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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केदार कश्यप के अनुभव पर जताया भरोसा, बनाया संसदीय कार्य मंत्री

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  • मानसून सत्र के बाद होगा साय कैबिनेट का विस्तार

अर्जुन झा-

जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट का विस्तार फिलहाल जरूर टल गया है, मगर मुख्यमंत्री श्री साय ने मंत्री केदार कश्यप के दीर्घकालीन अनुभव और उनकी क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्हें संसदीय कार्य मंत्री का प्रभार भी सौंप दिया है। राज्यपाल के अनुमोदन के बाद मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने इस संबंध में गुरुवार की देर रात आदेश जारी किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर केदार कश्यप को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है कि मंत्रिमंडल के मेरे साथी केदार कश्यप को वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास एवं सहकारिता विभाग के वर्तमान दायित्वों के साथ साथ संसदीय कार्य विभाग का प्रभार मिलने पर बहुत-बहुत बधाई एवं सफल कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। साय केबिनेट के विस्तार की चर्चा लंबे समय से चल रही है। शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के सांसद चुन लिए जाने के बाद शिक्षा मंत्रालय फिलहाल रिक्त है और इसे मुख्यमंत्री श्री साय अपने पास ही रखे हुए हैं। चूंकि मुख्यमंत्री के पास कार्य का बोझ ज्यादा रहता है, इसलिए कयास लगाए जा रहे थे कि शिक्षा मंत्रालय केदार कश्यप को दिया जा सकता है।. केदार कश्यप को इस मंत्रालय का खासा अनुभव भी है। वे रमन सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और शिक्षा के क्षेत्र में तब उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए थे। शिक्षा मंत्री रहते केदार कश्यप ने बस्तर संभाग के साथ समूचे छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में बेहतरीन कार्य किए थे। शिक्षकों और विभागीय कर्मियों का दुख दर्द दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए थे। सूत्र बताते हैं कि केदार कश्यप की मंशा है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को इतना बेहतर बना दिया जाए कि सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकलने वाले बच्चे भी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस, डॉक्टर, इंजीनियर बनने की काबिलियत से ओतप्रोत हो जाएं। सूत्रों के अनुसार साय कैबिनेट में अभी दो विधायकों में से एक नया और एक पुराने चेहरे को मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में केदार कश्यप को शिक्षा मंत्री बनाकर उनके पुराने विभाग वन, जलवायु परिवर्तन एवं सहकारिता विभाग का दायित्व किसी दूसरे चेहरे को दिया जा सकता है।

कश्यप को अहम दायित्व

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू हो रहा है। विधानसभा की कार्यवाही संचालित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री की अहम भूमिका होती है। इसलिए कैबिनेट का विस्तार न करते हुए फिलहाल मंत्री केदार कश्यप को ही संसदीय कार्य मंत्रालय का प्रभार दिया गया है। संसदीय कार्य मंत्रालय उसी को सौंपा जाता है, जो धीर गंभीर, सुशिक्षित, अनुभवी हो। इस पैमाने पर केदार कश्यप मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नजरों में खरे उतरे हैं। केदार कश्यप पहले भी मंत्री रहे हैं, संगठन में भी दायित्व सम्हाल चुके हैं और सबसे बड़ी बात यह कि वे एक सुलझे हुए मगर फायर ब्रांड नेता के रूप में भी जाने जाते हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें यह महति जिम्मेदारी सौंपी है। उधर मानसून सत्र के बाद सीएम साय अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार साय की कैबिनेट में नए मंत्री के दावेदार विधायकों में राजेश मूणत, अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, भावना बोहरा और गजेंद्र यादव हैं। इनमें से किन्ही दो विधायकों को शामिल किए जाने की चर्चा है। शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि रायपुर से एक नया मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में रमन कैबिनेट में रहे राजेश मूणत और अजय चंद्राकर दोनों में से किसी एक का चयन हो सकता है।

परित्यक्ता युवती के फेर में भाई ने फेर लिया था मुंह इसलिए कर दी बड़े भाई के साथ मां की भी हत्या

