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खाद संकट को लेकर विधानसभा में बिफरे उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायकलखेश्वर बघेल

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किसान खाद के लिए परेशान और सरकार बैठी है मौन: लखेश्वर बघेल

जगदलपुर प्रदेश में लगातार गहराते खाद संकट और किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होने की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है और कृषि को प्राथमिकता देने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का किसान आज डीएपी और यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकने और घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं

बघेल ने कहा कि वर्तमान समय खेती किसानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि कार्य तेजी से शुरू हो चुके हैं, लेकिन किसानों को समय पर बीज एवं खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण वे गंभीर चिंता में हैं। प्रदेश की सहकारी समितियों, सोसायटियों एवं खाद वितरण केंद्रों में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, लेकिन मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं दी जा रही है और दो एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि के मालिक किसानों को भी केवल एक बोरी खाद देकर वापस भेजा जा रहा है। इससे किसानों को खेती के कार्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस्तर विधायक ने कहा कि यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों के साथ अन्याय है। प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में बीज और खाद की कमी किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रही है। यदि किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं कराए गए तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय प्रभावित होगी और कृषि व्यवस्था कमजोर होगी।

नहीं चलेगा घोषणा से काम: बघेल उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। यदि समय रहते खाद संकट का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के हजारों किसानों की खेती प्रभावित हो सकती है सरकार को चाहिए कि खाद भंडारण, वितरण और आपूर्ति व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए। बघेल ने प्रशासन से मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक किसानों तक खाद उचित मात्रा में पहुंचे। साथ ही उन्होंने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं वितरण में अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि कई बार किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिलने के बावजूद निजी स्तर पर अधिक कीमतों पर खाद उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं, जिसकी जांच आवश्यक है,

मिले क्वालिटी का बीज भी

बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने यह भी कहा कि किसानों को केवल खाद ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा बीज उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। कृषि सीजन के दौरान बीज और खाद दोनों की पर्याप्त व्यवस्था होना बेहद आवश्यक है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। छत्तीसगढ़ विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रदेशभर में डीएपी एवं यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, वितरण व्यवस्था में सुधार लाया जाए तथा किसानों को राहत देने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं अन्नदाता की उपेक्षा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती कांग्रेस पार्टी किसानों के मुद्दों को लगातार उठाती रही है और आगे भी किसानों के अधिकार, सम्मान एवं हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।

कल भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान – कृतियों का विमोचन

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रायपुर । देश के जाने-माने कथाकार, लेखक, संपादक श्री बलराम 29 मई को समय 3 बजे राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद , शंकर नगर रायपुर में शिक्षा नीति-2020 के विशेष संदर्भ में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और मेरा लेखन’ विषय पर अपना व्याख्यान देंगे । श्रीबलराम ने दैनिक ‘आज’ (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत की। उन्होंने ‘सारिका’, ‘नवभारत टाइम्स’ (साहित्य संपादक) और ‘लोकायत’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया है । वर्तमान में वे भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के तहत ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ (साहित्य अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका) के संपादक हैं । उन्होंने एनसीईआरटी (नई दिल्ली के पाठ्यचर्या समिति) के विशेषज्ञ के रूप में उल्लेखनीय सेवाएँ दी हैं । एक अन्य आयोजन में उन्हें पर डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी स्मृति लघुकथा पुरस्कार-2026 से अलंकृत किया जायेगा ।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से उनके 75 वें वर्ष पर अभिनंदन किया जायेगा । श्री बलराम छत्तीसगढ़ के रचनाकारों की विभिन्न कृतियों का विमोचन करेंगे । इनमें प्रमुख हैं – डॉ. महेन्द्र कुमार ठाकुर – सत्य, साहस और संघर्ष का सृजन-विस्तार (संपादक – डॉ. रमेश तिवारी और राजशेखर चौबे), नेता जी घूँघट के सामने (हास्य व्यंग्य संग्रह – डॉ. महेन्द्र कुमार ठाकुर), नारी का संबल (त्रैमासिक पत्रिका – संपादक श्रीमती शंकुतला तरार), छत्तीसगढ़ मित्र (मासिक पत्रिका – संपादक : डॉ. सुधीर शर्मा), वैभव वैभव प्रकाशन की कृतियों तथा जयप्रकाश मानस की दो लघुकथा संग्रहों बची हुई हवा तथा दो कतार पीछे का विमोचन करेंगे।

