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बरसते पानीे में कांग्रेस की शिक्षा न्याय यात्रा

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जगदलपुर जिला मुख्यालय जगदलपुर में कांग्रेस नेताओं ने बरसते पानी के बीच शिक्षा न्याय यात्रा निकाली और जिला शिक्षा कार्यालय का घेराव किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर एवं ग्रामीण के संयुक्त नेतृत्व में स्कूलों व शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के खिलाफ कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा शिक्षा न्याय यात्रा निकाली गई। इस दौरान तेज बारिश हो रही थी। कांग्रेसी भीगते हुए डीईओ कार्यालय पहुंचे और का घेराव किया। शिक्षा न्याय यात्रा में पूर्व विधायक रेखचंद जैन, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, पूर्व महापौर जतिन जायसवाल एवं अन्य पदादिकारी कार्यकर्ता शामिल हुए।

नक्सली बताकर मार डाला गया रसोइया को: विधायक विक्रम मंडावी

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  •  मृतक की पत्नी और सात बच्चे हो गए हैं बेसहारा
  • कांग्रेस विधायक मंडावी ने मुठभेड़ पर उठाए सवाल

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर में बीते 6 जून को मुठभेड़ में मारे गए 7 नक्सलियों में से एक शख्स को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीजापुर के कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी का आरोप है कि जिस महेश कुड़ियम को नक्सली बताकर मारा गया है, वह सरकारी स्कूल मे मध्यान्ह भोजन रसोईया था।

विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया है कि नक्सवाद खत्म करने के अभियान के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को मारा जा रहा है। मंडावी ने कहा है कि 6 जून को बीजापुर के नेशनल पार्क एरिया में ईरपागुट्टा निवासी महेश कुड़ियम को नक्सली बताकर मार दिया गया।

 

महेश कुड़ियम भोपाल पटनम ब्लॉक की प्रथमिक शाला ईरपागुट्टा में मध्यान्ह भोजन रसोइया का काम करता था। महेश कुड़ियम के छोटे छोटे 7 बच्चे हैं, 3 बच्चे सरकारी आश्रम में पढ़ते हैं।

महेश कुड़ियम का यूनियन बैंक भोपाल पटनम में खाता है जिसमे हर महीने रसोइया का सरकारी पैसा जमा होता है। विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से सवाल किया है कि क्या सरकार निर्दोष आदिवासियों को मार कर नक्सवाद खत्म करना चाहती है ? क्या 7 बच्चों का पिता नक्सली हो सकता है ?

क्या सरकारी स्कूल में रसोइया का काम करने वाला व्यक्ति नक्सली हो सकता है ? क्या सरकारी वेतन लेने वाला व्यक्ति नक्सली हो सकता है? क्या निर्दोष आदिवासियों की हत्या से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा? क्या ऐसे अभियानों से आदिवासियों का विश्वास जीता जा सकता है ? क्या बस्तर में नक्सलवाद समाप्त करने की प्रकिया में निर्दोष आदिवासियों को मारना उचित है? क्या आप बस्तर में ऐसे ही नक्सलवाद खत्म करना चाहते हैं जिसमे निर्दोष आदिवासी मारे जाएं? कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और आदिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विक्रम मंडावी ने महेश कुड़ियम की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करते हुए उसके परिवार को पर्याप्त मुआवजा और उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग सरकार से की है।

गोदावरी माइंस प्रबंधन पर भैंसाकन्हार के ग्रामीणों ने लगाया सौतेले व्यवहार और अशांति फैलाने का आरोप

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  • ग्रामीणों को आपस में लड़ा रहा है माइंस प्रबंधन
  • न रोजगार दिया और न ही सुविधाएं उपलब्ध कराई

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर के कांकेर जिला अंतर्गत भानुप्रतापपुर क्षेत्र के भैंसाकन्हार के ग्रामीणों ने गोदावरी माइंस प्रबंधन पर क्षेत्र में अशांति फैलाने और ग्रामीणों के साथ सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है।

