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आपदा पीड़ितों की मद्द हेतु आगे आया उत्कल समाज

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कलेक्टर को सौंपा 21 हजार का चेक

जगदलपुर बस्तर संभाग में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के संकट को देखते हुए सामाजिक संगठन पीड़ित मानवता की सेवा में आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में उत्कल समाज बस्तर संभाग ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

समाज ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि राहत शिविरों के संचालन के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्यों में प्रशासन का हाथ बंटाने के लिए सहयोग राशि दी जाएगी। इसी निर्णय के परिपालन में मंगलवार को उत्कल समाज का एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को 21 हजार रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर सीपी बघेल और नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने समाज की इस मानवीय पहल और तत्परता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। चेक सौंपने के दौरान उत्कल समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष राजेश दास, सचिव सुमीत महापात्र, उपाध्यक्ष मथुरा तिवारी, कोषाध्यक्ष मनोज महापात्र, संगठन सचिव रमेश नंद, कार्यालय सचिव अच्युत सामंत तथा कार्यकारिणी सदस्य अतुल दास सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

बाल कल्याण समिति ने किया औचक निरीक्षण

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परखी बच्चों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्थाएं

जगदलपुर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ) जिला बस्तर द्वारा जिले की पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाओं का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शासकीय बाल गृह (बालक), बालिका गृह, खुला आश्रय गृह (बालक), बस्तर सामाजिक जन विकास समिति तथा सेवा भारती (मातृ छाया) विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी, जगदलपुर का विस्तृत अवलोकन किया गया। बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ)जिला बस्तर के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्रही ने बताया कि निरीक्षण के दौरान संस्थाओं में बच्चों के लिए उपलब्ध साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था तथा समग्र देखरेख की गुणवत्ता का गहन परीक्षण किया गया।

समिति ने संस्था अधीक्षकों एवं कर्मचारियों को बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं बाल हितैषी व्यवहार बनाए रखने तथा सभी आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर करने के निर्देश दिए। बारिश के मौसम को देखते हुए समिति ने सभी संस्थाओं को बालगृहों में निवासरत बच्चों के लिए तत्काल छाता एवं रेनकोट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।समिति ने बताया कि जिले की सभी पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाएं किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो रही हैं। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन संस्थाओं का प्रत्येक माह कम से कम दो बार नियमित निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान समिति सदस्यों ने संस्थाओं में संधारित विभिन्न पंजियों एवं अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण किया। साथ ही बालक-बालिकाओं एवं कर्मचारियों से व्यक्तिगत चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। पूर्व निरीक्षण के दौरान बताई गई कमियों का संस्थाओं द्वारा सफलतापूर्वक निराकरण किए जाने पर समिति ने संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण उपरांत बाल कल्याण समिति ने संस्थाओं के कार्य एवं व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए भविष्य में भी इसी स्तर की गुणवत्ता एवं बच्चों के सर्वोत्तम हितों को सुनिश्चित करने की अपेक्षा व्यक्त की। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य संतोष जोशी, वर्षा श्रीवास्तव, धनेश्वरी वर्मा सहित संबंधित संस्थाओं के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जगदलपुर में बाढ़ से भारी नुकसान, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में सैकड़ों वाहन डूबे

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वार्ड-41 के लालबाग क्षेत्र में रातोंरात बिगड़े हालात; स्थानीय लोगों ने बताया—करीब 1,500 दोपहिया और 100 से अधिक चारपहिया वाहन प्रभावित

जगदलपुर। भारी बारिश के बाद जगदलपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। लालबाग स्थित चंद्रशेखर आजाद वार्ड क्रमांक 41 की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बड़ी संख्या में वाहन पानी में डूब गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, कॉलोनी में करीब 1,500 दोपहिया और 100 से अधिक चारपहिया वाहन प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की प्रशासनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।बाढ़ का पानी रात में तेजी से बढ़ने के कारण कई वाहन मालिकों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का मौका नहीं मिला। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ दोपहिया वाहन नालियों और निचले हिस्सों में बह गए। पानी उतरने के बाद वाहनों को हुए नुकसान का आकलन शुरू हुआ।पत्रकार ओमप्रकाश साहू की कार समेत तीन वाहन प्रभावितईडब्ल्यूएस हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में शिव मंदिर के पास रहने वाले पत्रकार ओमप्रकाश साहू ने बताया कि रात में अचानक पानी बढ़ने लगा।

