नारायणपुर दशहरा पर्व के अवसर पर पुलिस लाइन नारायणपुर में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जिले में शांति, सुरक्षा और जनकल्याण की कामना की।इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऐश्वर्य चंद्राकर, एसडीओपी अजय सिंह, एसडीओपी छोटेडोंगर मनोज मांडवी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। जिले के डीआरजी परिसर और सभी थानों में भी परंपरानुसार शस्त्र पूजन किया गया।कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ने पुलिस लाइन में नवनिर्मित वाहन शाखा कार्यालय का उद्घाटन भी किया। इससे वाहन शाखा के कार्यों के बेहतर एवं सुव्यवस्थित संचालन में सहायता मिलेगी।
विदेशी पर्यटक पर चढ़ा बस्तर की लोककला का जादू
कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन’ में हस्तशिल्प देख हुए मुग्ध अनुवेद’ ब्रांड की खरीदारी कर दिया थम्स-अप
जगदलपुर, 20 अक्टूबर 2026/ बस्तर की समृद्ध जनजातीय शिल्पकला और अनूठी सांस्कृतिक विरासत अब सात समंदर पार के सैलानियों को भी अपना मुरीद बना रही है। ‘आमचो बस्तर टूरिज्म’ पहल के तहत संचालित ‘बस्तर कला एवं हस्तशिल्प – बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन’ में आज एक विदेशी पर्यटक ने भ्रमण कर स्थानीय शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा का दीदार किया। भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमान ने बस्तर की विश्वप्रसिद्ध प्राचीन ढोकरा आर्ट (बेलमेटल), काष्ठ शिल्प, बांस कला और रॉट आयरन से सजी आकर्षक कृतियों का बेहद बारीकी से अवलोकन किया।

इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों में रची-बसी पारंपरिक कारीगरी को देखकर वे खासे प्रभावित हुए और उन्होंने इस कला की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए ‘थम्स-अप’ के साथ अपनी खुशी और संतुष्टि जाहिर की।कला की सुंदरता से प्रभावित होकर विदेशी पर्यटक ने न केवल स्थानीय शिल्पकला की बारीकियों को समझा, बल्कि बस्तर के हुनर को स्मृति-चिह्न के तौर पर साथ ले जाने के लिए अनुवेद ब्रांड के तहत तैयार बस्तर आर्ट उत्पादों की जमकर खरीदारी भी की। उल्लेखनीय है कि बस्तर कला गुड़ी परिसर का विकास राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी शिल्पकारों के उत्कृष्ट उत्पादों को एक व्यवस्थित मंच और सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक सीधे शिल्पकारों से जुड़ पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण महिला कलाकारों को उनकी मेहनत का उचित और सीधा पारिश्रमिक मिल रहा है। भ्रमण के समापन पर विदेशी मेहमान ने कला गुड़ी की टीम और स्व-सहायता समूह की दीदियों के साथ यादगार ग्रुप फोटो भी खिंचवाई, जिससे पूरा परिसर उत्साह और गर्व के माहौल से सराबोर रहा।
रावण तो हर साल जलता है, फिर भी क्यों नहीं रुकता सीता का हरण?