अब खनिज माफियाओं के फन कुचलने की जरूरत

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दिखावे की कार्रवाई से नहीं चलने वाला है काम

कार्रवाई होने के बाद दूसरे दिन ही सिर उठा लेते हैं रेत माफिया

अवैध परिवहन करते वाहन किए गए जप्त

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा एवं के कड़े रुख के बाद भले ही जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया गया है, मगर ताज्जुब की बात तो यह है कि यही माफिया कार्रवाई होने के दूसरे दिन बाद ही फिर से सिर उठा लेते हैं। जुर्माना भरने के बाद उनके वाहन भले ही छूट जाते हैं, मगर बाद में वे दूसरे वाहनों के जरिए रेत और अन्य गौण खनिजों का अवैध खनन एवं परिवहन शुरू कर देते हैं। विभाग के मैदानी अधिकारियों और कुछ राजनेताओं के संरक्षण में यह खेल बदस्तूर चलते रहता है।

बीते 27 मई को जिला खनिज अधिकारी शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में खनिज जांच दल ने बस्तर जिला अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। खनिज महकमे की टीम ने मांदर, रायकोट और कोड़ेनार जैसे संवेदनशील इलाकों में औचक निरीक्षण करते हुए अवैध रूप से गौण खनिज का परिवहन कर रहे छह वाहनों को रंगेहाथों पकड़ा। बिना वैध अभिवहन पास (रॉयल्टी पर्ची) के खनिजों का परिवहन करते पाए जाने पर इन सभी वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ अवैध परिवहन का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है तथा खनिज से लदे सभी वाहनों को तुरंत जप्त कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। इस छापेमारी के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से रेत और चूना पत्थर का अवैध कारोबार उजागर हुआ है। खनिज विभाग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, मांदर क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए तीन गाड़ियां पकड़ी गईं। इसी तरह रायकोट क्षेत्र में जांच दल ने हाईवा को अवैध रूप से चूना पत्थर ले जाते हुए जप्त किया। इसके अलावा कोड़ेनार क्षेत्र में भी रेत के अवैध परिवहन पर कार्रवाई की गई, जहां दो टिप्परों को खनिज सहित अपनी अभिरक्षा में लिया गया। प्रशासन ने इस मामले में संलिप्त सभी वाहन मालिकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

खनिज अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन सभी आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 के नियम 71 और खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के अंतर्गत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने पूर्व में दी गई चेतावनियों को दोहराते हुए कहा कि बिना वैध पास के खनिजों का परिवहन करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। यदि भविष्य में इन्हीं परिवहनकर्ताओं द्वारा दोबारा ऐसा कृत्य किया गया, तो और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में खनिज संपदा की चोरी रोकने और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए खनिज अमले द्वारा यह आकस्मिक जांच अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा, जिससे क्षेत्र के खनिज माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

फिर क्यों सिर उठा लेते हैं माफिया?

बकावंड, जिले में खनिज विभाग द्वारा लगातार खनिज माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करना अच्छी बात है, मगर बकावंड और करपावंड क्षेत्र में कार्रवाई के दूसरे दिन ही रेत का उत्खनन शुरू हो जाना यह साबित करता है कि विभाग से ज्यादा माफिया मजबूत हैं। कलेक्टर के कड़े रुख के चलते खनिज अधिकारी चेरपा भले ही द्वारा ऐसी कार्रवाईयों को अंजाम दे रहे हैं, मगर इन कार्रवाईयों पर जमीनी तौर पर कड़ा क्रियान्वयन करनें में श्री चेरपा के मातहत अधिकारी न जाने क्यों मजबूर हैं? खनिज विभाग के अधिकारी के रिश्तेदार से लेकर भू माफिया भी अपने संरक्षणदाता आकाओं के माध्यम से लगातार अवैध खनन और परिवहन को अंजाम देते आ रहे हैं। बकावंड और करपावंड इलाके में ऎसी गतिविधियां आसानी से देखी जा सकती हैं। इसे देखते हुए इन इलाकों के किसान और ग्रामीण कहते हैं हैं कि नदियों के गुनहगारों के फन कुचलना अब जरूरी हो गया है।