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  •  पुलिस ने किया डबल मर्डर केस पर बड़ा खुलासा
  • जर, जोरू और जमीन बनी दोहरे हत्याकांड की वजह

अर्जुन झा-

जगदलपुर हर विवाद में जर, जोरू और जमीन ही मुख्य कारक होते हैं। रामायण से लेकर महाभारत तक में जर जोरू और जमीन तथा भारत से चीन एवं पाकिस्तान के रिश्तों में खटास के पीछे भी जमीन ही निहित है। वहीं जगदलपुर में 11 जुलाई को हुए डबल मर्डर केस में भी जर जोरू और जमीन ही मुख्य वजह रही है। एक भाई चाहता था एक प्रॉपर्टी को बेचकर अच्छा सा मकान बनाना और बिजनेस करना। बड़े भाई को यह बात पसंद नहीं थी। वहीं जो बड़ा भाई अपने छोटे भाई की मदद के लिए तत्पर रहता था, उसने मुंह फेर लिया था। क्योंकि वह पराई नारी के चक्कर में पड़ गया था। छोटे भाई को बड़े भाई की बेरुखी और इश्क मोहब्बत वाला खेल पसंद नहीं आया। इसलिए उसने बड़े भाई की हत्या कर दी। बीच में मां आई, तो उसकी भी जान ले ली।

जगदलपुर के इंदिरा वार्ड स्थित अनुपमा चौक के एक मकान में 11 जुलाई को मां गायत्री गुप्ता और बेटे नीलेश गुप्ता के खून से लथपथ शव मिले थे। वहीं दूसरा बेटा नीतेश गुप्ता घायल अवस्था में बाथरूम में पड़ा मिला था। खून पूरे कमरे में फैला हुआ था। कमरे में रखा सामान बिखरा पड़ा था। निलेश गुप्ता और गायत्री गुप्ता को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा ठोस हथियार से सिर, चेहरा एवं गर्दन पर गंभीर चोट पहुंचाकर हत्या की गई थी। नितेश गुप्ता को भी हथियार से मारकर चोट पहुंचाया गया था। प्रकरण में पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माहेश्वर नाग के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक उदित पुष्कर, उप पुलिस अधीक्षक नासिर बाठी के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी कोतवाली सुरेश जांगड़े, थाना प्रभारी परपा निरीक्षक दिलबाग सिंह, थाना प्रभारी बोधघाट निरीक्षक लीलाधर राठौर के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच शुरू की गई। इस दौरान सीसीटीवी कैमरे से प्राप्त फुटेज, घटना स्थल पर मिले साक्ष्य, तकनीकी साक्ष्य एवं परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के अनुरूप अज्ञात व्यक्तियों की पतासाजी एवं नितेश गुप्ता उर्फ सोनू से विस्तृत पूछताछ की गई। नीतेश ने बताया कि वह तीन चार माह से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। मां और बडे भाई नीलेश से पैसे मांगने पर गाली गलौज करते और डांटते थे। हमारी दो जगह जमीन मकान है। नीतेश अपने बड़े नीलेश भाई और मां को सलाह देता था कि एक जमीन और मकान को बेचकर एक जमीन पर घर बनाकर दोनों परिवार रहेंगे और बचे पैसे से कोई अच्छा सा बिजनेस डालकर सेट हो जाएंगे। बडा भाई मना कर देता था और मां भी उसी का साथ देती थी और मुझे गालियां देती रहती थी। इस कारण मैं बहुत परेशान था। मैने कई जगह से लाखों रूपये कर्ज में ले रखे थे। लेनदार मुझे फोन करते रहते थे। साथ ही इस बीच बड़ा भाई नीलेश पति द्वारा छोड़ दी गई दूसरी जाति की विवाहित लड़की से शादी करना चाहता था। मां जब भी हम दोनों की शादी की बात करती थी, तो बड़ा भाई नीलेश बोलता था कि तू अपना देख मेरे बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। बड़ा भाई जबसे उस लड़की के संपर्क में आया, तबसे वह न मुझे पैसे की मदद करता था और न ही मेरी कोई बात मानता था। इससे पहले वह जरूरत पडने पर मुझे पैसों की मदद भी करता था और मुझसे भी पैसे की मदद मांग लेता था।