भैंसाकन्हार के सरपंच रमल कोर्राम ने कहा है कि खनन शुरू करने से पहले जन सुनवाई के दौरान गोदावरी माइंस कंपनी ने क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन 16 साल बीत जाने के बाद भी माइंस प्रभावित एवं माइंस के नीचे स्थित गांव भैंसाकन्हार के लोगों को रोजगार देना तो दूर की बात गोदावरी माइंस प्रबंधन ने गांव में एक भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई और गांव को पूरी तरह उपेक्षित रखा गया है। सरपंच रमल कोर्राम ने आगे कहा कि कंपनी ग्रामीणों के निवेदन और आवेदनों पर गांवों को आपस में लड़ाकर दादागिरी करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि गोदावरी माइंस प्रबंधन लीज क्षेत्र से बाहर भी कहीं भी काम करना चाहता है और वन क्षेत्र में भी दादागिरी करते हुए गुपचुप तरीके से हजारों पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत पर जांच हुई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सरपंच रमल कोर्राम ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि समय रहते इस मामले में दखल दें और भैंसाकन्हार गांव के लोगों को रोजगार और मूलभूत सुविधाएं दिलाने की पहल करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो गांववासी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

संविधान और लोकतंत्र की हत्या तो कांग्रेस ने की थी आपातकाल थोपकर: किरण सिंह देव

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  • 50 वर्ष पहले इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने लगाया था आपातकाल
  • कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता आज भी कायम: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव

जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा है कि तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आज से ठीक पचास साल पहले 25 जून 1975 को अपनी कुर्सी बचाने व सत्ता पर बने रहने के लालच में संविधान व लोकतंत्र की हत्या करते हुए देश में आपातकाल थोप दिया था। कांग्रेस पार्टी के इस काले अध्याय में न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को रौंदा, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलकर यह स्पष्ट कर दिया कि जब जब कांग्रेस की सत्ता संकट मे होती है, वह संविधान और देश की आत्मा को ताक पर रखने से पीछे नहीं हटती। आज 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस उसी मानसिकता के साथ चल रही है, सिर्फ तरीकों में बदलाव हुआ है, मगर कांग्रेस की नीयत आज भी वैसी ही तानाशाही वाली है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने मंगलवार को यहां भाजपा जिला कार्यालय में पत्रवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता लोभ कांग्रेस का स्थायी चरित्र है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी को चुनाव में भ्रष्ट आचरण व सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करने का दोषी ठहराया और उन्हें 6 वर्ष तक किसी भी निर्वाचित पद पर रहने से अयोग्य घोषित कर दिया था, जिससे घबराकर सत्ता पर काबिज रहने के लिये इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आतंरिक अशांति का हवाला देकर राष्ट्रपति से देश में आपातकाल लगवा दिया था। जिसके बाद रातोंरात प्रेस की बिजली काट दी गई, नेताओं को बंदी बना लिया गया और देश में तानाशाही लाद दी गई। संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरूपयोग कर लोकतंत्र को रौंदा गया, संसद व न्यायपालिका को अपंग बनाने का घृणित कृत्य कांग्रेस ने किया। कांग्रेस का यह काला चेहरा व चरित्र देश की जनता को जानना व समझना होगा।

परिवार के चरणों में कांग्रेस

किरण सिंह देव ने कहा कि जिस संविधान की शपथ लेकर इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी थी, उसी संविधान की आत्मा को कुचलते हुए उन्होंने लोकतंत्र को बंधक बनाकर तानाशाही में बदल दिया था। आज भी कांग्रेस शासित राज्यों में कानून व्यवस्था का हाल यह है कि वहां विरोध का दमन, धार्मिक तुष्टिकरण व सत्ता का अहंकार खुलेआम दिखता है। आपातकाल के दौरान एक परिवार को संविधान से ऊपर रखने वाली कांग्रेस आज भी राहुल- प्रियंका के इर्दगिर्द सिमटी हुई है और कांग्रेस का समूचा तंत्र परिवार के चरणों में समर्पित है।

अब संविधान बचाने का ढोंग

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि आपातकाल में इंदिरा गांधी ने संविधान में 39वां और 42वां जैसा क्रूर और अलोकतांत्रिक संशोधन किए। कांग्रेस के वैचारिक एजेंडे को थोपने के लिए संविधान में संशोधन कर धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी जैसे शब्द जोड़े गए। लोकतंत्र व संविधान की हत्या करने वाली कांग्रेस के नेता आज संविधान की किताब लेकर उसे बचाने का झूठा स्वांग रचने से बाज नही आ रहे हैं। संविधान बचाओ का नारा देने वाली कांग्रेस वही पार्टी है, जिसने संविधान को सबसे पहले रौंदा था।

