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₹8.23 करोड़ से बदलेगी जगदलपुर की तस्वीर, सड़क-नाली से रोशनी तक 17 बड़े काम मंजूर

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15वें वित्त आयोग से मिली बड़ी सौगात; महापौर संजय पांडे के विकास विजन को मिली रफ्तार, हर वार्ड तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर फोकस

जगदलपुर। शहर के सुनियोजित और संतुलित विकास की दिशा में नगर निगम को बड़ी वित्तीय मंजूरी मिली है। 15वें वित्त आयोग के अनटाइड ग्रांट से 17 विकास कार्यों के लिए ₹823.20 लाख यानी करीब ₹8.23 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस राशि से शहर के अलग-अलग हिस्सों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, सड़क चौड़ीकरण, पाथवे और विद्युतीकरण जैसे काम कराए जाएंगे। खास बात यह है कि विकास कार्यों को विभिन्न वार्डों और प्रमुख आवागमन वाले क्षेत्रों में रखा गया है, जिससे शहर की बुनियादी सुविधाओं को एक साथ मजबूत करने की कोशिश दिखाई दे रही है।*महापौर के स्वच्छता विजन में सड़क, नाली और रोशनी सबसे अहम*महापौर संजय पांडे लगातार शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और स्वच्छता को नगर विकास की प्राथमिकता बता रहे हैं। उनका जोर ऐसे कामों पर है, जिनका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

सड़कें बेहतर हों, बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम हो, नालियों की क्षमता बढ़े और प्रमुख मार्ग पर्याप्त रोशनी से जगमगाएं—इसी सोच के तहत स्वीकृत कार्यों को विकास की कड़ी से जोड़ा जा रहा है।महापौर का कहना है कि आधुनिक शहर का विकास केवल बड़े निर्माण कार्यों से नहीं, बल्कि मजबूत सड़क, व्यवस्थित जल निकासी, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और बेहतर आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं से तय होता है। इसी सोच के साथ अलग-अलग वार्डों की जरूरत के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।*कहीं नाली, कहीं सड़क तो कहीं चौड़ीकरण*स्वीकृत कार्यों में वार्ड क्रमांक 25 में दलपत सागर कॉलेज से कब्रिस्तान मेन रोड तक आरसीसी नाली निर्माण शामिल है। वार्ड 43 में सुभाष मिश्रा के घर से एक्सपोर्ट रोड तक नाली तथा वार्ड 37 में राजेंद्र नगर के पीछे से चिरकोट रोड तक नाली निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न वार्डों में बीटी सड़क निर्माण के कार्य भी प्रस्तावित हैं।डीजे कोर्ट चौक से बोधघाट थाना चौक तक तथा शहीद पार्क से चांदनी चौक होते हुए हनुमान मंदिर और संजय मार्केट क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के काम भी स्वीकृत किए गए हैं। इन क्षेत्रों में रोशनी की व्यवस्था मजबूत होने से रात के समय आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है।वार्ड 25 में दुर्गा मंदिर से बोधघाट रोड तक बीटी सड़क चौड़ीकरण, गंगा मुंडा क्षेत्र में आरसीसी ड्रेन और नया बस स्टैंड से जिला न्यायालय क्षेत्र में नाली निर्माण भी इसी योजना में शामिल है। वहीं वार्ड 48 में पीजी कॉलेज से नालंदा परिसर तक सड़क चौड़ीकरण, पाथवे, नाली एवं विद्युतीकरण का काम कराया जाएगा।

प्रमुख मार्गों और बढ़ते शहर पर फोकस

जगदलपुर शहर के विस्तार के साथ यातायात और जल निकासी जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण के साथ पैदल आवागमन के लिए पाथवे और जल निकासी के लिए नाली निर्माण को एक साथ जोड़ना नगर विकास की दीर्घकालीन जरूरतों से जुड़ा कदम माना जा रहा है। स्वीकृत कार्यों में सड़क और नाली के साथ विद्युतीकरण को शामिल करने से कई क्षेत्रों में एक साथ आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना है।

