City Media - Page 89 of 1804 - Latest Hindi News of Chhattisgarh
RakeshCity
previous arrow
next arrow
     
Home Blog Page 89

पोल खुलने पर आपा खो बैठी कांग्रेस की महिला पार्षद

0
  • पार्षद करने लगी महापौर संजय पांडे से बदजुबानी
  • पीएम आवास में वसूली मामले में जमानत पर है महिला कांग्रेसी पार्षद

जगदलपुर डिबेट के दौरान महापौर संजय पाण्डेय और भाजपाइयों ने जैसे ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 25 हज़ार रुपए लेने का मामला उजागर किया, वैसे ही कांग्रेस की महिला पार्षद आपे से बाहर हो गई और उन्होंने बदजुबानी शुरू कर दी।

पूर्व में भी इस महिला पार्षद द्वारा वार्डवासियों के साथ कथित ठगी करने के पश्चात नागरिकों को धमकाया गया था। उनका यह वीडियो पूरे शहर में वायरल है। इससे पूर्व वार्डवासियों ने उसकी ऐसी धुनाई कर दी थी जिससे उसके चेहरे पर जो चोट आई थी। इसका भी वीडियो वायरल हुआ था और आज के विडियो में भी देखा जा सकता है कि किस प्रकार उसने आपा खोकर गंदी- गंदी और भद्दी गालियां दी हैं। सारे शहर को मालूम है कि इस भ्रष्टाचारी पार्षद के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी ने 28 दिन तक बोधघाट थाने के सामने धरना दिया था। उस समय भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सहित 700 से ऊपर कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया गया था। विधानसभा में मामला उठने के बाद अंततः कांग्रेस सरकार ने ही महिला पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। फिलहाल वह जमानत हैं।

कन्वर्टेड महिला के शव के अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद

0
  • कन्वर्जन से आदिवासी गांवों में बिगड़ रहे हालात
  • गांव की सरहद पर कहीं भी शव दफनाने नहीं देने के लिए अड़ गए ग्रामीण

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर में कन्वर्जन अब सिर्फ आदिवासी संस्कृति और परंपराओं पर खतरा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण एकता को खंडित करने का सबब भी बन गया है। यह फूट डालो और राज करो की नीति भी साबित हो रहा है। ऐसा ही एक बड़ा मामला बस्तर के कांकेर जिले के ग्राम दुर्गूकोंदल से सामने आया है, जहां अंतिम संस्कार का मसला गांव की परंपरा और एकता का अंतिम संस्कार करता हुआ प्रतीत हो रहा है। गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है

बस्तर संभाग में एक ओर जहां नक्सली आदिवासियों का नर संहार करते आए हैं, वहीं दूसरी ओर कन्वर्जन ने इस आदिम समुदाय को विलुप्ति की कगार पर पहुंचा दिया है।अपनी परंपराओं, संस्कृति और पूजा पद्धति पर अडिग आदिवासी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। बस्तर में सदियों से निवासरत गोंड़, हल्बा, मुरिया, भतरा, भतरी आदि जनजातियों का संख्या बल लगातार क्षीण होता जा रहा है। वजह साफ है- नक्सलियों के हाथों संहार और बाहरी सभ्यता का आक्रमण। यहां कन्वर्जन एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। कन्वर्टेड लोग अपनी मूल परंपरा को त्याग चुके हैं और उन्हीं की वजह से कई जगहों पर विवाद की स्थिति अक्सर निर्मित होती आई है। कांकेर जिले के ब्लॉक मुख्यालय दुर्गूकोंदल में भी ऐसा ही कुछ हुआ। यहां शुक्रवार को इसाई धर्म अपना चुकी एक महिला की मृत्यु हो गई। इस महिला के अंतिम संस्कार को लेकर दुर्गूकोंदल के ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। महिला के परिजन शनिवार को अपनी ही निजी जमीन पर शव का अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। इससे पहले शुक्रवार की रात ग्राम पटेल व ग्राम गायता की उपस्थिति में सामाजिक लोगों और ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में सभी ने एकमत होकर ईसाई धर्म मानने वाली मृत महिला के शव को दुर्गूकोंदल में अंतिम संस्कार नहीं करने देने का निर्णय सुना दिया। ग्राम पटेल ने मृतका के परिजनों को बुलाकर बताया कि ग्रामवासियों और समाज ने निर्णय लिया है कि गांव में शव का अंतिम संस्कार करने नहीं देंगे, क्योंकि महिला ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुकी थी। इनके शव को दफनाने से हमारे ग्राम व्यवस्था, देव व्यवस्था अपमानित होगी। मृत महिला के परिजनों ने कहा कि हमारी निजी जमीन है, हम अपनी जमीन में अंतिम संस्कार करेंगे। लेकिन ग्राम के गायता, पटेल और ग्रामीणों ने गांव की सरहद पर महिला का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इस बीच पुलिस के अधिकारियों ने भी कहा कि जबरन अंतिम संस्कार से विवाद की स्थिति निर्मित होगी इसलिए जमीन सरकारी हो या निजी, ग्रामीणों की मंशा के अनुरूप अंतिम संस्कार ना करें। इस मसले को लेकर गांव में अभी तनाव जैसी स्थिति है।