शक्ति की पूजा से पहले नारी का सम्मान करना सीखना होगा
लेखिका: नम्रता सिंह (उर्मिला फाउंडेशन, रायपुर एवं उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल रायपुर भाटापारा की हेड)“सियावर रामचंद्र की जय!”“उमापति महादेव की जय!”“राधा रमणीय कृष्ण कन्हैया की जय!”“पार्वती पतये, हर-हर महादेव!”इन जयघोषों को सुनकर मन को एक अद्भुत शांति मिलती है। ऐसा लगता है मानो भारतीय संस्कृति की आत्मा इन शब्दों में समाहित हो। इन उद्घोषों में कहीं सीता के साथ राम हैं, कहीं पार्वती के साथ महादेव और कहीं राधा के साथ कृष्ण। हमारी परंपराएं हमें स्मरण कराती हैं कि नारी केवल किसी की सहचरी नहीं, बल्कि प्रेम, शक्ति, श्रद्धा और सृजन का आधार है।लेकिन इन्हीं जयघोषों के बीच मन में एक सवाल उठता है—क्या रावण के पुतले को जलाने मात्र से सीता का हरण बंद हो जाएगा? क्या दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण का अंत होते ही नारी के प्रति सम्मान की शुरुआत हो जाती है? हर वर्ष दशहरा आता है। मैदानों में रावण के विशाल पुतले खड़े किए जाते हैं। जमकर आतिशबाजी होती है, जयघोष गूंजते हैं और हजारों लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं। साल दर साल रावण के पुतले की ऊंचाई बढ़ती जाती है, लेकिन समाज के सामने एक गंभीर प्रश्न आज भी खड़ा है—जब रावण हर साल जलता है, तो फिर नारी के विरुद्ध अपराध क्यों नहीं रुकते? कहीं बेटियों पर तेजाब से हमला होता है, कहीं सामूहिक दुष्कर्म जैसी जघन्य घटनाएं सामने आती हैं, तो कहीं किसी महिला की अस्मिता को कुचलने के लिए उसके बच्चों तक को निशाना बनाया जाता है। अपहरण, हिंसा और हत्या जैसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर हमारी पूजा, हमारे संस्कार और हमारे सामाजिक मूल्य कहां कमजोर पड़ रहे हैं? क्या हमारी आस्था केवल उत्सवों तक सीमित रह गई है? हम देवी की प्रतिमा के सामने सिर झुकाते हैं, लेकिन जीवित नारी के सम्मान के सामने हमारी संवेदनाएं मौन क्यों हो जाती हैं? सच तो यह है कि रावण का पुतला जलाना आसान है, लेकिन अपने भीतर छिपे अहंकार, वासना, हिंसा और स्त्री के प्रति हीन दृष्टिकोण को जलाना कहीं अधिक कठिन है। असली रावण वह मानसिकता है, जो नारी को एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के बजाय केवल एक वस्तु समझती है; जो उसकी इच्छा को महत्व नहीं देती, उसकी भावनाओं को अनदेखा करती है और उसकी स्वतंत्रता को अपनी सत्ता के विरुद्ध मानती है।
आखिर पुरुष यह क्यों भूल जाता है कि नारी की भी अपनी इच्छाएं हैं, अपने सपने हैं, अपनी भावनाएं हैं और अपना आत्मसम्मान है? उसका जीवन किसी दूसरे की इच्छा के अधीन रहने के लिए नहीं है। नारी का सम्मान किसी की कृपा नहीं, उसका अधिकार है।जिस नारी को हम मां कहकर पूजते हैं, वही किसी की बहन, किसी की बेटी, किसी की पत्नी और किसी की मित्र भी है। लेकिन क्या सम्मान पाने के लिए उसका इन रिश्तों में से किसी एक से जुड़ा होना आवश्यक है? क्या किसी अनजान महिला की गरिमा इसलिए कम हो जाती है कि वह हमारी बहन या बेटी नहीं है? नारी का सम्मान उसके रिश्ते से नहीं, उसके इंसान होने से होना चाहिए। यदि हम वास्तव में एक सभ्य और सुरक्षित समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने घरों से शुरुआत करनी होगी। बेटों को बचपन से सिखाना होगा कि सहमति का सम्मान करना, महिलाओं की स्वतंत्रता स्वीकार करना और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का विरोध करना ही सच्चे संस्कार हैं। परिवार, विद्यालय, समाज और कानून सभी को मिलकर ऐसी मानसिकता के विरुद्ध खड़ा होना होगा, जो नारी को कमजोर समझती है। इस दशहरे पर आइए, केवल रावण के पुतले का दहन न करें, बल्कि अपने भीतर बैठे उस रावण को भी पहचानें, जो नारी के सम्मान को चुनौती देता है। संकल्प लें कि किसी महिला के साथ अन्याय होते देखकर चुप नहीं रहेंगे, बेटियों को भय नहीं बल्कि आत्मविश्वास देंगे और बेटों को अधिकार नहीं, जिम्मेदारी का अर्थ समझाएंगे। क्योंकि जिस दिन नारी को देवी के रूप में पूजने के साथ-साथ एक मनुष्य के रूप में सम्मान भी मिलने लगेगा, उसी दिन दशहरे का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा। याद रखिए, रावण का पुतला जलाने से परंपरा पूरी होती है, लेकिन नारी का सम्मान करने से समाज संस्कारित होता है। इस बार रावण बाहर नहीं, अपने भीतर जलाइए। क्योंकि नारी का सम्मान ही सच्चे अर्थों में बुराई पर अच्छाई की विजय है।