तवे से मारा, नाड़े से गला घोंटा

नीतेश ने पुलिस को बताया है कि घटना तिथि की रात में भी हम लोगों में पैसे मांगने की बात को लेकर वाद विवाद हुआ। धक्का मुक्की करते समय भाई नीचे गिर गया। मैंने यह कहते हुए लोहे के तवे से उस पर वार कर दिया कि आज तुझे खत्म करके ही रहूंगा। मां बीच बचाव के लिए आई। गाली देते हुए मुझे खींचने लगी और थप्पड़ मारने लगी तो मैने उस पर भी उसी तवे से वार कर दिया। दोनों बेहोश होकर गिर गए। तब मैंने अपने चड्डा के नाड़े से दोनों का गला घोट दिया। दोनों की हत्या करने बाद अपने बचाव में घटना को लूटपाट का रूप देने के लिए आलमारी के सामान को बिखेर दिया। अपने आप को ब्लेड से चोट पहुंचाई और अपने हाथ पैर को स्वयं से रस्सी से बांधकर बाथरूम में लेट गया। फारेसिंक एक्सर्पट से घटना स्थल का निरीक्षण कराया गया जो नितेश पर संदेह होने पर तकनीकी साक्ष्यो के तथ्यपरक साक्ष्यो के आधार पर पूछताछ की गई। पूछताछ में नीतेश टूट गया और मां और भाई की हत्या का अपराध करना कबूल कर लिया।

इनकी रही अहम भूमिका

मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले पुलिस कर्मियों में निरीक्षक सुरेश जांगड़े, दिलबाग सिंह, लीलाधर राठौर, तामेश्वर चौहान, उप निरीक्षक लोकेश्वर नाग, सहायक उप निरीक्षक दिनेश नंदी, नायडू, आरक्षक रवि सरदार, युवराज सिंह ठाकुर, संजय रजावत, केशव चंद्रा, सोनू गौतम, दीपक कुमार आदि शामिल हैं।

छः महीने में ही साय सरकार हो गई असहाय: जावेद खान

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  •  प्रदेश में लचर हो गई है कानून व्यवस्था 
    जगदलपुर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जावेद खान ने कहा है कि छः महीने की विष्णु देव साय सरकार कानून व्यवस्था को लेकर इस तरह से असहाय सरकार हो गई है कि छत्तीसगढ़ को अपराधगढ़ बना दिया है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब बस्तर भी इससे अछूता नहीं रहा है। आगजनी, चाकूबाजी, लूट, बलात्कार, हफ्ता वसूली, खनन माफिया से लेकर भूमाफिया राज चरम पर है।अब जगदलपुर शहर के बीचो-बीच जघन्य और शहर को झकझोर देने वाला दोहरा हत्याकांड शहर की और प्रदेश की कानून व्यवस्था को जाहिर करने के लिए काफी है,प्रदेश के गृहमंत्री से प्रदेश संभल नहीं रहा है,भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जहां से विधायक हैं उस विधानसभा में कानून व्यवस्था का यह हाल है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में कानून व्यवस्था कैसी होगी यह गंभीर सवाल खड़ा करता है साय सरकार पर,आज अपराधियों के अंदर पुलिस प्रशासन का भय खत्म हो गया है,प्रदेश के गृहमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट को आज आत्म चिंतन और सरकार की कार्यशैली की गंभीरता से आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है।

