सरपंच के उकसावे में आकर ग्रामीणों ने किया राजस्व टीम पर हमला
अर्जुन झा
बकावंड बस्तर जिले के करपावंड में शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर निजी भूमि का सीमांकन कर शेरा चौधरी को कब्जा दिलाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम पर हुए हमले के लिए करपावंड के भाजपाई सरपंच को जिम्मेदार माना जा रहा है। आरोप है कि सरपंच के उकसाने पर ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम पर हमला किया था। पुलिस ने सरपंच सहित आधा दर्जन ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
करपावंड में एसडीएम, एसडीओपी एवं थानेदार और पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन का सीमांकन किया जा रहा था। इसी दौरान गांव के भाजपाई सरपंच के उकसावे में आकर दर्जनों ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की टीम पर अचानक हमला कर दिया। हमले में राजस्व निरीक्षक देवेन्द्र श्रीवास को गंभीर चोटें आई हैं। तहसीलदार रूपेश मरकाम के साथ भी ग्रामीणों ने धक्का-मुक्की की। बीच बचाव करते समय एसडीओपी भानपुरी को भी सामान्य चोट आई है। करपावंड थाना प्रभारी और उनकी टीम ने मोर्चा सम्हाला तथा हालात को काबू में किया। लगभग एक दर्जन ग्रामीणों को हिरासत में लेकर हवालात पहुंचा दिया गया। इस घटना के बाद करपावंड में तनाव का माहौल है और वहां भारी पुलिस बल किया गया है। इस हमले में जमीन मालिक शेराराम चौधरी को भी गंभीर चोट आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। शेरा चौधरी ने कुछ वर्ष पूर्व मदन निषाद के 5 एकड़ जमीन में से डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी थी। शेरा राम चौधरी द्वारा खरीदी गई जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। जमीन मालिक चौधरी ने तहसीलदार न्यायालय में कब्जा दिलाने को लेकर वाद दायर किया था।

न्यायालय ने चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस निर्णय के विरूद्ध कब्जाधारियों ने एसडीएम न्यायालय में अपील की थी।वहां भी कब्जाधारियों को हार का सामना करना पड़ा। राजस्व मंडल और कोर्ट में भी मामला पहुंचा, मगर वहां भी कब्जाधारियों को राहत नहीं मिली। जानकारी के अनुसार कोर्ट के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम जमीन शेरा चौधरी को कब्जा दिलाने के लिए करपावंड पहुंची थी। जमीन की नाप जोख के दौरान करपावंड सरपंच के इशारे पर ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की। हमले में आरआई और तहसीलदार घायल हो गए। खबर है कि विगत 6 माह से जमीन मालिक का सरपंच और ग्रामीणों से विवाद चल रहा था।
प्रशासनिक कार्रवाई में विलंब
बताते हैं कि करपावंड सरपंच, कुछ पंचों एवं ग्रामीणों द्वारा गांव में विवाद उत्पन्न किए जाने को लेकर पूर्व में बस्तर कलेक्टर एवं एसपी के समक्ष शिकायत भी की गई थी। जिसमें एक विधवा का आवास सरपंच द्वारा तोड़े जाने एवं शासकीय जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकायत भी शामिल थी। मगर प्रशासनिक कार्रवाई में लेटलतीफी के कारण सरपंच का मनोबल बढ़ता गया। इसका खामियाजा प्रशासनिक अधिकारियों को भुगतना पड़ा। समय रहते प्रशासनिक अफसरों ने सरपंच के खिलाफ एक्शन ले लिया होता तो यह घटना नहीं होती। कहीं न कही प्रशासनिक कार्रवाई में लेट लतीफी के चलते सरपंच ने घटना को अंजाम दिया है।
सरपंच और ग्रामीणों पर केस
भानपुरी एसडीओपी ने बताया कि शासकीय कार्य में बाधा डालने एवं शासकीय कर्मचारी पर जानलेवा हमले करने के आरोप में करपावंड सरपंच एवं आधा दर्जन ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। खबर है कि पुलिस को देख सरपंच महिलाओं को आगे कर छुपता फिर रहा है।