श्रद्धा-भक्ति में डूबे बस्तर के अफसर, कलेक्टर छिकारा ने जूनियर छिकारा के साथ किए फूल परिक्रमा के दीदार
सपत्नीक हवन में भी शामिल हुए कलेक्टर आकाश छिकारा
अर्जुन झा
जगदलपुर नक्सल मुक्त हो चुके आस्था और धर्म प्रभावना की दिलकश बयार देखने को मिल रही। जिले के टॉप ऑफिसर्स भी आस्था और श्रद्धा भक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। जगदलपुर स्थित माई दंतेश्वरी की पूजा करने बच्चे व पत्नी संग पहुंचे पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा की भक्ति भावना हम पहले ही देख चुके हैं। अब बस्तर दशहरा की फूल परिक्रमा के अवसर पर बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा भी अपने बेटे जूनियर छिकारा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा जूनियर छिकारा को गोद में लेकर पहुंचे थे। उन्होंने श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच खड़े होकर पूजा अर्चना की और फूल रथ के दर्शन किए। जूनियर छिकारा कौतूहल भरी नजरों से रंग बिरंगी सजावट का दीदार करते नजर आए, जबकि डीएम आकाश छिकारा मुस्कुराते हुए खड़े नजर आए। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना और कई अन्य अधिकारी भी पहुंचे थे, मगर कहीं भी वीआईपी कल्चर जैसा दृश्य देखने को नहीं मिला। श्री छिकारा व अन्य अधिकारी बस्तरिहा पागा पहने आम आदिवासियों के बीच खड़े रहे। न पद का घमंड और न रुतबे का रौब। कई श्रद्धालुओं ने कलेक्टर श्री छिकारा के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई।हजारों लोगों की भीड़ में माई दंतेश्वरी के जयकारे के बीच कलेक्टर बस्तर आकाश छिकारा आम लोगों की तरह उपस्थित होकर कार्यक्रम देखते रहे।उल्लेखनीय है कि बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद इस बार कई राज्यों से पुजारी, भक्त और पर्यटक काफी संख्या में जगदलपुर पहुंच कर इस विश्व प्रसिद्ध दशहरे का अवलोकन कर रहे हैं। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने अपने प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ मिलकर इस बस्तर दशहरा को सफल बनाने का पूरा प्रयास किया है। आज नवमी के दिन कलेक्टर आकाश छिकारा ने सपत्नीक दंतेश्वरी मंदिर पहुंच कर हवन में सहभागिता दर्ज कराई।मंदिर परिसर में उपस्थित लोगों ने कलेक्टर की आम आदमी की तरह उपस्थिति को काफी सराहा। लोगों की प्रतिक्रिया थी कि जिले के बड़े अधिकारी किसी न किसी बहाने अगर जनता से मेल जोल रखेंगे तो क्षेत्र में प्रशासनिक कसावट तो आएगी ही, लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी अच्छे से मिलेगा।
पदयात्रियों की सेवा में जुटे पुलिसकर्मी
सुशासन सरकार में इस बार प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह मुस्तैद होकर काम कर रही है। माई दंतेश्वरी के दर्शन करने दंतेवाड़ा जाने वाले पदयात्रियों के लिए परपा थाना पुलिस ने केसलूर पुलिस चौकी के समीप शुद्ध जल और नीबू शरबत पिलाने की व्यवस्था की है। सूर्योदय से लेकर शाम ढलने तक जब पदयात्री थके हुए अपनी यात्रा करते रहते हैं, तब इस चौक पर उन्हें परपा पुलिस के जवान आदरपूर्वक शुद्ध जल और नींबू शरबत पिलाकर तरोताजा कर देते हैं। नीबू शरबत और शीतल जल पदयात्रियों को नई ताजगी से भर देता है। वैसे हर वर्ष पुलिस विभाग इस प्रकार की व्यवस्था करता है, किंतु पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के विशेष निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक श्री राठौर ने परपा पुलिस को इसकी जिम्मेदारी दी है।
