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कन्वर्जन के खिलाफ एक और गांव हुआ लामबंद

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ग्रामसभा का फैसला, गांव में पादरियों की एंट्री बैन

लगातार हो रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने एकजुट हुए सिड़मुर गांव के ग्रामीण

अर्जुन झा

जगदलपुर कन्वर्जन के खिलाफ शुरू हुई मुहिम अब कांकेर व सुकमा के बाद बस्तर जिले के आदिवासी समुदाय के बीच भी पहुंच गई है। आदिवासियों ने अब एकजुटता दिखाते हुए कन्वर्जन का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। गांव गांव में पास्टर, पादरियों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने का सिलसिला सा चल पड़ा है। बदलाव की यह बयार कांकेर जिले से शुरू होकर बस्तर और सुकमा जिलों तक पहुंच चुकी है। इसका बेहतर परिणाम भी सामने आने लगा है। विदित हो कि बस्तर जिले में ही हजारों चर्च बन चुके हैं। हाउस चर्च के माध्यम से शहर जगदलपुर में कन्वर्जन का खेल खुलकर खेला जा रहा है लेकिन सनातन रक्षा का दावा करने वाले संगठन बिल्कुल सामने नहीं आ रहे हैं, बल्कि आम ग्रामीण ही अब खुलकर इसका प्रतिकार कर रहे हैं। बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगे सिडमुर गांव में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ग्रामसभा ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। गांव के सभी वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर प्रस्ताव पारित किया है कि अब बाहरी पादरी या धर्म प्रचारक गांव की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह निर्णय ग्रामसभा में उपस्थित गांव के सभी 275 परिवारों की सर्वसम्मति से लिया गया है। ग्रामीणों और ग्राम प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है ।

कि यह निर्णय किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं है, बल्कि ग्रामीण एकता और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा लिए उठाया गया कदम है। वहीं गांव में पहले से रह रहे कुछ ईसाई परिवार इस निर्णय को लेकर असमंजस में हैं और प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के अनुसार, भविष्य में यदि कोई बाहरीव्यक्ति गांव में आकर धार्मिक प्रचार या धर्मांतरण की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सामूहिक निर्णय लेकर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का साफ कहना h कि गांव में सामाजिक एकता, पारंपरिक विश्वास और आपसी सौहार्द्र बनाए रखना है। ग्रामसभा में मौजूद बुजुर्गों और प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से गांव में बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ी थी। बताया गया है कि ये लोग ग्रामीणों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इससे गांव के पारंपरिक, सांस्कृतिक और सामाजिकढांचे पर खतरा मंडराने लगा था। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 10 से 12 वर्षों में गांव में ईसाई समुदाय के अनुयायियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है, जिससे मतभेद और असंतोष की स्थिति बनती जा रही थी। सिड़मुर गांव की ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर बहरी पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका उद्देश्य बढ़ते धर्मांतरण को रोककर सामाजिक समरसता बनाए रखना है। ग्रामसभा ने यह भी कहा कि सिड़मुर गांव की परंपरा और आस्था से किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। सिड़मुर गांव के सभी 275 परिवारों ने सामूहिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा- यह निर्णय किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि गांव की शांति और एकता की रक्षा के लिए है।

बलराम है मास्टर माइंड

गांव के ही पादरी बलराम कश्यप जो खुद कन्वर्टेड है और उसका साथी भोलाराम नागलंबे समय से गांव के लोगों को बहला फुसला करकन्वर्ट कराते आ रहे थे।ग्रामीण उन्हें कई बार समझाईश दे चुके थे मगर वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे। अंततः राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा गांव में गठित ग्राम रक्षा समिति के सह संयोजक पीलाराम सोनी उनके सहयोगी पाकलू राम भारती, कार्तिक गोयल एवं चैतूराम नाग की पहल पर गांव में सार्वजनिक बैठक हुई। इस बैठक में कड़ा फैसला लेते हुए कन्वर्जन का खेल चलाने वालों पर नकेल कस दी गई।