थानेदार पर हो कार्रवाई: मिश्रा

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जगदलपुर कांकेर जिले के अंतागढ़ में पत्रकार के साथ थाना प्रभारी अंतागढ़ द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने कड़ी निंदा की है। मिश्रा ने कहा है कि बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्र में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता की आवाज बन कर क्षेत्र की जन समस्याओं को शासन, प्रशासन तक पहुंचाते हैं। वे सच्चे मन से जनता की सेवा कर रहे हैं। वहां पर अगर पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो आम जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल होती है एवं आगे क्षेत्र का वातावरण खराब होगा। शिवसेना नेता चंद्रमौली मिश्रा ने शासन प्रशासन इस मामले की जांच करते हुए तत्काल थाना प्रभारी पर कार्रवाई करने की मांग की है।

खाद संकट को लेकर विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक श्री लखेश्वर बघेल का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, कहा-किसान खाद के लिए परेशान, सरकार मौन

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प्रदेश में लगातार गहराते खाद संकट और किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होने की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के उप नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर विधायक श्री लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है और कृषि को प्राथमिकता देने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का किसान आज डीएपी और यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकने और घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर है।

बघेल ने कहा कि वर्तमान समय खेती-किसानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि कार्य तेजी से शुरू हो चुके हैं, लेकिन किसानों को समय पर बीज एवं खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण वे गंभीर चिंता में हैं प्रदेश के विभिन्न सहकारी समितियों, सोसायटियों एवं खाद वितरण केंद्रों में किसानों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, लेकिन मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता नहीं हो पा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद नहीं दिया जा रहा है और दो एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि रखने वाले किसानों को भी केवल एक बोरी खाद देकर वापस भेजा जा रहा है इससे किसानों को खेती के कार्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बस्तर विधायक नें कहा कि यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों के साथ अन्याय है प्रदेश का किसान पहले से ही मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है ऐसे समय में बीज और खाद की कमी किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रही है यदि किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं कराए गए तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय प्रभावित होगी और कृषि व्यवस्था कमजोर होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना है यदि समय रहते खाद संकट का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश के हजारों किसानों की खेती प्रभावित हो सकती है सरकार को चाहिए कि खाद भंडारण, वितरण और आपूर्ति व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए।

बघेल ने प्रशासन से मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक किसानों तक खाद उचित मात्रा में पहुंचे साथ ही उन्होंने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं वितरण में अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की उन्होंने कहा कि कई बार किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिलने के बावजूद निजी स्तर पर अधिक कीमतों पर खाद उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं, जिसकी जांच आवश्यक हैल

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को केवल खाद ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा बीज उपलब्धता और गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कृषि सीजन के दौरान बीज और खाद दोनों की पर्याप्त व्यवस्था होना बेहद आवश्यक है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े

छत्तीसगढ़ विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष श्री लखेश्वर बघेल ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रदेशभर में डीएपी एवं यूरिया खाद की पर्याप्त आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए, वितरण व्यवस्था में सुधार लाया जाए तथा किसानों को राहत देने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया जाए

उन्होंने कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं अन्नदाता की उपेक्षा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती कांग्रेस पार्टी किसानों के मुद्दों को लगातार उठाती रही है और आगे भी किसानों के अधिकार, सम्मान एवं हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी

नेशनल हाईवे-30 पर ट्रक से टकराया पिकअ,पपास सड़क हादसा, खालीll पिकअप ट्रक से टकराई, ड्राइवर गंभीर

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फरसागुड़ा-जूनावाही के बीच हुई दुर्घटना

जगदलपुर नेशनल हाइवे-30 पर फरसागुड़ा जूनावाही के पास आज सुबह बड़ी सड़क दुर्घटना हो गई। जगदलपुर से केशकाल की ओर जा रहे खाली मुर्गा पिकअप आगे चल रहे ट्रक से साइड लेते समय अनियंत्रित होकर पीछे से टकरा गया। हादसे में पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक गंभीर रूप से घायल हो गया।

