मुरिया दरबार में आदिवासी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर भाजपा का आयाेजन बना दिया – उमाशंकर शुक्ला

0
5

जगदलपुर, 23 अक्टूबर । प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर प्रकाशित आमंत्रण पत्र को लेकर उन्हाेने कहा कि अमंत्रण पत्र में संभाग के आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के नाम शामिल नहीं होने से उनकी भागीदारी को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बस्तर की आदिवासी परंपरा से जुड़े इतने बड़े आयोजन में स्थानीय प्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों को उचित स्थान मिलना चाहिए था, लेकिन बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार काे भारतीय जनता पार्टी का आयाेजन बना दिय गया।

इतना ही नही बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार के लिए जारी आमंत्रण पत्र संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी कर बस्तर दशहरा समिति काे दरकिनार कर दिया गया। उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान जुड़ी है। जिसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रर्दशित करने के लिए आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू काे बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में बुलाकर भारतीय जनता पार्टी अदिवासी हितैशी हाेने का ढ़ाेग करना चाहती है, लेकिन ऐसे आयोजन में स्थानीय आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों काे स्थान नही देने से बस्तर की जनता के समक्ष भाजपा का असली चेहरा उजागर हाे गया है। उन्हाेने कहा कि बस्तर दशहरा का पूरा संचालन बस्तर दशहरा समिति के पदेन अध्यक्ष बस्तर सांसद के माध्यम से किया जा रहा है, ताे मुरिया दरबार के लिए जारी आमंत्रण पत्र संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी करना बस्तर दशहरा समिति एवं बस्तर सांसद का अपमान है। इतना ही नही मुरिया दरबार के आमंत्रण पत्र में कांग्रेस के आदिवासी जनप्रतिनिधियओं में केशकाल की राज्य सभा की सांसद फूलाे देवी नेताम, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, कोंटा विधायक कवासी लखमा, एवं भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी का नाम शामिल नही करना बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार काे भारतीय जनता पार्टी का आयाेजन बनाने काे प्रमाणित करता है। उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार काे भारतीय जनता पार्टी का आयाेजन बनाने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के आदिवासी जनप्रतिनिधियाें में कांकेर सांसद भोजराज नाग, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कांकेर विधायक आसाराम नेताम और अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी का नाम मुरिया दरबार के आमंत्रण पत्र में शामिल नही करना बस्तर के आदिवासी जनप्रतिनिधियाें काे बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार से दरकिनार करना बस्तर के आदिवासी जनप्रतिनिधियाें का अपमान है। वहीं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी आमंत्रण पत्र में संस्कृति विभाग के मंत्री राजेश अग्रवाल स्वयं काे अतिथि बनाया जाना हास्यास्पद है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here