सुकमा में हो चुकी है बड़ी पहल

उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में कन्वर्टेड लोगों की घर वापसी भी तेज गति से जारी है। कन्वर्टेड हो चुके लोग अपने मूल धर्म में वापस लौट रहे हैं। कन्वर्ट हो चुके लोगों की घर वापसी कराने के लिए अब भाजपा के लोग भी आगे आ रहे हैं। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के अनेक गांवों से धर्मांतरित हो चुके लोगों की मूल धर्म में वापसी का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब सुकमा जिले तक पहुंच चुका है।सुकमा जिले ग्राम पंचायत छिंदगढ़ रानीबाहर में एक समुदाय द्वारा ग्रामवासियों को बहला फुसला कर व प्रलोभन लालच देकर कई परिवारों का जबरन धर्मांतरण कराया गया था। इनमें से 6 परिवारों के लगभग 26 लोगों ने घर वापसी कर अपने पुराने समाज व अपने रीति रिवाजों को फिर से अपना लिया है। ये परिवार तीन साल पहले कन्वर्ट हुए थे। सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य एवं ग्राम रानीबहाल के युवराज विक्रांत सिंह देव, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय सोढ़ी, ग्राम के प्रमुखजनों, पुजारी की उपस्थिति में इन 6 परिवारों की घर वापसी कराई गई। हूंगा राम मरकाम ने कहा है कि इन लोगों को दूसरे धर्म के लोगों द्वारा बहला फुसला कर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। हमारे द्वारा समझाईश दी जाने पर इन परिवारों ने अपने मूल धर्म में वापसी की है अब आने वाले दिनों में और लोगों की घर वापसी होगी। कन्वर्टेड लोगसमाज से बाहर थे अब उन्हें वापस समाज से जोड़ लिया गया है। उन्हें तिलक लगा कर, चावल और फूल सौंपकर एवं धरती माता को स्पर्श कराया गया। पानी में हल्दी, तुलसी पता डालकर उसे जात का रूप दिया गया। इस जल को गंगाजल जैसा पवित्र माना जाता है। इस जल को घर वापसी कर रहे लोगों पर छिड़का गया और धरती माता को भी अर्पित किया गया। माटी पुजारी ने धार्मिक प्रक्रियाएं संपन्न कराईं। अब ये सभी परिवार गांव के सार्वजनिक एवं सामाजिक क्रियाकलापों और धार्मिक कार्यक्रमों में पहले की तरह भाग ले सकेंगे।

नक्सलियों को पसंद नहीं रेड कार्पेट, फिर कर दी दो युवकों की हत्या

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क्या गोली की बोली ही समझते रहेंगे नक्सली?

अर्जुन झा-

जगदलपुर लगता है नक्सलियों को सरकार की रेड कार्पेट और स्वागत के लिए लालायित बाहें पसंद नहीं हैं, उन्हें सिर्फ गोली की ही बोली पसंद आती है, या फिर हो सकता है यह उनकी खिसियाहट व झुंझलाहट हो कि वे निरीह ग्रामीणों को मौत के घाट उतारते चले जा रहे हैं। बस्तर संभाग में नक्सलियों ने फिर दो बेकसूर ग्रामीण युवकों की निर्मम हत्या कर दी है।

युवकों की हत्या का मामला बस्तर के बीजापुर जिले से सामने आया है। बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्रान्तर्गत ग्राम नेला कांकेर निवासी 25 वर्षीय रवि कट्टम पिता कन्ना उम्र एवं 38 वर्षीय तिरूपति सोढ़ी पिता नरसा की नक्सलियों द्वारा 24 अक्टूबर को धारदार हथियार से मारकर हत्या कर दी गई। सूचना पर थाना उसूर द्वारा घटना की तस्दीकी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में नक्सली लगातार निर्दोष ग्रामीणों की हत्याएं करते जा रहे हैं। सुरक्षा बलों के हाथों लगातार मात खा रहे नक्सली अब ग्रामीणों को निशाना बना रहे हैं। यह उनकी भड़ास का नतीजा है जिसे कि वे अब निरीह ग्रामीणों की हत्याओं पर उतार आए हैं। हताशा और निराशा के दौर से गुजर रहे नक्सली इस कदर कमजोर हो चले हैं कि वे अपना वजूद दिखाने के लिए आम ग्रामीणों पर जुल्मो सितम ढाने लगे हैं। आर्थिक, हथियारों और संख्या बल के मामले में नक्सलियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। उनके साथी लगातार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते जा रहे हैं।