यहां पुलिस वालियों का गरबा
नक्सलमुक्त बस्तर संभाग में सबसे शानदार पहल सुकमा में देखने को मिली, जहां पुलिस की महिला कमांडोज, महिला पुलिस अधिकारी व जवान तथा पुलिसकर्मियों की बहन बेटियों के लिए खास डांडिया गरबा का आयोजन किया गया था।एके-47 के जरिए नक्सलियों का मुकाबला करती आईं पुलिस की दुर्गा वाहिनी की लेडी कमांडोज हाथों में डांडिया की छड़ियां लेकर गरबे की मस्ती में झुमती नजर आईं। इस बेहद खास आयोजन में सुकमा एसपी मयंक गुर्जर ने शहीद पुलिस जवानों के परिवारों की बहन बेटियों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया था। वे भी अपनों को खोने का गम कुछ पलों के लिए ही सही भुलाकर गरबा करती नजर आईं। यहां पूरा वातावरण आत्मीयता से भरा नजर आया। यहां आईएएस, आईपीएस अधिकारी भी मातहत कर्मियों के साथ गरबा डांडिया खेलते नजर आए। अति नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्र रहे सुकमा में कानून-व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर सदैव मुस्तैद रहने वाली पुलिस टीम के मनोबल और पारिवारिक सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसपी मयंक गुर्जर ने यह भव्य और प्रेरणादायक आयोजन 17 अक्टूबर को सुकमा पुलिस लाइन में किया था। पूरे बस्तर संभाग में पुलिस परिवारों और शहीद जवानों के परिवारों के लिए भव्य गरबा-डांडिया महोत्सव का आयोजन पहली बार देखने सुनने को मिला।
सट्टा-पट्टी लिखते 03 आरोपी गिरफ्तार
दल्लीराजहरा, जिला बालोद राजहरा पुलिस की सटोरियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई
सट्टा-पट्टी, नगदी रकम एवं डॉट पेन जप्त।
थाना क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर पुलिस ने की रेड कार्रवाई।- तीनों आरोपियों के कब्जे से सट्टा-पट्टी पर्ची एवं कुल ₹2,582 नगद बरामद।- आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत की गई कार्रवाई।
विस्तृत विवरणपुलिस अधीक्षक बालोद किरण चौहान एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना के निर्देशन में तथा नगर पुलिस अधीक्षक राजहरा विकास पाटले के मार्गदर्शन में जिले में अवैध जुआ, सट्टा एवं शराब के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को थाना दल्लीराजहरा पुलिस द्वारा टाउन पेट्रोलिंग एवं जुर्म-जरायम पतासाजी के दौरान थाना क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए सट्टा-पट्टी लिखने के आरोप में तीन व्यक्तियों को पकड़ा गया। आरोपियों के कब्जे से सट्टा-पट्टी पर्चियां, नगदी रकम एवं डॉट पेन जप्त कर उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। 01. शहीद अस्पताल के सामने सट्टा-पट्टी लिखते आरोपी पकड़ा गयादिनांक 17.10.2026 को टाउन पेट्रोलिंग एवं जुर्म-जरायम पतासाजी के दौरान पुलिस टीम ने माइंस रोड स्थित शहीद अस्पताल, दल्लीराजहरा के सामने सट्टा-पट्टी लिखते हुए **कमल रामटेके**, पिता स्वर्गीय रामेश्वर रामटेके, उम्र 45 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 19, राजहरा को पकड़ा।आरोपी के कब्जे से एक लाइनिंग कागज में लिखी सट्टा-पट्टी पर्ची, **₹882 नगद एवं एक डॉट पेन** जप्त किया गया। आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत कार्रवाई की गई।### 02. रेलवे क्रॉसिंग चिखलाकसा के पास दूसरा आरोपी गिरफ्तारइसी दिन पुलिस टीम द्वारा रेलवे क्रॉसिंग चिखलाकसा के पास कार्रवाई करते हुए **राजाराम आरदे**, पिता दुकालु राम, उम्र 62 वर्ष, निवासी ग्राम कारूटोला, थाना राजहरा को सट्टा-पट्टी लिखते हुए पकड़ा गया।आरोपी के कब्जे से एक लाइनिंग कागज में लिखी सट्टा-पट्टी पर्ची,
₹500 नगद एवं एक डॉट पेन** जप्त किया गया। आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई।
