दल्ली राजहरा। श्रमवीर चौक के समीप स्थित जर्जर पुलिया अब हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। पुलिया की खस्ताहाल हालत, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी और भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। हाल ही में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक वृद्ध महिला की मौत की घटना ने प्रशासनिक लापरवाही की गंभीरता को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार आखिर कब तक किया जाएगा?बताया जाता है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर पूर्व में बीएसपी प्रबंधन द्वारा पुलिया की मरम्मत कराई गई थी।

भारी वाहनों को रोकने के लिए संकेतक बोर्ड और बैरिकेड भी लगाए गए थे। रविवार के साप्ताहिक बाजार के दौरान भीड़ को देखते हुए कुछ समय के लिए मार्ग खोलने की व्यवस्था थी, लेकिन धीरे-धीरे यह अस्थायी व्यवस्था स्थायी लापरवाही में तब्दील हो गई।जिन स्थानों पर भारी वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे, वहां अब प्रभावी रोकथाम नजर नहीं आती। नतीजतन भारी वाहन लगातार पुलिया से गुजर रहे हैं। पुलिया का कमजोर होता ढांचा और उस पर दौड़ते भारी वाहन किसी बड़े हादसे की आशंका को और बढ़ा रहे हैं।सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यह मार्ग टाउनशिप क्षेत्र में आता है और यहां से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों की लगातार आवाजाही होती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।घटना के बाद नागरिकों और व्यापारियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू एवं उपाध्यक्ष मनोज दुबे (पिंटू) ने मौके पर पहुंचकर पुलिया की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से तत्काल चर्चा कर स्थायी बैरिकेड लगाने तथा भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही।हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासनस्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिया की स्थिति पहले से जर्जर है और यहां दुर्घटना में एक महिला की जान जा चुकी है, तो फिर जिम्मेदार विभाग किसी और हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं? लोगों की मांग है कि पुलिया का पूर्ण जीर्णोद्धार होने तक भारी वाहनों की आवाजाही तत्काल बंद की जाए और मजबूत स्थायी बैरिकेड लगाए जाएं।नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में होने वाले किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की है।