जनप्रतिनिधियों के प्रयासों को महापौर ने सराहा

नगर को मिली इस बड़ी स्वीकृति पर महापौर संजय पांडे ने उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव, बस्तर सांसद महेश कश्यप तथा जगदलपुर विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नगर विकास को लेकर तीनों जनप्रतिनिधियों का विजन और सहयोग जगदलपुर के लिए महत्वपूर्ण है।महापौर ने कहा कि शहर को केवल वर्तमान जरूरतों के हिसाब से नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर वार्ड को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है।

महापौर बोले – विकास की नई तस्वीर गढ़ रहा जगदलपुर

महापौर संजय पांडे ने कहा, “जगदलपुर को बेहतर सड़क, मजबूत नाली व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और सुगम आवागमन वाली आधुनिक नगरी के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता है। 15वें वित्त आयोग से मिली यह स्वीकृति शहर के विकास को नई गति देगी। हमारा प्रयास है कि विकास का लाभ शहर के हर वार्ड और हर नागरिक तक पहुंचे। सड़क से लेकर नाली और स्ट्रीट लाइट तक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत कर हम जगदलपुर के विकास की नई तस्वीर गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”उन्होंने कहा कि स्वीकृत सभी कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाएगा। उनका जोर इस बात पर है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि लंबे समय तक नागरिकों के लिए उपयोगी और टिकाऊ साबित हों।₹8.23 करोड़ की यह मंजूरी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब जगदलपुर शहर लगातार विस्तार ले रहा है। 17 कार्यों के जरिए अलग-अलग वार्डों में सड़क, नाली और रोशनी जैसी मूलभूत जरूरतों को मजबूत करने की कोशिश को महापौर के ‘हर वार्ड तक विकास’ के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है।

आदिवासियों की आस्था का सौदा कर रहे हैं आदिवासी मुख्यमंत्री: विक्रम मंडावी

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नंदराज पर्वत में लौह अयस्क खनन पर बिफरे विक्रम मंडावी

7200 पेड़ काटने की मंजूरी और ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन शुरू करने पर विधायक मंडावी हुए हमलावर


जगदलपुर सात साल पहले आदिवासियों के उग्र आंदोलन के बाद जिस नंदराज पर्वत पर खनन रुक गया था, उसी पवित्र पहाड़ पर विष्णुदेव साय सरकार फिर लौह अयस्क निकालने और हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रही है। वन विभाग ने पहले चरण में ही 7200 पेड़ काटने की मंजूरी दे दी है। लौह अयस्क के सैंपल निकलकर नगरनार भेजे जा चुके हैं। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने इसे आदिवासी आस्था पर सीधा हमला बताते हुए नंदराज पर्वत पर लौह खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग सरकार से की है।


विक्रम मंडावी ने बयान जारी कर कहा है कि बस्तर के आदिवासी नंदराज पहाड़ को सिर्फ पहाड़ नहीं मानते। यह पिटोर रानी माता और नंदराज देवता का निवास है। 2019 में 50 गांवों के लोगों ने किरंदुल में महाआंदोलन किया था। फर्जी ग्रामसभा के आरोप लगे थे। आज वही पहाड़ फिर उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने अपने ही समुदाय की आस्था और जंगल को उद्योगपतियों को क्यों सौंप दिया है? विधायक विक्रम मंडावी का आरोप है कि 2017 की ग्रामसभा पहले ही शून्य घोषित हो चुकी थी। उसमें मृत व्यक्तियों के अंगूठे और फर्जी दस्तखत पाए गए थे। जांच रिपोर्ट शासन के पास लंबित है। नई ग्रामसभा की मंजूरी के बिना काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पेसा कानून और वन अधिकार कानून की खुली अवहेलना हो रही है। अनुसूचित क्षेत्र में खनन से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की विष्णुदेव साय सरकार कानून को दरकिनार कर रही है।