कुछ ही समय में पानी पार्किंग और घरों के आसपास पहुंच गया।साहू के अनुसार, उनकी Ertiga कार (CG 17 LA 9265) पूरी तरह पानी में डूब गई। उनकी Activa स्कूटी और Pulsar मोटरसाइकिल भी पानी के बहाव में नाली की ओर बह गईं। उन्होंने बताया कि इस घटना में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सर्वे के बाद होगा स्पष्टबाढ़ का पानी लंबे समय तक वाहनों में भरे रहने से इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रभावित लोगों के अनुसार, बड़ी संख्या में वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि, कुल नुकसान और प्रभावित वाहनों की वास्तविक संख्या का स्पष्ट आंकड़ा प्रशासनिक सर्वे के बाद ही सामने आएगा।स्थानीय लोगों ने प्रभावित क्षेत्र में नुकसान का सर्वे कराकर राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

आपदा पीड़ितों की मद्द हेतु आगे आया उत्कल समाज

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कलेक्टर को सौंपा 21 हजार का चेक

जगदलपुर बस्तर संभाग में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के संकट को देखते हुए सामाजिक संगठन पीड़ित मानवता की सेवा में आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में उत्कल समाज बस्तर संभाग ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

समाज ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि राहत शिविरों के संचालन के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्यों में प्रशासन का हाथ बंटाने के लिए सहयोग राशि दी जाएगी। इसी निर्णय के परिपालन में मंगलवार को उत्कल समाज का एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को 21 हजार रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर सीपी बघेल और नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने समाज की इस मानवीय पहल और तत्परता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। चेक सौंपने के दौरान उत्कल समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष राजेश दास, सचिव सुमीत महापात्र, उपाध्यक्ष मथुरा तिवारी, कोषाध्यक्ष मनोज महापात्र, संगठन सचिव रमेश नंद, कार्यालय सचिव अच्युत सामंत तथा कार्यकारिणी सदस्य अतुल दास सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

भेजपदर में बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आया बीजेपी महिला मोर्चा, गीता मिश्रा ने बांटी राहत सामग्री और खीर

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जगदलपुर, बाढ़ से अति प्रभावित क्षेत्र भेजपदर के प्रभावितों को बीजेपी की वरिष्ठ नेता गीता मिश्रा ने आज लगातार तीसरे दिन भी राहत पहुंचने का कार्य किया,सभी जरूरतमंदों को कपड़े दवाई ,राशन का सहयोग करने के पश्चात आज इनके द्वारा इन्हीं सैकड़ों ग्रामीण के बीच खीर बांटी गई, वहां उपस्थित महिला पुरुषों और बच्चों ने बताया कि गीता मैडम लगातार हमारे बीच उपस्थित होकर हमारा सहयोग कर रही है, वहीं बीजेपी नेता गीता मिश्रा ने कहा कि हम पार्टी के दिए गए निर्देश का पालन कर बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे है उन्होंने महिला मोर्चा नगरनार की महिला बहनों को धन्यवाद दिया कि वे इस विकट स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़े होकर उनका सहयोग किया।

प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री बस्तर के आदिवासियों का देवस्थान नंदराज पर्वत को उद्योगपतियों को सौंपने में लगे हैं- विक्रम मंडावी

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7200 पेड़ काटने की मंजूरी और ग्रामसभा के बिना खनन शुरू किए जाने पर विक्रम मंडावी का भाजपा और विष्णुदेव साय पर तीखा हमला