कलेक्टर से भेंट की बीएड कॉलेज प्राचार्य पूर्वा शर्मा ने

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कांकेर शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय कांकेर की प्राचार्य डॉ. पूर्वा शर्मा ने कांकेर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर से सौजन्य मुलाकात की।कलेक्टर ने कांकेर बीएड कॉलेज के संबंध में विस्तार से जानकारी लेते हुए जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति का आश्वासन दिया। इस पर प्राचार्य डॉ. पूर्वा शर्मा ने उन्हें कॉलेज आने के लिए निवेदन किया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। डॉ. पूर्वा शर्मा प्राचार्य के साथ महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. आस्था शर्मा एवं डॉ. कृष्णमूर्ति शर्मा भी थे।

प्राचार्य कक्ष में सांप

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जगदलपुर बीएड कॉलेज कांकेर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्राचार्य कक्ष में एक जहरीला सांप आराम फरमाते दिखा। यह सांप प्राचार्य की कुर्सी के ठीक पीछे दीवार पर लगे बोर्ड पर बैठा हुआ था। सांप को देखते ही सर्प विशेषज्ञ ज्ञानू गौतम को बुलाया गया। ज्ञानू गौतम ने कुछ ही मिनटों में सांप को पकड़ लिया और उसे जंगल में ले जाकर छोड़ दिया।

8 हजार रू. की रिश्वत लेते एसडीएम के बाबू को एंटी करप्शन ब्यूरो ने पकड़ा

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  •  नामांतरण के लिए मांगी थी 10 हजार रुपए की घूस

जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के एसडीएम कार्यालय में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने एक रिश्वतखोर बाबू रंगेहाथ धर दबोचा। एसीबी की कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।

एसीबी की टीम ने नारायणपुर जिला कलेक्ट्रेट एसडीएम शाखा में सहायक ग्रेड 2 के पद पर पदस्थ शंकर कुमेटी को 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है। मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। चांदनी चौक के नारायणपुर निवासी लवदेव देवांगन से जमीन के नामांतरण के बदले एसडीएम शाखा में सहायक ग्रेड 2 पर पदस्थ शंकेर कुमेटी कई दिनों से दस हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। लवदेव देवांगन ने मामले की शिकायत एसीबी जगदलपुर यूनिट से की। जिसके बाद एसीबी टीम ने जाल बिछाकर रिश्वतखोर बाबू को गिरफ़्तार कर लिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो जगदलपुर के उप पुलिस अधीक्षक रमेश मरकाम ने बताया ने रिश्वतखोर बाबू को पकड़े जाने की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस तरह के मामलों की शिकायत मोबइल नंबर 9479190031 पर कर सकते हैं।

बीएनएस में अब कुल 358 नई धाराएं, 175 धाराएं बदल गईं, 22 धाराएं खत्म

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  • नए कानूनों पर आयोजित कार्यशाला में दी जानकारी

कांकेर पूरे देश में एक जुलाई से देश में तीन नए कानून प्रभावशील हो गए हैं। जिनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 शामिल हैं।

ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1860 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) लागू हुई थी। केन्द्र सरकार ने 16 दशक बाद 2023 में व्यापक बदलाव किए हैं, जिसमें सिर्फ धाराएं ही नहीं बदलीं, बल्कि सजा और जुर्माने के प्रावधान में भारी परिवर्तन किए गए हैं। पुराने कानून की बहुचर्चित धाराएं 302 हत्या अब 103, ठगी या धोखाधड़ी 420 अब 318 (4), चोरी 379 अब 303(2) व दुष्कर्म 376 आईपीसी अब 64 बीएनएस कहलाएंगी। आने वाले समय में अब इंडियन पिनल कोड 1860 (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू हो गए हैं। नवीन कानूनों के विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराने एवं आमजनता को जागरूक लाने ने के उद्देश्य से आज पुलिस विभाग द्वारा कार्यशाला आयोजित कर कांकेर के वरिष्ठ नागरिकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई। साथ ही सामान्यतः प्रयुक्त होने वाली अलग- अलग धाराओं एवं उनमें निहित उपधाराओं के बारे में बताया गया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षु आईपीएस संदीप कुमार पटेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भानुप्रतापपुर ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की विभिन्न प्रमुख धाराओं व उप धाराओं के बारे में पीपीटी के माध्यम से बताया। इस अवसर पर डीएसपी जीएस साव ने नए कानून के विभिन्न प्रावधानों पर जानकारी दी। साथ ही कानून के विशेषज्ञ अधिवक्ताओं ने भी नवीन कानून पर प्रकाश डाला।