विधायक विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि विष्णुदेव साय खुद आदिवासी समुदाय से हैं। बस्तर के लोग उनसे उम्मीद करते थे कि वे जल, जंगल, जमीन और आस्था की रक्षा करेंगे। इसके बजाय उनके कार्यकाल में नंदराज जैसे पवित्र पर्वत पर फिर खनन की तैयारी शुरू हो गई। भाजपा की डबल इंजन सरकार बस्तर के संसाधनों को उद्योगपतियों तक पहुंचाने में लगी हुई है। नंदराज उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है। खनन के नाम पर आदिवासियों के देवता का निवास नष्ट किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरण नहीं, आस्था पर भी हमला है। विधायक विक्रम मंडावी ने सीधा सवाल किया-सरकारें जनता के लिए बनती हैं। सत्ता में आने के बाद जनता के लिए काम करना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार बनने के बाद पूरा ध्यान इस बात पर है कि बस्तर का जल, जंगल, जमीन और खनिज कैसे उद्योगपतियों तक पहुंचे? सवाल साफ है यह सरकार किसके लिए काम कर रही है? जनता के लिए या उद्योगपतियों के लिए? आदिवासी मुख्यमंत्री को इस फैसले की जवाबदेही लेनी होगी। नंदराज पहाड़ को बचाने का संघर्ष आस्था का संघर्ष है, जंगल का संघर्ष है और बस्तर की पहचान का संघर्ष है। हम इस लड़ाई में आदिवासी समाज के साथ खड़े हैं।

आपदा पीड़ितों की मद्द हेतु आगे आया उत्कल समाज

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कलेक्टर को सौंपा 21 हजार का चेक

जगदलपुर बस्तर संभाग में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के संकट को देखते हुए सामाजिक संगठन पीड़ित मानवता की सेवा में आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में उत्कल समाज बस्तर संभाग ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

समाज ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि राहत शिविरों के संचालन के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्यों में प्रशासन का हाथ बंटाने के लिए सहयोग राशि दी जाएगी। इसी निर्णय के परिपालन में मंगलवार को उत्कल समाज का एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को 21 हजार रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर सीपी बघेल और नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने समाज की इस मानवीय पहल और तत्परता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। चेक सौंपने के दौरान उत्कल समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष राजेश दास, सचिव सुमीत महापात्र, उपाध्यक्ष मथुरा तिवारी, कोषाध्यक्ष मनोज महापात्र, संगठन सचिव रमेश नंद, कार्यालय सचिव अच्युत सामंत तथा कार्यकारिणी सदस्य अतुल दास सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

बाल कल्याण समिति ने किया औचक निरीक्षण

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परखी बच्चों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्थाएं

जगदलपुर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ) जिला बस्तर द्वारा जिले की पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाओं का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शासकीय बाल गृह (बालक), बालिका गृह, खुला आश्रय गृह (बालक), बस्तर सामाजिक जन विकास समिति तथा सेवा भारती (मातृ छाया) विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी, जगदलपुर का विस्तृत अवलोकन किया गया। बाल कल्याण समिति (न्यायपीठ)जिला बस्तर के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्रही ने बताया कि निरीक्षण के दौरान संस्थाओं में बच्चों के लिए उपलब्ध साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था तथा समग्र देखरेख की गुणवत्ता का गहन परीक्षण किया गया।

समिति ने संस्था अधीक्षकों एवं कर्मचारियों को बच्चों के प्रति संवेदनशील एवं बाल हितैषी व्यवहार बनाए रखने तथा सभी आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर करने के निर्देश दिए। बारिश के मौसम को देखते हुए समिति ने सभी संस्थाओं को बालगृहों में निवासरत बच्चों के लिए तत्काल छाता एवं रेनकोट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।समिति ने बताया कि जिले की सभी पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाएं किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो रही हैं। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन संस्थाओं का प्रत्येक माह कम से कम दो बार नियमित निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान समिति सदस्यों ने संस्थाओं में संधारित विभिन्न पंजियों एवं अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण किया। साथ ही बालक-बालिकाओं एवं कर्मचारियों से व्यक्तिगत चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। पूर्व निरीक्षण के दौरान बताई गई कमियों का संस्थाओं द्वारा सफलतापूर्वक निराकरण किए जाने पर समिति ने संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण उपरांत बाल कल्याण समिति ने संस्थाओं के कार्य एवं व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए भविष्य में भी इसी स्तर की गुणवत्ता एवं बच्चों के सर्वोत्तम हितों को सुनिश्चित करने की अपेक्षा व्यक्त की। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य संतोष जोशी, वर्षा श्रीवास्तव, धनेश्वरी वर्मा सहित संबंधित संस्थाओं के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जगदलपुर में बाढ़ से भारी नुकसान, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में सैकड़ों वाहन डूबे