देश को विदेश में बदनाम करना आदत

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि आज कांग्रेस के चेहरे बदल गए हैं लेकिन तानाशाही की प्रवृत्ति और सत्ता का लोभ जस का तस है। पचास साल बाद आपातकाल को याद करना इसलिए भी आवश्यक है कि यह महज इतिहास की एक घटना मात्र नहीं है बल्कि कांग्रेस की मानसिकता का प्रमाण है। सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाना और देश की छवि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर खराब करना कांग्रेस की नई डिजिटल इमरजेंसी रणनीति बन चुकी है। जब देश हर मोर्चे पर प्रगति कर रहा है, तब कांग्रेस, सरकार की हर उपलब्धि को झुठलाने में लगी है। यह वही नकारात्मक मानसिकता है जिसने 1975 में देश को पीछे खींचा था। देश की सुरक्षा, सैन्य कार्रवाई या विदेश नीति पर कांग्रेस जिस तरह सेना पर सवाल उठाती है, न्याय पालिका पर हस्तक्षेप, फ्री स्पीच के नाम पर अराजकता और मीडिया ट्रायल को बढ़ावा देकर कांग्रेस आज नए तरीकों से देश में वही आपातकाल लागू करना चाहती है।

गांधी परिवार की सोच से बंधी है कांग्रेस

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी व गांधी परिवार की मानसिकता आज भी “हम ही राष्ट्र हैं” की सोच से बंधी है, उन्हें जनता का स्पष्ट बहुमत भी हमेशा लोकतंत्र का संकट नज़र आता है। भष्ट्राचार के मामलों में जब भी गांधी परिवार पर जांच होती है, कांग्रेस लोकतंत्र खतरे में है का शोर मचाती है। यही भाषा व तरीका इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट से अयोग्य घोषित होने के बाद अपनाया था। जब जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है, उसने न जनादेश का सम्मान किया है और न विपक्ष की गरिमा बनाए रखी है। पत्रवार्ता में भाजपा जिला अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विद्याशरण तिवारी, जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र पाण्डेय, श्रीनिवास मिश्रा, नगर निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, जिला कोषाध्यक्ष रजनीश पाणिग्रही, जिला मीडिया प्रभारी आलोक अवस्थी, पूर्वी नगर मंडल अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव मौजूद रहे।

नवीन पाठ्यपुस्तक शिक्षक प्रशिक्षण: बस्तर में शिक्षकों की बहुभाषी शिक्षा पर उन्मुखीकरण कार्यशाला का समापन

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जगदलपुर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट बस्तर और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के निर्देशों के अनुसार बस्तर ब्लॉक डाइट में नवीन पाठ्यपुस्तक शिक्षक प्रशिक्षण (एलएलएफ) के तहत महत्वपूर्ण बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस छः दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का उद्देश्य जिलेभर के संकुल समन्वयकों और शिक्षकों को नई पाठ्यपुस्तकों में हुए बदलावों और बहुभाषी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना है। इस प्रशिक्षण में बस्तर जिले के सात ब्लॉक बस्तर, बास्तानार, दरभा, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल, जगदलपुर और बकावंड से कुल 21 समन्वयक तथा 42 शिक्षक शामिल हुए। प्रशिक्षण में नवीन पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को गहराई से समझा गया और बस्तर जिले के सावधिक आंकलन पर आधारित डेटा विश्लेषण पर भी चर्चा हुई। एनसीएफ एफएस 2022 शिक्षा नीति: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा – मूलभूत स्तर 2022 (एनसीएफ एफ एस 2022) की शिक्षा नीति के सिद्धांतों और पठन के चार प्रमुख दृष्टिकोणों- मौखिक भाषा, डिकोडिंग, पठन और लेखन पर विस्तृत चर्चा की गई। गणित की शिक्षण प्रक्रिया पर भी गहन चर्चा हुई, जिसमें प्राथमिक कक्षाओं में गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। कक्षा पहली, दूसरी और तीसरी के लिए साप्ताहिक शिक्षण योजना और शिक्षक संदर्शिका पर शिक्षकों के बीच समझ विकसित की गई। इस प्रशिक्षण में जिले के एसआरजी समूह और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की पूरी बस्तर एलएलएफ टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सत्रों के दौरान कक्षा में की जाने वाली गतिविधियों और शिक्षकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें समन्वयकों और शिक्षक साथियों ने अपने अनुभव साझा किए और सुधार के संभावित तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इस प्रशिक्षण का एक मुख्य फोकस बहुभाषी शिक्षा पर रहा, जिसमें बच्चों की घर की भाषा को शिक्षण कार्य में विशेष महत्व दिया गया। शिक्षकों को हल्बी और भतरी जैसी स्थानीय बोलियों को शिक्षण के माध्यम के रूप में उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे बच्चों को सीखने में आसानी हो और उनकी अपनी भाषा को सम्मान मिले। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नवीन पाठ्यपुस्तकों पर शिक्षकों की समझ को बढ़ाना और उनकी शैक्षणिक क्षमता को मजबूत करना है। साथ ही, यह प्रशिक्षण शिक्षकों को अपने-अपने स्कूल स्तर की चुनौतियों को पहचानने और उनका समाधान निकालने में भी मदद करेगा। डायट बस्तर से प्रिंसिपल नितिन दंडसेना, एफएलएन प्रभारी बेनूराम मौर्य और श्री जॉन ने इस प्रशिक्षण को सफल बनाने में विशेष सहयोग किया। यह उम्मीद की जाती है कि इस प्रशिक्षण से निश्चित तौर पर शिक्षण प्रक्रिया में सुधार आएगा, जिससे बच्चों को बेहतर और प्रभावी शिक्षा मिल सकेगी।

लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने एवं कांग्रेस के लोकतंत्र पर कुठाराघात के 50 वर्ष

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  • प्रेस कॉन्फ्रेंस लेने पहुंचे अध्यक्ष अक्षय ऊर्जा विकास अधिकरण (क्रेडा) प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी जी।
  • इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति की आड़ लेकर अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया।
  • संविधान की आत्मा को कुचलते हुए उन्होंने लोकतंत्र को एक झटके में तानाशाही में बदल दिया और पूरी व्यवस्था को ही कठपुतली बनाकर रखने का षड्यंत्र रच दिया।
  • कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका सहित लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को बंधन बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

प्रेस की स्वतंत्रता पर ऐसा हमला हुआ कि बड़े-बड़े अखबारों की बिजली काट दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया ।

आपातकाल के दौरान एक ही परिवार को संविधान से ऊपर रखने वाली कांग्रेस आज भी राहुल प्रियंका के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है, तंत्र आज भी परिवार के चरणों में समर्पित है।

बालोद, मंगलवार भूपेन सवर्णी जी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर भारत पर आपातकाल ठोक दिया यह निर्णय किसी युद्ध या विद्रोह के कारण नहीं बल्कि अपने चुनाव को रद्द किए जाने और सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया था कांग्रेस पार्टी ने इस काले अध्याय में न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को रौंदा बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिक के मौलिक अधिकारों को कुचलकर या स्पष्ट कर दिया कि जब-जब उनकी सट्टा संकट में होती है वे संविधान और देश की आत्मा को तक में रखने से पीछे नहीं हटती आज 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस इस मानसिकता के साथ चल रही है आज भी सिर्फ तरीकों का बदलाव हुआ है नियत आज भी वैसी ही तानाशाही वाली है l

मार्च 1971 में लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद इंदिरा गांधी की वैधानिकता को चुनौती मिली उनके विपक्षी उम्मीदवार राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव को भ्रष्ट आचरण और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आधार पर चुनौती दी देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही थी जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा था देश पहले से ही आर्थिक बदहाली महंगाई और खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था बिहार और गुजरात में छात्रों के नेतृत्व में नवनिर्माण आंदोलन खड़ा हो चुका था। 8 में 1974 को जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में ऐतिहासिक रेल हड़ताल ने पूरे देश को जगा लिया इस आंदोलन को रोकने के लिए 1974 में गुजरात में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया यही राष्ट्रपति शासन 1975 में लगने वाले आपातकाल की एक शुरुआत था इसके साथ ही बिहार में कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा और 1975 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा।

