गड़े धन के लिए बच्चे की बलि देने की तैयारी?

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कोहकापाल में 12 वर्षीय बच्चे को तांत्रिक क्रियाओं में शामिल करने का आरोप

गड़े धन का हंडा पाने के लिए नरबलि की तैयारी का दावा

ग्रामीणों ने एसपी से लगाई जांच की गुहार

बकावंड बस्तर जिले की बकावंड तहसील अंतर्गत ग्राम कोहकापाल में 12 वर्षीय बच्चे को कथित तांत्रिक क्रियाओं में शामिल किए जाने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बाहर जंगल में जमीन के अंदर दबे कथित धन, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘हंडा’ कहा जाता है, को निकालने के लिए तांत्रिक गतिविधियां की जा रही थीं और इसी दौरान बच्चे को निशाना बनाया गया और उसकी बलि देने की तैयारी की गई थी।

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे की आंखों पर करीब तीन दिनों तक पट्टी बांधकर उसे अलग-अलग तांत्रिक क्रियाओं में शामिल किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि कथित रूप से गड़े धन को हासिल करने के लिए बच्चे की बलि देने की तैयारी की जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण कथित तांत्रिक और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नगरनार थाना पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि थाना स्तर पर उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन को फाड़ दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस स्तर से स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। मामले को लेकर बच्चे के परिजनों सहित ग्रामीण जगदलपुर पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कथित तांत्रिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसी अन्य बच्चे को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

कटघरे में पुलिस

सुशासन सरकार में प्रशासनिक लचरता के कारण अब जादू टोना, तांत्रिक क्रियाओं से पुराने गड़े धन को किस विधि से निकाली जाए जैसी हरकत सामने आ रही है। नर बलि देने की कुत्सित मानसिकता और नगरनार पुलिस की कार्यप्रणाली ने इस मामले में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों को दंड देने के बजाय संरक्षण देने पर आमदा है। बकावंड ब्लॉक की घटना को नगरनार पुलिस सुलझाने के बजाय बहुत ही हल्के में लेकर अपनी लचर कार्यप्रणाली का नमूना पेश किया है। जिस पुलिस कर्मी ने ग्रामीणों का आवेदन फाड़ कर फेंक दिया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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