आजाद भारत में लोकतंत्र एवं संविधान की हत्या का काला अध्याय इमरजेंसी: अनिल खोबरागड़े

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  •  लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान स्वागत योग्य 

दल्लीराजहरा 50 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल को अलोकतांत्रिक एवं तानाशाही पूर्ण निर्णय बताते हुए भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी अनिल खोबरागड़े ने कहा है कि आजाद भारत में लोकतंत्र एवं संविधान की हत्या का यह काला अध्याय है। इसलिए प्रतिवर्ष 25 जून को इसे काला दिवस के रूप में याद किया जाता है।

अनिल खोब्रगड़े ने कहा है कि देश में 1974 -75 में कांग्रेस सरकार की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तानाशाही, भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के खिलाफ देश के लोगों में असंतोष एवं आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया था। जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए देश के गैर कांग्रेसी दलों, स्वयंसेवकों एवं छात्र युवाओं ने कांग्रेस के खिलाफ धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन प्रारंभ कर दिया जिससे देश में अस्थिरता फैल गई थी। इन घटनाओं से विचलित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाकर स्वयंसेवकों एवं गैर कांग्रेसी नेताओं में लोकनायक जयप्रकाश नारायण , मोरारजी भाई देसाई ,अटल बिहारी वाजपेई ,जॉर्ज फर्नांडीज, अरुण जेटली, नीतीश कुमार, शरद यादव जैसे हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया था। साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी लगाते हुए मीडिया को प्रतिबंधित कर अखबार के दफ्तर में ताले लगा दिए गए थे। छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी लोकतंत्र समर्थकों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई थी। देश में ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को मीसाबंदी के रूप में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा अपने कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में सत्यापित सूची के अनुसार ऐसे लगभग 320 लोकतंत्र सेनानी मीसा बंदियों को पेंशन देकर सम्मानित किया गया था। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार में मीसा बंदीयों की पेंशन बंद कर दी गई। आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर लोकतंत्र बचाओ प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य अनिल खोबरागड़े ने छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री द्वारा लोकतंत्र सेनानी परिवारों को 10 हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक की सम्मान निधि दी जा रही है, जो कि स्वागत योग्य है।