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वार्ड-41 के लालबाग क्षेत्र में रातोंरात बिगड़े हालात; स्थानीय लोगों ने बताया—करीब 1,500 दोपहिया और 100 से अधिक चारपहिया वाहन प्रभावित

जगदलपुर। भारी बारिश के बाद जगदलपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। लालबाग स्थित चंद्रशेखर आजाद वार्ड क्रमांक 41 की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बड़ी संख्या में वाहन पानी में डूब गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, कॉलोनी में करीब 1,500 दोपहिया और 100 से अधिक चारपहिया वाहन प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की प्रशासनिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।बाढ़ का पानी रात में तेजी से बढ़ने के कारण कई वाहन मालिकों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने का मौका नहीं मिला। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ दोपहिया वाहन नालियों और निचले हिस्सों में बह गए। पानी उतरने के बाद वाहनों को हुए नुकसान का आकलन शुरू हुआ।पत्रकार ओमप्रकाश साहू की कार समेत तीन वाहन प्रभावितईडब्ल्यूएस हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में शिव मंदिर के पास रहने वाले पत्रकार ओमप्रकाश साहू ने बताया कि रात में अचानक पानी बढ़ने लगा।

कुछ ही समय में पानी पार्किंग और घरों के आसपास पहुंच गया।साहू के अनुसार, उनकी Ertiga कार (CG 17 LA 9265) पूरी तरह पानी में डूब गई। उनकी Activa स्कूटी और Pulsar मोटरसाइकिल भी पानी के बहाव में नाली की ओर बह गईं। उन्होंने बताया कि इस घटना में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सर्वे के बाद होगा स्पष्टबाढ़ का पानी लंबे समय तक वाहनों में भरे रहने से इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रभावित लोगों के अनुसार, बड़ी संख्या में वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि, कुल नुकसान और प्रभावित वाहनों की वास्तविक संख्या का स्पष्ट आंकड़ा प्रशासनिक सर्वे के बाद ही सामने आएगा।स्थानीय लोगों ने प्रभावित क्षेत्र में नुकसान का सर्वे कराकर राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

आपदा पीड़ितों की मद्द हेतु आगे आया उत्कल समाज

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कलेक्टर को सौंपा 21 हजार का चेक

जगदलपुर बस्तर संभाग में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के संकट को देखते हुए सामाजिक संगठन पीड़ित मानवता की सेवा में आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में उत्कल समाज बस्तर संभाग ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।

समाज ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि राहत शिविरों के संचालन के साथ-साथ अन्य आवश्यक कार्यों में प्रशासन का हाथ बंटाने के लिए सहयोग राशि दी जाएगी। इसी निर्णय के परिपालन में मंगलवार को उत्कल समाज का एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा और बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को 21 हजार रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना, अपर कलेक्टर सीपी बघेल और नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने समाज की इस मानवीय पहल और तत्परता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। चेक सौंपने के दौरान उत्कल समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष राजेश दास, सचिव सुमीत महापात्र, उपाध्यक्ष मथुरा तिवारी, कोषाध्यक्ष मनोज महापात्र, संगठन सचिव रमेश नंद, कार्यालय सचिव अच्युत सामंत तथा कार्यकारिणी सदस्य अतुल दास सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

भेजपदर में बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आया बीजेपी महिला मोर्चा, गीता मिश्रा ने बांटी राहत सामग्री और खीर