बस्तर दशहरा की परंपरा एवं संस्कृति का संरक्षण हम सबका दायित्व है – सांसद महेश कश्यप

0

जगदलपुर: जिला कलेक्टर कार्यालय के प्रेरणा कक्ष में आज बस्तर दशहरा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया।

सांसद एवं समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने नवनियुक्त उपाध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे पूर्वजों ने ‘आमचो बस्तर’ की परंपराओं को सहेज कर रखा है। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम भी इस संस्कृति को संरक्षित करें। यह पर्व सामाजिक एकता और जनसहभागिता का अनुपम प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि दशहरा पर्व के ऐतिहासिक स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संरक्षित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही शासन द्वारा आबंटित बजट के अतिरिक्त राष्ट्रीय कंपनियों से सहयोग प्राप्त करने की भी पहल की जा रही है। सांसद ने यह भी बताया कि इस बार संभाग के सातों जिलों से देवी-देवताओं के आगमन के लिए प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा की जाएगी।

बैठक के दौरान महाराज कमलचंद भंजदेव ने मांझी, चालकी एवं सेवादारों के रिक्त पदों की भर्ती करने तथा देवी-देवताओं के आश्रय स्थलों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। महापौर संजय पांडेय ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। कलेक्टर हरिस एस ने बताया कि गत वर्ष (2024) एवं आगामी वर्ष (2025) के दशहरा बजट की विस्तृत जानकारी समिति को दी गई है।

नकटी सेमरा में पौधरोपण : एक पेड़ देवी-देवताओं के नाम

बैठक उपरांत समिति सदस्यों, अतिथियों एवं मांझी-चालकी द्वारा नकटी सेमरा दशहरा वन में वृक्षारोपण किया गया। यह परंपरा “एक पेड़ देवी-देवताओं के नाम” अंतर्गत की गई। ज्ञात हो कि रथ निर्माण हेतु प्रतिवर्ष लगभग 200 पेड़ों की आवश्यकता होती है। प्रतिपूर्ति स्वरूप साजा आदन, साल, महुआ, आम, नीम, आंवला, तेंदू, कुसुम, सागौन, बांस, जामून सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।

इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडेय, नगर निगम सभापति खेम सिंह देवांगन, बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता, अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल, ऋषिकेश तिवारी, अपर कलेक्टर नारायणपुर पंचभोई, आयुक्त नगर पालिक निगम प्रवीण वर्मा, तहसीलदार एवं सचिव रुपेश मरकाम सहित बड़ी संख्या में मांझी, चालकी, पुजारी, मेम्बर एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

जेसीआई जगदलपुर सिटी ने कराया राइड एंड राइस सायकल दौड़ का भव्य आयोजन, 437 विद्यार्थी हुए शामिल