वहीं ग्रामीण भी निरंतर उनसे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में नक्सलियों का तिलमिलाना गैरवाजिब नहीं है। उधर सरकार कहती आ रही है कि नक्सली नेता शांति वार्ता के लिए सामने आते हैं, तो उनका स्वागत है, हम उनके लिए रेड कार्पेट बिछाए बैठे हैं और बाहें फैलाए खड़े हैं। इस तरह का ऐलान छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर की धरती से किया था, मगर लगता है कि नक्सलियों को रेड कार्पेटनहीं रेड ब्लड ज्यादा पसंद है, बातचीत नहीं, गोली की ही बोली पसंद है। अगर नक्सली ऐसा ही खूनी खेल खेलते रहे तो हो सकता है सरकार और भी आक्रामक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

धराए 155 जुआरी, फड़ों से बरामद हुए से 2 लाख 23 हजार रूपए

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बस्तर के 8 थाना क्षेत्रों में हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई

जगदलपुर दीपावली और जुए का अटूट रिश्ता है, मगर इस रिश्ते में दीवार बन जाती है पुलिस। हर साल लाखों रुपयों के जुए के ढेरों मामले पकड़े जाते हैं। इस साल भी बस्तर पुलिस ने जुआरियों के रंग में भंग डाल दिया। विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने डेढ़ सौ से भी अधिक जुआरी पकड़े और जुए के फड़ों से करीब सवा दो लाख रुपए बरामद किए।

बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के मार्गदर्शन में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत जिले के 8 थाना क्षेत्रों में 155 जुआरियों को गिरफ्तार कर 2 लाख 23 हजार 990 रूपये नगद बरामद किए गए हैं। जगदलपुर कोतवाली एवं भानपुरी थाने में जुए के 7-7 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। तो वहीं बोधघाट थाने में सबसे अधिक 14 प्रकरण दर्ज कर 42 जुआरियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 15 से 21 अक्टूबर के बीच 8 थानों में 47 प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं कई थानों की पुलिस जुआरियों तक पहुंचने में नाकाम रही। जिसमें सीमावर्ती राज्य के करपावंड थाना पुलिस को भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी।जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उड़ीसा से कई बड़े जुआरी का फड़ सजा कर और लाखों का जुआ खेल कर सकुशल लौट गए। पुख्ता जानकारी के आधार पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एकसाथ छापेमारी की गई। इस अभियान के दौरान 47 प्रकरण दर्ज कर 155 जुआरियों को गिरफ्तार किया गया तथा उनके कब्जे से 2 लाख 23 हजार 990 रुपए बरामद किए गए हैं।दीपावली पर्व के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध अथवा समाज विरोधी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के निर्देशन में बस्तर पुलिस द्वारा ऐसे अवैध कार्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सखूत कार्रवाई की जा रही है। बस्तर पुलिस की यह कार्रवाई जनशांति एवं अपराध-मुक्त समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।*बॉक्स**करपावंड में हो गया कांड* दीपावली पर जुए का दौर तो पूरे बस्तर जिले में चलता रहा। सरहदी क्षेत्र होने के कारण करपावंड थाना क्षेत्र में जुए का दौर पूरे शबाब पर रहा। बस्तर संभाग के बस्तर सहित अन्य जिलों के जुआरियों का यहां चले जुए के फड़ों में जमघट लगा ही था, बड़ी संख्या में ओड़िशा के जुआरी भी यहां दांव लगाने पहुंचे थे। सूत्र बताते हैं कि करपावंड थाना क्षेत्र में दीपावली के पहले से जुए के फड़ लगना शुरू हो गए थे और अब भी कई स्थानों पर जुआ चल रहा है। यहां लाखों रुपयों के दांव लगाए गए। पुलिस ने इक्का दुक्का मामले पकड़े थे, लेकिन रुपयों को हड़प कर जुआरियों को छोड़ दिया गया। वहीं बड़े फड़ों से हजारों में सेटिंग कर ली गई थी, लिहाजा वहां जुआ खेल रहे लोगों को पुलिस की ओर से पूरी तरह अभयदान दे दिया गया था। इसमें करपावंड थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जिले के सभी थाना क्षेत्रों में जुए के मामले पकड़े गए, मगर इकलौता करपावंड थाने में जुए का एक भी मामला पंजीबद्ध नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। सूत्र बताते हैं कि करपावंड के कुछ सरहदी गांवों में बारहों माह जुआ और खुड़खुड़िया का खेल चलता है। इसके एवज में बंधी बंधाई रकम थाना पहुंचाई जाती है। पुलिस अधीक्षक से इस क्षेत्र में चल रही अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगाने तथा करपावंड थाना प्रभारी की भूमिका की जांच कराने की मांग क्षेत्र के ग्रामीणों ने की है।