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जगदलपुर, बाढ़ से अति प्रभावित क्षेत्र भेजपदर के प्रभावितों को बीजेपी की वरिष्ठ नेता गीता मिश्रा ने आज लगातार तीसरे दिन भी राहत पहुंचने का कार्य किया,सभी जरूरतमंदों को कपड़े दवाई ,राशन का सहयोग करने के पश्चात आज इनके द्वारा इन्हीं सैकड़ों ग्रामीण के बीच खीर बांटी गई, वहां उपस्थित महिला पुरुषों और बच्चों ने बताया कि गीता मैडम लगातार हमारे बीच उपस्थित होकर हमारा सहयोग कर रही है, वहीं बीजेपी नेता गीता मिश्रा ने कहा कि हम पार्टी के दिए गए निर्देश का पालन कर बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे है उन्होंने महिला मोर्चा नगरनार की महिला बहनों को धन्यवाद दिया कि वे इस विकट स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़े होकर उनका सहयोग किया।

प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री बस्तर के आदिवासियों का देवस्थान नंदराज पर्वत को उद्योगपतियों को सौंपने में लगे हैं- विक्रम मंडावी

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7200 पेड़ काटने की मंजूरी और ग्रामसभा के बिना खनन शुरू किए जाने पर विक्रम मंडावी का भाजपा और विष्णुदेव साय पर तीखा हमला

बीजापुर दिनांक-30-09-2026सात साल पहले आदिवासियों के उग्र आंदोलन के बाद जिस नंदराज पर्वत पर खनन रुक गया था, उसी पवित्र पहाड़ पर विष्णुदेव साय सरकार ने फिर लौह अयस्क निकालने और हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रहे है। वन विभाग ने पहले चरण में ही 7200 पेड़ काटने की मंजूरी दे दी है। लौह अयस्क के सैंपल निकलकर नगरनार भेजे जा चुके हैं। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने इसे आदिवासी आस्था पर सीधा हमला बताते हुए नंदराज पर्वत पर लौह खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग सरकार से की है।विक्रम मंडावी ने अपने अपने प्रेस बयान में कहा कि बस्तर के आदिवासी नंदराज पहाड़ को सिर्फ पहाड़ नहीं मानते। यह पिटोर रानी माता और नंदराज देवता का निवास है। 2019 में 50 गांवों के लोगों ने किरंदुल में महाआंदोलन किया था। फर्जी ग्रामसभा के आरोप लगे थे। आज वही पहाड़ फिर उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने अपने ही समुदाय की आस्था और जंगल को उद्योगपतियों को क्यों सौंप दिया है?विधायक विक्रम मंडावी का आरोप है कि 2017 की ग्रामसभा पहले ही शून्य घोषित हो चुकी थी। उसमें मृत व्यक्तियों के अंगूठे और फर्जी दस्तखत पाए गए थे। जांच रिपोर्ट शासन के पास लंबित है। नई ग्रामसभा की मंजूरी के बिना काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पेसा कानून और वन अधिकार कानून की खुली अवहेलना हो रही है। अनुसूचित क्षेत्र में खनन से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की विष्णुदेव साय सरकार कानून को दरकिनार कर रही है।विधायक विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि विष्णुदेव साय खुद आदिवासी समुदाय से हैं। बस्तर के लोग उनसे उम्मीद करते थे कि वे जल, जंगल, जमीन और आस्था की रक्षा करेंगे। इसके बजाय उनके कार्यकाल में नंदराज जैसे पवित्र पर्वत पर फिर खनन की तैयारी शुरू हो गई। भाजपा की डबल इंजन सरकार बस्तर के संसाधनों को उद्योगपतियों तक पहुँचाने में लगी हुई है। नंदराज उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है।खनन के नाम पर आदिवासियों के देवता का निवास नष्ट किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरण नहीं, आस्था पर हमला है। विधायक विक्रम मंडावी ने सीधा सवाल किया सरकारें जनता के लिए बनती हैं। सत्ता में आने के बाद जनता के लिए काम करना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार बनने के बाद पूरा ध्यान इस बात पर है कि बस्तर का जल, जंगल, जमीन और खनिज कैसे उद्योगपतियों तक पहुँचे। सवाल साफ है यह सरकार किसके लिए काम कर रही है? जनता के लिए या उद्योगपतियों के लिए?आदिवासी मुख्यमंत्री को इस फैसले की जवाबदेही लेनी होगी। नंदराज पहाड़ को बचाने का संघर्ष आस्था का संघर्ष है, जंगल का संघर्ष है और बस्तर की पहचान का संघर्ष है। हम इस लड़ाई में आदिवासी समाज के साथ खड़े हैं।

