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फिर रोका ठेकेदारों का भुगतान; प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया ईएनसी ने

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  •  नक्सल क्षेत्रों के विकास की राह में रोड़ा बने पीडब्ल्यूडी के ईएनसी 
  • बस्तर को फिर गर्त में ले जाने का काम कर रहे हैं इंजीनियर इन चीफ 

जगदलपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रूरल रोड प्रोजेक्ट-2 (आर आर पी-2) लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी)की हठधार्मिता की भेंट चढ़ गई है। इस प्रोजेक्ट को जमीन पर साकार करने वाले ठेकेदारों को परेशान करने और उन्हें आर्थिक तंगी में उलझाए रखने की जिद ईएनसी ने पाल रखी है। उन्होंने इसे अपनी निजी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। उनके इस हठ के चलते बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित संभाग में प्रोजेक्ट के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। बस्तर संभाग में प्रोजेक्ट को साकार करने में लगे ठेकेदारों को विशेष तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस कदम से विकास की ओर अग्रसर बस्तर फिर गर्त में जाता दिख रहा है।

 

पहले हम अपने पाठकों को आरआरपी-2 के बारे में बताते हैं। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प ले रखा है। इस संकल्प की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और बस्तर के आदिवासी पुत्र एवं वन मंत्री केदार कश्यप जी जान से जुटे हुए हैं। दरअसल विकास के जरिए नक्सलवाद के विनाश के ध्येय से केंद्र और राज्य की सरकारें काम कर रही हैं। आरआरपी-2 भी इसी ध्येय का एक बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों के गांवों तक पक्की सड़कें और पुल पुलिया बनाने का प्रावधान है। सड़कों का जाल बिछने से जहां अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ जाएगी, वही विकास और जन सुविधाओं का विस्तार भी सुगमता पूर्वक होगा। मगर लोक निर्माण विभाग के ईएनसी श्री भतपहरी को शायद नक्सल प्रभावित इलाकों का विकास नागवार गुजर रहा है। यही वजह है कि वे बार बार ठेकेदारों का भुगतान रोक कर बस्तर के विकास की राह में रोड़े अटकाते आ रहे हैं। बस्तर संभाग में कार्यरत ठेकेदारों को भुगतान देने में विभाग द्वारा वर्तमान में फिर आनाकानी की जा रही है। ठेकेदार को परेशान करने की योजना में शामिल ईएनसी श्री भतपहरी और उनके कांकेर ओर जगदलपुर के प्रभारी अधीक्षण यंत्री श्री सूर्यवंशी की भूमिका को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बस्तर के अधिक्षण यंत्री श्री टेकाम को जानबूझ कर यहां से हटा दिया गया है ताकि सड़क निर्माण में अपना तन मन धन लगाने वाले ठेकेदारों को परेशान किया जा सके। केंद्र सरकार की आरआरपी-2 योजना की छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन एजेंसी लोक निर्माण विभाग है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाके को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, मगर इस कड़ी में ईएनसी श्री भतपहरी बड़ी गांठ साबित हो रहे हैं।

 

सुशासन को बदनाम करने की साजिश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार को ऐसे प्रशासनिक अधिकारी जानबूझ कर बदनाम करने में जुटे हुए हैं। भुगतान में विलंब से कार्य ठप पड़ जाते हैं, इससे केंद्र सरकार की नजरों में राज्य सरकार की साख गिर जाती है। सूत्र बताते हैं कि साय सरकार को बदनाम करने की नीयत से ईएनसी ने फिर ठेकेदारों के कई करोड़ का भुगतान अटका दिया है। भुगतान में विलंब के पीछे कभी सॉफ्टवेयर में दिक्कत तो कभी तकनीकी परेशानी बहाना बना कर दर्जनों ठेकेदारों को कई करोड़ रुपए के भुगतान से वंचित रखा जा रहा है। बताते हैं कि पूर्व में भी इसी प्रकार का रवैया ईएनसी श्री भतप्रहरी द्वारा अपनाया गया था। तब कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था।