राजद्रोह खत्म, अब देशद्रोह

कार्यशाला में बताया गया कि अंग्रेजों के समय के कानून 124(क) आईपीसी को नए कानून के तहत खत्म कर उसकी जगह देशद्रोह कर दिया गया है। लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना कोई भी कर सकता है। मगर कोई सशस्त्र विरोध, बम धमाका करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी

आईपीसी में 511 धाराएं थीं, जबकि बीएनएस में 358 धाराएं है। 175 धाराएं बदल गई हैं, 18 नई जोड़ी गई हैं, साथ ही 22 धाराएं खत्म हो गई है। इसी तरह सीआरपीसी में में 533 धाराएं है, इनमें 160 धाराएं बदली गई हैं। नौ नई धाराएं जोड़कर नौ को खत्म कर दिया गया है। इसमें पूछताछ से ट्रायल तक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रावधान हो गया है।

सामने आई प्रतिक्रियाएं

नगर के वरिष्ठ नागरिक सतीश लटिया ने कहा कि सन् 1860 के ब्रिटिशकालीन कानून में बदलाव की महति आवश्यकता थी, जिसे दृष्टिगत रखते हुए केंद्र सरकार ने समय की मांग के आधार पर नवीन कानून लाया, जो बेहद प्रासंगिक हैं। आमजनता को नए नियमों व प्रावधानों से रूबरू कराने एवं जागरूक करने विधिक साक्षरता शिविर लगाया जाना चाहिए। अधिवक्ता ईश्वर लाल साहू ने कहा कि नवीन न्याय संहिता में केन्द्र शासन द्वारा सकारात्मक पक्ष पर अधिक फोकस किया गया है। विशेष तौर पर महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। इसमें सिर्फ धाराएं ही नहीं बदलीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ और जनता के लिए सार्थक बनाने का प्रयास किया गया है। पत्रकार वीरेंद्र यादव ने कहा कि पुराने कानूनों के स्थान पर नई न्याय संहिता लागू किया जाना स्वागतेय है। इससे पीड़ितों को अपेक्षाकृत अच्छा और जल्द न्याय मिलेगा। आमजनता को नए नियमों-कायदों के प्रति जागरूक करने में मीडिया की अहम भूमिका रहेगी और इस सार्थक कार्य में हमारा सदैव सहयोग रहेगा। व्यवसायी राजा देवनानी ने कहा कि दंड संहिता के स्थान पर न्याय संहिता की शब्दावली से ही स्पष्ट है कि दण्डित करने के स्थान पर पीड़ित को न्याय दिलाना अधिक आवश्यक है। पुराने प्रावधानों में तब्दीली से भारत की न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा।

पत्रकार टिंकेश्वर तिवारी ने कहा कि नए कानून नागरिक केंद्रित अभियुक्त केंद्रित और पीड़ित केन्द्रित हैं, जो कल्याणकारी न्याय व्यवस्था की अवधारणा है। इससे लोगों को त्वरित, तात्कालिक न्याय और निष्पक्ष न्याय मिलेगा, साथ ही आज के दौर में ये अधिनियम बेहद प्रासंगिक सिद्ध होंगे।

नए कानून के प्रति जागरूकता लाने में मीडिया प्रतिनिधियों की अहम भूमिका: आईजी

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  • मीडिया कर्मियों से रूबरू हुए आईजी सुंदरराज पी.
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही का नए कानून में है प्रावधान: एसपी शलभ सिन्हा

जगदलपुर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. एवं पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा द्वारा गुरुवार को लालबाग स्थित शौर्य भवन में मीडिया प्रतिनिधियों को नए कानून के संबंध में जागरूकता कार्यशाला के दौरान विस्तृत जानकारी दी गई।

