गौ सेवा आयोग सदस्य दीपक पनपलिया ने विधायक रूपु भतरा एवं पुलिस प्रशासन का जताया आभार
गौसेवक मुन्ना बजरंगी एवं रोहन घोष ने उठाई गौमांस तस्करी नेटवर्क की व्यापक जांच की मांग
जगदलपुर गौवंश संरक्षण के लिए बस्तर जिले के गौ सेवकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बीच पड़ोसी राज्य ओडिशा के कोटपाड़ में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई में 27 गायों को कत्लखाने से बचाया गया, वहीं मौके से लगभग 9 क्विंटल गौमांस भी बरामद किया गया है। बचाई गई गायों को सुरक्षित रखने एवं उनकी देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। गौरतलब है कि बस्तर जिले के गौ सेवकों ने ओडिशा के विधायक रूपु भतरा से मुलाकात कर गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण का विषय प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हुए प्रयासों के क्रम में कोटपाड़ में यह कार्रवाई हुई। पुलिस कार्रवाई के बाद कत्ल होने से बचाई गई 27 गायों में से 19 गायों को बस्तर जिले के कुरंदी स्थित हैप्पी कामधेनु गौशाला के सुपुर्द किया गया है, जबकि शेष 8 गायों को कोटपाड़ के स्थानीय गौपालकों को सौंप दिया गया। बस्तर के गौ सेवकों के अनुसार, इस मामले का एक गंभीर पहलू गौमांस के कारोबार का संभावित विस्तार छत्तीसगढ़ के जगदलपुर तक होना है। उनका कहना है कि पूर्व में पकड़े गए एक गौमांस तस्करी के आरोपी ने कथित तौर पर कोटपाड़ क्षेत्र से गौमांस का परिवहन कर उसका विक्रय करने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में गौ सेवकों ने संबंधित एजेंसियों से मामले की व्यापक जांच कर गौवंश वध, गौमांस के परिवहन और बिक्री से जुड़े संभावित नेटवर्क का पता लगाने की मांग की है। गौ सेवक मुन्ना बजरंगी ने कहा कि 27 गायों को कत्लखाने से बचाया जाना राहत की बात है, लेकिन मौके से लगभग 9 क्विंटल गौमांस की बरामदगी इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। गौवंश की सुरक्षा के लिए इस पूरे मामले से जुड़े लोगों, परिवहन के रास्तों और मांस की बिक्री के संभावित ठिकानों की भी जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।गौ सेवक रोहन घोष ने कहा कि ओडिसा में भाजपा की सरकार बनने के बाद कोटपाड़ में 27 गायों को बचाया जाना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसियों को मामले की तह तक जाकर यह पता लगाना चाहिए कि गौमांस का स्रोत क्या था, उसका परिवहन किन रास्तों से किया जा रहा था। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और ओडिशा के गौ सेवक आपसी समन्वय के साथ गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। गौ सेवा आयोग के सदस्य दीपक पनपलिया ने कोटपाड़ में गौवंश को बचाने तथा गौमांस बरामदगी की बड़ी कार्रवाई के लिए ओडिशा के विधायक रूपु भतरा एवं पुलिस विभाग के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले की गहन जांच कर गौवंश वध एवं गौमांस के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जगदलपुर छत्तीसगढ़ को यूं ही ‘धान का कटोरा’ नहीं कहा जाता। यहां की उपजाऊ धरती, धान की समृद्ध परंपरा और मेहनतकश अन्नदाताओं ने राज्य की पहचान को विशिष्ट बनाया है। लेकिन जब अन्न उपजाने वाला ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने, समय पर भुगतान कराने और सरकारी व्यवस्थाओं की जटिलताओं से जूझने को विवश हो, तब यह सवाल केवल कृषि का नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय और ग्रामीण विकास का भी बन जाता है। इसी संदर्भ में भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ द्वारा 27 अक्टूबर को आयोजित ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ को अन्नदाताओं की समस्याओं, अधिकारों और अपेक्षाओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के एक महत्त्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।
विगत वर्षों में प्रदेश के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति अपेक्षाकृत सुप्तप्राय रहे हैं। अधिकारों के प्रति जागरूकता और संगठित होकर अपनी माँगों को प्रभावी ढंग से उठाने की आवश्यकता के बावजूद, प्रदेशव्यापी स्तर पर ऐसी सक्रियता कम दिखाई देती थी। लेकिन पिछले एक वर्ष से भारतीय किसान संघ के सतत प्रयासों ने इस स्थिति में एक नई हलचल पैदा की है। आज छत्तीसगढ़ के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग, सक्रिय और संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वे अपनी समस्याओं को केवल व्यक्तिगत कठिनाई मानकर सहने के बजाय, सामूहिक रूप से उनके समाधान की मांग कर रहे हैं। इसी बदलती चेतना और संगठनात्मक सक्रियता का परिणाम है कि 27 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में आयोजित ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ में उठी आवाजों से पूरा प्रदेश अन्नदाताओं के अधिकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा। यह रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश के कृषि समाज में बढ़ती अधिकार चेतना और संगठित भागीदारी का प्रतीक भी है।