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दल्ली राजहरा में सड़क के साथ उधड़ गई बीएसपी प्रबंधन के भ्रष्टाचार की परत

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61 लाख की लागत से बनाई जा रही सड़क में भ्रष्टाचार का खुला खेल

दल्लीराजहरा शहर में वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और लगातार मांगों के बाद कराए जा रहे सड़क मरम्मत एवं डामरीकरण कार्य अब विकास की उम्मीद नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का खुला दस्तावेज बनता जा रहा है। लगभग 13 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुधार पर 61 लाख 36 हजार 863 रुपये की राशि खर्च की जा रही है, लेकिन काम की मौजूदा स्थिति देखकर शहरवासियों में गहरा आक्रोश है। सड़क निर्माण शुरू हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ और कई स्थानों पर डामर उखड़ने लगा है, गड्ढे जस के तस नजर आ रहे हैं और अनेक हिस्सों में सड़क को आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। लोगों का साफ कहना है कि जिस तरह का काम किया जा रहा है, वह एक बरसात भी नहीं झेल पाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्य राजहरा टाउनशिप की मौजूदा सड़कों की रिपेयरिंग, मेंटेनेंस और डामरीकरण से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरटी-3 डामर का उपयोग किया जाना है। यह ठेका मेसर्स कैलाश इंटरप्राइजेस भिलाई को दिया गया है, जिसे विभागीय दर से लगभग 26 प्रतिशत कम पर यह कार्य सौंपा गया है। इतनी कम दर पर लिया गया ठेका शुरू से ही संदेह के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब ठेकेदार इतनी कम रेट पर काम ले रहा है तो गुणवत्ता से समझौता होना तय है, जिसका असर अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर के कई हिस्सों में यह देखा गया है कि गड्ढों को सही तरीके से भरे बिना ऊपर से डामर डाल दिया गया है। पुलिस थाना से लेकर निर्मला स्कूल तक के मार्ग पर डब्ल्यूबीएम कार्य के नाम पर की गई खानापूर्ति ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। डामर और गिट्टी के मिश्रण में न तो मानक अनुपात का पालन किया जा रहा है और न ही तापमान का ध्यान रखा जा रहा है।आरटी-3 डामर टैंकरों के माध्यम से लाया जा रहा है, लेकिन इसकी मात्रा, उपयोग और गुणवत्ता पर कोई ठोस निगरानी नजर नहीं आती। नतीजा यह है कि डामर की ऊपरी परत समय से पहले ही जवाब देने लगी है। दल्ली राजहरा की जनता का आक्रोश केवल सड़क की खराब हालत तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि बीएसपी प्रबंधन ने दशकों से इस शहर से अरबों रुपये की कमाई की है, लेकिन जब कर्मचारियों और शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं देने की बात आती है तो हमेशा उदासीन रवैया अपनाया जाता है। सड़क जैसी बुनियादी जरूरत के लिए लोगों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा और जब काम शुरू हुआ तो उसमें भी वही पुरानी कहानी- अनियमितता, लापरवाही और भ्रष्टाचार—सामने आ गई। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू बीएसपी प्रबंधन की चुप्पी है। ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी अधिकारी इस पर खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है। न गुणवत्ता को लेकर कोई सार्वजनिक निगरानी दिखाई देती है और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या यह सब कुछ पहले से तय था और क्या अधिकारियों की प्राथमिकता शहर और कर्मचारियों की सुविधा नहीं, बल्कि अपनी जेब भरना बन चुकी है।

भावनाओं से न खेले प्रबंधन: जीत

हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों के हित की बात करने वाली मजदूर यूनियनें भी इस पूरे मामले में खामोश नजर आ रही हैं। सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में हो रही लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर यूनियनों की ओर से न तो कोई निरीक्षण की मांग उठी और न ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस पहल दिखाई दी। लोगों का कहना है कि शायद तब सबको होश आएगा, जब सड़क पूरी तरह उखड़ जाएगी और फिर से मरम्मत की मांग उठेगी। इस मामले पर जनमुक्ति मोर्चा नेता जीत गुहा ने कहा कि शहर के विकास के लिए जिम्मेदार बीएसपी प्रशासन द्वारा शहरवासियों की भावनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है। कहावत है कि मॉल है महराज का, मिर्जा खेले होली, कुछ ऎसी ही हालत बीएसपी प्रशासन ने बनाकर रखी है। यह भी पहला मौका नहीं है जब राजहरा टाउनशिप में नगर हित के कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे हों। इससे पहले भी कई विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस बार सड़क निर्माण की हालत इतनी खराब है कि भ्रष्टाचार खुद सड़कों पर उतर आया है।

