदिवासी नेताओं से मिलने का सिर्फ पाखण्ड ही कर रहे हैं।

प्रदेश के वन मंत्री कश्यप ने राहुल गांधी और प्रदेश के कांग्रेस नेताओं से सवाल किए हैं :

0 क्या राहुल गांधी से यह प्रश्न पूछने की हिम्मत बैज कर पाए कि जब भूपेश बघेल की सरकार थी, तब प्रदेश से भेजे गए तीन राज्यसभा सांसदों में छत्तीसगढ़ के किसी व्यक्ति को राज्यसभा सांसद क्यों नहीं बनाया गया था? किसी आदिवासी को कांग्रेस ने इस लायक क्यों नहीं समझा?

0 छत्तीसगढ़ के किसी आदिवासी व्यक्ति को एक राज्यसभा की सीट क्यों नहीं दी? तीनों की तीनों सीटें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसके इशारे पर बेच दीं और छत्तीसगढ़ का अहित किया?

0 बैज क्या राहुल गांधी से यह पूछने की हिम्मत कर पाए या फिर दिल्ली गए और ‘सर नमस्ते’ करके आ गए?

 

0 यदि राहुल गांधी को सच में आदिवासियों की इतनी ही फिक्र थी तो वह उस समय क्यों चुप्पी साधे रहे, जब छत्तीसगढ़ की पिछली भूपेश सरकार लगातार आदिवासियों के साथ अन्याय कर रही थी?

 

0 आदिवासी बहुल इलाकों बस्तर व सरगुजा में धर्मांतरण के चलते आदिवासियों में वर्ग संघर्ष की नौबत लाने वाले अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल को तलब क्यों नहीं किया?

 

0 भूपेश बघेल ने बस्तर के कमिश्नर और सुकमा के एसपी की उन चिठिठयों पर धूल क्यों पड़ने दी, जिनमें बस्तर में धर्मांतरण के चलते स्थिति के भयावह होने की बात कही गई थी।

0 आदिवासी क्षेत्रों में तेन्दूपत्ता संग्राहकों के हितों तक पर भूपेश सरकार ने डाका डाला, उनको दी जाने वाली चरणपादुका तक का वितरण बंद करवा दिया, तब बैज और मरकाम ने चुप्पी क्यों साध रखी थी?

0 बैज और मरकाम आदिवासी हितों की बात जब भूपेश सरकार के कार्यकाल में नहीं कर पाए तो अब राहुल गांधी के सामने उनकी जुबान खुली होगी, क्या यह सोचना ही बेमानी व हास्यास्पद नहीं है?

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