भारतीय किसान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री मनीष शर्मा के अनुसार संघ अन्नदाताओं के अधिकारों और उनकी उन्नति के लिए तहसील से जिला और प्रदेश स्तर तक निरंतर प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि अन्नदाताओं के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह वक्तव्य संगठन की उस भूमिका को रेखांकित करता है, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली कृषि संबंधी समस्याओं को व्यापक मंच पर उठाकर शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। हालाँकि, इन प्रयासों की वास्तविक सफलता इस बात से भी तय होगी कि उठाई गई माँगों पर कितना ठोस संवाद होता है और अन्नदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए कितनी समयबद्ध कार्रवाई की जाती है। रैली के माध्यम से सामने रखी गई मांगों में धान का उचित मूल्य, लंबित भुगतान, उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था में सुधार, टोकन वितरण की समस्या, तौल में पारदर्शिता, खाद की उपलब्धता और निर्धारित दरों पर बिक्री जैसे विषय प्रमुख हैं। संगठन ने वर्ष 2022-23 से संबंधित लगभग 1,700 करोड़ रुपये के कथित लंबित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए धान का मूल्य 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है। इन आंकड़ों और मांगों को संगठन के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; लंबित राशि, उसके पात्र हितग्राहियों और भुगतान की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसी प्रकार, टोकन की संख्या और उपार्जन की समय-सीमा से जुड़ी मांगों का मूल्यांकन वास्तविक कृषि क्षेत्रफल, उपज, भंडारण क्षमता और केंद्रों की कार्यक्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।अन्नदाता की समस्या को केवल समर्थन मूल्य तक सीमित कर देना भी उचित नहीं होगा। खेती की लागत में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, डीजल, बिजली, मशीनरी और श्रम का खर्च शामिल है। इसके साथ मौसम की अनिश्चितता, बेमौसम वर्षा, सूखा, कीट-प्रकोप और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी जुड़ा रहता है। ऐसे में उपज का उचित मूल्य तभी सार्थक होगा, जब भुगतान समय पर हो, फसल का नुकसान होने पर मुआवजा पारदर्शी ढंग से मिले और खेती के लिए आवश्यक संसाधन सुलभ दरों पर उपलब्ध हों। धान उपार्जन की व्यवस्था छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्त्व रखती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवारों की आय धान की खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। इसलिए उपार्जन केंद्रों पर लंबी प्रतीक्षा, टोकन संबंधी कठिनाइयाँ, तौल को लेकर विवाद या भुगतान में विलंब सीधे परिवारों के घरेलू बजट, अगली फसल की तैयारी और ग्रामीण बाजार की क्रय-शक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि उपार्जन केंद्रों पर शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था हो, तौल और भुगतान के अभिलेख उपलब्ध रहें तथा प्रत्येक शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति संबंधित अन्नदाता को बताई जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रदेश में घोषित अतिरिक्त सहायता के बीच अंतर को भी स्पष्ट रूप से समझना होगा। केंद्र सरकार विभिन्न कृषि उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, जबकि राज्य सरकार अपनी नीतियों के अनुसार अतिरिक्त सहायता या अन्य प्रोत्साहन दे सकती है। धान का मूल्य निर्धारित करते समय यह सुनिश्चित होना चाहिए कि घोषणा, पात्रता, वास्तविक भुगतान और उपार्जन की प्रक्रिया के बीच कोई अस्पष्टता न रहे। अन्नदाताओं को केवल घोषित दर नहीं, बल्कि उनकी उपज के बदले वास्तव में प्राप्त होने वाली राशि और भुगतान की समय-सीमा भी स्पष्ट रूप से मालूम होनी चाहिए।