ईगो पाले बैठे हैं साहब

मीडिया में मामला उजागर होने के बाद ही चुनिंदा ठेकेदारों को भुगतान किया गया था। मीडिया के इसी दबाव को अब श्री भतपहरी ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इसी कुंठा के चलते अब उन्होंने दूसरे ढंग से ठेकेदारों को परेशान करना शुरू किया है। ईएनसी के कुछ विश्वस्त अधिकारी ही आरआरपी-2 योजना योजना को लीड करते हैं। एसएनएस स्पर्श पोर्टल के माध्यम से भुगतान होता है। इस पोर्टल में कई माह से खराबी बताकर भुगतान लंबित रखा गया है। सूत्र तो यह भी दावा करते है कि ईएनसी भतप्रहरी द्वारा इस बार दावा किया गया है कि देखते हैं, बिना मेरी मर्जी के कैसे भुगतान होता है? यानि उन्होंने ईगो पाल लिया है। ठेकेदार भले चाहे आर्थिक तंगी से जूझते रहें, आरआरपी-2 प्रोजेक्ट का भले ही भट्ठा बैठ जाए, मगर साहब का ईगो हर्ट नहीं होना चाहिए।  भतपहरी द्वारा अपनाए जा रहे इस रवैये से सुशासन सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

प्रमुख सचिव बनाम SEIAA चेयरमैन :साख बचाने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे IAS कोठारी, पर्सनल कैपेसिटी में दाखिल की अर्जी , खनन माफिया कनेक्शन या अफसरशाही की नाकामी

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राजेश भाटिया

नई दिल्ली मध्यप्रदेश में पर्यावरण स्वीकृतियों का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर है। Writ Petition (Civil) No. 689/2025 के तहत दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप है कि 237 पर्यावरणीय मंजूरियाँ गैरकानूनी तरीके से जारी की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “इतनी बड़ी संख्या में स्वीकृतियां यदि नियमों के विपरीत दी गई हैं तो यह गंभीर मामला है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।”

क्या है मामला

 

यह याचिका वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार दास ने दाखिल की थी, जिसमें मांग की गई कि सभी 237 मंजूरियों को अवैध घोषित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। आरोप यह भी है कि पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया को दरकिनार कर खनन माफिया और उद्योग समूहों को फायदा पहुँचाया गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से जवाब मांग चुका है। याचिका में कहा गया कि SEIAA (State Environment Impact Assessment Authority) की बैठकें महीनों तक टाल दी गईं और तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट्स दबा दी गईं।

टकराव की पृष्ठभूमि

सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद मुख्य रूप से SEIAA चेयरमैन एस.एन.एस. चौहान और राज्य के पर्यावरण विभाग के शीर्ष अफसरों (प्रमुख सचिव और सदस्य सचिव) के बीच खिंचाव से पैदा हुआ। चेयरमैन चौहान का दावा है कि उन्होंने अवैध मंजूरियों का विरोध किया और 50 से ज्यादा बार सरकार व मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर SEIAA को पंगु बना दिया और खनन माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए फाइलें आगे बढ़ा दीं।

अपनी साख बचाने सुप्रीम कोर्ट पहुँचे पूर्व प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव (पर्यावरण) डॉ. नवीन कोठारी, आईएएस ने अपनी साख बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में Intervention Application दाखिल की है। डॉ. कोठारी ने कहा कि याचिका में उनके कार्यकाल पर लगे आरोप निराधार हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा कानून और EIA Notification, 2006 के तहत ही काम किया और SEIAA की आंतरिक खींचतान के कारण स्वीकृतियों में गड़बड़ी हुई। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी विष्णु शर्मा, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने पेश की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

अदालत ने अब तक की सुनवाई में कहा है कि ” यदि इतने बड़े पैमाने पर स्वीकृतियां नियमों को दरकिनार कर दी गईं, तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संस्थागत विफलता है। जिम्मेदार अफसरों को व्यक्तिगत तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

यक्ष प्रश्न यह है कि क्या कोई प्रमुख सचिव नियमानुसार अनुमति दे सकता है ? और दे सकता है तो फिर सिया जैसी संस्था की प्रासंगिता क्या ?