बीजापुर दिनांक-30-09-2026सात साल पहले आदिवासियों के उग्र आंदोलन के बाद जिस नंदराज पर्वत पर खनन रुक गया था, उसी पवित्र पहाड़ पर विष्णुदेव साय सरकार ने फिर लौह अयस्क निकालने और हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रहे है। वन विभाग ने पहले चरण में ही 7200 पेड़ काटने की मंजूरी दे दी है। लौह अयस्क के सैंपल निकलकर नगरनार भेजे जा चुके हैं। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने इसे आदिवासी आस्था पर सीधा हमला बताते हुए नंदराज पर्वत पर लौह खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग सरकार से की है।विक्रम मंडावी ने अपने अपने प्रेस बयान में कहा कि बस्तर के आदिवासी नंदराज पहाड़ को सिर्फ पहाड़ नहीं मानते। यह पिटोर रानी माता और नंदराज देवता का निवास है। 2019 में 50 गांवों के लोगों ने किरंदुल में महाआंदोलन किया था। फर्जी ग्रामसभा के आरोप लगे थे। आज वही पहाड़ फिर उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने अपने ही समुदाय की आस्था और जंगल को उद्योगपतियों को क्यों सौंप दिया है?विधायक विक्रम मंडावी का आरोप है कि 2017 की ग्रामसभा पहले ही शून्य घोषित हो चुकी थी। उसमें मृत व्यक्तियों के अंगूठे और फर्जी दस्तखत पाए गए थे। जांच रिपोर्ट शासन के पास लंबित है। नई ग्रामसभा की मंजूरी के बिना काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पेसा कानून और वन अधिकार कानून की खुली अवहेलना हो रही है। अनुसूचित क्षेत्र में खनन से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की विष्णुदेव साय सरकार कानून को दरकिनार कर रही है।विधायक विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि विष्णुदेव साय खुद आदिवासी समुदाय से हैं। बस्तर के लोग उनसे उम्मीद करते थे कि वे जल, जंगल, जमीन और आस्था की रक्षा करेंगे। इसके बजाय उनके कार्यकाल में नंदराज जैसे पवित्र पर्वत पर फिर खनन की तैयारी शुरू हो गई। भाजपा की डबल इंजन सरकार बस्तर के संसाधनों को उद्योगपतियों तक पहुँचाने में लगी हुई है। नंदराज उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है।खनन के नाम पर आदिवासियों के देवता का निवास नष्ट किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरण नहीं, आस्था पर हमला है। विधायक विक्रम मंडावी ने सीधा सवाल किया सरकारें जनता के लिए बनती हैं। सत्ता में आने के बाद जनता के लिए काम करना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार बनने के बाद पूरा ध्यान इस बात पर है कि बस्तर का जल, जंगल, जमीन और खनिज कैसे उद्योगपतियों तक पहुँचे। सवाल साफ है यह सरकार किसके लिए काम कर रही है? जनता के लिए या उद्योगपतियों के लिए?आदिवासी मुख्यमंत्री को इस फैसले की जवाबदेही लेनी होगी। नंदराज पहाड़ को बचाने का संघर्ष आस्था का संघर्ष है, जंगल का संघर्ष है और बस्तर की पहचान का संघर्ष है। हम इस लड़ाई में आदिवासी समाज के साथ खड़े हैं।

बंदूक छोड़ कलम को अपनी ताकत बनाई आत्मसमर्पित नक्सली अर्जुन ने

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प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की दसवीं बोर्ड परीक्षा

