- शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज ने मुख्य शोधकर्ता के प्रयास पर लगाई मुहर
- विज्ञान एवं पौद्योगिक परिषद रायपुर को भेजा पत्र
- छ.ग. विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद ने पेटेंट फाईलिंग के लिए नई दिल्ली में सम्बधित विभाग निर्देशक को लिखा पत्र
- वनमित्रा के उपयोग से लकड़ी और गैस की होगी बचत
नवीन गुप्ता
जगदलपुर। पर्यावरण को संरक्षित करने एवं जंगलों की हो रही कटाई से बचाने के लिए शहर के एक 73 वर्षीय मुख्य शोधकर्ता धींगरमल खत्री अपने अथक प्रयास एवं शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के सहयोग से वनमित्र नामक चुल्हा का आविष्कार किया है। जिसका उपयोग धान के भूसा द्वार संचालित होगा जिसमें लकड़ी की आवश्यकता नाम मात्र होगी। 20 रूपये के खर्च में वनमित्रा चुल्हा से निकलने वाला ईंधन से 50 व्यक्तियों का भोजन तैयार करने की क्षमता है। जिसका उपयोग घर के रसोईसे लेकर उद्योग हेतु समान एवं सहज में किया जा सकता है। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जगदलपुर प्राचार्य डॉ. अशोक दुबे, डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने मौके का मुआयना कर पर्यावरण संरक्षित के दिशा में बेहतर शोध बतया है। उक्त उपकरण को पेटेंट फाईलिंग के लिये इंजीनियरिंग कॉलेज जगदलपुर द्वारा रायपुर विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद को पत्र भेजा जा चुका है। रायपुर से संबंधित विभाग द्वारा मई 2022 को वनमित्र के पेटेंट फाईलिंग के लिये निर्देशक यशवंत देव पनवार विज्ञान एवं औद्योगिकी विभाग रायपुर को पत्र भेजा चुका है। जो दिल्ली में संबंधी विभाग से अनुमति का इंतजार है।
जिले के जगदलपुर कुम्हारपारा निवासी मुख्य शोधकर्ता धींगरमल खत्री के द्वारा वनमित्रा चुल्हा का आविष्कार किया जा चुका है। जिसके पेटेंट फाईलिंग के लिये सबंधित विभाग नई दिल्ली को भेजा जा चुका है। वनमित्रा चुल्हा के निर्माण में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज प्राचार्य दुबे के मागर्दशन में महाविद्यालय यांत्रिकी विभाग के सहयोगी खत्री द्वारा देश के हित में वन संरक्षण के उद्देश्य से धान भूसा द्वारा संचालित वनमित्रा चुल्हा विकसित किया गया है। जिसमें लकड़ी की आवश्यकता नाम मात्र की होती है तथा यह पूर्ण रूपेण पर्यावरण को संरक्षित कर धान भूसा एवं खरपतवार के उपयोग से संचालित होती है। उक्त चुल्हे में ईंधन के रूप में धान की पलारी सुखे पत्त्ते, घांस, छोटी सूखी झाड़ी इस प्रकार से अन्य सूखी वनस्पति का उपयोग किया जा सकता है। उक्त चुल्हा घर को वायुप्रदूषण मुक्त रखने के लिए चिमनीका उपयोग कर घर के वातावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।
लकड़ी की होगी बचत:-
वनमित्रा चुल्हा का उपयोग से लकड़ी की बचत होगी। ग्रामीण इलाकों में भोजन पकाने के लिये बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही है जिसे पर्यावरण की समस्या बढ़ने लगी है। उक्त चुल्हा 2 फीट उंचाई एवं गोलाई का आकार का है। जिसमें हवा हेतु इनलेट वाल्व लगाया गया है। बर्नर, फिल्टर, चिमनी, फ्यूट इन्ट्री गेट लगा हुआ है। बताया गया है 20 रूपये के खर्च में 50 व्यक्तियों का भोजन तैयार करने की क्षमता है। उक्त उपकरण का बाजार में लांच करने केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुमति का इंतजार है। वहां से अनुमति मिलते ही यह संबंधित आविष्कार के माध्यम से उपलब्ध होगा।
वनमित्रा चुल्हा के आविष्कार खत्री ने बताया कि वनमित्रा चुल्हा का उपयोग से पेट्रोलियम पदार्थ के आयात का बढ़ता बोझ में वृहद रूप में कमी आयेगी देश के नागरिकों को आर्थिक राहत मिलेगा। उन्होंने बताया कि गांव में गृहणियों को चावल के साथ-साथ पकान हेतु इको फेे्रंडली ईंधन भी सुलभ होगा।
पेटेंट फाईलिंग क्या है?
भारत में पेटेंट प्राप्त करने से मुख्य शोधकर्ता को फाईल करने की तारीख से लगभग 20 वर्षो तक अपना आविष्कार बनाने उपयोग करने और बेचने का पूरा अधिकार मिलता है। यह आविष्कारक के अनुमति के बिना किसी अन्य द्वारा कॉपी या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।