EIA Notification 2006 (पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना) और Environment Protection Act, 1986 स अधिसूचना के अनुसार – किसी भी नए प्रोजेक्ट, गतिविधि, विस्तार या आधुनिकीकरण को शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्व पर्यावरणीय अनुमति (Prior Environmental Clearance-EC) लेना आवश्यक है। यह अनुमति या तो केंद्र सरकार (Category A प्रोजेक्ट्स के लिए) या SEIAA (State Environment Impact Assessment Authority) ( Category B प्रोजेक्ट्स के लिए) द्वारा दी जाती है।

प्रमुख सचिव (Principal Secretary) या कोई अन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अपने स्तर पर इस अनुमति को न तो प्रदान कर सकते हैं और न ही इसे दरकिनार कर सकते हैं।

प्रक्रिया स्पष्ट है: Screening → Scoping → Public Consultation → Appraisal → Clearance. यदि इसे तोड़ा जाए तो यह EIA Notification 2006 और Environment Protection Act 1986 का सीधा उल्लंघन होगा। इसीलिए प्रमुख सचिव द्वारा स्वयं अनुमति देना कानून के दायरे में संभव नहीं है।

यह केवल नियामक प्राधिकरण (MoEFCC / SEIAA) ही कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या?

मामला अब सोमवार को दोबारा सूचीबद्ध है। सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सुप्रीम कोर्ट अगला कदम क्या उठाएगा। क्या कोर्ट सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश देगा ? या फिर यह मामला स्वतंत्र एजेंसी को जांच के लिए सौंपा जाएगा? यह सुनवाई सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर मिसाल कायम कर सकती है। *देखना दिलचस्प होगा अनुमतियों को वैध माना जाता है या उल्लंघन ?*

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: बालोद जिले में विभिन्न गतिविधियों का हो रहा निरंतर आयोजन

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  • स्कूलों में खेल प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में शामिल हुए विद्यार्थी

बालोद, 30 अगस्त 2025छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 के अवसर पर जिला प्रशासन बालोद द्वारा विभिन्न गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। आज जिले के विभिन्न स्कूलों में खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। डिप्टी कलेक्टर श्रीमी प्राची ठाकुर ने बताया कि फिट इंडिया मिशन के तहत आज स्वामी आत्मानंद विद्यालय झलमला में विभिन्न खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जिसमें खो-खो, शतरंज, रस्सी कुद, गोला फेंक, मार्शल आर्ट आदि शामिल है।

नगर पंचायत पलारी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गिरीश कुमार साहू ने बताया कि रजत महोत्सव अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पलारी में विभिन्न खेल कार्यक्रम सहित स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ शासन के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर नगर पंचायत गुंडरदेही के सौजन्य से आत्मानंद स्कूल में आज छात्र छात्राओं द्वारा विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया।”

 

नक्सलियों को पसंद नहीं है बस्तर के बच्चों का राष्ट्रप्रेम पढना लिखना

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  •  नक्सलियों का राष्ट्रविरोधी और शिक्षा विरोधी चेहरा हो गया है अब बेनकाब
  • सहन नहीं करते शिक्षा और तिरंगे का सम्मान

अर्जुन झा

जगदलपुर नक्सली जो कारगुजारियां दिखा रहे हैं, उससे साबित हो गया है कि वे आदिवासी हितैषी होने का सिर्फ ढोंग करते हैं। जल जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर बस्तर के आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सली दरअसल नहीं चाहते कि बस्तर के बच्चे पढ़ लिखकर देश की सेवा में योगदान दें, देशभक्त बन जाएं। उन्हें तो राष्ट्र ध्वज तिरंगे से भी नफरत है। नक्सलियों की यही सोच बस्तर में नक्सलवाद के अंत का एक बड़ा कारण बन रही है।

बस्तर संभाग में एक के बाद एक कुल 9 शिक्षादूतों की हत्या और नक्सली स्मारक पर स्वतंत्रता दिवस के दौरान तिरंगा फहराने का शानदार साहस दिखाने वाले युवक की हत्या इन तथ्यों को पुख्ता करते हैं। नक्सली पहले शाला भवनों सरकारी बिल्डिंगों में आगजनी, सड़कों, पुल पुलियों को बम से उड़ाने का काम किया करते थे। यह घटनाएं उनकी शिक्षा और विकास विरोधी सोच को दर्शाती रही हैं। नक्सलगढ़ के गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और फोर्स की पहुंच बढ़ जाने के बाद इस तरह की घटनाएं थम गईं हैं। मगर अब अपनी शिक्षा विरोधी सोच को आगे बढ़ाते हुए नक्सलियों ने अपना पैतरा बदल लिया है। अब वे बस्तर के बच्चों को सुपोषित बनाने, उनके बीच ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षदूतों को खत्म कर बस्तर संभाग के बच्चों को कुपोषित और अशिक्षित बनाए रखने का अभियान चला रहे हैं। अपने इस मिशन के तहत नक्सली बस्तर संभाग में नौ शिक्षादूतों और दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार चुके हैं। सुकमा जिले में चार शिक्षादूतों और बीजापुर