03. रेलवे क्रॉसिंग चिखलाकसा के पास तीसरा आरोपी पकड़ा गयापुलिस टीम ने रेलवे क्रॉसिंग चिखलाकसा के पास ही कार्रवाई करते हुए **केशव राम मंडावी, पिता रामजी मंडावी, उम्र 35 वर्ष, निवासी ग्राम कारूटोला, थाना राजहरा को सट्टा-पट्टी लिखते हुए पकड़ा।आरोपी के कब्जे से एक लाइनिंग कागज में लिखी सट्टा-पट्टी पर्ची, ₹1,200 नगद एवं एक डॉट पेन** जप्त किया गया। आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 की धारा 6 के तहत कार्रवाई की गईl
जप्त सामग्री का विवरणतीनों आरोपियों के कब्जे से कुल **₹2,582 नगद**, तीन सट्टा-पट्टी पर्चियां एवं तीन डॉट पेन जप्त किए गए हैं। पुलिस द्वारा प्रकरणों में वैधानिक कार्रवाई की गई है।### राजहरा पुलिस की आम नागरिकों से अपीलराजहरा पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि वे अवैध जुआ-सट्टा, अवैध शराब बिक्री, गांजा एवं नशीली दवाओं के कारोबार जैसी गैरकानूनी गतिविधियों से दूर रहें। ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों से अनुरोध है कि अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध अथवा अवैध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें तथा अपराधों की रोकथाम में पुलिस का सहयोग करें।पुलिस थाना दल्लीराजहरा, जिला बालोद (छत्तीसगढ़)मोबाइल नंबर: 9479192058
बस्तर की 150 साल पुरानी मुरिया दरबार परंपरा को मिटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं होगी — विधायक विक्रम मंडावी
बीजापुर 75 दिन तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन पर होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार का नाम बदलने की कोशिश बस्तर की आदिम परंपरा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का घृणित और सुनियोजित षड्यंत्र है। यह भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं की ओर से बस्तर के आदिवासियों के अस्तित्व पर सीधा हमला है।
विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों की आस्था, अस्मिता और जीवन का आधार है। विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में आगे कहा कि सिरहासार में लगने वाला मुरिया दरबार बस्तर रियासत की उस जीवंत लोक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मांझी-चालकी और आदिवासी समाज अपनी बात प्रशासन के सामने रखते थे। आज इसे “आम दरबार” कहकर मिटाने की कोशिश न केवल आदिवासियों का अपमान है, बल्कि माँ दंतेश्वरी का भी अपमान है।

विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि भाजपा की यह सोच उसी मानसिकता का हिस्सा है, जो बस्तर की जल-जंगल-जमीन और आदिवासी संस्कृति को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर बदलना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा इससे पहले जगदलपुर का मशहूर माड़िया चौक का नाम बदला गया अब मुरिया दरबार का नाम बदला जा रहा है, नाम बदलना कोई छोटी बात नहीं है यह आदिवासियों के ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का पहला कदम है।
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सभी आधिकारिक दस्तावेजों, आमंत्रण पत्रों और कार्यक्रम सूची में केवल “मुरिया दरबार” ही लिखा जाए।अन्यथा इसे लेकर उग्र आंदोलन करेगा।
ओरछा में 102 पौवा अवैध शराब के साथ दो आरोपी गिरफ्तार
नारायणपुर ओरछा थाना पुलिस ने अवैध देशी शराब के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 102 पौवा देशी मदिरा, कुल 18.360 बल्क लीटर शराब और परिवहन में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 16,360 रुपये बताई गई है।पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति मोटरसाइकिल क्रमांक CG-19-BQ-2811 से अवैध शराब लेकर बिक्री के लिए जा रहे हैं। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ओरछा-नारायणपुर मार्ग पर ग्राम बड़गुमर के पास मोटरसाइकिल रोककर तलाशी ली। इस दौरान दो बैग से 180 एमएल की 102 बोतलें बरामद हुईं, जिनकी कीमत 8,160 रुपये आंकी गई। वहीं, मोटरसाइकिल की कीमत 8,200 रुपये बताई गई है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जुरियाराम कावड़े (28), निवासी टाहकाकावाड़ा, वर्तमान निवास ओरछा मांझीपारा, और सुमन ध्रुव (30), निवासी इंदिरा आवासपारा, ओरछा के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध क्रमांक 09/2026 दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश किया गया।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल के निर्देशन तथा वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजेश पाण्डेय के नेतृत्व में की गई।
वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, कुसुमकसा रेलवे पुल निर्माण के लिए 4 करोड़ 21 लाख रुपये की स्वीकृति पर ग्रामीणों ने जताया आभार
जनपद सदस्य मंजू संजय बैस के प्रयासों की सराहना, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन एवं जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख के प्रति ग्रामीणों ने व्यक्त किया आभार
कुसुमकसा कुसुमकसा की वर्षों पुरानी समस्या रेलवे पुल निर्माण की मांग अब पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ गई है। रेलवे पुल के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 4 करोड़ 21 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर कुसुमकसा सहित आसपास के ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है। इस बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने की दिशा में लिए गए निर्णय के लिए ग्रामवासियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री यशवंत जैन एवं भाजपा जिलाध्यक्ष श्री चेमन देशमुख के प्रति आभार व्यक्त किया।इसी कड़ी में कुसुमकसा के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का प्रतिनिधिमंडल संबंधित जनप्रतिनिधियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने पहुंचा। इस अवसर पर शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि रेलवे पुल की समस्या लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। इस मांग को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे थे और अब निर्माण के लिए स्वीकृति मिलने से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद जगी है।इस अवसर पर जनपद सदस्य श्रीमती मंजू संजय बैस, सरपंच श्रीमती वेद बाई पिस्दा एवं क्षेत्र की सामाजिक कार्यकर्ता बहन आशा आर्य सहित भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और ग्रामवासी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल में ग्राम पंचायत गिद्धाली के सरपंच श्री कँवल सिंह, ग्राम पंचायत कुसुमकसा के उपसरपंच श्री नितिन जैन, श्री संतोष जैन, श्री पंकज जेठवानी, श्री खेमिन निर्मलकर, श्री पुष्पजीत बैस एवं श्री मनीष जेठवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।## मंजू संजय बैस ने कहा—जनता की समस्या का समाधान ही हमारा संकल्पजनपद सदस्य श्रीमती मंजू संजय बैस ने रेलवे पुल निर्माण के लिए स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कुसुमकसा की जनता लंबे समय से इस समस्या के समाधान की प्रतीक्षा कर रही थी। ग्रामीणों की परेशानी को दूर करना और क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस मांग को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने तथा उसके समाधान की दिशा में पहल करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री यशवंत जैन एवं जिलाध्यक्ष श्री चेमन देशमुख के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं के समाधान से होता है। रेलवे पुल निर्माण की स्वीकृति कुसुमकसा के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है और लंबे समय से उठाई जा रही मांग को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ ग्रामीणों को इस समस्या से राहत मिलेगी।