प्रबंधन का जवाब

इस संबंध में विभागीय अभियंता राकेश बांधे का कहना है कि कार्य में 20 एमएम सील कोट का अधिकांश हिस्सा शामिल है और अन्य स्थानों पर गड्ढों की मरम्मत की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जो सड़कें ज्यादा खराब हैं, उन्हें चिन्हित कर सुधार किया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत और जनता का अनुभव इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। बरसात के पहले ही सड़क उखड़ने लगी है। ऐसे में दल्ली राजहरा की जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि क्या यह सड़क एक साल भी टिक पाएगी, क्या इस कार्य की कभी निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह भी बीएसपी प्रबंधन के भ्रष्ट और लापरवाह रवैये का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।

दंतेश्वरी गर्ल्स कॉलेज जनभागीदारी समिति की बैठक

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जगदलपुर शासकीय दंतेश्वरी कन्या महाविद्यालय में गुरुवार को जनभागीदारी समिति की बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जनभागीदारी समिति की बैठक मे सदस्य आलोक अवस्थी, सफीरा साहू, अनिल शर्मा, करमजीत कौर, गणेश नागवंशी, गीता नाग,अपर कलेक्टर सीपी बघेल, प्राचार्य डां रंजना नाथ, महाविद्यालय के स्टाफ उपस्थित थे। बैठक में कॉलेज से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से चर्चा करने के पश्चात सभी विषयों को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने कहा महाविद्यालय के विकास के लिए हम सभी मिलकर महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करेंगे। हमारे बस्तर के युवाओं में बहुत प्रतिभा है । महाविद्यालय के विकास के लिए प्रस्ताव दें, उस पर हम हमारी सरकार से चर्चा कर उसे पूरा करने का कार्य करेंगे।

अटल सदन दल्ली राजहरा में महिलामोर्चा की बैठक संपन्न

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दल्लीराजहरा,8 जनवरी 2026-आज दल्ली राजहरा के अटल सदन में महिलामोर्चा की प्रथम बैठक रखी गई जिसमें भारतीय जनता पार्टी महिलामोर्चा की प्रदेश महामंत्री श्रीमती शीतल नायक एवं बालोद जिला महिलामोर्चा अध्यक्ष श्रीमती डॉ.मोना टूवानी जी का आगमन हुआ।प्रदेश महामंत्री प्रदेश महामंत्री श्रीमती शीतल नायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि नारी को सशक्त बनाने के लिए महिला मोर्चा हमेशा तत्पर है केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को प्रदेश के गांव-गांव तक और हर घर तक पहुंचाना यह हमारी प्राथमिकता है।महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष श्रीमती मोना टूवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में हमें बालोद जिले के तीनों विधानसभा में जीत हासिल करनी है और इन चुनावों में महिलाओं की विशेष भागीदारी रहे, अंत में उन्होंने अटल जी की एक कविता के साथ अपने बात की समाप्ति की हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा,काल के कपाल पे लिखता मिटाता हु,गीत नया गाता हूं।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से दल्ली राजहरा नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू,मंडल महामंत्री रमेश गुजर,राजेश दसोंडे,मंडल उपाध्यक्ष मुकेश खस,सुरेन्द्र बेहरा, वार्ड क्रमांक 22के पार्षद सुरेश जायसवाल, वार्ड क्रमांक 21 के पार्षद भूपेंद्र श्रीवास,प्रमोद कुमार,समर्थ लखानी,राहुल साहू महिला मोर्चा नगर अध्यक्ष श्रीमती गीता मरकाम,अरुणा रामटेके,मालती निषाद,मोनिका साहू,सुख्वंतीं ठाकुर,रमनी बाघ,ललिता साहू,ऊषा साहू,नंदा पसीने, भिखी मसीहा,संध्या शर्मा,मोहंतिन चौरखा,पिंकी सिंह एवं बड़ी संख्या में महिला मोर्चा की कार्यकर्ता उपस्थित रही कार्यक्रम का संचालन श्रीमती किरण सिंहा ने किया एवं आभार सुखवंतींन ठाकुर ने किया।

मिशन 31 मार्च-26′ का काउंट डाउन शुरू, थोक में 63 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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पुनर्वास से पुनर्जीवन की ओर लौटे माओ वादी