12 जून 1975 को कोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनाव में दोषी ठहराया और उन्हें 6 वर्षों तक किसी भी निर्वाचन पद पर रहने से अयोग्य करार दिया इसके बाद राजनीतिक स्थिरता तेजी से बड़ी जिससे घबराकर इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आंतरिक अशांति का हवाला देकर राष्ट्रपति से आपातकाल लगा दिया रातों-रात प्रेस की बिजली काटी गई नेताओं को बंदी बनाया गया और 25 जून की सुबह देश की तानाशाही की सूचना रेडियो के माध्यम से दी गई।

संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को रौंदा गया सांसद और न्यायपालिका को अपंग बना दिया गया यह सिलसिला किसी युद्ध या बाहरी हमले से नहीं बल्कि एक व्यक्ति के कुर्सी कोन होने के भाई से शुरुआत और पूरे राष्ट्र को मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया।

1975 आपातकाल की घोषणा कोई राष्ट्रीय संकट का नतीजा नहीं बल्कि एक गरीबी प्रधानमंत्री की सत्ता बचाने की राजनीति थी जिसे न्यायपालिका से मिली चुनौती से बौखलाकर थोपा गया।

इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति की जो देकर अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग किया अपनी कुर्सी को बचाने की जीत थी।

संविधान की आत्मा को कुचलते हुए उन्होंने लोकतंत्र को एक झटके में तानाशाही में बदल दिया और पूरी व्यवस्था को ही कठपुतली बनाकर रखने का षड्यंत्र रच दिया।

कार्यपालिका विधायक और न्यायपालिका सहित लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को बंधक बनाकर सत्ता के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया प्रेस की स्वतंत्रता पर ऐसा हमला हुआ कि बड़े-बड़े अखबारों की बिजली का काट दी गई सेंसरशिप लगा दी गई और पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया।

कांग्रेस शशि राज्य में कानून व्यवस्था का हाल यह है कि वहां विरोध का दमन धार्मिक तुष्टिकरण और सत्ता का अहंकार खुलेआम दिखता है।

इंदिरा इज इंदिरा एण्ड इंदिरा इज इंदिरा जैसे नारे कांग्रेस की उसे मानसिकता को दर्शाते थे जिसके तहत इंदिरा गांधी ने देश को व्यक्ति पूजा और परिवारवाद की प्रयोगशाला बना दिया था।

आपातकाल के दौरान एक परिवार को संविधान से ऊपर रखने वाली कांग्रेस आज भी राहुल प्रियंका के इर्द-गिर्द सिम टीवी है,तंत्र आज भी परिवार के चरणों में समर्पित है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, माननीय सांसद श्री भोजराज नाग,जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख, वरिष्ठ नेता यशवंत जैन, निर्वितमान जिला अध्यक्ष पवन साहू , पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्णकांत पवार , वरिष्ठ नेता प्रीतम साहू ,वरिष्ठ नेता यज्ञदत्त शर्मा , प्रदेश कार्य समिति सदस्य श्री अभिषेक शुक्ला ,जिला महामंत्री राकेश छोटू यादव ,नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चौधरी , जिला मीडिया प्रभारी कमल पनपालिया, सोशल मीडिया जिला संयोजक संदीप सिन्हा।

 

माटवाडा में जहरीला फुटू खाने से एक ही परिवार के पांच लोग बीमार

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  • फूड पायजिंनिग पीड़ितों की स्थिति अब सामान्य 

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में जहरीला फुटू (मशरूम) खाने से एक परिवार के पांच सदस्य बीमार हो गए। पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति खतरेसे बाहर है।

मामलाबीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत माटवाड़ा का है। गांव के एक ही परिवार के 5 लोग जहरीला फूटू (मशरूम) खाने से बीमार हो गए । रात में बीमार लोगों को भैरमगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के बाद उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इसके पूर्व धुसावड के 5-6 ग्रामीण फूड पायजिंनिग के शिकार हुए थे। मराठवाड़ा के ग्रामीणों के जहरीला फूटू खाने से बीमार लोगों की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री महेश गागड़ा भी स्वास्थ केंद्र पहुंचे। मरीजों का हालचाल जानने के बाद महेशगागड़ा ने चिकित्सक को त्वरित इलाज करने के लिए कहा। इस दरम्यान गागड़ा ने अन्य भर्ती मरीजों से मुलाक़ात कर हाल चाल जाना और आवश्यक स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिए। मरीजों के बारे में भैरमगढ़ ब्लाक के बीएमओ डॉ. रमेश तिग्गा ने बताया कि जहरीला फूटू की सब्जी खाने से पेट दर्द व उल्टी जैसे शिकायत शुरू हो गई। सभी का तत्काल इलाज किया गया। सभी मरीजों की स्थिति अभी सामान्य है। अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