पिकअप में दो लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर को गंभीर चोटें आई हैं। घायल ड्राइवर को 108 एंबुलेंस से मेकाज अस्पताल जगदलपुर ले लाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिकअप जगदलपुर में मुर्गा खाली करके वापस केशकाल जा रहा था। इसी दौरान ट्रक को ओवरटेक करने के प्रयास में पिकअप पीछे से जा टकराया। हादसे के बाद हाइवे पर कुछ देर आवागमन बाधित रहा। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त पिकअप को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया।

कोलचूर पंचायत में लाखों के भ्रष्टाचार का आरोप, बाउंड्रीवॉल निर्माण में गड़बड़ी

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पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव पर सरकारी राशि डकारने का आरोप

नाराज ग्रामीण बोले- कागजों पर विकास, जमीन पर भ्रष्टाचार

जगदलपुर विकासखंड बस्तर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोलचूर में पंचायत के कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव पर मिलीभगत कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मामले को लेकर गांव में भारी नाराजगी का माहौल है और ग्रामीण लगातार जांच व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य के नाम पर लगभग 4 लाख 90 हजार रुपए की स्वीकृति हुई थी, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य बेहद घटिया और अधूरा दिखाई दे रहा है।

आरोप है कि करीब 4 लाख 50 हजार रुपए तक की राशि केवल कागजों में खर्च दिखाकर हड़प ली गई। गांव वालों का कहना है कि विकास कार्य सिर्फ फाइलों और दस्तावेजों में पूरे हो रहे हैं, जबकि हकीकत में पंचायत की स्थिति बदहाल है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में कई अन्य निर्माण कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कहीं आधा-अधूरा निर्माण किया गया, तो कहीं बिना काम किए ही भुगतान निकाल लिया गया। लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव की लापरवाही और मनमानी के कारण शासन की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो पंचायत में लाखों रुपए के घोटाले उजागर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी साधे बैठे हैं, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से मांग की है कि कोलचूर पंचायत के सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर सरकारी राशि की वसूली की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार की फाइलों पर धूल जमती रहेगी।

वर्जन

कराएंगे जांच

पंचायत से लगातार शिकायतें मिल रही हैं और सचिव के कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। जांच कराएंगे और जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

नगर पंचायत में करोड़ों की गड़बड़ी, सीएमओ और अकॉउंटेंट सस्पेंड

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वित्तीय अनियमितता की जांच प्रक्रिया हुई तेज

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले की नगर पंचायत भोपालपटनम में हुई वित्तीय गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रालय, नया रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार नगर पंचायत भोपालपटनम के सीएमओ विकास पाटले एवं लेखापाल सूर्यकिरण चिडेम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार मुख्य नगर पालिका अधिकारी और लेखपाल पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, बिना प्रशासनिक स्वीकृति के कार्य कराने तथा सरकारी राशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद नगर पंचायत भोपालपटनम में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत भोपालपटनम में अटल चौक स्थापना कार्य के नाम पर किए गए कार्यों में नियमों को दरकिनार कर लगभग 15 लाख रुपए की राशि बिना सक्षम अनुमति के आहरित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्यों के निष्पादन में निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा वित्तीय अनुशासन की खुली अवहेलना की गई। शासन के आदेश में उल्लेख किया गया है कि बिना सक्षम स्वीकृति के भुगतान किए जाने और सरकारी राशि के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच प्रारंभ की गई।

जांच में अनियमितता पाए जाने पर शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया। जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में दोनों अधिकारियों का मुख्यालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय जगदलपुर में निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अथवा वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। वहीं संबंधित प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख तलब किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद भोपालपटनम नगर पंचायत सहित स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से नगर पंचायत में विकास कार्यों और खर्चों को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा भी कई बार निर्माण कार्यों में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी को लेकर शिकायतें की गई थीं।शासन की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ती है तो नगर पंचायत के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार नगरीय प्रशासन विभाग ने मामले में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश भी जारी किए हैं। जांच के दौरान यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भोपालपटनम नगर पंचायत में हुए इस बड़े प्रशासनिक एक्शन ने जिले भर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अब सबकी नजर शासन की आगामी जांच रिपोर्ट और संभावित आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

