बस्तर के आईटीआर की जैव विविधता को मिली नई पहचान
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व से वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण की उत्साहजनक खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वन भैंसा और विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुका हिमालयन गिद्ध एक बार फिर टाइगर रिजर्व के जंगलों में दिखाई दिए हैं। दोनों दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी को विशेषज्ञ बस्तर के इस वन क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र और सफल संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
बीजापुर जिले में विस्तारित इंद्रावती टाइगर रिजर्व लंबे समय से वन भैंसा संरक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। हाल ही में जंगल में वन भैंसों का झुंड प्राकृतिक आवास में विचरण करता दिखाई दिया। जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण उनके लिए अनुकूल बना हुआ है। हिमालयन गिद्धों की मौजूदगी ने भी वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। मृत पशुओं के अवशेषों को साफ कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह दुर्लभ पक्षी वर्तमान में विलुप्ति के खतरे से जूझ रहा है। ऐसे में इंद्रावती के जंगलों में इसका दिखाई देना वन्य जीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वन विभाग द्वारा लगातार गश्त, निगरानी, कैमरा ट्रैप और प्राकृतिक आवास संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और प्रभावी संरक्षण के कारण इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जैव विविधता लगातार मजबूत हो रही है।
उत्साहित हैं डायरेक्टर बलगा
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उप संचालक संदीप बलगा ने बताया कि वन विभाग वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। वन भैंसा और हिमालयन गिद्ध जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्यों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। वन्यप्राणी के ओरिएंटेशन में देकर उनकी मॉनिटरिंग करना है। स्कैट, सैंपल कैसे लेना है, और उनकी कैमरा ट्रैप से में मॉनिटरिंग कैसे करनी है, इस बाबत कर्मियों और अधिकारियों को ट्रेनिंग देने की जरूरत है।