रैली में अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजना से संबंधित अधूरे कार्यों, फसल क्षति के मुआवजे, खाद की कथित अधिक कीमत, मक्का और गेहूँ जैसी अन्य फसलों के समर्थन मूल्य पर उपार्जन तथा गौ-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी माँगें उठाई गई हैं। इन विषयों का दायरा धान की खरीद से कहीं व्यापक है। सिंचाई परियोजनाओं में देरी से कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है, जबकि मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों के लिए प्रभावी बाजार व्यवस्था न होने पर फसल विविधीकरण की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। यदि प्रदेश धान पर निर्भरता कम करते हुए कृषि को अधिक टिकाऊ और विविधतापूर्ण बनाना चाहता है, तो वैकल्पिक फसलों के लिए बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण, भंडारण और सुनिश्चित बाजार की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।कृषि नीति की सफलता केवल अधिक उत्पादन से नहीं मापी जा सकती। भारतीय कृषि में उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता, भूजल की स्थिति, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को वैश्विक खाद्य सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि और वन-संपदा से समृद्ध प्रदेश के लिए यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है कि कृषि विकास की योजनाएँ स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल हों। जल-संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि के उपयुक्त विकल्प और स्थानीय कृषि ज्ञान का वैज्ञानिक मूल्यांकन भविष्य की कृषि नीति के महत्त्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।यहाँ शासन और अन्नदाता संगठनों, दोनों की जिम्मेदारी सामने आती है। संगठन का दायित्व है कि वह समस्याओं को प्रमाणों, स्पष्ट माँगों और प्राथमिकताओं के साथ प्रस्तुत करे; वहीं शासन-प्रशासन को शिकायतों को केवल ज्ञापन या प्रदर्शन तक सीमित न रखते हुए उनके समाधान की समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए। लंबित भुगतान की जाँच, उपार्जन केंद्रों की क्षमता का आकलन, खाद की कीमतों और उपलब्धता की निगरानी, सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति तथा फसल क्षति के मुआवजे की स्थिति पर नियमित सार्वजनिक जानकारी इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठित माँगें नीति-निर्माण को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। भारतीय किसान संघ के प्रयासों से प्रदेश के अन्नदाताओं में बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक समाज अपनी समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रख सकता है। लेकिन किसी आंदोलन का वास्तविक परिणाम तभी सामने आता है, जब उसके बाद संवाद हो, जिम्मेदारी तय हो और निर्णयों की समीक्षा की जा सके। अन्नदाताओं की समस्याओं का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्पष्ट आँकड़ों, पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था से संभव है।अंततः, ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की समृद्धि का वास्तविक माप केवल धान के उत्पादन या उपार्जन के आँकड़ों में नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के जीवन की खुशहाली में भी दिखाई देना चाहिए। ऋग्वेद का मंत्र “अक्षैर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व” (ऋग्वेद 10.34.13) जुए में मत उलझो, बल्कि खेती करो का संदेश देता है। यह मंत्र कृषि और श्रम की महत्ता को रेखांकित करता है। जो हाथ धरती से अन्न उपजाते हैं, उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य पाने और अपने श्रम के सम्मान के लिए बार-बार संघर्ष न करना पड़े, यह किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारतीय किसान संघ की 27 अक्टूबर की ‘अन्नदाता गर्जना रैली’ ने समूचे प्रदेश को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश के अन्नदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और अपनी मांगों को संगठित स्वर देने के लिए तैयार हैं। अब शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस आवाज को सुने और उठे प्रश्नों का उत्तर केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों, पारदर्शी व्यवस्था और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से दे। क्योंकि अन्नदाता का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, उसके श्रम के उचित मूल्य और अधिकारों की सुनिश्चितता से होता है।
दल्ली राजहरा लौह नगरी दल्ली राजहरा को नशा मुक्त बनाने के लिए श्रमिक नेता संजय सिंह द्वारा जुलाई माह में किया गया आमरण अनशन आखिरकार रंग लाने लगा है। उनके अनशन के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और अब दल्ली राजहरा में शराब माफियाओं, नशीली दवाइयों और गांजा कारोबारियों पर पुलिस की सख्त और लगातार कार्रवाई चल रही है। बताया जा रहा है कि दल्ली राजहरा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब, नशीली टेबलेट और गांजा का कारोबार फल-फूल रहा था।