पुलिस कांस्टेबल पर नक्सलियों ने किया जानलेवा हमला

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  • धारदार हथियार से किए गए संतू पोटामी पर वार
  • पदेडा़ साप्ताहिक बाजार में दिनदहाड़े हुई वारदात

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के पदेड़ा गांव के साप्ताहिक बाजार में में अज्ञात लोगों ने पुलिस कांस्टेबल संतू पोटाम पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कांस्टेबल को जिला चिकित्सालय बीजापुर में भर्ती कराया गया है। चर्चाहै कि हमलावर नक्सली थे।

23 जून सोमवार को दोपहर बाद 4-5 बजे थाना बीजापुर क्षेत्रांतर्गत ग्राम पदेड़ा के साप्ताहिक बाजार में आरक्षक संतू पोटाम पर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा धारदार हथियार से प्राणघातक हमला किया गया। गंभीर घायल संतू राम पोटमी का चेरपाल स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक उपचार किया गया, फिर उन्हें बाद बीजापुर जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया है। घटना में माओवादियों के हाथ होने की आशंका जताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया।बीजापुर के एएसपी चंद्रकांत गवर्ना ने बताया कि आरक्षक का अस्पताल में इलाज जारी है। आरक्षक संतू राम पोटामी बीजापुर जिला पुलिस बल के जवान हैं।

जगदलपुर में नजर आ रहा है असली सुशासन; बोलने लगे हैं विधायक किरण देव और मेयर संजय पाण्डेय के काम

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  • मजबूत और टिकाऊ सड़कें दे रही हैं गवाही

अर्जुन झा-
जगदलपुर किसी भी गांव, कस्बे और शहर की तरक्की की पहचान वहां की सड़कों से होती है और यही सड़कें विकास का पैमाना भी हैं, क्योंकि सड़कों के जरिए ही विकास के दूसरे संसाधन पहुंचते हैं। अब हमारे जगदलपुर में भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन वाली सरकार के असली सुशासन की झलक सड़कों पर दिखाई देने लगी है। क्षेत्रीय विधायक किरण सिंह देव द्वारा स्वीकृत कराई गई राशि से महापौर संजय पाण्डेय की निगहबानी में बनवाई जा रही सड़कें असल सुशासन की तस्वीर पेश कर रही हैं।

पहले सड़कें बरिश की पहली बौछार भी नहीं झेल पाती थीं। अब शहर में मजबूत और टिकाऊ सड़कों के निर्माण के लिए विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण किरण सिंह देव ने बड़ी राशि की स्वीकृति दिलाई है। इस राशि से जो सड़कें महापौर संजय पाण्डेय की देखरेख में बनाई जा रही हैं, वे बारिश की मार तो पूरी दमदारी से झेल ही रही हैं, काफी मजबूती से खड़ी हैं और दमक भी रही हैं। जगदलपुर में मेयर संजय पाण्डेय के नेतृत्व में नगर निगम द्वारा विधायक किरण सिंह देव एवं सांसद महेश कश्यप के सहयोग से स्वीकृत राशि से बेहतरीन सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। बन रही मजबूत और काफी ज्यादा चौड़ी सड़कें सुशासन की शानदार बानगी पेश करती नजर आ रही हैं। इन नई नवेली और दमदार सड़कों ने लोगों का दिल जीत लिया है। विकास और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाने लगी है।विधायक किरण देव हर निर्माण कार्य की गुणवत्ता से समझौता न करने की चेतावनी लगातारदेते आ रहे हैं, वहीं महापौर संजय पाण्डेय भी इस मामले में बेहद गंभीर नजर आते हैं।नगर निगम क्षेत्र के धरमपुरा इलाके में कैलाश होटल के सामने की गली से लेकर दलपत सागर तालाब के समीप हनुमान मंदिर चौक तक करीब 700 मीटर लंबी सड़क बनाई गई है। यह सड़क विधायक किरण सिंह देव और महापौर संजय पाण्डेय की कर्तव्य परायणता, मजबूत इच्छाशक्ति और जनता के प्रति जवाबदेही की मिसाल पेश कर रही है। पहले अक्सर गुणवत्ताहीन निर्माण होने से बरसात में सड़क बह जाती थी, मगर अब महापौर संजय पांडे की देखरेख में बनी इस सड़क की तारीफ हर कोई कर रहा है। विधायक किरण सिंह देव और संजय पाण्डेय तो शहर के विकास के लिए गंभीर हैं ही, सांसद प्रतिनिधि आनंद मोहन मिश्रा की भी महति भूमिका से यह सड़क बनाई गई है जिससे लोगों का आवागमन सुविधा जनक हो गया है। इस मामले में शहर के संभ्रांत लोगों ने कहा कि बेहतरीन सड़क बनने पर हम नगर विधायक किरण देव और महापौर संजय पाण्डेय को साधुवाद देते हैं।