## भाजपा नेता संजय बैस ने कहा—यह पूरे कुसुमकसा की सामूहिक जीत हैभाजपा नेता एवं पूर्व जनपद सदस्य श्री संजय बैस ने इस अवसर पर कहा कि **कुसुमकसा रेलवे पुल की स्वीकृति किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि वर्षों से इस समस्या को झेल रहे समस्त ग्रामवासियों की सामूहिक जीत है।** जनता की मांग को सुनना, उसे शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना ही जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का दायित्व है।उन्होंने कहा कि रेलवे पुल की समस्या के कारण क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों की इस मांग को लेकर लगातार प्रयास किए गए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नेतृत्व में शासन द्वारा 4 करोड़ 21 लाख रुपये की स्वीकृति मिलना कुसुमकसा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके लिए भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री यशवंत जैन एवं भाजपा जिलाध्यक्ष श्री चेमन देशमुख का मार्गदर्शन और सहयोग भी सराहनीय है।श्री बैस ने कहा कि जनपद सदस्य श्रीमती मंजू संजय बैस सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भाजपा कार्यकर्ताओं ने जनहित के विषयों को प्राथमिकता देते हुए अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि **जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और उस विश्वास पर खरा उतरना हमारा कर्तव्य है।** कुसुमकसा के विकास, ग्रामीणों की सुविधाओं और क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी सभी मिलकर प्रयास करते रहेंगे।उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार एवं सभी सहयोगी जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि रेलवे पुल का निर्माण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्द आगे बढ़े, ताकि लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।## ग्रामीणों में खुशी, शीघ्र निर्माण की उम्मीदरेलवे पुल निर्माण के लिए स्वीकृति मिलने से कुसुमकसा एवं आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से चली आ रही मांग पर निर्णय होने से उन्हें राहत की उम्मीद मिली है। उन्होंने शासन से आग्रह किया कि निर्माण संबंधी आगामी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कर कार्य को धरातल पर उतारा जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को जल्द सुविधा मिल सके।इस अवसर पर उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रदेश सरकार, भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों तथा इस मांग को आगे बढ़ाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। कुसुमकसा रेलवे पुल की स्वीकृति को ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
नक्सलमुक्त बस्तर में बह रही आस्था की बयार, एसपी सिन्हा परिवार के साथ पहुंचे मां दंतेश्वरी के दरबार में
संभाग के देवी धामों में श्रद्धालुओं की संख्या में हुई बेतहाशा वृद्धि
मतांतरण गतिविधियों पर विराम, अब चल पड़ी सनातन की लहर
अर्जुन झा
जगदलपुर नक्सल मुक्त बस्तर में अब अमन के साथ आस्था की भी बयार बहने लगी है। संभाग के देवी धामों में दर्शनर्थियों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। लोग भयमुक्त होकर देवी मां के दरबारों में पहुंच रहे हैं। वहीं गांव गांव में मातारानी की प्रतिमा स्थापित कर ग्रामीण आराधना में जुटे हैं। मतांतरण गतिविधियों पर विराम लगने के बाद ग्रामीणों में आस्था का पुनर्जागरण हुआ है और सनातन की लहर चल पड़ी है। वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मातारानी के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में बस्तर पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा भी अपने परिवार के साथ माई दंतेश्वरी के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने सपत्नीक दर्शन कर रथ परिक्रमा का भी दीदार किया।
