पीसीसी चीफ दीपक बैज ने बस्तरवासियों के हित में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष रखे 8 मुद्दे

0
34
  •  शाह के बार-बार बस्तर दौरे पर भी उठाए सवाल

अर्जुन झा

जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बार बार बस्तर प्रवास पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बस्तर के हित में आठ बड़े मुद्दे अमित शाह के समक्ष रखे हैं और आठ सवाल भी पूछे हैं।

दीपक बैज ने कहा है यह समझना पड़ेगा कि अमित शाह बार-बार बस्तर क्यो आ रहे है? छत्तीसगढ़ में जब 15 साल भाजपा की सरकार थी तक बस्तर नही आए, लेकिन अब बार- बार क्यो आ रहे है? अमित शाह बस्तर आते है तब नक्सलियों की एक चिट्ठी आती है कि हम चर्चा करने और युद्ध विराम के लिए तैयार हैं।  बैज ने कहा कि यह अमित शाह के लिए तैयार की गई स्क्रिप्ट और पॉलिटिकल स्टंट है। ताकि अमित शाह बस्तर में जाकर बोलें कि हमारी सरकार की कार्रवाई से नक्सली डर गए हैं और सरेंडर कर रहे हैं। सोची समझी प्लानिंग के तहत काम किया जा रहा है। अमित शाह के बस्तर आने का मकसद नक्सलवाद का खात्मा करना नहीं, बल्कि चहेते उद्योगपतियों के जल, जंगल, जमीन, माइंस देने के लिए रास्ता तैयार करने का है। बस्तर में कीमती खनिज संपदा है, उद्योगपतियों के लिए जमीन तलाशने वे बस्तर आए हैं। दीपक बैज ने सीधा आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार अंबानी और अडानी को बस्तर की खनिज संपदा सौंपने की तैयारी में है। दीपक बैज ने अमित शाह से 8 सवाल पूछते हुए जवाब मांगा है। उन्होंने कहा है कि शाह गारंटी देंगे बस्तरियों के मंशा के खिलाफ अडानी या अन्य उद्योगपतियों की बस्तर में इन्ट्री नहीं होगी? बस्तर के लोगों के मन में शंका पैदा हो रही है कि मोदी के मित्र अडानी के लिए रेड कारपेट बिछाने भाजपा के नेता बार-बार बस्तर आ रहे हैं। अमित शाह इस बात की गारंटी देंगे कि बस्तर के आदिवासियों तथा बस्तरियों की भावनाओं के विपरीत बस्तर में अडानी एवं अन्य उद्योगपतियों की एंट्री नहीं होगी। श्री बैज ने पूछा है कि एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर में क्यों नहीं आ रहा?*

एनएमडीसी लौह अयस्क तो बस्तर से निकलती है और उसे दुनिया भर में भेजती है परंतु अपना मुख्य कार्यालय बस्तर की बजाए हैदराबाद में बनाए बैठी है। पूर्व में बस्तर में यातायात के अभाव से यह निर्णय ठीक लगता था परंतु वर्तमान में बस्तर भी अब सर्वसुविधायुक्त बन चुका है एनएमडीसी को अपना मुख्यालय अब बस्तर में बनाना चाहिए ताकि बस्तर के बेरोजगार युवाओं के लिए एनएमडीसी में रोजगार का द्वार खुल सके। अमित शाह बताएं एनएमडीसी का मुख्यालय बस्तर में क्यों नहीं आ रहा? दीपक बैज ने सवाल किया है कि नंदराज पहाड़ की लीज कें द्र रद्द क्यों नहीं कर रहा? नंदराज पहाड़ से ग्रामीणों की आस्था जुड़ी हुई है वे उस पहाड़ को देवतुल्य मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। बैलाडीला नंदराज पहाड़ लौह अयस्क के दोहन हेतु रमन सरकार ने 2016-17 में अडानी को लीज पर दिया था। जिसके विरोध में क्षेत्र के ग्रामीणों ने लंबा संघर्ष किया। भूपेश बघेल सरकार ने लीज रद्द कर दी थी, परंतु आज तक केन्द्र ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी नही किया है। अमित शाह बताएं अडानी का हित बड़ा है या आदिवासियों की आस्था? पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा है कि बस्तर का नगरनार स्टील प्लांट बस्तर वासियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है जिसमें मोदी सरकार अपने उद्योगपति मित्र को फायदा पहुंचाने विनिवेश करना चाहती है। बस्तर विशेषकर लोगो की भावना से जुड़ा नगरनार संयंत्र बेचने की कार्यवाही कब बंद होगी? नगरनार नहीं बिकेगा इसकी गारंटी देंगे? दीपक बैज ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता के हित में भूपेश सरकार ने विधानसभा से आरक्षण संशोधन विधेयक पारित करवा कर राजभवन भेजा था, इस विधेयक में सर्व समाज के लिए आरक्षण का प्रावधान है जिसमें आदिवासियों के लिए 32 प्रतिशत ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग के गरीबों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। अमित जवाब दें कि आदिवासियों का 32 प्रतिशत आरक्षण कब तक राजभवन में लंबित रहेगा?

बैज ने कहा है कि सन 2017-18 में दल्लीराजहरा रेलमार्ग के निर्माण का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने भानुप्रतापपुर से किया था और मंच से आश्वस्त किया था कि 2021 में यह बनकर तैयार हो जाएगा और इस रेलमार्ग में यात्री ट्रेनें सरपट दौड़ेगी, परंतु आज तक रेल लाइन का कार्य पूरा नहीं हुआ है जो कि बस्तर की जनता के साथ छलावा है। अमित शाह बताएं यह कब पूरी होगी? प्रदेश कांग्रेस प्रमुख दीपक बैज ने कहा है कि भारत माला ओडीशा के नवरंगपुर से होकर जा रही है नगरनार से भारत माला की दूरी 32 किमी के आसपास है केन्द्र सरकार जगदलपुर से भारत माला तक जोड़ने पहल करे या एनएमडीसी नगरनार से भारत माला तक सड़क निर्माण कराए। उन्होंने कहा है कि bजल, जंगल, जमीन के अधिकारों से स्थानीय आदिवासियों को वंचित करने और खनन माफिया अपने पूंजीपति मित्रों को अनुचित लाभ पहुंचाने 2006 के वन अधिकार अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों को मोदी सरकार ने शिथिल कर दिया है क्या इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री आदिवासियों से माफी मांगेंगे?