0

जगदलपुर 17 अगस्त । जेसीआई जगदलपुर सिटी द्वारा रविवार सुबह राइड एंड राइस सायकल दौड़ का भव्य आयोजन किया गया। यह अब तक जिले में छात्रों के लिए आयोजित सबसे बड़ी साइकिल दौड़ रही, जिसमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शहरवासियों ने पूरे उत्साह के साथ इसका स्वागत किया।

सुबह 7 बजे से पंजीयन प्रारंभ हुआ । का शुभारंभ दीप्ती कॉन्वेंट स्कूल की बैंड टीम द्वारा राष्ट्रीय गान के साथ हुई। और ठीक 7:45 बजे सायकल दौड़ मुख्य अतिथि विधायक एवंi भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, अतिथि गण महापौर संजय पांडे, बेवरेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष श्याम सोमानी के द्वारा फ्लैग ऑफ करके हुआ। इसके अलावा सुभाष वार्ड के पार्षद कुबेर देवांगन एवं शहर के अनेक गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस साइकिल रैली में कक्षा 5वीं से 9वीं तक 437 छात्रों ने भाग लिया। प्रतियोगिता मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने से प्रारंभ हुई गुरु नानक चौक से दंडामी माडिया चौक होकर चांदनी चौक से कमिश्नर कार्यालय आकाशवाणी मार्ग होते हुए गुरु गोविंद सिंह चौक से होकर

लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा मार्ग तय कर प्रतिभागी मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने पहुंचे ।

14.4 2 मिनट में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान पर आदित्य विश्वकर्मा रहे वहीं दूसरे स्थान पर 14.51 मिनट में दौड़ पूरी कर प्रखर आजाद रहे और तीसरे स्थान पर हिमांशु कश्यप रहे। इन तीनों विजेताओं को अतिथियों के हाथों क्रमशः 11001,7001 और 5001 रुपए का पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं बालिकाओं में प्रथम स्थान पर रियांशी साहू द्वितीय स्थान पर रिया चक्रवर्ती और तृतीय स्थान पर गुनगुन दास रही। इनके साथ सांत्वना पुरस्कार संजीवनी पांडे अशव कुशवाहा, कियाँश सोमानी, रत्ना श्रोती और आस्था जैन को प्रदान किया गया।

पुरस्कार वितरण समारोह में अपने उद्बोधन में अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों में स्वास्थ्य, अनुशासन और जागरूकता की भावना को सशक्त बनाते हैं। मुख्य अतिथियों ने फिटनेस को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे निरंतर खेलों और शारीरिक गतिविधियों से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी ही देश का भविष्य है और यदि वह खेलों में सक्रिय भागीदारी करेगी तो निश्चित रूप से समाज और राष्ट्र दोनों प्रगति की राह पर आगे बढ़ेंगे। कार्यक्रम को शहर के लिए प्रेरणादायी पहल बताते हुए उन्होंने इसे सराहनीय कदम कहा और इस तरह के आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया। उनका कहना था कि जेसीआई जगदलपुर सिटी ने जिस लगन और भव्यता के साथ इस आयोजन को संपन्न कराया है, वह बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए अवसर प्रदान करता है। अतिथियों ने यह भी उल्लेख किया कि साइकिलिंग जैसी गतिविधियाँ बच्चों को न केवल प्रकृति से जोड़ती हैं, बल्कि उनमें टीम भावना और अनुशासन की प्रवृत्ति विकसित कर जीवन में संतुलन बनाए रखने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

इस अवसर पर छात्रों के साथ उनके परिजन और अभिभावक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। दौड़ को

निर्विघ्न संपन्न करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिस के जवान और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे।

करपावंड थाना क्षेत्र में नशामुक्ति अभियान

0
  • ग्रामीणों और विद्यार्थियों को दिलाई गई शपथ

बकावंड थाना करपावंड क्षेत्र में आज नशामुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान में थाना प्रभारी बसंत कुमार खलखो सहित थाना स्टाफ, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षकगण एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम में सरपंच लखमूराम नेताम एवं पंचगण, शिक्षक गौतम नाग, अर्जुन कश्यप, पूजा मण्डरीया, डमरू नागेश, निशांत द्विवेदी सहित क्षेत्र के नागरिक मौजूद रहे। सभी ने नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी और समाज को इससे दूर रहने की शपथ दिलाई। थाना प्रभारी बसंत कुमार खलखो ने बताया कि पुलिस द्वारा निरंतर इस तरह के कार्यक्रम चलाकर युवाओं को सही दिशा देने और अपराधों पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने भी नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