जिलों में पांच शिक्षादूतों के साथ ही दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हत्या नक्सली कर चुके हैं। नक्सलियों का राष्ट्र विरोधी चेहरा तब सामने आया, जब उन्होंने सुकमा जिले के सिलगेर में नक्सली स्मारक पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की खुशी में तिरंगा फहराने वाले एक आदिवासी युवक की जान नक्सलियों ने ले ली थी। ये घटनाएं नक्सलियों के चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर करती हैं। बता दें कि शिक्षादूत की भूमिका वे युवक निभाते हैं, जो पढ़े लिखे होते हैं और गांवों के बच्चों को शिक्षित बनाने का जिनमें जुनून होता है। उन्हें एवज में महज दस हजार रुपए का मानदेय मिलता है। ये युवा उन स्कूलों को पुनः खोलकर शिक्षा की रौशनी बिखेरते हैं, जिन्हें नक्सलियों ने ही बंद करा दिया था।

फिर एक शिक्षा दूत की हत्या

नक्सलियों बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में फिर एक शिक्षा दूत की हत्या कर दी है। जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तोड़का गांव में नक्सलियों ने 25 वर्षीय शिक्षादूत कल्लू ताती पिता मंगल ताती निवासी तोड़का की बेरहमी से हत्या कर दी। कल्लू ताती गंगालूर क्षेत्र के नेंड्रा स्कूल में बच्चों को पढ़ाता था। जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम स्कूल से लौटते समय नक्सलियों ने कल्लू ताती का अपहरण कर लिया था और देर रात उन्हें मौत के घाट उतार दिया। घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस घटना की जांच में जुट गई है। बस्तर संभाग के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे हैं। ऐसे में शासन ने स्थानीय युवाओं को शिक्षादूत के रूप में नियुक्त कर स्कूलों को पुनः संचालित करने का प्रयास किया है। उनकी वजह से कई गांवों में शिक्षा की लौ फिर से जल उठी है और बच्चे स्कूल लौटने लगे हैं। बंद पड़े स्कूलों के पुनः संचालन के बाद से अब तक नक्सली बीजापुर जिले में कुल शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं।

बड़े घर परिवार में बड़ी धूमधाम से मनाया गया प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार नवा खानी

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बस्तर बस्तर जिले के मधोता खैरगुड़ा के बड़े घर परिवार में नवा खानी पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व बस्तर वासियों का प्रमुख पारंपरिक लोक त्योहार है, जो नए धान की फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।

इस पर्व के दौरान, धाकड़ समुदाय के लोग अपने खेतों में नए धान की बालियों को तोड़ते हैं और फिर पूजा अर्चना कर उन्हें अपने इष्ट देवताओं को अर्पित करते हैं। इसके बाद, वे नए धान को कुटकर मिश्रण तैयार कर पूरे परिवार के सदस्यों को टीका लगा कर नवा खानी पर्व मनाते हैं चावल से बने खीर पुड़ी दाल बड़ा और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग देवताओं को लगाते हैं और फिर परिवार के साथ मिलकर प्रसाद के रूप में भोजन करते हैं। परिवार के सदस्य एक दूसरे को प्रणाम (जुहार भेंट) कर आशीर्वाद लेते हैं।

नवाखाई पर्व का महत्व बस्तर वासियों के लिए बहुत अधिक है, क्योंकि यह उनके इष्ट देवी देवताओं को सम्मानित करने और नए अनाज की फसल का जश्न मनाने का अवसर है। यह पर्व धाकड़ समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इष्ट देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

सड़क दुर्घटना में पिता- पुत्री की दर्दनाक मौत

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बालोद :- डौंडीलोहारा सड़क दुर्घटना में  कोंडे निवासी सुरेंद्र कुमार नेताम  अपनी बेटी के साथ मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी -24 N-3640 अझोली स्कूल के पास ही ट्रक और मोटरसाइकिल  की भिडंत से मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए ।एवं मोटरसाइकिल चालाक सुरेन्द्र कुमार नेताम दुर्घटना स्थल में ही मौके पर ही मौत हो गई  तथा गंभीर रूप से घायल अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां उसके बेटी  को भी मृत घोषित कर दिया गया ।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक सुरेंद्र कुमार नेताम धोबेदण्ड पंचायत के ग्राम कोंडे का रहने वाला था। जिसका ससुराल डौंडीलोहारा के आसपास बताया है घटना के पश्चात् पुलिस मौके पर पहुंचकर परिजन को सूचित कर पतासाजिश कर सूचना देने का प्रयास किया जा रहा हैl

