जिला अस्पताल की छत से गिरकर भर्ती मरीज की मौत, अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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सुनील कथूरिया

जिला अस्पताल नारायणपुर में भर्ती 51 वर्षीय मरीज की अस्पताल की छत से गिरने के बाद मौत हो गई। मृतक की पहचान गऊराम गांवर, निवासी खड़ीबहार, नारायणपुर के रूप में हुई है। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार, गऊराम गांवर को परिजनों ने 21 अगस्त की शाम करीब 7 से 8 बजे पेट में दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों के मुताबिक उपचार के बाद उन्हें दर्द से राहत मिल गई थी। 22-23 अगस्त की दरमियानी रात करीब 2 बजे मृतक के छोटे पुत्र और अटेंडर ने उन्हें अस्पताल के बेड पर सोते हुए आखिरी बार देखा था। इसके बाद थकान के कारण अटेंडर की आंख लग गई।सुबह करीब 6 बजे अस्पताल की नर्स ने अटेंडर को जगाकर बताया कि उसके पिता अस्पताल के बाहर जमीन पर गिरे हुए हैं। अटेंडर ने बाहर जाकर देखा तो गऊराम लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़े थे और उनके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। अस्पताल स्टाफ उन्हें तत्काल अंदर लेकर गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।बताया जा रहा है कि मृतक का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं था। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मरीज अस्पताल में भर्ती था तो वह आधी रात को वार्ड से निकलकर अस्पताल की छत तक कैसे पहुंच गया? क्या छत का दरवाजा खुला हुआ था? यदि हां, तो उसे बंद रखने की व्यवस्था क्यों नहीं थी? अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए क्या निगरानी व्यवस्था थी, यह भी जांच का विषय है।बगल के बेड पर भर्ती मरीज भी लापताघटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर एक और गंभीर सवाल सामने आया है। बताया जा रहा है कि मृतक के बगल वाले बेड पर भर्ती एक अन्य मरीज भी अस्पताल से गायब है, जबकि उसका सामान अभी भी उसी बेड के पास रखा हुआ है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।घटना की सूचना अस्पताल प्रबंधन द्वारा थाना नारायणपुर को दी गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गऊराम गांवर छत तक कैसे पहुंचे और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।खबर लिखे जाने तक मृतक के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी थी।फिलहाल घटना को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में अस्पताल प्रबंधन की वास्तविक जिम्मेदारी और लापरवाही की स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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