बस्तर के दंतेवाड़ा में पुलिस और सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी=

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर में मिशन ’31 मार्च 2026′ का काउंट डाउन शुरू हो गया है। नक्सलमुक्त बस्तर का संकल्प तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसी क्रम में बस्तर की दंतेवाड़ा पुलिस और फोर्स को बड़ी सफलता मिली है। यहां 63 नक्सलियों ने आज एकसाथ आत्मसमर्पण किया। सरेंडर करने वालों में 1 करोड़ 17 लाख के 36 इनामी नक्सली शामिल हैं।

इन नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में पुलिस अधीक्षक गौरव राय के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन के तहत इन नक्सलियों ने आज बदलाव की नई शुरूआत की है।आत्मसमर्पित माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ डिवीजन, उड़ीसा राज्य में सक्रिय थे। आत्मसमर्पित माओवादियों में 18 महिला तथा 45 पुरूष माओवादी शामिल हैं।

आत्मसमर्पित माओवादियों में 8 लाख के 7 ईनामी, 5 लाख के 7 ईनामी 2 लाख के 8 ईनामी, 1 लाख के 11 ईनामी एवं 50 हजार के तीन ईनामी नक्सली शामिल हैं। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि ‘पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन बस्तर में स्थायी शांति, गरिमा और समग्र प्रगति की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है। इन नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने हेतु प्रोत्साहित कराने में डीआरजी, बस्तर फाईटर्स दंतेवाड़ा एवं सीआरपीएफ की 111वीं, 195वीं एवं 230वीं वाहिनी दंतेवाड़ा का विशेष योगदान रहा है।पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी., सीआरपीएफ के उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा श्री रामकुमार बर्मन के मार्गदर्शन में नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को परिणित करने के उद्देश्य से लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान संचालित किया जा रहा है। जिससे माओवादी संगठन हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और प्रगति के मार्ग को अपना रहे हैं और समाज के मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में आज 9 जनवरी को 1 करोड़, 19 लाख, 50 हजार के 36 ईनामी सहित 64 नक्सलियों ने पुलिस उप महानिरीक्षक सीआरपीएफ राकेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, कमांडेंट 111वीं वाहिनी सीआरपीएफ गोपाल यादव, कमांडेंट 195वीं वाहिनी सीआरपीएफ अनिल कुमार सिंह, कमांडेट 230वीं वाहिनी सीआरपीएफ अनिल कुमार प्रसाद, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार बर्मन एवं उप कमांडेंट सीआरपीएफ डीआईजी आफिस विमल कुमार के समक्ष डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत् 50-50हजार रूपये की सहायता राशि के साथ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

राज्यपाल रमेन डेका शुक्रवार 09 जनवरी को बालोद जिले के प्रवास पर रहेंगे

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डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ समारोह में होंगे शामिल बालोद, 08 जनवरी 2026 राज्यपाल रमेन डेका शुक्रवार 09 जनवरी को बालोद जिले के एक दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। राज्यपाल डेेका अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान शुक्रवार 09 जनवरी को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम दुधली में आयोजित प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ समारोह में शामिल होंगे। जारी किए गए प्रवास कार्यक्रम के अनुसार डेका दोपहर 01.30 बजे हेलीकाॅप्टर द्वारा पुलिस परेड ग्राउंड रायपुर से प्रस्थान कर दोपहर 01.55 बजे हेलीपैड ग्राम दुधली में पहुँचकर सड़क मार्ग द्वारा दोपहर 02 बजे प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी स्थल में पहुँचेंगे। राज्यपाल श्री डेका ग्राम दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ समारोह में शामिल होेने के पश्चात् दोपहर 03.10 बजे हेलीपैड ग्राम दुधली से पुलिस परेड ग्राउंड रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

करपावंड के ऐतिहासिक मेले में विभिन्न गांवों से पहुंचे देवी-देवता

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सरपंच नीलम कश्यप ने परंपरा संरक्षण के लिए ग्रामीणों को सराहा

बकावंड विकासखंड बकावंड के करपावंड में ऐतिहासिक मेले का आयोजन हुआ। मेले में पारंपरिक संस्कृति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कोसमी के युवा सरपंच नीलम कश्यप विभिन्न गांवों के सरपंचों के साथ मेले में शामिल हुए।