शताब्दी वर्ष पर होंगे भव्य कार्यक्रम

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जगदलपुर शुक्रवार की शाम शहर के जगतू माहरा शासकीय बहुउद्देशीय विद्यालय (बस्तर हाई स्कूल) के शताब्दी वर्ष पर 17 नवंबर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर प्रबंधन समिति के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने जरूरी बैठक ली। शताब्दी वर्ष पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारी पर विस्तार से चर्चा कर सभी की जवाबदारी एवं रूपरेखा तैयार की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल, शाला प्रबंधन समिति के राकेश तिवारी, अखिलेश शुक्ला, प्राचार्य रामकुमार, एवं विधालय के शिक्षक उपस्थित थे। प्रबंधन समिति की महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम की तैयारियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा कर सभी की जवाबदारी तय की। साथ ही शताब्दी समारोह में आयोजित कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा तैयार कर कार्यक्रम को सफलतापूर्वक और भव्य रूप से सभी के सहयोग से सफल आयोजन करने संबंधित चर्चा की गई। बैठक में शामिल सभी लोगों ने कार्यक्रम की भव्य तैयारी पर अपने विचार रखे।

छठी मैया के भक्तों के लिए बिछाई रेड कार्पेट

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आस्था के सम्मान में महापौर संजय पाण्डेय और वार्ड पार्षद लक्ष्मण झा की शानदार पहल

जगदलपुर माई दंतेश्वरी की नगरी जगदलपुर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब छठी मैया के भक्तों के लिए रेड कार्पेट बिछाई गई है। दरअसल छठी मैया के प्रति आस्था के सम्मान में जगदलपुर के सनातनी महापौर संजय पांडेय और गंगा नगर वार्ड के युवा पार्षद, एमआईसी सदस्य एवं छठी मैया के भक्त लक्ष्मण झा ने यह शानदार पहल की है। महापौर संजय पाण्डेय और गंगा नगर वार्ड के पार्षद लक्ष्मण झा द्वारा जगदलपुर नगर के गंगा मुंडा तालाब के छठ घाट की सीढ़ियों पर इस साल लाल कालीन बिछवाई गई है।पार्षद लक्ष्मण झा के अनुसार छठ व्रतधारियों की सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है ताकि किसी को कोई परेशानी नहीं हो। व्रतधारी अपने घरों से नंगे पैर छठ घाटों तक पहुंचते हैं। इस दौरान उनके पैरों में कंकड़ पत्थर, कांटे आदि चूभते हैं।

तालाब पहुंचकर वे सुरक्षित तरीके छठी मैया और सूर्य देव की आराधना कर सकें इसलिए महापौर संजय पाण्डेय और वार्ड पार्षद लक्ष्मण झा ने पूरे तालाब के चारों ओर प्रमुख घाट स्थल पर कालीन बिछा दी है। जिससे नंगे पैर चलकर छठ पूजा करने वालों को कोई परेशानी नहीं हो। लाल कालीन बिछाए जाने से घाटों की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं। जो भी व्यक्ति इस शानदार व्यवस्था को देखता है, वह महापौर पाण्डेय और पार्षद झा की तारीफ जरूर करता है। लोग कह उठते हैं कि आस्था और श्रद्धा भक्ति का ऐसा सम्मान पहली बार देखने को मिल रहा है। वहीं घाटों के आसपास मौजूद कुछ जलीय पौधों को हटाने की मांग भी लोग कर रहे हैं।

आंधी में तब्दील हुई घर वापसी की बयार, कन्वर्टेड 6 परिवार लौटे मूल धर्म में

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अब भाजपा के लोग भी कन्वरर्जन के खिलाफ आने लगे हैं सामने

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग में कन्वर्टेड लोगों की घर वापसी की लहर अब आंधी में तब्दील होती जा रही है। घर वापसी का अभियान रफ्तार पकड़ चुका है। एक के बाद एक लोग अपने मूल धर्म में वापस लौट रहे हैं। बड़ी बात तो यह है कि भूले भटके और बहके लोगों की घर वापसी कराने के लिए अब भाजपा के लोग भी आगे आ चुके हैं। हालांकि इन भाजपा नेताओं का कहना है कि वे अपनी जाति समुदाय की धर्म परंपरा को बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, न कि राजनैतिक उद्देश्य से।