शिक्षादूत बनकर शिक्षा की अलख जगाना चाहता है अर्जुन ओयाम

अर्जुन झा-

जगदलपुर भारत भूमि अनादि काल से सदमार्ग पर चलने और पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देने वाली भूमि रही है। यहां एक खूंखार डाकू वाल्मीकि का ऐसा हृदय परिवर्तन हुआ कि महर्षि का दर्जा प्राप्त करने में सफल हो गए। रामायण ग्रंथ की रचना कर महर्षि वाल्मीकि कालजयी हो गए। ये तो थी त्रेतायुग की बात, कलयुग में भी अब ऎसी गाथाएं घटित होने लगी हैं। जो नक्सली कभी बंदूक को अपनी ताकत समझता था और उसके दम पर आतंक मचाता था, आज उसी नक्सली ने बंदूक छोड़ कलम को अपनी ताकत बना लिया है। आईए आपको सुनाते हैं कलयुग के इस वाल्मीकि की गाथा कलयुग के इस वाल्मीकि का नाम है अर्जुन। द्वापर युग के अर्जुन का निशाना अचूक था, वैसे ही कलयुग के इस अर्जुन की बंदूक की गोली भी हमेशा निशाने को हिट करती थी, मगर आज के बदल चुके अर्जुन की कलम भी कम पैनी नहीं है। बंदूक छोड़ कलम पकड़ने की चाहत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने अर्जुन को “शिक्षा वीर” बना दिया है।

आज के इस अर्जुन का पूरा नाम है अर्जुन ओयाम। केंद्र और राज्य की सरकारों की नीतियों एवं योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सली अर्जुन ने समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया और बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में उसने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद तो अर्जुन ने तमाम कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए पुनर्वास केंद्र में रहकर पढ़ाई शुरू कर दी। उसने 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी और 500 में 335 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। अर्जुन की इस दृढ़ इच्छाशक्ति को बल और हौसला दिया पुलिस के बड़े अधिकारियों ने। पुलिस के अफसर लगातार अर्जुन का मनोबल बढ़ाते रहे। परीक्षा के लिए आवश्यक पुस्तकें और संसाधन उसे उपलब्ध कराए। परीक्षा के फार्म भरने से लेकर उनकी परीक्षा की तैयारी में सहायक बने। अर्जुन ओयाम वर्ष 2010 में माओवादी संगठन में शामिल हुआ था, लेकिन संगठन में रहते हुए भी उसने पढ़ाई जारी रखने की अपनी इच्छा को कभी समाप्त नहीं होने दिया। अक्टूबर 25 में 210 सशस्त्र माओवादियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण करने के बाद अर्जुन ने अपने जीवन की नई शुरुआत शिक्षा के माध्यम से करने का संकल्प लिया। समर्पण के बाद अर्जुन ने 10वीं की परीक्षा की तैयारी की और अपने 7 अन्य साथियों के साथ 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह उपलब्धि उसके दृढ़ संकल्प, मेहनत और बदलते जीवन की प्रेरणादायक मिसाल है। बीजापुर एसपी उमेश प्रसाद यादव ने अर्जुन की इस उपलब्धि के लिए उसे बधाई दी और आगे की पढ़ाई के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

अब ये है अर्जुन का लक्ष्य

अब अर्जुन का लक्ष्य 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने गांव तोड़का में शिक्षादूत के रूप में कार्य करना है। वह गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके जीवन में ज्ञान का उजियारा फैलाना चाहता है। अर्जुन का सपना है कि गांव के बच्चे पढ़ें, आगे बढ़ें और शिक्षा के माध्यम से गांव एवं पूरे क्षेत्र के विकास की नई कहानी लिखें। पुनर्वासित नक्सली अर्जुन ओयाम का कहना है- “बंदूक से नहीं, शिक्षा के उजियारे से बदलेगा गांव का भविष्य।”

पितृ पक्ष में गणेश विसर्जन और भंडारे को लेकर हिंदू सेना ने उठाए सवाल, धार्मिक मर्यादा के अनुरूप आयोजन की अपील