नीलम कश्यप और अन्य सरपंचों ने देवी देवताओं की पूजा अर्चना की। कोसमी के सरपंच नीलम कश्यप ने मेले को बस्तर की संस्कृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि करपावंड के ग्रामीण अपनी ऐतिहासिक और समृद्ध परंपरा को आज भी सहेजे हुए हैं, जो गर्व की बात है। कश्यप ने कहा कि हमारी नई पीढ़ी को चाहिए कि वह हमारी इस धरोहर को सम्हाले रखे और अपनी अगली पीढ़ी को सौंपे। नीलम कश्यप ने ग्रामवासियों को मेला आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।

जगदलपुर में दिखेगी गोंडवाना संस्कृति की शानदार झलक

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दो दिवसीय गोंडवाना समाज मिलन समारोह 10 जनवरी से

जगदलपुर गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला बस्तर जगदलपुर द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दो दिवसीय वार्षिक गोंडवाना सामाजिक मिलन समारोह 10 जनवरी को बुढ़ाल पेन की पारंपरिक सेवा अर्जी के साथ प्रारंभ होगी। 11 जनवरी रविवार को बस्तर सांसद तिरुमाल महेश कश्यप, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक जगदलपुर तिरुमाल किरण सिंह देव, महापौर जगदलपुर तिरुमाल संजय पांडे, वार्ड पार्षद तिरुमाल संग्राम सिंह राणा, संभागीय अध्यक्ष गोंडवाना समाज समन्वय समिति सुमेर सिंह नाग, संभागीय अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज प्रकाश ठाकुर एवं समाज के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति में समापन होगा।

गोंडवाना समाज समन्वय समिति बस्तर जिला के मीडिया प्रभारी नरेश मरकाम एवं माखन लाल सोरी ने बताया है कि 10 जनवरी रविवार को बुढ़ाल पेन की सेवा अर्जी के पश्चात समाज के विद्यार्थियों महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जिसमें प्रमुख रूप से रंगोली, दोना पत्तल सिलाई, क्विज, चित्रकला, निबंध लेखन, आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा, आदिवासी लोक नृत्य एकल, सामूहिक एवं युगल प्रारूप में आयोजित की जाएगी। इन प्रतियोगिताओं के लिए अब तक लगभग 80 प्रतिभागी अपना पंजीयन करा चुके हैं।इन प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन के लिए समाज के महिला प्रभाग की पदाधिकारियों की टीम बनाई गई है और युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही है। समाज द्वारा बस्तर जिले के सभी विकासखंडों के साथ ही साथ संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में निवासरत गोंडवाना समाज के सदस्यों को कार्यक्रम में शामिल करने के लिए युद्ध स्तर पर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है ताकि समाज के लोग इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होकर सामाजिक एकता संस्कृति, बोली भाषा, रहन-सहन टंडा, मंडा, कुंडा नेग के बारे में जाने समझेंऔर नई पीढ़ी को भी इसके बारे में अवगत करा सकें। 11 जनवरी को टंडा मंडा कुंडा नेग के बारे में कोया पुणेम्मी बैदार जी का विशेष व्याख्यान रखा गया है। इस आयोजन में बस्तर जिले के साथ ही साथ संभाग के अन्य जिलों के गोंडवाना समाज के सामाजिक विचारक कार्यकर्ता पदाधिकारी विद्यार्थी कर्मचारी अधिकारी शामिल होंगे। समाज के जिला अध्यक्ष नकुल सिंह सेवता ने बताया कि यह आयोजन समाज की समृद्ध गोंडी भाषा संस्कृति रीति रिवाज को संरक्षित संवर्धित करते हुए नए पीढ़ी को देने के उद्देश्य के साथ ही समाज में शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, व्यापार व्यवसाय, रोटी बेटी व्यवस्था, विवाह योग्य युवक युवतियों का पंजीयन कराने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। आयोजन में वर्ष 2024-25 सत्र के समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया जाएगा।

खेत में रखी धान खरही जलकर खाक

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जगदलपुर बस्तर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खोरखोसा सुकुलगुड़ा पारा के किसान डमरू पिता सोनिया के खेत में रखी धान की खरही (कुपा) जलकर खाक हो गई। मिली जानकारी के अनुसार खेत की पराली में अज्ञात लोगों ने आग लगाई थी, जिसकी चपेट में खरही आ गई। आग से किसान का पूरा धान जलकर खाक हो गया है। किसान डमरू को भारी नुक़सान हुआ है और वह अब अपना कर्ज कैसे चुकाएगा, इसे लेकर काफी चिंतित है। काफी प्रयास करने के बाद आग पर काबू पाया गया पर तब तक धान जलकर खाक हो चुका था।