जिससे युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही थी। इसी को लेकर श्रमिक नेता संजय सिंह ने नशा मुक्त बालोद की मांग को लेकर आमरण अनशन किया था। अनशन के बाद प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। वर्तमान में पुलिस द्वारा लगातार छापेमार कार्रवाई की जा रही है और नशे के कारोबार में लिप्त लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस सकारात्मक कार्रवाई को लेकर श्रमिक नेता संजय सिंह ने बालोद जिला कलेक्टर मैडम से सौजन्य मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया और आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रखने की मांग की ताकि दल्ली राजहरा पूरी तरह से नशा मुक्त हो सके।
बालोद में ANTF पुलिस की कार्रवाई, 11.83 लाख रुपये की सामग्री जब्तबालोद, 29 अक्टूबर। बालोद पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अवैध मादक पदार्थों और हथियारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नया बस स्टैंड के पीछे खड़ी एक कार से 6.40 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) और एक देशी पिस्टल बरामद की है। पुलिस ने मामले में दल्लीराजहरा के रेलवे कॉलोनी निवासी 25 वर्षीय लीनेश बंसोड़ उर्फ बाड़ू को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से मादक पदार्थ, देशी पिस्टल, मोबाइल फोन और टाटा हेक्सा कार सहित कुल 11 लाख 83 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात ANTF टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नया बस स्टैंड बालोद के पीछे सफेद रंग की टाटा हेक्सा कार क्रमांक CG 17 KM 4455 में बैठा एक व्यक्ति हेरोइन और देशी पिस्टल रखे हुए है। सूचना पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए पुलिस टीम गवाहों के साथ मौके पर पहुंची।
कार की तलाशी लेने पर डैशबोर्ड के अंदर पारदर्शी झिल्ली में रखा लगभग 6.40 ग्राम हेरोइन तथा एक देशी पिस्टल बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम लीनेश बंसोड़ उर्फ बाड़ू, पिता सुनील बंसोड़, उम्र 25 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 21, रेलवे कॉलोनी, राजहरा, थाना दल्लीराजहरा, जिला बालोद बताया। पुलिस के अनुसार, आरोपी देशी पिस्टल के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।पुलिस ने बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत 1 लाख 28 हजार रुपये, देशी पिस्टल की कीमत 50 हजार रुपये, आईक्यू कंपनी के मोबाइल फोन की कीमत 5 हजार रुपये तथा टाटा हेक्सा कार की कीमत 10 लाख रुपये आंकी है। इस प्रकार कुल 11 लाख 83 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है। आरोपी के विरुद्ध थाना बालोद में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(ख) एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले में मादक पदार्थ और हथियार के संबंध में आगे की विवेचना कर रही है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बालोद किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना एवं एसडीओपी बालोद विनय साहू के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, आरक्षक बनवाली साहू, चुलेन्द्र कुर्रे, भूपेश साहू, संजय सोनी एवं ANTF बालोद की टीम की सराहनीय भूमिका रही। बालोद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और अवैध हथियारों से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें तथा नशे एवं अवैध हथियारों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई में सहयोग करें।
बालोद, 29 अक्टूबर। जिले के रनचिरई थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि से संघर्षरत बालक को अभिरक्षा में लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले में थाना रनचिरई में अपराध क्रमांक 136/2026 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(1), 70(2), 137(2) एवं 127(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) एवं 6 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। विवेचना के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ग्राम परसदा निवासी गितेश्वर साहू (19 वर्ष) एवं चंद्रशेखर साहू (18 वर्ष) को गिरफ्तार किया। वहीं, मामले में संलिप्त एक अन्य नाबालिग को विधि के अनुसार अभिरक्षा में लिया गया है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना के निर्देशन तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गुण्डरदेही श्रीमती श्रुति सिंह के पर्यवेक्षण में की गई। थाना प्रभारी रनचिरई निरीक्षक उत्तम गावड़े के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। बालोद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण को प्राथमिकता दें तथा नाबालिगों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें।