बंदूक छोड़ कलम को अपनी ताकत बनाई आत्मसमर्पित नक्सली अर्जुन ने

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प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की दसवीं बोर्ड परीक्षा

शिक्षादूत बनकर शिक्षा की अलख जगाना चाहता है अर्जुन ओयाम

अर्जुन झा-

जगदलपुर भारत भूमि अनादि काल से सदमार्ग पर चलने और पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देने वाली भूमि रही है। यहां एक खूंखार डाकू वाल्मीकि का ऐसा हृदय परिवर्तन हुआ कि महर्षि का दर्जा प्राप्त करने में सफल हो गए। रामायण ग्रंथ की रचना कर महर्षि वाल्मीकि कालजयी हो गए। ये तो थी त्रेतायुग की बात, कलयुग में भी अब ऎसी गाथाएं घटित होने लगी हैं। जो नक्सली कभी बंदूक को अपनी ताकत समझता था और उसके दम पर आतंक मचाता था, आज उसी नक्सली ने बंदूक छोड़ कलम को अपनी ताकत बना लिया है। आईए आपको सुनाते हैं कलयुग के इस वाल्मीकि की गाथा कलयुग के इस वाल्मीकि का नाम है अर्जुन। द्वापर युग के अर्जुन का निशाना अचूक था, वैसे ही कलयुग के इस अर्जुन की बंदूक की गोली भी हमेशा निशाने को हिट करती थी, मगर आज के बदल चुके अर्जुन की कलम भी कम पैनी नहीं है। बंदूक छोड़ कलम पकड़ने की चाहत और दृढ़ इच्छाशक्ति ने अर्जुन को “शिक्षा वीर” बना दिया है।

आज के इस अर्जुन का पूरा नाम है अर्जुन ओयाम। केंद्र और राज्य की सरकारों की नीतियों एवं योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सली अर्जुन ने समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया और बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में उसने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद तो अर्जुन ने तमाम कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए पुनर्वास केंद्र में रहकर पढ़ाई शुरू कर दी। उसने 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी और 500 में 335 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। अर्जुन की इस दृढ़ इच्छाशक्ति को बल और हौसला दिया पुलिस के बड़े अधिकारियों ने। पुलिस के अफसर लगातार अर्जुन का मनोबल बढ़ाते रहे। परीक्षा के लिए आवश्यक पुस्तकें और संसाधन उसे उपलब्ध कराए। परीक्षा के फार्म भरने से लेकर उनकी परीक्षा की तैयारी में सहायक बने। अर्जुन ओयाम वर्ष 2010 में माओवादी संगठन में शामिल हुआ था, लेकिन संगठन में रहते हुए भी उसने पढ़ाई जारी रखने की अपनी इच्छा को कभी समाप्त नहीं होने दिया। अक्टूबर 25 में 210 सशस्त्र माओवादियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण करने के बाद अर्जुन ने अपने जीवन की नई शुरुआत शिक्षा के माध्यम से करने का संकल्प लिया। समर्पण के बाद अर्जुन ने 10वीं की परीक्षा की तैयारी की और अपने 7 अन्य साथियों के साथ 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह उपलब्धि उसके दृढ़ संकल्प, मेहनत और बदलते जीवन की प्रेरणादायक मिसाल है। बीजापुर एसपी उमेश प्रसाद यादव ने अर्जुन की इस उपलब्धि के लिए उसे बधाई दी और आगे की पढ़ाई के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