 

आजादी का नया सूर्योदयः बस्तर के 29 गांवों में पहली बार फहरा तिरंगा

0

बस्तर के 29 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की अत्यंत महत्वपूर्ण और आशावादी खबर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह खबर सिर्फ एक सूचना मात्र नहीं है, बल्कि दशकों से नक्सलवाद की भयावह छाया में जी रहे बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में आ रहे एक ऐतिहासिक बदलाव की कहानी बयां करती है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर, इन तीन जिलों के कुल 29 ऐसे गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया गया, जहाँ अब तक लाल झंडे की प्रतीकात्मक उपस्थिति ही देखी जाती थी। यह घटना बस्तर के बदलते परिदृश्य, राज्य और केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों और सबसे महत्वपूर्ण, इन क्षेत्रों के आम ग्रामीणों के जीवन में आ रही नई उम्मीद की एक जीवंत मिसाल है।

बस्तर संभाग विशेषकर बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले दशकों से वामपंथी उग्रवाद, जिसे आमतौर पर नक्सलवाद के नाम से जाना जाता है, का गढ़ रहा है। ये क्षेत्र घने जंगल, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और जनजातीय आबादी की बहुलता के कारण नक्सलियों के लिए छिपने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने का एक सुरक्षित ठिकाना बन गए थे। माओवादियों ने इन क्षेत्रों में अपनी समानांतर सत्ता स्थापित कर रखी थी, जहाँ उनका फरमान ही कानून माना जाता था। स्कूल बंद कर दिए जाते थे, सड़कें नहीं बनने दी जाती थीं, और विकास परियोजनाओं को बाधित किया जाता था। ग्रामीणों को अपनी मर्जी के खिलाफ नक्सलियों का साथ देना पड़ता था, और ऐसा न करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते थे। अपहरण, हत्या, जबरन वसूली और हिंसा की वारदातें आम बात थीं। इन गांवों में राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय भावनाओं का खुलकर प्रदर्शन करना खतरे से खाली नहीं था। अक्सर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी, माओवादियों के दबाव के चलते इन गांवों में तिरंगा फहराना संभव नहीं हो पाता था, और कई बार तो उनकी उपस्थिति के कारण लाल झंडे फहराए जाते थे, जो उनके अपने विचारधारा का प्रतीक था। इस प्रकार इन गांवों के लोग आजादी के बाद भी एक तरह की आंतरिक गुलामी और डर के साये में जी रहे थे।

15 अगस्त 2025 को इन 29 गांवों में तिरंगा फहराया जाना सिर्फ एक प्रतीकात्मक घटना नहीं है, बल्कि यह दशकों के संघर्ष और दमन से मुक्ति का प्रतीक है। यह ग्रामीणों के लिए अपनी पहचान, अपने देश और अपने भविष्य को फिर से स्थापित करने का अवसर है। उक्त सभी गांव बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में फैले हुए हैं, और इनमें से कई गांव ऐसे हैं जो पहले नक्सली गतिविधियों के केंद्र बिंदु माने जाते थे, जिनमें बीजापुर जिले के कोंडापल्ली, जीड़पल्ली, जीड़पल्ली-2, वाटेवागु, कर्रेगुट्टा, पिड़िया, गुंजेपर्ती, पुजारीकांकेर, भीमारम, कोरचोली एवं कोटपल्ली, नारायणपुर जिले के गारपा, कच्चापाल, कोडलियार, कुतूल, बेड़माकोट्टी, पदमकोट, कांदूलनार, नेलांगूर, पांगुड़, होरादी एवं रायनार और सुकमा जिले के तुमालपाड़, रायगुडे़म, गोल्लाकुंडा, गोमगुड़ा, मेटागुड़ा, उसकावाया और नुलकातोंग शामिल हैं। इन गांवों में तिरंगा फहराने का मतलब है कि अब यहाँ राज्य का शासन स्थापित हो चुका है और माओवादियों का प्रभाव कम हो गया है। यह सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और जनजातीय समुदायों के विश्वास को जीतने के प्रयासों का सीधा परिणाम है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कई कारकों का योगदान है, जिनमें सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई है और रणनीतिक ऑपरेशन चलाए हैं। नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना, जैसे कि नारायणपुर में आईटीबीपी के 4 कैंप खोले जाने का जिक्र है, माओवादियों के गढ़ों में प्रवेश करने और उन्हें कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन शिविरों से सुरक्षा बलों को न केवल दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद मिलती है, बल्कि वे ग्रामीणों के साथ बेहतर संबंध भी स्थापित कर पाते हैं।

