जगदलपुर, बस्तर विक्रम लहरे, जिलाध्यक्ष सर्व अनुसूचित जाति समाज ने बस्तर दशहरा मेला में आम जनता की सुरक्षा, पारदर्शिता और सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
विक्रम लहरे ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मेला में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ घूमने आते हैं ऐसे में मेले में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
उन्होंने शासन,प्रशासन एवंजिम्मेदार अधिकारी से मांग की है कि मेले में प्रवेश के लिए जारी किए जाने वाले गेट पास की व्यवस्था,उसकी दर एवं उससे होने वाली आय की जानकारी सार्वजनिक की जाए साथ ही मेले में संचालित प्रत्येक झूले,खाने-पीने की दुकान और अन्य दुकानों से कितना शुल्क या टैक्स लिया जा रहा है,इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए संबंधित ठेकेदारों एवं संचालकों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए।
विक्रम लहरे ने विशेष रूप से झूलों और बिजली की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मेले में लगाए गए सभी झूलों की तकनीकी जांच कराई जाए तथा बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित किया जाए बिजली के खुले तार, खराब उपकरण और असुरक्षित झूलों के कारण किसी भी व्यक्ति की जान खतरे में नहीं पड़नी चाहिए मेले में अग्निशमन, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि यदि मेले में किसी झूले, बिजली के तार या अन्य लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को कितना मुआवजा दिया जाएगा और मुआवजा देने की जिम्मेदारी किस अधिकारी, ठेकेदार या संबंधित संस्था की होगी? इन सभी विषयों पर पहले से स्पष्ट नियम और जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि दुर्घटना होने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना न पड़े।
विक्रम लहरे ने मांग की कि जिला प्रशासन, नगर निगम एवं संबंधित विभाग मेले की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करें तथा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। मेले का आयोजन मनोरंजन और खुशियों के लिए होता है, न कि लोगों की जान जोखिम में डालने के लिए। प्रशासन को चाहिए कि वह राजस्व वसूली के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता दे।
विक्रम लहरे, जिलाध्यक्ष सर्व अनुसूचित जाति समाज ने जिला प्रशासन से मांग की कि इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक जांच कराई जाए और आम जनता की सुरक्षा के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाएं।
दशहरा मेले में झूलों, खाने-पीने की दुकानों एवं गेट पास की दरें कम करने की मांग
विक्रम लहरे ने कँहा जिला प्रशासन एवं मेला आयोजकों से मांग की है कि दशहरा मेले में प्रवेश गेट पास, सभी प्रकार के झूलों, खाने-पीने की दुकानों तथा अन्य खरीदारी की दुकानों पर वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य आम जनता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्धारित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि दशहरा मेला केवल अमीर और संपन्न परिवारों के मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि गरीब, मजदूर, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी खुशियां मनाने का अवसर है। लेकिन यदि गेट पास, झूलों और खाने-पीने की वस्तुओं के दाम अधिक होंगे, तो गरीब परिवार अपने बच्चों को पर्याप्त मनोरंजन नहीं करा पाएंगे।
हमारी मांग है कि मेले में गेट पास से लेकर झूलों, खाने-पीने की सामग्री और अन्य दुकानों पर मिलने वाली वस्तुओं के उचित एवं किफायती मूल्य निर्धारित किए जाएं। मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि दुकानदार मनमाने दाम न वसूल सकें। साथ ही, मेला आयोजक और संबंधित प्रशासन यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक परिवार अपने सीमित बजट में भी मेले का आनंद उठा सके।
विक्रम लहरे ने कहा कि मेले का उद्देश्य केवल व्यापार और मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को खुशी और मनोरंजन का अवसर प्रदान करना भी होना चाहिए। जब गरीब परिवार भी अपने बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला सकेगा, तभी दशहरा मेले का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा
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प्रमुख मांग: दशहरा मेले में सभी वर्गों के परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गेट पास, झूलों, खाने-पीने की सामग्री एवं अन्य दुकानों के मूल्य उचित और किफायती किए जाएं, ताकि गरीब परिवार भी बिना आर्थिक बोझ के मेले का आनंद उठा सकें।