विधायक देव की बड़ी पहल
इस कार्य को 4 मार्च 2025 के लिए स्थानीय विधायक किरण देव द्वारा भूमिपूजन किया गया था। इसी दिन 3 अन्य कार्यों का भी भूमिपूजन विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव के हाथों हुआ था। इनमें से धरमपुरा विवेकानंद आश्रम से नेगीगुड़ा तक 1.45 किमी लंबी मजबूत सड़क बन चुकी है। यह सड़क निर्माण लोक निर्माण विभाग के माध्यम से पूर्ण किया गया है। स्थानीय विधायक किरण देव के अथक प्रयास से उक्त करोड़ों रुपए के कार्य का शानदार समापन भी हुआ है और क्षेत्र के रहवासियों को सुंदर चौड़ी मजबूत सड़कें मिली हैं। विदित हो कि किरण देव द्वारा लगातार विकास के कार्यों को महत्व दिया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम अब सामने आने लगे हैं बरसात के पूर्व अच्छी सड़क बनने से लोगों ने किरण देव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

नगरनार स्टील प्लांट की ठेका कंपनी ने सालों से काम कर रहे मजदूरों को दिखाया बाहर का रास्ता

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  •  अब बाहरी मजदूर लाकर काम कराने की तैयारी
  • भाजपा नेत्री गीता देवी ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

नगरनार एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट में निजी कंपनी सीडीएलपी के अधीन काम कर रहे आसपास के गांवों के मजदूरों को कंपनी ने बिना किसी जानकारी अथवा नोटिस और वजह के काम से निकाल दिया है। इन मजदूरों ने स्थानीय भाजपा नेत्री गीता देवी को अपनी व्यथा सुनाई। गीता देवी ने मजदूरों को इंसाफ दिलाने की बात कही है।

नगरनार स्टील में कार्यरत ठेका कंपनी सीडीएलपी ने अपने अधीन पचासों मजदूरों को काम से बेदखल कर दिया है। इनमें से ज्यादातर मजदूर इस ठेका कंपनी के माध्यम से प्लांट में 3 और 4 साल से सेवा देते आ रहे थे। इन मजदूरों को न नोटिस दिया गया और न ही कोई कारण बताया गया। आज सोमवार को जब ये मजदूर ड्यूटी पर पहुंचे तब उन्हें अचानक उन्हें काम नहीं करने हेतु निर्देश दे दिया गया। ये सभी मजदूर स्टील प्लॉट के आसपास के गांवों में रहने वाले हैं। एक युवा मजदूर ने बताया कि आज सुबह ड्यूटी पर आने पर पहुंचे तो पता चला कि हम सभी का गेटपास कंपनी ने कैंसल करा दिया है और कार्य में नहीं आने का निर्देश दिया है। परेशान मजदूरों ने भाजपा नेत्री गीता देवी से संपर्क कर उन्हें अपनी व्यथा सुनाई।मजदूरों को काम से आकरण निकाले जाने पर भाजपा नेत्री गीता देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रोजगार छीनने का यह कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना नोटिस दिए वर्षों से कार्य कर रहे कर्मचारियों को अचानक काम से निकलना गैर कानूनी है। खबर लिखे जाने तक कम्पनी का कोई भी अधिकृत अधिकारी मौके पर कारण बताने उपस्थित नहीं था, जानकारी के अनुसार ओड़िशा की यह कंपनी स्थानीय कामगारों को निकाल कर अब बाहरी लोगों को मौका देना चाह रही है।

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