खुद बाढ़ में तबाह हो गए, मगर डोंगाघाट के बाढ़ पीड़ितों के लिए मसीहा बन गए सूरज ठाकुर

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खुद का घर बाढ़ में ढह गया, परिवार प्रभावित, फिर भी दूसरों की मदद के लिए गले तक पानी में उतरे सूरज

जगदलपुर इंद्रावती नदी में आई भीषण बाढ़ ने जगदलपुर के डोंगाघाट क्षेत्र में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। बाढ़ के इस संकट के बीच शिव मंदिर वार्ड निवासी सूरज ठाकुर ने मानवता और सेवा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे डोंगाघाट के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। बाढ़ के कारण सूरज ठाकुर का स्वयं का मकान ढह गया और उनका पूरा परिवार भी बाढ़ से प्रभावित हुआ। इसके बावजूद उन्होंने अपनी परेशानियों की परवाह किए बिना डोंगाघाट के बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद करने का निर्णय लिया।

दरअसल सूरज ठाकुर अपनी जान जोखिम में डालकर गले तक भरे पानी के बीच घर-घर पहुंचे और जरूरतमंद लोगों तक पानी, भोजन, नाश्ता सहित आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य किया।सूरज ठाकुर ने बाढ़ की विकट परिस्थितियों में कई परिवारों तक पहुंचकर उनका हालचाल जाना और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई। जब अधिकांश लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, उस समय सूरज स्वयं बाढ़ के पानी में उतरकर लोगों की मदद में जुटे रहे। डोंगाघाट के लोगों ने सूरज ठाकुर की इस सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि मुसीबत कब आ जाए, यह किसी को पता नहीं होता। बाढ़ की इस कठिन घड़ी में जब सूरज का अपना घर और परिवार भी प्रभावित था, तब भी उन्होंने दूसरों की चिंता करते हुए जिस तरह मदद का हाथ बढ़ाया, वह मानवता की मिसाल है।स्थानीय लोगों ने सूरज ठाकुर को “बाढ़ पीड़ितों का मसीहा” बताते हुए कहा कि उन्होंने संकट की घड़ी में डोंगाघाट के लोगों का साथ दिया और बिना किसी स्वार्थ के उनकी मदद की। लोगों ने सूरज ठाकुर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सेवा और साहस के लिए पूरा डोंगाघाट उनका धन्यवाद करता है।

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