अभनपुर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के अनुरूप हर गरीब को पक्का मकान उपलब्ध कराने के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, आज नगर पालिका गोबरा नवापारा में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंद्र कुमार साहू उपस्थित रहे। विधायक साहू के हाथों 56 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र का वितरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि विधायक इंद्र कुमार साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना देश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशहाली और सुरक्षा का नया सवेरा लेकर आई है।
डबल इंजन की सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना और उनका पक्का मकान का सपना साकार करना है। उन्होंने सभी हितग्राहियों को उनके नए और सुरक्षित आशियाने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं नगर पालिका अध्यक्ष ओमकुमारी संजय साहू ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र के विकास और जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए परिषद पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष भूपेंद्र सोनी ने भी विचार रखे और योजना की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सभापति पूजा कंसारी, पार्षद जीना निषाद, एल्डरमैन गुलाब राव, मुकुंद मेश्राम, कन्हैया साहू, युवा मोर्चा उपाध्यक्ष देवेंद्र साहू, तथा क्षेत्र के प्रतिष्ठित पत्रकार लीलाराम साहू सहित बड़ी संख्या में नागरिक, नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी एवं हितग्राही उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया और मिष्ठान वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
दल्ली राजहरा राज्य की सुशासन सरकार ने छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों में कार्यरत ठेकेदारों को बिटुमीन डामर की क्षतिपूर्ति राशि देने की घोषणा कर बड़ी राहत पहुंचाई है। केबिनेट के इस फैसले पर ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है।
बिटुमीन डामर की लगातार बढ़ती कीमत से परेशान होकर ठेकेदार अपना अनुबंधित कार्य नहीं कर पा रहे थे। डामर की कीमत बढ़ने से लागत भी बढ़ गई थी। इससे ज्यादातर सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे।इस मसले को लेकर माथुर कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर आशुतोष माथुर के नेतृत्व में आरसी जैन कंस्ट्रक्शन के रिखब जैन, उपाध्याय कंस्ट्रक्शन के मयंक उपाध्याय, एसएस इंफ्रा के सपन जैन, मेसर्स एसआर सरकार कंस्ट्रक्शन के सुबीर सरकार, भारद्वाज कंस्ट्रक्शन के राजेंद्र भारद्वाज आदि ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से कुछ दिनों पहले मुलाकात की थी। ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री डामर की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से निर्माण कार्यों में आ रही परेशानी से अवगत कराया था। मुख्यमंत्री श्री साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा इन ठेकेदारों को दिलाया था। इसके बाद विष्णु देव साय सरकार केबिनेट की हुई बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण अंतर्गत संचालित तथा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत सड़क निर्माण, नवीनीकरण एवं संधारण के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की अवधि में ठेकेदारों को क्रय एवं उपयोग किए गए डामर की राहत राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से पूर्व के अनुबंधित ठेकेदारों को भी 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक क्रय एवं उपयोग किए गए डामर की अंतर राशि प्रदान करने का भी फैसला लिया गया है। इससे सरकार को 70 करोड़ से 100 करोड़ रु. तक अतिरिक्त राशि वहन करनी पड़ेगी। सरकार के इस अहम फैसले पर खुशी जताते हुए आशुतोष माथुर, रिखब जैन, मयंक उपाध्याय, सपन जैन, सुबीर सरकार, राजेंद्र भारद्वाज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार माना है।
बीएसपी अस्पताल से दवाई लेकर लौट रही थी 65 वर्षीय महिला, नगर पालिका के पास दिया घटना को अंजाम, FIR दर्ज