बस्तर संभाग में आदिवासी समुदाय के अस्तित्व पर धर्मांतरण ने बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कन्वर्जन कराने वाले लोग बस्तर के गांव गांव में सक्रिय हैं। बीमारियां, पारिवारिक समस्याएं दूर करने जैसे बहकावे और प्रलोभन में आकर हजारों आदिवासी परिवार धर्मांतरित हो चुके हैं। गांवों में देवगुड़ी मातागुड़ी की संख्या घटती जा रही है और प्रार्थना स्थलों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। घरों से देवी देवताओं के चित्र गायब हो चुके हैं, महिलाओं ने मांग में सिंदूर भरना, चूड़ियां, मंगलसूत्र पहनना बंद कर दिया है। ऐसे लोग अपनी प्राचीन परंपराओं, संस्कृति और पूजा पद्धति को पूरी तरह त्याग चुके हैं। वे मृतकों का दाह संस्कार करना छोड़ शवों को दफनाने लगे हैं। इसे लेकर गांवों में अक्सर विवाद की स्थिति निर्मित होती रही है। मगर अब आदिवासी समाज जाग उठा है। समाज के पढ़े लिखे और जागरूक लोग कन्वर्ट हो चुके लोगों को समझा बुझाकर उन्हें पुनः उनके मूल धर्म से जोड़ रहे हैं। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के अनेक गांवों से धर्मांतरित हो चुके लोगों की मूल धर्म में वापसी का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब सुकमा जिले तक पहुंच चुका है। घर वापसी की बड़ी खबर संभाग के सुकमा जिले से सामने आई है।

सुकमा जिले ग्राम पंचायत छिंदगढ़ रानीबाहर में एक समुदाय द्वारा ग्रामवासियों को बहला फुसला कर व प्रलोभन लालच देकर कई परिवारों का जबरन धर्मांतरण कराया गया था। इनमें से 6 परिवारों के लगभग 26 लोगो ने घर वापसी कर अपने समाज व अपने रीति रिवाज को अपना लिया है। ये परिवार तीन साल पहले कन्वर्ट हुए थे। सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य एवं ग्राम रानीबहाल के युवराज विक्रांत सिंह देव, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय सोढ़ी, ग्राम के प्रमुखजनों, पुजारी की उपस्थिति में इन 6 परिवारों की घर वापसी कराई गई। हूंगा राम मरकाम ने कहा है कि इन लोगों को दूसरे धर्म के लोगों द्वारा बहला फुसला कर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। हमारे द्वारा समझाईश दी जाने पर इन परिवारों ने अपने मूल धर्म में वापसी की है अब आने वाले दिनों में और लोगों की घर वापसी होगी। कन्वर्टेड लोगसमाज से बाहर थे अब उन्हें वापस समाज से जोड़ लिया गया है। उन्हें तिलक लगा कर, चावल और फूल सौंपकर एवं धरती माता को स्पर्श कराया गया। पानी में हल्दी, तुलसी पता डालकर उसे जात का रूप दिया गया। इस जल को गंगाजल जैसा पवित्र माना जाता है। इस जल को घर वापसी कर रहे लोगों पर छिड़का गया और धरती माता को भी अर्पित किया गया। माटी पुजारी ने धार्मिक प्रक्रियाएं संपन्न कराईं। अब ये सभी परिवार गांव के सार्वजनिक एवं सामाजिक क्रियाकलापों और धार्मिक कार्यक्रमों में पहले की तरह भाग ले सकेंगे।

छट्ठी का भोजन बना जानलेवा

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5 बच्चों की मौत, कई लोगों की हालत गंभीर