बस्तर कभी धार्मिक जागरण का केंद्र रहा है। यहां के प्रकृति पुजारी आदिवासी भगवान भोलेनाथ और मां अंबे के उपासक रहे हैं। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा स्थित माई दंतेश्वरी का धाम, बारसूर की पहाड़ी की चोटी पर स्थापित पाषाण निर्मित एशिया की सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा, जगदलपुर का दंतेश्वरी मंदिर, सुकमा जिले रामाराम स्थित श्रीराम मंदिर, कांकेर स्थित कंकालीन माता मंदिर इस प्राचीन आस्था के जीवंत प्रमाण हैं। नक्सलियों के साथ ही मिशनरी ने भी इस आस्था को कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। नक्सलियों ने बारसूर की ऐतिहासिक और अति प्राचीन प्रतिमा को गिरा दिया था। वहीं मिशनरी ने धर्मांतरण का ऐसा कुचक्र चलाया कि सनातनी आस्था लगभग तहस नहस हो गई थी। स्थानीय लोगों को उनकी आस्थासे विमुख कर दिया गया। गणेश पूजा, दुर्गा पूजा और पारंपरिक तीज त्यौहार मनाने पर बंदिशें लगाई जा रही थीं। लाउड स्पीकर से गणेश पूजा और दुर्गा पूजा न मनाने के लिए कहा जाता था। सरकारें बदली, नक्सलवाद का खात्मा हुआ और धर्मांतरण गतिविधियों पर भी विराम लग गया। धर्म से विमुख हो चुके लोग स्वस्फूर्त होकर मूल धर्म में लौटने लगे हैं। अब पूरे बस्तर में सनातन और स्थानीय परंपराओं तथा धार्मिक आस्था के पुर्नजागरणका दौर चल पड़ा है। लोग देवी देवताओं की शरण में लौट आए हैं। दंतेवाड़ा के प्रसिद्ध देवी धाम दंतेश्वरी मंदिर में इस बार की नवरात्रि के दौरान अपेक्षाकृत अपार भीड़ उमड़ रही है। पदयात्रियों की संख्या में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। दूर दूर के गांवों से हजारों श्रद्धालु के नंगे पांव चलकर माई दंतेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। नक्सल घटनाओं के चलते पुलिस और प्रशासन के जो अधिकारी चिंता में घुलते रहते थे, वे भी अब बेफिक्र होकर मातारानी के दर्शन के लिए पहुंचने लगे हैं। बीती रात बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने अपनी धर्मपत्नी और बिटिया के साथ जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंच कर मत्था टेका। सिन्हा दंपत्ति ने मातारानी से बस्तर में शांति बनाए रखने की कामना की। और श्रीमती सिन्हा ने रथ परिक्रमा का भी जायजा लिया। इस दौरान सिन्हा अपनी नन्ही बिटिया को कंधे पर बिठाए नजर आए। जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी को एक आम नागरिक की तरह अपने बीच पाकर अन्य श्रद्धालु हैरत में पड़ गए। कई लोगों ने अपने मोबइल फोन के कैमरे में इस दृश्य को कैद भी किया। कुल मिलाकर ये सारे नजारे साबित करते हैं कि सुशासन सरकार में अब सब कुछ कुशल मंगल है।
चाकू दिखाकर लोगों को डरा रहा बदमाश गिरफ्तार
जगदलपुर नगर के संजय मार्केट सुलभ शौचालय के पास धारदार चाकू लहराकर आमजनों डराने वाले एक बदमाश को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के नेतृत्व मेें बस्तर पुलिस द्वारा अपराधी तत्वों के वखिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में संजय मार्केट के सुलभ शौचालय के पास धारदार चाकू को लहराकर आमजनों को डराने धमकाने वाले कालीपुर अटल आवास धर्मपुरा निवासी 25 वर्षीय बदमाश सोम कुमार नाग पिता गठलू नाग को गिरफ्तार किया गया है।आरोपी के कब्जे से एक धारदार चाकू जप्त किया गया है। आरोपी को न्यायालय में न्यायिक रिमांड पर पेश किया गया, जहां से उसे जिसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। आरोपी को निरीक्षक लीलाधर राठौर के नेतृत्व में उप निरीक्षक अरुण मरकाम, अमित सिदार, प्रशिक्षु उप निरीक्षक थाना इंचार्ज रानी सोनी, प्रधान आरक्षक राजेश राजपूत, विनोद, आरक्षक महेंद्र पटेल, महंगू कश्यप, वरुण ठाकुर, हरीश, बंसीलाल, रंगलाल खरे की टीम ने पकड़ा।