दल्ली राजहरा दल्ली राजहरा में पुलिस बनकर ठगी करने का मामला सामने आया है। नगर पालिका के पास वार्ड क्रमांक 04 जाने वाले रास्ते में दो युवकों ने खुद को पुलिस वाला बताकर एक बुजुर्ग महिला से लगभग 2.5 तोला सोने की चैन और लॉकेट, ठग कर फरार हो गए।
क्या है पूरा मामला
प्रार्थिया द्रौपती बाई तिवारी पति स्व. चंपालाल तिवारी उम्र 65 साल, निवासी वार्ड क्रमांक 04 टेबलर सेट राजहरा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि दिनांक 27/10/2026 को सुबह करीब 10 बजे वह अपने घर से बीएसपी अस्पताल दवाई लेने गई थी। करीब 11 बजे अस्पताल से दवाई लेकर वापस घर टेबलर सेट वार्ड क्रमांक 04 जा रही थी।जैसे ही वह नगर पालिका के पास वार्ड क्रमांक 04 रोड के पास पहुंची, वहां रोड के किनारे एक लड़का मोटर साइकिल पर बैठा था और दूसरा लड़का मोटर साइकिल के पास खड़ा था। दोनों ने नमस्ते किया और कहा – “रुको आंटी, कहां रहती हो?”महिला ने बताया कि वह आगे रहती है। इस पर ठगों ने कहा – “आगे शीला टीचर को जानते हो? उनके घर चोरी हुई है, मर्डर हुआ है, सोना-चांदी चोरी हो गया है। हम पुलिस वाले हैं, सोना-चांदी की चेकिंग चल रही है।”इसी दौरान तीसरा लड़का वहां आया जो पहले से चैन पहना हुआ था। ठगों ने उसे चैन निकालने को कहा तो उसने अपनी चैन निकालकर पेपर में लपेट दी। फिर बुजुर्ग महिला को भी चैन निकालने के लिए दबाव बनाया। महिला ने कहा “घर जाकर निकालूंगी” तो ठगों ने कहा – “चेकिंग चल रही है, हम पुलिस वाले हैं, बिना निकाले हम जाने नहीं देंगे।”डर के कारण महिला ने अपनी पुरानी इस्तेमाल की हुई सोने की चैन और लॉकेट वजनी करीब 2.5 तोला ठगों ने उसे भी पेपर में लपेटा और महिला को दूसरा पेपर थमाते हुए बोले – “जल्दी से बैग में रखो और घर जाओ।”जैसे ही महिला आगे जाकर चैन देखी तो पेपर में उसकी चैन नहीं थी। वापस लौटी तो दोनों आरोपी बाइक से फरार हो चुके थे।
पुलिस ने किया मामला दर्ज*प्रार्थिया की शिकायत पर थाना दल्लीराजहरा में धारा 204, 319(2), 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
बालोद दिनांक: 28 अक्टूबर 2026 तांदुला नदी किनारे रामघाट मंदिर के पास नशीली दवाइयों की बिक्री की सूचना पर बालोद पुलिस की दबिश।
तीन आरोपियों से प्रतिबंधित नशीली दवाई Nitrosun-10 (Nitrazepam) की 1,500 टैबलेट, नगदी, दोपहिया वाहन एवं मोबाइल फोन जब्त।
प्रकरण में कुल ₹7,15,000 की सामग्री जब्त, एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(ग) के तहत अपराध पंजीबद्ध।पुलिस अधीक्षक बालोद किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना एवं एसडीओपी बालोद विनय साहू के मार्गदर्शन में जिले में अवैध गतिविधियों एवं नशीले पदार्थों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।इसी क्रम में
दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को थाना बालोद में पदस्थ निरीक्षक श्री शिशुपाल सिन्हा को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि तांदुला नदी किनारे रामघाट मंदिर, बालोद के पास कुछ व्यक्ति दोपहिया वाहनों में प्रतिबंधित नशीली दवाइयां रखकर बिक्री करने की तैयारी में हैं। सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए थाना बालोद और ANTF बालोद की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई।पुलिस टीम ने मौके से तीन आरोपियों नवीन चावला, आशीष निर्मलकर एवं किशन बहादुर उर्फ नेपाली को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से प्रतिबंधित नशीली दवाई Nitrosun-10 (Nitrazepam Tablets IP), नगदी रकम, दोपहिया वाहन एवं मोबाइल फोन बरामद किए गए।आरोपियों द्वारा नशीली गोलियां भुबनेश्वर ओडिशा से लाई जा रही थी।
प्रतिबंधित नशीली दवाई सहित ₹7.15 लाख की सामग्री जब्तपुलिस द्वारा की गई जब्ती का विवरण निम्नानुसार है:-🔸 प्रतिबंधित नशीली दवाई: Nitrosun-10 (Nitrazepam Tablets IP) की कुल 1,500 टैबलेट, वजन लगभग 870 ग्राम, अनुमानित कीमत ₹6,00,000।🔸 नगदी रकम: ₹15,000🔸 मोटरसाइकिल: हीरो स्प्लेंडर प्लस, पंजीयन क्रमांक CG05AU3540, अनुमानित कीमत ₹30,000।🔸 स्कूटी: एक्टिवा, पंजीयन क्रमांक CG24W3471, अनुमानित कीमत ₹50,000।🔸 मोबाइल फोन: मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनका विवरण एफआईआर में दर्ज है।