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दल्ली राजहरा। गणेशोत्सव के समापन के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन और विभिन्न समितियों द्वारा आयोजित भंडारे एवं अन्य कार्यक्रमों को लेकर हिंदू सेना संगठन ने धार्मिक परंपराओं और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। हिंदू सेना ने उन सभी गणेश समितियों का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पितृ पक्ष प्रारंभ होने से पहले गणेश प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया। संगठन का कहना है कि गणेशोत्सव और पितृ पक्ष दोनों की अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं हैं, इसलिए आयोजकों को तिथि, समय और कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।संगठन संरक्षक श्रीमती आशा सिंह ने कहा कि गणेशोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन धार्मिक परंपरा और निर्धारित अवधि के अनुरूप श्रद्धापूर्वक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संगठनों और ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ द्वारा भी समय-समय पर गणेश विसर्जन समय पर किए जाने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। यदि किसी समिति को झांकी, सांस्कृतिक कार्यक्रम अथवा शोभायात्रा आयोजित करनी है तो उसका स्वरूप और समय अलग निर्धारित किया जा सकता है, ताकि धार्मिक अनुष्ठान और सार्वजनिक मनोरंजन के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे।हिंदू सेना जिला अध्यक्ष श्रीमती नंदा पसीने ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण, श्रद्धा और तर्पण से जुड़ा महत्वपूर्ण समय माना जाता है। ऐसे में इस अवधि में गणेशोत्सव से संबंधित भोग-भंडारे अथवा अन्य कार्यक्रम आयोजित करने से पहले स्थानीय धार्मिक परंपराओं और विद्वानों की राय पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन किसी की आस्था या भावना को ठेस पहुंचाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक आयोजनों में परंपरा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करता है। उन्होंने समय पर गणेश विसर्जन करने वाली समितियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।हिंदू सेना मातृशक्ति शहर अध्यक्ष श्रीमती संगीता रजक ने कहा कि गणेश विसर्जन के दौरान डीजे और संगीत आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन विसर्जन का मूल उद्देश्य भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदाई देना है। उन्होंने कहा कि विसर्जन जुलूस में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और परिवार भी शामिल होते हैं, इसलिए आयोजकों को सार्वजनिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश श्रद्धालु पूरी आस्था और अनुशासन के साथ विसर्जन में शामिल होते हैं, लेकिन यदि कुछ लोग नशे की स्थिति में हुड़दंग, अशोभनीय नृत्य या अनुचित व्यवहार करते हैं तो आयोजक समितियों को ऐसे मामलों पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए।हिंदू सेना मातृशक्ति महामंत्री श्रीमती पुष्पा शांडिल्य ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की भव्यता केवल बड़े डीजे, अधिक भीड़, आतिशबाजी या देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और अनुशासन से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति और परंपराओं की बात करने वाले संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने आयोजनों में भी इन मूल्यों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। गणेशोत्सव समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बने, इसके लिए सभी समितियों को आयोजन के स्वरूप और उसके सामाजिक प्रभाव पर आत्ममंथन करना चाहिए।हिंदू सेना ने गणेश समितियों से अपील की कि आगामी आयोजनों में धार्मिक परंपराओं, प्रशासनिक नियमों, ध्वनि मर्यादा, महिलाओं एवं परिवारों की गरिमा तथा सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखा जाए। संगठन ने कहा कि भगवान गणेश के प्रति सच्ची श्रद्धा यही है कि उनकी विदाई भी आस्था, शांति और सम्मान के साथ की जाए।

पितृ पक्ष में गणेश विसर्जन और भंडारे पर उठे सवाल, धार्मिक परंपरा के अनुरूप आयोजन करने की बुद्धि देव भगवान गणेश , हिंदू सेना संगठन दल्ली राजहरा