इसके साथ ही विकास कार्य और सरकारी योजनाओं का विस्तार किया गया है, क्योंकि सरकार मानती है कि केवल सैन्य अभियान ही पर्याप्त नहीं हैं। सरकार ने इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है, जिसके तहत नियद नेल्लानार योजना के अन्तर्गत सड़क निर्माण, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शामिल है। प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा जैसी योजनाएं सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही पिछले 5 महीनों में बीजापुर जिले में 11 कैंपों की स्थापना की गई है, जो सुरक्षा और विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय आबादी का विश्वास जीतना सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सुरक्षा बलों और प्रशासन ने ग्रामीणों का विश्वास जीतने के लिए कई कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा के अवसर प्रदान करना और रोजगार के अवसर पैदा करना, ग्रामीणों को माओवादियों से दूर ले जाने में मदद कर रहे हैं। ग्रामीणों को यह महसूस कराया जा रहा है कि सरकार उनके साथ है और उनके बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।

सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण के कारण नक्सली नेतृत्व कमजोर हुआ है। कई महत्वपूर्ण नक्सली नेताओं को मार गिराया गया है या उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे उनकी संगठनात्मक क्षमता कमजोर हुई है। सरकार की आकर्षक आत्मसमर्पण नीतियों ने भी कई नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है, जिससे नक्सली संगठन कमजोर हुए हैं। इन 29 गांवों में तिरंगा फहराना बस्तर के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। इसके कई सकारात्मक निहितार्थ हैं। सबसे पहले यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। इससे लोगों को डर के बिना जीने और अपने दैनिक जीवन को सामान्य रूप से चलाने का अवसर मिलेगा। जिन क्षेत्रों में पहले नक्सली हस्तक्षेप के कारण विकास असंभव था, अब वहां सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। यह ग्रामीणों के जीवन में प्रत्यक्ष सुधार लाएगा। स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों का खुलना ग्रामीणों के लिए शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करेगा, जिससे उनकी अगली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल होगा। शांति और विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कृषि, वनोपज और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन गांवों में तिरंगा फहराना राष्ट्रीय भावना और एकता को मजबूत करता है। यह ग्रामीणों को देश के मुख्यधारा से जोड़ता है और उन्हें अपनी भारतीय पहचान पर गर्व करने का अवसर देता है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है। शांति स्थापित होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी।

कर्रेगुट्टा सहित बस्तर के 29 गांवों में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह दर्शाता है कि दशकों के संघर्ष और हिंसा के बाद, बस्तर एक नए सवेरे की ओर बढ़ रहा है। यह घटना सुरक्षा बलों के त्याग, सरकार की प्रतिबद्धता और सबसे बढ़कर, इन क्षेत्रों के आम ग्रामीणों की आशा और धैर्य का प्रतीक है। साथ ही यह एक उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वित प्रयासों से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कैसे इन क्षेत्रों में शांति और विकास की इस नई किरण को एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य में बदला जाता है। यह सिर्फ बस्तर के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है, जो दिखाती है कि कैसे विश्वास, दृढ़ता और राष्ट्रीय भावना के साथ सबसे कठिन बाधाओं को भी पार किया जा सकता है। यह वास्तव में बदलते बस्तर की एक नई और सच्ची तस्वीर है।