कुल जब्ती की अनुमानित कीमत ₹7,15,000। एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्धउक्त मामले में थाना बालोद में अपराध क्रमांक 0574/2026, धारा 22(ग) एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। मामले में आरोपियों की भूमिका एवं जब्त सामग्री के संबंध में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सराहनीय भूमिकाउक्त कार्रवाई में निरीक्षक श्री शिशुपाल सिन्हा, सहायक उप निरीक्षक श्री धरम भूआर्य (प्रभारी, साइबर सेल) तथा आरक्षक बनवाली साहू, संजय सोनी, चुलेंद्र कुर्रे, विपिन गुप्ता, भोप सिंग साहू, राहुल, पूरन, मिथलेश , योगेश एवं ANTF टीम की सराहनीय भूमिका रही। बालोद पुलिस की अपीलबालोद पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि नशीली दवाइयों के अवैध कारोबार अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। नशे के दुष्प्रभावों के प्रति स्वयं जागरूक रहें और युवाओं को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई में सहयोग करें।
कुसुमकसा। बालोद जिले के डौंडी विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुसुमकसा की तीन होनहार बेटियों ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन से पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। सेजेस स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल, कुसुमकसा की छात्राएं लक्ष्मी मानिकपुरी एवं खुशी विश्वकर्मा राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर लोकसभा भवन में सम्मानित होंगी। वहीं, कुसुम पब्लिक स्कूल कुसुमकसा की छात्रा वंशिका सिंह का चयन देशभर से चुने गए 12 बच्चों में हुआ है, जिन्हें लोकसभा में अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। तीनों बेटियों की इस उपलब्धि से कुसुमकसा सहित पूरे बालोद जिले में हर्ष और गर्व का माहौल है।राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में प्रतिभा का प्रदर्शनसेजेस स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा लक्ष्मी मानिकपुरी एवं खुशी विश्वकर्मा ने राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी इस उपलब्धि ने विद्यालय और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। खुशी विश्वकर्मा इससे पहले कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जिले की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं। अब राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान ने उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।लोकसभा में विचार रखेंगी वंशिका सिंहकुसुमकसा की एक अन्य होनहार बेटी वंशिका सिंह भी अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने जा रही हैं। कुसुम पब्लिक स्कूल, कुसुमकसा के प्राचार्य श्री आर.के. सिंह की पुत्री वंशिका का चयन लोकसभा में अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए देशभर से चयनित 12 बच्चों में हुआ है। प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिपरिषद एवं सांसदों की गरिमामयी उपस्थिति वाले इस प्रतिष्ठित मंच पर विचार रखने का अवसर मिलना वंशिका के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से विद्यालय परिवार और क्षेत्र के लोगों में उत्साह है।शिक्षकों के मार्गदर्शन ने निखारी प्रतिभाइन उपलब्धियों के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत के साथ-साथ शिक्षकों का मार्गदर्शन और अभिभावकों का प्रोत्साहन भी महत्वपूर्ण है। सेजेस स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका सुश्री सोनल गुप्ता के परिश्रम, समर्पण एवं कुशल मार्गदर्शन की सराहना की जा रही है। विद्यालय के प्राचार्य सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रयासों से विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।संजय बैस एवं मंजू बैस ने दी बधाईपूर्व जनपद सदस्य संजय बैस एवं जनपद पंचायत डौंडी की सभापति मंजू बैस ने लक्ष्मी मानिकपुरी, खुशी विश्वकर्मा और वंशिका सिंह को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने तीनों बेटियों के माता-पिता, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार को भी बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल की बेटियों का राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।उन्होंने कहा कि इन बेटियों की सफलता से क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। बेटियों को उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।कुसुमकसा की इन तीनों बेटियों की उपलब्धि ने यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। गांव की मिट्टी में पली-बढ़ी बेटियां भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर देश के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंच सकती हैं। आज कुसुमकसा की बेटियां लोकसभा भवन में सम्मान और विचारों के माध्यम से क्षेत्र का मान बढ़ाने जा रही हैं, जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।