 

राष्ट्रीय राजमार्ग NH-63 बना मुसीबत का रास्ता

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  • छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग बदहाल, यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी

बीजापुर 29 अगस्त।छत्तीसगढ़ के बस्तर से तेलंगाना के निजामाबाद तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-63 इन दिनों भारी बदहाली का शिकार है। लगभग 550 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में छत्तीसगढ़ का हिस्सा 220 किलोमीटर, महाराष्ट्र का 60 किलोमीटर और तेलंगाना का 270 किलोमीटर है। इनमें महाराष्ट्र के 60 किलोमीटर हिस्से की हालत सबसे ज्यादा खराब है — खासकर लगभग 30 किलोमीटर का stretch तो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

यात्री और वाहन चालक बेहाल

इस बदहाल सड़क के कारण पिछले 2-3 वर्षों से बसें, मालवाहक गाड़ियाँ और यात्री बुरी तरह से परेशान हैं। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर गहरे गड्ढे पड़ चुके हैं, जिनमें भारी वाहन फंस जाते हैं। इन फंसी हुई गाड़ियों को निकालने के लिए जेसीबी, क्रेन और ट्रैक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। कई बार एक ही वाहन एक से अधिक जगहों पर फंस जाता है, जिससे यात्रियों की स्थिति बेहद दयनीय हो जाती है।

जंगलों से घिरा मार्ग, सुरक्षा भी बनी चुनौती

इस मार्ग में अधिकांश हिस्सा जंगलों से घिरा हुआ है और गांव बहुत कम हैं, जिससे यात्रियों को न सिर्फ सड़क की खराबी बल्कि सुरक्षा की भी चिंता सताती है। मोबाइल नेटवर्क की कमी और सहायता की अनुपलब्धता इस मार्ग को और अधिक खतरनाक बना देती है।

प्रशासन की उदासीनता पर सवाल

जहां छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की ओर सड़क की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, वहीं महाराष्ट्र के हिस्से की सड़क की स्थिति को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन की गंभीर उदासीनता सामने आ रही है। 2019-20 में निर्मित यह सड़क मात्र 5-6 साल में ही इतनी खराब हो चुकी है कि कुछ बस ऑपरेटरों ने इस मार्ग पर सेवाएं बंद कर दी हैं। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

जनहित में माँग: जल्द हो मरम्मत

जनता की ओर से यह मांग बार-बार उठ रही है कि महाराष्ट्र शासन तत्काल इस दिशा में ठोस कदम उठाए और इस मार्ग की मरम्मत कराए। यह सिर्फ तीन राज्यों को जोड़ने वाला एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवन रेखा है — जिसमें व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन की अनेक जरूरतें जुड़ी हुई हैं।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि इस विषय को प्रशासन तक पहुँचाया जाए ताकि जल्द से जल्द कार्रवाई हो सके। यह समाचार जनहित में प्रकाशित किया गया है।

जिला अस्पताल बालोद में चार पीजी डॉक्टरों की नियुक्ति, स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार

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बालोद, जिला अस्पताल बालोद में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई थी, जिससे आमजन को इलाज के लिए अन्य जिलों में भटकना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को देखते हुए भाजपा नेताओ व जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं चेयरमेन इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी रायपुर श्री द्वारा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री माननीय श्याम बिहारी जायसवाल को मांग पत्र सौंपा गया था।

मांग पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल बालोद हेतु चार पीजी डॉक्टरों की बॉन्ड पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। नियुक्त किए गए डॉक्टर इस प्रकार हैं –

1. डॉ. मधु (MS Ophthalmologist)

2. डॉ. अविनाश कुमार मंडावी (MD Anesthesia)

3. डॉ. निरंजन बेहेरा (MS ENT)

4. डॉ. शरथ बाबू वी.एस. (MD General Medicine)

इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से जिला अस्पताल बालोद में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और मरीजों को अब धमतरी, दुर्ग या रायपुर रेफर होने की आवश्यकता कम पड़ेगी।