इस मौके पर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि देश में 1 जुलाई से नया कानून प्रभावशील हो गया है। नवीन कानून के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने के लिए कम्युनिटी पुलिसिंग, विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों में कार्यशाला इत्यादि के माध्यम से प्रयास किया जा रहा है। साथ ही नए कानून के प्रति व्यापक जनजागरूकता निर्मित करने के लिए मीडिया की अहम भूमिका है। जो मीडिया विभिन्न प्लेटफार्मों से लोगों में नए कानून के संबंध में जागरूकता ला सकता है। इसे मद्देनजर रखते हुए शासन के निर्देशानुसार यह कार्यशाला आयोजित की गई है। कार्यशाला में आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि भारतीय मूल्यों पर आधारित ये नए कानून दंडात्मक से न्याय- उन्मुख दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत है, जो भारतीय न्याय व्यवस्था को प्रतिबिंबित करता है। इसका मुख्य लक्ष्य ऐसी आपराधिक न्याय प्रणाली बनाना है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने सहित कानूनी व्यवस्था को भी और अधिक मजबूत बनाती है। जिससे सभी के लिए सुलभ एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सके। इस दौरान पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बताया कि देश में पुराने कानून ब्रिटिश काल से चले आ रहे थे। जिसे प्रासंगिक बनाने एवं निर्धारित समय सीमा में प्रकरणों का समाधान करने के लिए बदलाव किया गया है। इस बदलाव से अपराधियों के खिलाफ एफआईआर करने में दिक्कत नहीं होगी तथा गंभीर अपराधियों के विरुद्ध प्रक्रिया का पालन करते हुए कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। प्रकरणों के निराकरण के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है। पीड़ित पक्ष को ध्यान में रखा गया है। पीड़ित पक्षकार को ई-साक्ष्य, जीरो एफआईआर और ई- एफआईआर से राहत मिलेगी। पीड़ित पक्ष को न्याय जल्दी मिलेगा। यह कानून सभी नागरिकों तक पहुंच सके, इसके लिए विभिन्न माध्यमों से लगातार जानकारी दी जा रही है।पुलिस अधीक्षक सिन्हा ने कहा कि ई- एफआईआर के लिए फोन, ई-मेल, व्हाट्सएप के माध्यम से अपराध घटित होने की सूचना दे सकते हैं। अब इसके लिए जवाबदेही तय हो जाएगी। प्रार्थी को निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित थाने में जाकर हस्ताक्षर कर एफआईआर दर्ज करानी होगी। थाना प्रभारी या विवेचक को जांच की जरूरत लगने पर एसडीओपी या सीएसपी की लिखित अनुमति के बाद जांच होगी। झूठी शिकायत से बचने के लिए तीन दिवस में पुलिस अधिकारी जांच करेंगे। गंभीर मामला होने पर एफआईआर दर्ज होगी तथा विधिवत प्रकरण की विवेचना की जाएगी। यह महत्वपूर्ण है कि डिजिटल फॉर्म में शिकायतों को लेने से विश्वसनीयता बढ़ेगी। प्रकरणों के निराकरण के लिए नए कानूनों में समयावधि निर्धारित की गई है, जिससे जवाबदेही के साथ मामलों का निराकरण हो सकेगा। उन्होंने बताया कि आईपीसी में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं। कई अपराधों के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 6 छोटे अपराध से जुड़े आरोपियों के सुधार के लिए सामाजिक सेवा का प्रावधान किया गया है। कई अपराधों में जुर्माना वृद्धि सहित सजा की अवधि बढ़ाई गई है। कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक दिलीप कोसले ने बताया कि 1 जुलाई से तीन मुख्य कानून भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू हो गए हैं। पूर्व कानून में बदलाव किया गया है तथा अलग-अलग धाराओं में सजा के लिए परिवर्तन किया गया है। कानूनों में एकरूपता लाने के लिए नया कानून लाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रकरणों के निराकरण के लिए नए कानूनों में समय का निर्धारण किया गया है। पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रावधान किए गए है। विशेषकर अपराधिक मामलों में तलाशी एवं जब्ती के दौरान फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाएगी। इन कानूनों के संबंध में नागरिकों को जानकारी होना चाहिए। नए कानून में आरोपियों के लिए नये प्रावधान किए गए हैं। सभी के लिए आवश्यक है कि स्वयं भी इन कानूनों को समझें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें तथा दूसरों को भी जागरूक करें। पुलिस समय पर विवेचना करें, इसके लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से कानून लागू होने के बाद कोई भी अपराध होने पर नए कानून के अंतर्गत घटना या अपराध पंजीबद्ध होगा। इसके अंतर्गत अपराधों के लिए न्याय व्यवस्था अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि निर्धारित समय में उनका निराकरण हो सके। सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। एफआईआर की प्रक्रिया, एफआईआर के निर्णय सभी डिजिटल फॉर्म में होंगे। सामाजिक-आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से अब नागरिक अलग-अलग स्थानों में भी रहते हैं,ऐसी स्थिति में दस्तावेज डिजिटल होने से फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि नये टेक्नॉलॉजी को अपनाने से कार्य सुगम होंगे तथा अपराधियों को समय पर दण्ड मिल सकेगा। बच्चों एवं महिलाओं के खिलाफ आरोप होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, इसे गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने नये कानून के धाराओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया। इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधि और पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