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दल्ली राजहरा। हिंदू सेना उन सभी गणेश समितियां का तहे दिल से आभार व्यक्त करती जिन्होंने पितृ पक्ष से पहले गणेश विसर्जन कर दिया है आपको बता दें कि गणेशोत्सव के समापन के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन और विभिन्न गणेश समितियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को लेकर इस बार धार्मिक परंपरा, आयोजन की मर्यादा और कार्यक्रमों के स्वरूप पर चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान गणेश विसर्जन तथा भोग-भंडारे के आयोजन को लेकर धर्म और परंपरा से जुड़े लोगों ने आयोजकों से आत्ममंथन करने की अपील की है।समय पर विसर्जन की मांग पहले भी उठती रहीहिंदू संगठनों तथा ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ द्वारा समय-समय पर यह मांग उठाई जाती रही है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन गणेशोत्सव की निर्धारित धार्मिक अवधि में ही किया जाना चाहिए। इस वर्ष भी समय पर गणेश विसर्जन किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। इसके पीछे उद्देश्य यही बताया गया कि गणेशोत्सव और पितृ पक्ष दोनों की अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं हैं, इसलिए दोनों अवसरों को आपस में मिलाने के बजाय उनकी धार्मिक मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।गणेश विसर्जन और झांकी का आयोजन अलग-अलग होधर्मावलंबियों का कहना है कि यदि किसी गणेश समिति द्वारा झांकी, सांस्कृतिक कार्यक्रम या सार्वजनिक शोभायात्रा का आयोजन किया जाना है तो उसका समय और स्वरूप पहले से निर्धारित किया जा सकता है। गणेश प्रतिमा का धार्मिक विसर्जन और झांकी का सार्वजनिक आयोजन अलग-अलग रखा जाए, तो धार्मिक परंपरा भी बनी रहेगी और समितियों को भव्य कार्यक्रम करने का अवसर भी मिलेगा। इससे धार्मिक आयोजन और मनोरंजनात्मक कार्यक्रम के बीच स्पष्ट अंतर भी रहेगा।पितृ पक्ष में भोग-भंडारे को लेकर भी चर्चापितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्रद्धा से जुड़ा समय माना जाता है। ऐसे में इस अवधि में सार्वजनिक भोग-भंडारे अथवा अन्य कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर लोगों की अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी आयोजन से पहले स्थानीय धार्मिक परंपराओं और विद्वानों की राय लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए, ताकि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो।गणेश समितियों से धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपीलनगर में विभिन्न गणेश समितियां हर वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेशोत्सव का आयोजन करती हैं। समितियों द्वारा प्रतिमा स्थापना, पूजा-अर्चना, भजन, झांकी और विसर्जन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिंदू सेना का कहना है कि समितियों की भूमिका केवल आयोजन कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विसर्जन जुलूस में अनुशासन, धार्मिक वातावरण और सामाजिक मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी आयोजकों की होनी चाहिए।विसर्जन केवल डीजे और नृत्य तक सीमित न होगणेश विसर्जन के दौरान डीजे बजाने की परंपरा तेजी से बढ़ी है। डीजे और संगीत अपने आप में आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि गणेश विसर्जन का मूल उद्देश्य भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदाई देना है, न कि इसे केवल डीजे और नृत्य का कार्यक्रम बना देना। तेज ध्वनि, देर रात तक नृत्य और अनियंत्रित भीड़ के कारण कई बार धार्मिक वातावरण प्रभावित होता है।नशे की स्थिति में हुड़दंग पर लगे रोकयह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि विसर्जन में शामिल सभी लोग नशे में नहीं होते और अधिकांश श्रद्धालु पूरी आस्था एवं अनुशासन के साथ कार्यक्रम में शामिल होते हैं। लेकिन कुछ लोगों द्वारा शराब अथवा अन्य नशे की स्थिति में सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग, अशोभनीय नृत्य अथवा अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती हैं। ऐसे मामलों पर आयोजक समितियों और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।महिलाओं और परिवारों की मौजूदगी का भी रखा जाए ध्यानविसर्जन जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और परिवार शामिल होते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थान पर ऐसा नृत्य या व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता जिससे किसी महिला या परिवार को असहज स्थिति का सामना करना पड़े। आयोजकों को चाहिए कि डीजे और नृत्य के नाम पर होने वाले अशोभनीय प्रदर्शन पर स्वयं नियंत्रण रखें और विसर्जन को पारिवारिक एवं धार्मिक वातावरण में संपन्न कराएं।हिंदूवादी नेताओं से भी आत्ममंथन की अपेक्षाहिंदू धर्म और संस्कृति की बात करने वाले नेताओं तथा संगठनों से भी समाज के लोगों की अपेक्षा है कि वे केवल भाषणों और नारों तक हिंदू संस्कृति की बात सीमित न रखें, बल्कि धार्मिक आयोजनों की तिथि, स्वरूप और मर्यादा में भी उसका पालन दिखाई दे। यदि परंपराओं की रक्षा की बात करनी है तो सबसे पहले धार्मिक आयोजनों में परंपरा और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। यही वास्तविक सांस्कृतिक जिम्मेदारी मानी जाएगी।धर्म के नाम पर दिखावा नहीं, आस्था जरूरीगणेशोत्सव की भव्यता का मूल्यांकन केवल बड़े डीजे, अधिक भीड़, आतिशबाजी अथवा देर रात तक चलने वाले नृत्य से नहीं किया जाना चाहिए। आयोजन की वास्तविक सफलता इस बात में है कि भगवान गणेश की पूजा और विसर्जन श्रद्धा, शांति, अनुशासन तथा सामाजिक सद्भाव के साथ संपन्न हो। धार्मिअब आयोजकों को करना होगा आत्ममंथनगणेशोत्सव आस्था और सामाजिक एकता का पर्व है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि आयोजन समितियां स्वयं तय करें कि उनके कार्यक्रम से समाज को क्या संदेश जा रहा है। हिंदू सेना संगठन बालोद जिला अध्यक्ष नंदा पसीने, संगठन संरक्षक आशा सिंह, मातृशक्ति नगर अध्यक्ष संगीता रजक, मातृशक्ति महामंत्री पुष्पा शांडिल नाम प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया

30 सितंबर 2026राहुल गांधी को निर्वाचन आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : संजय पाण्डेय

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जगदलपुर | जनता से बार-बार पराजित कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही : महापौर जगदलपुरजगदलपुर। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जगदलपुर महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हालिया संयुक्त बयान ने SIR से जुड़े निर्णयों में आयोग के तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति को स्पष्ट कर दिया है।

ऐसे में कांग्रेस द्वारा आयोग में कथित मतभेदों को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पाण्डेय ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना पर्याप्त तथ्य के आरोप लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस को निर्वाचन आयोग से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए। निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने पूर्व दावों की समीक्षा करनी चाहिए और यदि उसके आरोप तथ्यहीन साबित होते हैं तो देश और संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।SIR पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी महत्वपूर्णमहापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय देते हुए निर्वाचन आयोग के इस अभ्यास की वैधानिक शक्ति को स्वीकार किया था। न्यायालय ने SIR को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने से जोड़ा।उन्होंने कहा कि—“जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी प्रक्रिया की वैधानिकता पर निर्णय दे चुकी हो और निर्वाचन आयोग स्वयं अपने निर्णयों की प्रक्रिया को स्पष्ट कर चुका हो, तब राजनीतिक आरोपों को तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।”चुनाव हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहींश्री पाण्डेय ने कहा कि चुनाव में हार या जीत लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। किसी राजनीतिक दल को चुनावी परिणामों से असहमति हो सकती है और वह कानूनी एवं संवैधानिक माध्यमों से सवाल उठा सकता है, लेकिन हर चुनाव के बाद EVM, निर्वाचन आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इसी संवैधानिक चुनावी व्यवस्था के माध्यम से सदन में पहुंचे हैं। इसलिए व्यवस्था में कमियों की शिकायत हो तो उसका समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के भीतर किया जाना चाहिए।“लोकतंत्र में आरोप नहीं, प्रमाण महत्वपूर्ण हैं”महापौर ने कहा—“लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का आधार है—मतदाता का विश्वास, निष्पक्ष प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान। राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन देश की संस्थाओं पर लगाए गए प्रत्येक आरोप के साथ ठोस तथ्य और प्रमाण भी होने चाहिए।”उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और न्यायालय के निर्णयों को गंभीरता से देखे।संजय पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे ठोस प्रमाण क्या हैं। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो उन्हें निर्वाचन आयोग तथा देश से माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने कहा कि—“देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी एक दल की नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की व्यवस्था है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान, चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करें।”

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