बस्तर संभाग के खरीदी केंद्रों से 87 करोड़ का धान गायब!

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खरीदी केंद्र प्रभारियों से शॉर्टेज की भरपाई

लापरवाही डीएमओ की, सजा प्रबंधकों को

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के जिला विपणन संघ अधिकारियों की लापरवाही की खामियाजा धान खरीदी प्रभारी एवं प्रबंधकों को भुगतना पड़ रहा है। धान उठाव की जिम्मेदारी डीएमओ की होती है। नियमानुसार शॉर्टेज की रिकवरी की भरपाई डीएमओ से करने के बजाय प्रबंधकों को कर्जदार बना दिया गया है। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के भौतिक सत्यापन के बाद बस्तर संभाग के 5 जिलों के 300 से अधिक खरीदी केंद्रों में 87 करोड़ से अधिक के धान की कमी पाई गई है। इस कमी को भरपाई समिति प्रबंधकों से करने की तैयारी कर ली गई है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से समितियों को नोटिस जारी कर शॉर्टेज की राशि तीन माह के अंदर जमा कराने कहा गया है। अन्यथा 3 माह समिति प्रबंधक और खरीदी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जाने की चेतावनी दी गई है। समिति प्रबंधकों में इस आदेश को लेकर नाराजगी और डर का माहौल है। उनका कहना कि निर्धारित समय सीमा में मार्कफेड के द्वारा उठाव नहीं किए जाने का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।ज्ञातव्य हो कि बस्तर संभाग के 7 जिलों में 382 खरीदी केंद्रों पर धान विक्रय करने के लिए 2 लाख 72 हजार 647 किसानों ने पंजीयन कराया था। जिनमें से 2 लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया था। संभाग भर में 13 लाख 74 हजार 383 मिट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। जिसमें से 13 लाख 46 हजार 138 मिट्रिक टन धान का उठाव किया गया। भौतिक सत्यापन में 28 हजार 244 मिट्रिक टन धान की शॉर्टेज या परिवहन केंद्रों में कम जमा कराना पाया गया है। इस धान की कीमत 87 करोड़ रुपए से अधिक है। इस शॉर्टेज की राशि समिति प्रबंधकों से भरपाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

कांकेर जिले में सबसे ज्यादा शॉर्टेज

नारायणपुर एवं दंतेवाड़ा जिले को छोड़ दें तो अन्य सभी पांच जिलों में धान की भारी शॉर्टेज पाई गई है। सर्वाधिक शॉर्टेज कांकेर जिले में है। इस मामले में कोंडागांव दूसरे नंबर पर और बस्तर जिला तीसरे नंबर पर है। सुकमा और बीजापुर जिले भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। जानकारी के अनुसार 3100 रूपये प्रति क्विंटल के दर से शॉर्टेज की भरपाई कराई जाएगी।समितियों को धान खरीदी पर 31.25 रूपये प्रति क्विंटल के दर से कमीशन दिया जाता है। कमीशन राशि को शॉर्टेज की भरपाई में एडजस्ट किया जाएगा।

करे कोई, भरे कोई!

संभाग के के कई समिति प्रबंधकों एवं खरीदी प्रभारियों ने नाम नहीं की छापने के शर्त पर बताया कि शॉर्टेज को लेकर कई वर्षों से सरकार से मांग की जाती रहा है, लेकिन सरकार ने मांग पूरी करने के बजाय हमारे खिलाफ ही कार्रवाई शुरू कर दी है। समिति के सदस्यों ने बताया कि उठाव में विलंब के कारण धान शॉर्टेज की समस्या आई है। इसका खामियाजा समिति प्रबंधक एवं प्रभारियों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि शॉर्टेज की वसूली मार्कफेड की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार संग्रहण केन्द्रों एवं मिलर्स को शॉर्टेज में छूट दी जाती है उसी तरह समितियों को भी छूट मिलनी चाहिए। वेयर हाऊस में चावल पर शॉर्टेज में सूखत का प्रावधान है तो धान खरीदी पर क्यों नहीं? सरकार की दोहरी नीति से समिति प्रबंधक खफा हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से मिली जानकारी के अनुसार समितियों से धान के उठाव में अंतर पाया गया है। अंतर की राशि का वसूली समिति प्रबंधकों से करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, इसके लिए 3 माह की मोहलत दी गई है। राशि जमा नहीं कराने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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