महिला बालविकास आगन बड़ी के कार्यकर्ताओं कों किया गया इब्राहिम द्वारा वृक्ष वितरण

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चिखलाकसा– एक पेड़ माँ के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी जी के अहवान पर चिखलाकसा आगन बड़ी में समस्त कार्यकर्ता को फलदार व छायादार वृक्षों को मुख्यअतिथि नगर पंचायत चिखलाकसा के उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैय्यद के हाथों से वितरण किया गया इब्राहिम ने कहा मेरा हर एक व्यक्ति से अपील है एक पेड़ माँ के नाम सभी कोई लगाये जिससे वातावरण दूषित होने से बचेंगा हमने कोरोना काल में आक्सीजन की कमी से कितनो की मृत्यु होते देखा है दोबारा ऐसा दिन न आए इसलिए पेड़ लगाये सारा जहां हरा भरा हो जाये जिसमे उजस्थित सेक्टर सुपर वाइजर सरोज सहारे कार्यकर्त्ता निशा मरकाम, अनीता, सविता विश्वास, माधुरी रथ, फूलबाशन, वीणा धनकर, मनीषा, अर्चना, तुलेशवरी आदि लोग सम्लित हुवे |

नगर निगम कार्यालय में कांग्रेस नेताओं ने की तालाबंदी, निगम प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन

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  • नेता प्रतिपक्ष मांगा कक्ष, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप 

जगदलपुर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी व समस्त कांग्रेस पार्षदों द्वारा नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष हेतु आरक्षित कक्ष की मांग, महापौर के कथित भ्रष्टाचार की जांच, जनहित के मुद्दों, शहर में हो रहे जलभराव को लेकर आज नगर निगम में तालाबंदी कर घेराव एवं विरोध प्रदर्शन किया गया।