अब ये है अर्जुन का लक्ष्य

अब अर्जुन का लक्ष्य 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने गांव तोड़का में शिक्षादूत के रूप में कार्य करना है। वह गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके जीवन में ज्ञान का उजियारा फैलाना चाहता है। अर्जुन का सपना है कि गांव के बच्चे पढ़ें, आगे बढ़ें और शिक्षा के माध्यम से गांव एवं पूरे क्षेत्र के विकास की नई कहानी लिखें। पुनर्वासित नक्सली अर्जुन ओयाम का कहना है- “बंदूक से नहीं, शिक्षा के उजियारे से बदलेगा गांव का भविष्य।”

पितृ पक्ष में गणेश विसर्जन और भंडारे को लेकर हिंदू सेना ने उठाए सवाल, धार्मिक मर्यादा के अनुरूप आयोजन की अपील

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दल्ली राजहरा। गणेशोत्सव के समापन के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन और विभिन्न समितियों द्वारा आयोजित भंडारे एवं अन्य कार्यक्रमों को लेकर हिंदू सेना संगठन ने धार्मिक परंपराओं और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। हिंदू सेना ने उन सभी गणेश समितियों का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पितृ पक्ष प्रारंभ होने से पहले गणेश प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया। संगठन का कहना है कि गणेशोत्सव और पितृ पक्ष दोनों की अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं हैं, इसलिए आयोजकों को तिथि, समय और कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।संगठन संरक्षक श्रीमती आशा सिंह ने कहा कि गणेशोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन धार्मिक परंपरा और निर्धारित अवधि के अनुरूप श्रद्धापूर्वक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संगठनों और ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ द्वारा भी समय-समय पर गणेश विसर्जन समय पर किए जाने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। यदि किसी समिति को झांकी, सांस्कृतिक कार्यक्रम अथवा शोभायात्रा आयोजित करनी है तो उसका स्वरूप और समय अलग निर्धारित किया जा सकता है, ताकि धार्मिक अनुष्ठान और सार्वजनिक मनोरंजन के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे।हिंदू सेना जिला अध्यक्ष श्रीमती नंदा पसीने ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण, श्रद्धा और तर्पण से जुड़ा महत्वपूर्ण समय माना जाता है। ऐसे में इस अवधि में गणेशोत्सव से संबंधित भोग-भंडारे अथवा अन्य कार्यक्रम आयोजित करने से पहले स्थानीय धार्मिक परंपराओं और विद्वानों की राय पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन किसी की आस्था या भावना को ठेस पहुंचाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक आयोजनों में परंपरा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करता है। उन्होंने समय पर गणेश विसर्जन करने वाली समितियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।हिंदू सेना मातृशक्ति शहर अध्यक्ष श्रीमती संगीता रजक ने कहा कि गणेश विसर्जन के दौरान डीजे और संगीत आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन विसर्जन का मूल उद्देश्य भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदाई देना है। उन्होंने कहा कि विसर्जन जुलूस में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और परिवार भी शामिल होते हैं, इसलिए आयोजकों को सार्वजनिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश श्रद्धालु पूरी आस्था और अनुशासन के साथ विसर्जन में शामिल होते हैं, लेकिन यदि कुछ लोग नशे की स्थिति में हुड़दंग, अशोभनीय नृत्य या अनुचित व्यवहार करते हैं तो आयोजक समितियों को ऐसे मामलों पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए।हिंदू सेना मातृशक्ति महामंत्री श्रीमती पुष्पा शांडिल्य ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की भव्यता केवल बड़े डीजे, अधिक भीड़, आतिशबाजी या देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और अनुशासन से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति और परंपराओं की बात करने वाले संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने आयोजनों में भी इन मूल्यों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। गणेशोत्सव समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बने, इसके लिए सभी समितियों को आयोजन के स्वरूप और उसके सामाजिक प्रभाव पर आत्ममंथन करना चाहिए।हिंदू सेना ने गणेश समितियों से अपील की कि आगामी आयोजनों में धार्मिक परंपराओं, प्रशासनिक नियमों, ध्वनि मर्यादा, महिलाओं एवं परिवारों की गरिमा तथा सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखा जाए। संगठन ने कहा कि भगवान गणेश के प्रति सच्ची श्रद्धा यही है कि उनकी विदाई भी आस्था, शांति और सम्मान के साथ की जाए।

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