गांव के करीब पहुंच कर शेर ने किया हिरण का शिकार

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जगदलपुर ग्राम सालेमेटा-2 के जुनागुड़ा पारा की बाड़ी में आकर एक हिरण का किसी जंगली जानवर ने शिकार किया है। जंगली जानवर के पंजों के निशान के आधार पर उसके शेर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बस्तर ब्लॉक की ग्राम पंचायत लामकेर सरपंच लक्ष्मण कश्यप ने बताया कि एक हिरण किसी जंगली जानवर के हमले का शिकार हुआ है। जंगल से भागकर अपनी जान बचाने गांव की ओर आया था। सरपंच के अनुसार मौके पर शेर के पंजे का निशान दिखाई दिया है। जानवर ने हिरण के पेट को फाड़कर अंदर का मांस खा लिया है।सरपंच लक्ष्मण कश्यप ने ग्राम पंचायत लामकेर, सालेमेटा-2 एवं आसपास के गांव के लोगों से अपील की है कि वे सतर्क और जागरूक रहें। जंगल जाएं तो समूह बनाकर जाएं और देख परख कर ही जाएं। सरपंच ने गांव वालों को अकेले जंगल में जाने से मना किया है। आस-पास के गांवों में सतर्क रहने को कहा गया है। वन विभाग को सूचना दे दी गई है। वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि हिरण का शिकार शेर ने किया है या फिर किसी अन्य जानवर ने।

दुधली में आयोजित विशाल, भव्य एवं गरिमामय प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के माध्यम से जुड़ने जा रहा है एक स्वर्णीम अध्याय

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वृहद आयोजन को गर्वोत्सव एवं हर्षोत्सव के साथ चीर स्मरणीय बनाने सभी तैयारियां सुनिश्चित की गई

बालोद, 08 जनवरी 2026 बालोद जिले के ग्राम दूधली में 09 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित ’प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ का भव्य आयोजन के माध्यम से पूरे देश एवं प्रदेश के साथ-साथ बालोद जिले में भी भारतीय स्काउटिंग के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। यह भारत के इतिहास में राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का पहला आयोजन है, जिसकी मेजबानी का गौरव छत्तीसगढ़ राज्य के बालोद जिले को प्राप्त हुआ है। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में देशभर के विभिन्न राज्यों, रेलवे, केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय संगठन से लगभग 11,696 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य से सर्वाधिक 4,252 रोवर-रेंजर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। स्टाफ अधिकारियों और विदेशी प्रतिभागियों सहित 14 हजार से अधिक लोग इस ऐतिहासिक मिलन का हिस्सा बनेंगे। ज्ञातव्य हो कि अब तक केवल स्काउट-गाइड जंबूरी का ही आयोजन होता रहा है। लेकिन यह पहली बार है जब 16 से 25 आयु वर्ग के युवाओं (बालक वर्ग – रोवर एवं बालिका वर्ग – रेंजर) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस जंबूरी का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सेवा भावना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से ’विश्व नागरिक’ बनने के लिए प्रेरित करना है। स्काउटिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सदैव उत्कृष्ट रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में छत्तीसगढ़ के 366 प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 08 इवेंट में ’ए’ ग्रेड और 07 इवेंट में ’बी’ ग्रेड हासिल कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। उल्लेखनीय है कि जंबूरी शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है ’आनंदपूर्ण मिलन’। जंबूरी की शुरुआत 1907 में लॉर्ड राबर्ड बेडन पॉवेल द्वारा स्काउट आंदोलन की स्थापना। विश्व स्तर पर प्रथम विश्व स्काउट जंबूरी 1920 में लंदन (ओलंपिया) में आयोजित की गई। भारत में प्रथम राष्ट्रीय जंबूरी का आयोजन सन् 1951 में हैदराबाद में किया गया। छत्तीसगढ़ की मेजबानी वर्ष 2002 में रायपुर में 14वीं राष्ट्रीय जंबूरी का सफल आयोजन हुआ था। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स एवं जिला प्रशासन द्वारा इस 05 दिवसीय आयोजन के भव्य, गरिमामय एवं यादगार बनाने हेतु सभी तैयारियां सुनिश्चित की गई है। इस जंबूरी में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा उन्हें जंबूरी का अवलोकन कराने हेतु उनके लिए डे विजिटर पास आदि की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिससे कि यह वृहद एवं गरिमामय आयोजन गर्वोत्सव एवं हर्षोत्सव के साथ चीर स्मरीण बन सके।

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