 

 

अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका आंदोलन की राह पर

0
  • 1 सितंबर को पूरे प्रदेश में बंद रहेंगे आंगनबाड़ी केंद्र

जगदलपुर प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं 1 सितंबर को आंगनबाड़ी केंद्र बंद रख हड़ताल करेंगी। कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच ने 31 अगस्त तक मांग पूरी नहीं होने पर 1 सितंबर को पूरे प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र बंद करने की चेतावनी दी है।

मंच की संयोजक मंडल सदस्य सरिता पाठक, रुक्मणी सज्जन, सुधा रात्रे, हेमा भारती, कल्पना चंद ने बताया कि कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की लंबित मांगों एवं काम में आ रही समस्या को लेकर सचिव व संचालक के नाम पत्र दिया गया था। संचालक द्वारा हड़ताल के विषय में जारी किए गए आदेश पत्र को वापस लेने की मांग को लेकर सचिव को एक और पत्र दिया गया। हमने 31 का समय दिया है। आगामी 01सितंबर को आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। सभा रैली करने व ज्ञापन देने का कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलो में होगा। इसके बाद भी उचित पहल नही होने पर संयुक्त मंच अनिश्चतकालीन हड़ताल के बाध्य होगा। संयुक्त मंच ने कहा है कि पोषण ट्रेकर में कार्यकर्ताओं व सहायिकाओ की उपस्थिति का फेस केप्चर और ई-केवायसी के माध्यम से केंद्र के सभी कार्य को डिजिटल किया गया है। जिससे हितग्राहियो को और कार्यकर्ताओं व सहायिकाओ को कई व्यवहारिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे बंद कर आफ लाईन सभी कार्य कराए जाने तथा

अन्य सभी मांगों की पूर्ति 31अगस्त तक नहीं होने पर शासन का ध्यानाकर्षण कराने के लिए क्रमबद्ध योजना बनाई गई है। इसके तहत 19 से 30 अगस्त तक सभी सांसदों, विधायकों एवं कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जाएगा, 1 सितम्बर को सभी जिला मुख्यालयों में सामूहिक अवकाश लेकर धरना, सभा रैली व प्रदर्शन कर कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा जाएगा। 19 सितम्बर को एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं रायपुर पहुंचकर महारैली और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का घेराव करेंगी। और इसके बाद भी उचित पहल नही होने पर संयुक्त मंच कभी भी अनिश्चतकालीन हड़ताल की घोषणा कर सकता है।

नगरपालिका को बीएसपी के अधिकारी नहीं दे रहे एन ओ सी, दूसरी तरफ बीएसपी के करोड़ों की जमीन को करवा रहे अवैध कब्जा

0

दल्लीराजहरा:- 7वार्ड क्रमांक 09 के पार्षद मेवालाल पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि एस डी एम आफिस के सामने मुख्य मार्ग के बाजू में खुलेआम बीएसपी की जमीन पर अतिक्रमण किया जा रहा है और बीएसपी के अधिकारी इसमें अपनी मौन सहमति दे रहें हैं जोकि जांच का विषय है कई बार बीएसपी के मुख्य महाप्रबंधक खदान और नगर प्राशासन विभाग टाउनशिप बीएसपी को शिकायत करने के बाद भी किसी भी प्रकार की कार्यवाही का न होना एक बडे भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस बीएसपी की जमीन पर आज कब्जा किया जा रहा है उसकी आज की स्थिति में कीमत करोड़ों रूपए की है और बीएसपी के अधिकारी वहां बड़े आराम से कब्जा होने दें रहें हैं जिससे साफ पता चलता है कि बीएसपी के कुछ भ्रष्ट अधिकारी अतिक्रमण करने वालों के साथ मिलकर खुलेआम करोड़ों की जमीन का बंदरबांट करने में लगें हैं।