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि जगदलपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष उदयनाथ जेम्स के लिए नगर निगम कार्यालय में अलग से कक्ष देने की मांग को लेकर नगर निगम आयुक्त व महापौर के विरुद्ध नगर निगम परिसर में समस्त कांग्रेस पार्षदों ने लगातार धरना प्रदर्शन किया। नगर निगम आयुक्त की मनमानी व बीजेपी में शामिल महापौर द्वारा लगातार कांग्रेसी पार्षदों के साथ भेदभाव का सिलसिला जारी है। वहीं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष को अलग से कक्ष देने हेतु निगम आयुक्त व महापौर का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। जबकि नेता प्रतिपक्ष चुनने के पश्चात अतिरिक्त कक्ष देना निगम की जवाबदेही बनती है। निगम आयुक्त व महापौर का भेदभाव साफ दर्शाता है कि इन्हें कांग्रेस के पार्षदों से कोई मतलब नहीं है। कुल मिलाकर भेदभाव की राजनीति की जा रही है। श्री मौर्य ने आगे कहा कि निगम में पिछले नौ साल से कांग्रेस सत्ता में थी। नेता प्रतिपक्ष भाजपा का था। नगर निगम भवन में नेता प्रतिपक्ष के लिए चिन्हित कक्ष को भी आवंटित किया गया था। भाजपा ने कांग्रेस पार्षद दल में तोड़फोड़ कर महापौर सहित आधा दर्जन पार्षदों को अपनी पार्टी में मिलाकर सत्ता हथिया ली।सत्ता हाथ में आते ही भाजपा तानाशाही पर उतर आई है। कांग्रेस पार्षद दल के नेता, नेता प्रतिपक्ष के लिए चिन्हित कक्ष आवंटित नहीं करके दूसरा कक्ष दिया गया है। यह गलत परंपरा की शुरूआत है। श्री मौर्य ने महापौर पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की सबसे भ्रष्ट महापौर सफिरा साहू है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महापौर निधि से किए गए करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार की फाइल खुलने के डर से सफीरा साहू ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं बीजेपी में एंट्री करने के बाद अब इस फाइल की जांच के लिए चुनाव से पहले हल्ला बोल रहे बीजेपी के नेताओं व पार्षदो ने भी अपना मुंह बंद कर लिया है। साथ ही कांग्रेस पार्टी महापौर की फाइल की जांच की मांग भी करती है आज इन्ही सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा यह विरोध प्रदर्शन किया गया है

निगम फेल्योर : रेखचंद जैन

वहीं पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने नगर निगम पर तंज कसते शहर में जलभराव को लेकर कहा कि शहर में एक घंटे की बारिश ने ही नगर निगम की बरसात से पूर्व की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। पिछले दो माह से नालों की सफाई नहीं हुई है। जिसके कारण ड्रेनेज सिस्टम फेल हो चुका हैं। लोगों के घरों और दुकानों में पानी भर रहा है। जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया कई व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ। पहली बारिश में ही शहर के कई इलाकों में पानी भर रहा है। बाजारों में और दुकानों तक में पानी पहुंच रहा है। इधर, शहर के नालों की सफाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। लेकिन निगम प्रशासन व सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।कुल मिलाकर जनहित के मुद्दों पर निगम प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। नेता प्रतिपक्ष उदयनाथ जेम्स ने कहा कि कई बार इसको लेकर मेयर से बातचीत भी की गई। इसके बावजूद वह अपनी मनमानी कर रही हैं। खुद बीजेपी के पार्षदों ने मेयर फंड में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और उनकी फाइल की जांच की मांग नगर निगम के आयुक्त से की थी। उसके बाद इस मामले में सभी ने चुप्पी साध ली और अब यह फाइल कहां है? इसकी किसी को भी जानकारी नहीं है। पोल खुलने के डर से सफीरा साहू बीजेपी में शामिल हो गईं ताकि भ्रष्टाचार की फाइल हमेशा के लिए बंद हो जाए।महापौर निधि जनता का पैसा है, यह फ़ाइल जरूर खुलनी चाहिए और उनकी भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आनी चाहिए। इसके अलावा महापौर सफिरा साहू के साथ वरिष्ठ नेता यशवर्धन राव और अन्य 4 पार्षदों के कांग्रेस पार्टी छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. मेयर समेत इन पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से खुद भाजपाई इसका विरोध कर रहे हैं। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी अंगद प्रसाद त्रिपाठी, हनुमान द्विवेदी, समस्त कॉंग्रेस पार्षदगण,युवा कांग्रेस, एनएसयूआई अध्यक्ष व कार्यकर्ता, सेवादल, महिला कांग्रेस पदाधिकारी सहित विभिन्न प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, सोशल मीडिया के प्रशिक्षित प्रभारी आदि मौजूद रहे।

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