अबूझमाड़ के सुदूर गोट गांव में हुई दर्दनाक घटना

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत डूंगा के आश्रित गांव गोट में गुरुवार को फूड पॉइजनिंग की बड़ी ही दर्दनाक घटना हो गई, जिसने पूरे जिले को दहला कर रख दिया है। गांव में आयोजित एक छट्ठी कार्यक्रम के सामूहिक भोज के बाद अब तक पांच मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई ग्रामीण और बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं।इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल व्याप्त है। जानकारी के अनुसार गोट गांव के एक परिवार में छट्ठी समारोह आयोजित था। इसमें नाते रिश्तेदारों के साथ ही पूरे गांव के लोगों के लिए भोज का कार्यक्रम भी रखा गया था। भोजन करने के कुछ ही घंटों बाद ग्रामीणों और बच्चों में उल्टी-दस्त, चक्कर और बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। देखते ही देखते कई लोगों की हालत बिगड़ गई। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण, बीमारों को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाने में काफी कठिनाई हुई। आनन-फानन में उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक पांच मासूम बच्चों की जान जा चुकी थी। दर्जनों लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है।घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तत्काल हरकत में आया। नारायणपुर जिला अस्पताल और भैरमगढ़ स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सा टीमों को तुरंत गोट गांव के लिए रवाना किया गया। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य अमला मौके पर है और बीमारों का उपचार युद्धस्तर पर जारी है।प्रशासन ने बीमारी फैलने का प्राथमिक कारण छट्ठी के भोजन को माना है। इसकी पुष्टि के लिए भोजन के सैंपल लेकर फूड लैब में परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके।

गांव में मातम और निगरानी

पांच बच्चों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है, और प्रशासनिक अधिकारी हालात पर लगातार कड़ी नजर रखे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बीमारों की जांच कर रही हैं और उन्हें चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से संदिग्ध भोजन या पानी से परहेज़ करने की अपील की है। लापरवाही की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस संवेदनशील क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

टेट और पेंशन की समस्या का हो निराकरण: सीजी टीए

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मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को टीचर्स एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन

जगदलपुर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश व्यापी कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले के एलबी संवर्ग के शिक्षकों ने अपनी मांग दोहराते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्यसचिव, शिक्षा सचिव एवं शिक्षा संचालक के नाम कलेक्टर बस्तर को अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मे टेट परीक्षा अनिवार्यता के संबंध में शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट से 1 सितंबर 2025 को पारित निंर्णय जिसमें 5 वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है जबकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 17 अगस्त 2012 को जारी छत्तीसगढ़ राजपत्र शिक्षक पंचायत संवर्ग भर्ती तथा सेवा की शर्ते नियम 2012 के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है। इसके पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर 17 अगस्त 2012 के पूर्व के नियुक्त सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए छत्तीसगढ शासन द्वारा आवश्यक पहल करने की मांग की है। एल बी संवर्ग के शिक्षकों के पेंशन निर्धारण के लिए पेंशन हेतु सेवा अवधि की गणना संविलियन दिनांक 1 जुलाई 2018 से करने के कारण वर्ष 2028 के पूर्व सेवानिवृत होने वाले एलबी संवर्ग के शिक्षकों को पुरानी पेशन का लाभ नहीं मिल रहा है, अतः पूर्व सेवा प्रथम नियुक्ति अवधि की गणना करते हुए समस्त शिक्षक एलबी संवर्ग के लिए पुरानी पेंशन निर्धारित करने की मांग की गई।

संघ ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 2 सितंबर 2008 को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 16 सितंबर 2009 को तथा उत्तराखड सरकार द्वारा 29 अक्टूबर 2010 को आदेश जारी कर 33 वर्षं की अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेंशन के स्थान पर 20 वर्ष अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेशन का प्रावधान किया गया है, सेवानिवृत होने पर छत्तीसगढ़ में 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेंशन का नियम है। इसलिए भारत सरकार, उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड सरकार के समान 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा में अंतिम वेतन की 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान करने एवं उच्च न्यायालय बिलासपुर की डबल बेंच द्वारा याचिका पर 28 फरवरी 2024 को पारित निर्णय के तहत सभी पात्र एलबी संवर्ग के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति समयमान देने का आदेश जारी करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के प्रवीण श्रीवास्तव, लुदरसन कश्यप, मोहम्मद ताहिर शेख, अमित पॉल, शरद श्रीवास्तव, पवन भट्ट, गजराज सिंह, दुर्योधन पटेल, दिलीप कुमार भारती आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।

दिवाली पर मातम, तालाब में डूब गए तीन बच्चे

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तीनों बच्चों की मौत, दो बच्चे एक ही परिवार के