यहां बीएसपी प्रबंधन का दौहरा मापदंड साफ नजर आता है कि जब नगर हित में नगरपालिका द्वारा विकास के लिए बीएसपी प्रबंधन से नियमों के अनुरूप अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा जाता है तो बीएसपी प्रबंधन के अधिकारियों द्वारा साफ मना कर दिया जाता है और तो और उसमें बहुत से नियम गिनाए जाते हैं मगर आज स्थिति कुछ और ही नजर आती है कि बीएसपी के खाली पड़े करोड़ों की जमीन पर बीएसपी के अधिकारियों की मिलीभगत से खुलेआम कब्जा किया जा रहा है और बीएसपी के अधिकारियों द्वारा ईसपर मौन सहमति दी जा रही है।

और यहां एकबात और महत्वपूर्ण है कि जब कोई गरीब अपने रहने के लिए बीएसपी की खाली जमीन पर कच्चा मकान बनाता है तो तुरंत बीएसपी के शूरवीर उसका कच्चा मकान तोड़ने पहुंच जाते हैं और उसकी कोई मदद नहीं करता है मगर आज जब एक पूंजीपति द्वारा जानबूझकर अपने व्यावसायिक लाभ के लिए करोड़ों की जगह पर कब्जा कर रहा है तो बीएसपी अधिकारी भी उसका कब्जा करवाने में पूरी तरह से शामिल हैं जोकि बहुत ही शर्मनाक है। और प्रशासन भी मौन धारण किए हुए हैं जोकि चिंता का विषय है।

पार्षद मेवालाल पटेल ने बताया कि जब बात गरीबों का घर बनाने की होती है और बीएसपी से प्रधानमंत्री आवास के लिए उनकी अनुपयोगी खाली जगह को मांगा जाता है तो उसे देने के लिए सैंकड़ों बहाने बनाएं जातें हैं मगर यहां तो खेल ही अलग चल रहा है बीएसपी के अधिकारियों द्वारा खुद ही बीएसपी की जमीनों का बंदरबांट करने में लगे हुए हैं। और कार्यवाही करने वाला कोई नहीं है। पार्षद ने आगे बताया कि अगर तत्काल बीएसपी द्वारा बीएसपी के जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को तोडा नहीं जाता है तो सभी वार्डवासियों के साथ जिलाधीश बालोद से मुख्य महाप्रबंधक खदान और नगर प्राशासन बीएसपी के खिलाफ शिकायत किया जावेगा और राजहरा थाने में भी ईनके विरूद्ध बीएसपी की जमीनों को बेचने का मामला पंजीबद्ध किया जावेगा।

 

डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप

0

बालोद। जिले के डौंडी थाना क्षेत्र में डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला एक महिला आरक्षक की शिकायत पर दर्ज हुआ है। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर ने शादी का झांसा देकर एक साल तक शारीरिक शोषण किया और बाद में विवाह से इंकार कर दिया।

जानकारी के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके, जो डौंडी ब्लॉक के रहने वाले हैं और वर्तमान में बीजापुर जिले में पदस्थ हैं, पर यह गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला आरक्षक ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

बालोद की एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरोपी ने एक साल तक शादी का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए और अब विवाह से मुकर गया। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी कलेक्टर की गिरफ्तारी भी जल्द संभव मानी जा रही है।

एएसआई ने थाने में की आत्महत्या

0

दल्लीराजहरा थाने में पदस्थ एएसआई फांसी लगाकर आत्महत्या कर लीl बताया जा रहा है कि घटना सुबह करीबन 7:30 के आस पास की है जो एएसआई ने पुलिस स्टॉप के लिए बनाए गए बैरक में फंदे से लटका हुआ मिला  पुलिसकर्मीयो का नजर पड़ते ही उन्हें नीचे उतारकर शहीद अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दियाl

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक एएसआई हीरामन मंडावी लगभग 10 महीने पहले अर्जुन्दा थाना से दल्ली राजहरा थाना ट्रांसफर हुए थे। उसके पूरे परिवार दुर्ग जिले के बोरसी के निवासी थे ।  मंडावी लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.उनके पूरे परिवार दल्लीराजहरा पहुंच रहे है।

MOST POPULAR

HOT NEWS