तोमन साहू ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरकार का यह कदम जिले की बड़ी आबादी के लिए राहतकारी सिद्ध होगा। साथ ही उन्होंने अपेक्षा जताई कि शेष रिक्त विशेषज्ञ पद भी शीघ्र भरे जाएंगे।

क्षेत्रीय जनता में खुशी की लहर – स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा सरकार पर विश्वास बढ़ा

जिला अस्पताल बालोद में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की खबर मिलते ही जिले की जनता में हर्ष और संतोष का वातावरण है। लंबे समय से अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ता था, किंतु अब एनेस्थीसिया, ईएनटी, नेत्र रोग और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।

जनता ने इस पहल के लिए जहाँ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री माननीय श्याम बिहारी जायसवाल को धन्यवाद दिया है, वहीं भाजपा नेताओ मे प्रदेश महामंत्री भाजपा यशवंत जैन जिलाध्यक्ष भाजपा चेमन देशमुख जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू के प्रयासों की भी सराहना की है। लोगों का कहना है कि उनके द्वारा समय-समय पर उठाई गई मांगें अब धरातल पर साकार हो रही हैं।

क्षेत्रीय लोगों का विश्वास स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा सरकार दोनों के प्रति और प्रगाढ़ हुआ है। आमजन का मानना है कि इस निर्णय से न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होंगी बल्कि ग्रामीण और गरीब तबके की जानें भी सुरक्षित होंगी।

 

अज्ञात पुरुष की संदिग्ध मौत,झाड़ियों में मिला सड़ी गली शव

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बालोद:- जिले के गुरुर थाना क्षेत्र से आज सुबह नारागांव के पास के झाड़ियों में एक अज्ञात पुरुष की सड़ी – गली मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई । यह घटना नारागांव के पास झाड़ियों का हैं जहां हेमू ठाकुर उम्र 60 वर्ष जो पिपरछेड़ी का रहने वाला था । प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक 19 अगस्त को घर से बिन बताए लापता हुआ था। ग्रामीणों ने सूचना देने पर गुरुर पुलिस और दुर्ग से फोरेंसिक टीम जांच के लिए पहुंची जांच के दौरान शव 3-4 दिन का पुराना बताया जा रहा है । अब जांच के बाद ही मौत का असली वजह स्पष्ट नहीं हुआ हैं मामले में हत्या के सभी पहलुओं पर जांच जारी है ।

हमें जीवन मूल्य भी सिखाते हैं खेल: मेयर संजय पाण्डे

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  • राष्ट्रीय खेल दिवस पर मैराथन दौड़ का आयोजन

जगदलपुर नगर के धरमपुरा पीजी कॉलेज मैदान से निकली मैराथन दौड़ केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय खेल दिवस पर युवाओं के जोश और भारत की खेल परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक भी बन गई। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर आयोजित इस दौड़ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन है।

कार्यक्रम की शुरुआत मेजर ध्यानचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी स्मृति को नमन करने से हुई। इसके बाद हरी झंडी दिखाकर दौड़ का शुभारंभ किया गया। खेल भावना से सराबोर इस आयोजन में युवा धावकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। महापौर संजय पाण्डे, नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पाणिग्रही, लक्ष्मण झा, संग्राम सिंह राणा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, नगर निगम आयुक्त प्रवीण कुमार वर्मा, एसडीएम ऋषिकेश तिवारी, जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल, पार्षद पूनम सिन्हा, अतुल शुक्ला, कोटेश्वर नायडू सहित शिक्षा और खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। यह व्यापक भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि खेल समाज को एकजुट करने की क्षमता रखते हैं। महापौर संजय पांडे ने कहा कि खेल न केवल शरीर को मजबूत बनाते हैं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और टीम भावना जैसे जीवन मूल्य भी सिखाते हैं। यही कारण है कि मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी की जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाना भारतीय खेल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यह दौड़ केवल एक प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि यह युवाओं को यह याद दिलाने का प्रयास था कि यदि हम स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र चाहते हैं तो खेलों को शिक्षा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

मेजर ध्यानचंद ने अपने अद्भुत खेल कौशल से भारत को हॉकी में विश्वशक्ति बनाया। उनकी प्रतिभा, समर्पण और अनुशासन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसे आयोजनों से उनकी विरासत जीवित रहती है और नई पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि कठिन परिश्रम और निष्ठा से ही सफलता की राह तैयार होती है।

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