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के पदेड़ा गांव में दीपावली की खुशियां मातम में बदल गईं। बीजापुर ब्लाक की ग्राम पंचायत पदेडा़ के हिरोलीपारा निवासी तीन आदिवासी बच्चों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है। मंगलवार दोपहर नहाने के दौरान तीनों बच्चे तालाब में डूब गए। बताया जा रहा है कि एक बच्चा आंगनबाड़ी केंद्र में और दो बच्चे हिरोलीपारा की प्राथमिक शाला में पढ़ते थे।

इनकी उम्र 4 से 6 साल के बीच की थी। मृत बच्चों के नाम दिनेश कोरसा, नवीन हपका व मनीता हपका बताए गए हैं। दोनों बालक दूसरी कक्षा में पढ़ते थे, जबकि मनीता आंगनबाड़ी जाती थी। घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन व शिक्षा विभाग और पुलिस को दी गई है। प्रशासनिक पुलिस टीम मौके पर पहुंची। तीनों बच्चों के शवों को बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए बीजापुर लाया गया। पदेडा के पूर्व सरपंच गुड्डू कोरबा ने इस घटना की जानकारी दी और बताया कि घटना दोपहर में हुई है। बच्चे तालाब में नहाने गए थे, जहां वे हादसे का शिकार हो गए।गांव में गमगीन माहौल है।

पथरागुड़ा में दिखी गोंड़ समुदाय की परंपरा की शानदार झलक

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ईसर गौरा-गौरी विवाह का हुआ अदभूत आयोजन

जगदलपुर आदिवासी ध्रुव गोड़ समाज एवं अन्य सहयोगी समाजों द्वारा जगदलपुर के पथरा गुड़ा में इस वर्ष भी देवों के देव बूढ़ा देव और मां पार्वती की शादी का महापर्व मनाया गया।इसके साक्षी बने शहरवासी। 1 सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग ईशर गौरा की शादी में शामिल हुए। लोग ईशर गौरा के जयकारे लगाते, नाचते गाते और आतिशबाजी करते हुए चल रहे थे। महिलाएं घर घर से कलश लेकर निकलीं और लंबी कतारों में चल रहीं थीं।सभी लोग अपने इष्ट देव के विवाह में शामिल होकर अपने आप को धन्य समझ रहे थे। यह पावन पर्व मनाने के पीछे एक किंवदंती है कि नई फसल आने की खुशी में नए धान की बाली ईसर गौरा को भेट कर अच्छी फसल की कामना करते हुए अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ईसर गौरी की शादी के बाद ही आदिवासी समाज में लोग अपने बच्चों की शादी करते हैं। यह भी मान्यता है कि सुरोती की रात से ही मौसम में बदलाव दिखने लगता है ठंड का अहसास होने लगता है। इस त्यौहार की एक सप्ताह पहले से तैयारी कर ली जाती है। घरों की लिपाई पोताई और रंग रोगन किया जाता है। ईसर राजा की शादी में कोई कसर बाकी न रहे, इस बात की पूरी सावधानी बरती जाती है। दूसरे दिन विसर्जन का कार्यक्रम होता है जिसमें महिला पुरुष नाचते गाते हुए अपने आराध्य देव का विसर्जन करते हैं। समाज के संभागीय अध्यक्ष संजय ध्रुव, संभागीय सचिव लिलेश्वर ध्रुव, जिला उपाध्यक्ष विक्रम चंद्रवंशी, परिक्षेत्र अध्यक्ष अशोक मंडावी, उपाध्यक्ष करण सिंह नेताम, युवा अध्यक्ष हेमंत चंद्रवंशी, ओमप्रकाश ध्रुव, माता के सेवादार सीताराम नेताम, नीलकंठ ठाकुर गोंचू राम ध्रुव, भगत राम ध्रुव रामनारायण ध्रुव, धनी राम भंडारी, संतोष भंडारी, रमेश नेताम, जितेंद्र नेताम, वेद कुमार, रूप नारायण ध्रुव, महिला प्रकोष्ठ की दया ध्रुव, राधा ध्रुव, गौरी ध्रुव, सुरुजबती नेताम, पायल नेताम, पुष्पा ध्रुव, नीलम ध्रुव, अनिता ध्रुव, सावित्री ध्रुव, लक्ष्मी ठाकुर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक सदस्यों सहित गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर इस महति कार्य को संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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