बारिश से भीगा ग्रामीणों का सुखाया हुआ मक्का

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किसानों की सारी मेहनत पर एक झटके में फिर गया पानी

जगदलपुर बस्तर जिले की धुरगुड़ा पंचायत में किसानों की मेहनत पर अचानक बदले मौसम ने पानी फेर दिया। गांव के किसानों द्वारा कई दिनों की कड़ी मेहनत से खेतों से निकालकर सुखाया जा रहा मक्का अचानक हुई बारिश से पूरी तरह भीग गया। इस घटना के बाद किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है, क्योंकि अब तैयार फसल खराब होने का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि मक्का की फसल को सुरक्षित भंडारण के लिए खुले स्थानों पर सुखाया जा रहा था। किसान दिन-रात मेहनत कर अनाज को पलट पलटकर सुखाने में लगे थे, ताकि उसे बाजार में अच्छे दाम पर बेचा जा सके। लेकिन अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश के कारण पूरा मक्का भीग गया। कई किसानों के घरों और आंगनों में रखा अनाज भी पानी की चपेट में आ गया। किसानों का कहना है कि लगातार नमी बने रहने से मक्का में फफूंदी लगने और दाने सड़ने का खतरा बढ़ गया है। जिससे बाजार में उचित कीमत मिलना मुश्किल हो जाएगा। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वन्यप्राणियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता: वन मंत्री केदार कश्यप

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हाथियों की मौत रोकने छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का विशेष प्रशिक्षन

जून के पहले हफ्ते जुटेंगे देश के शीर्ष विशेषज्ञ

रायपुर छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों, विशेष रूप से हाथियों और हाथी शावकों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप लगातार गंभीर और संवेदनशील पहल कर रहे हैं। वन मंत्री श्री कश्यप की विशेष चिंता और स्पष्ट मंशा के अनुरूप अब राज्य में वन्यजीवों की असमय मृत्यु रोकने तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए वन विभाग द्वारा एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की जा रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून के प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का विषय “मृत्यु से सीख: एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच के आवश्यक तत्व” रखा गया है। वन मंत्री केदार कश्यप का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यप्राणियों के स्वास्थ्य, उपचार, वैज्ञानिक जांच और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप को भी उतनी ही प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसी सोच के साथ यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शीर्ष विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञ अधिकारियों और डॉक्टरों को हाथियों तथा अन्य वन्यप्राणियों में होने वाली बीमारियों की पहचान, उपचार, पोस्टमार्टम की वैज्ञानिक प्रक्रिया, बिसरा परीक्षण और फॉरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे। वन मंत्री केदार कश्यप चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का वन अमला राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक क्षमता से सुसज्जित हो, ताकि किसी भी वन्यजीव की बीमारी अथवा मृत्यु की स्थिति में त्वरित और सटीक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

हाथी शावकों की मौतों का होगा विश्लेषण

विगत एक वर्ष में रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथी शावकों की हुई मौतों को वन मंत्री केदार कश्यप ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में हुई वन्यजीव मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण रिपोर्ट एवं विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वास्तविक मामलों पर चर्चा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रशिक्षण में राज्य के सभी चिड़ियाघरों, टाइगर रिजर्व, अभयारण्यों में पदस्थ पशु चिकित्सकों सहित हाथी प्रभावित वन मंडलों के डीएफओ, उप-वनमंडलाधिकारी, वन क्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा। वन मंत्री केदार कश्यप की प्राथमिकता है कि मैदानी स्तर पर कार्यरत अमला वैज्ञानिक रूप से इतना सक्षम हो कि वन्यजीवों के स्वास्थ्य संरक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहे।

हो चुका है प्रारंभिक प्रशिक्षण

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर इससे पूर्व 7 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों एवं डॉक्टरों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इसी पहल को और व्यापक एवं व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक जांच प्रणाली और प्रशिक्षित अमले के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हाथियों एवं अन्य वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा का दायित्व भी है।

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