अभी भी अधिकारियों के दिल से नहीं निकला है लखमा का खौफ

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  •  पंचायतों में फर्जीवाड़ा मामले में डिप्टी सीएम शर्मा के आदेश पर अमल नहीं
  • उप मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को दिए थे एफआईआर कराने निर्देश
  • तीन भ्रष्ट सचिवों को बचाने में जुटे हैं एक अफसर और जांच अधिकारी
  • वरिष्ठ अधिकारी को किया जांच से अलग, कनिष्ठ को सौंप दी जिम्मेदारी
  • मृत व्यक्तियों के नाम राशि आहरण का गंभीर मामला

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले में अधिकारियों के सिर से पूर्व की कांग्रेस सरकार का खुमार अब तक नहीं उतर पाया है। पूर्व मंत्री कवासी लखमा का खौफ या कहें कि सुकमा को चारागाह समझने की प्रवृत्ति अफसरों के रग रग में समा गई है। इस जिले में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि अधिकारी अब मौजूदा उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के आदेश को भी हवा में उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा के आदेश पर साल भर बाद भी अमल नहीं किया गया है।

मामला सुकमा जिले की कोंटा जनपद पंचायत से जुड़ा हुआ है।प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड की एलमपल्ली ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार मामले में सुकमा कलेक्टर को 22 फरवरी 2024 पत्र क्रमांक 112 जारी कर सचिव गिरीश कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए उसकी सेवा समाप्ति के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के आदेशों का एक वर्ष बाद भी पालन नहीं किया जाना सरकार पर अफसरशाही के हावी होने की ओर इशारा करता है। जबकि जिला पंचायत के पूर्व सीईओ देवनारायण कश्यप द्वारा आरोप पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट में एक दर्जन से अधिक मृत मजदूरों के नाम से फर्जी मस्टर रोल तैयार कर राशि की बंदरबांट किए जाने का उल्लेख किया gyaहै। जांच रिपोर्ट में एक करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किये जाने का भी खुलासा किया गया था। इसी तरह गुमोड़ी ग्राम पंचायत में कागजों में विकास कार्य दर्शा कर एक करोड़ से अधिक की राशि की बंदरबांट की जांच रिपोर्ट उप संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास सुकमा द्वारा खुलासा किया जा चुका है। भ्रष्टाचार के मामले में सर्वाधिक चर्चित बंडा पंचायत में अमृत सरोवर एवं अन्य विकास कार्य कागजों में किये जाने को लेकर जिला सीईओ भी खुलासा कर चुके हैं। पूर्व मंत्री के इनके चहेते सचिव को बचाने जांच अधिकारी को ही बदल दिया गया है। एक आईएएस अफसर के इशारों पर वरिष्ठ अधिकारी को जांच से हटाकर कनिष्ठ को जांच की फाईल सौंप दी गई। यह कदम कर्मचारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराई जाती है तो जनपद के पूर्व अधिकारी पर भी जांच की आंच को देखते हुए जांच के नाम पर खानापूर्ति कर बचाने की कवायद की जा रही है। दीगर विभाग के एक अधिकारी का इन मामलों की जांच में सीधा हस्तक्षेप है, ताकि सचिव एवं एक अधिकारी को बेगुनाह साबित किया जा सके।

ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिले के एक भाजपा नेता ने कांग्रेस के कार्यकाल में एलमपल्ली पंचायत में हुए भ्रष्टाचार मामले में की जांच दोबारा कराने की मांग करते हुए 16 फरवरी 2024 को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखा था। उक्त मामले की जांच में एक करोड़ से अधिक राशि की अफरा तफरी का खुलासा हो चुका था। संगठन के नेता से मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एलमपल्ली सचिव गिरीश कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर उसकी सेवा समाप्ति के निर्देश कलेक्टर सुकमा को दिए थे। इस निर्देश पत्र में श्री शर्मा ने 12 बिंदुओं पर जांच कराने के लिए भी कहा था। मगर एक वर्ष बाद भी मंत्री के आदेशों का पालन नहीं हो सका है।

सचिवों की बहाली की तैयारी

जानकारी के अनुसार एलमपल्ली सचिव गिरीश कश्यप एवं गुमोड़ी सचिव बुधराम बारसे द्वारा पंचायतों में स्वीकृत कार्य अमृत सरोवर, सोलर लाईट, हैण्डपंप खनन, फर्जी मस्टररोल सहित अन्य कार्यो को कागजों में पूर्ण कर दोनों सचिवों पर 2 करोड़ से अधिक की राशि की बंदरबांट करने का खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ था।

उक्त मामले में कई माह बीत जाने के बाद भी आगे की कार्रवाई फाईलों में बंद है। जांच प्रतिवेदन जिम्मेदार अफसरों तक नहीं भेजा जा सका है। विशेष सूत्रों से जानकारी मिली है कि जांच में लीपापोती कर दोनों सचिवों को बहाल करने की भी तैयारी की जा रही है। इन सचिवों को बेगुनाह साबित कर एक जनपद के पूर्व अधिकारी का सीधा हस्तक्षेप है जो आए दिन जांच अधिकारी के दफ्तर से लेकर उनके निवास तक दौड़ लगाकर फाईलों को दुरूस्त करने अपनी ज्ञान को साझा करते देखे जाने की खबर है।

बंडा का सचिव भी सुर्खियों में

बंडा का पूर्व पंचायत सचिव प्रकाश सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 27 मई को जिला पंचायत सीईओ द्वारा निलंबित किया जा चुका है। सचिव प्रकाश सिंह पर वर्ष 2019 से 2023 के दौरान कई तालाबों, सोलर लाईट एवं अन्य कई कार्य कागजों में होना बताकर राशि की बंदरबांट करने का आरोप है। खबर है कि प्रस्ताव तैयार कर सरपंच व रोजगार सहायक के फर्जी हस्ताक्षर कर कोंटा एसबीआई बैंक से राशि का आहरण किया जाता था, जिसका कमीशन सुकमा के अधिकारी एवं नेता तक पहुंचाए जाने की खबर है। इस पंचायत सचिव की भी जांच पर ब्रेक लग गया है।

नस्तीबद्ध करने की जल्दबाजी

कोंटा विकासखण्ड की ग्राम पंचायतों में कागजों पर विकास कार्य कराकर राशि की बंदरबांट किए जाने की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी प्राप्त करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जनपद हो या जिला पंचायत हर जगह जानकारी देने में आनाकानी की जाती है और जानकारी भी आधी अधूरी उपलब्ध कराकर प्राप्त आवेदनों को जनपद एवं जिला सुकमा से नस्तीबद्ध करने में जल्दबाजी दिखाई जाती है। जानकारी नहीं देना इशारा करता है कि पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार के मामलों के तार अधिकारी से जुड़े हुए हैं।

वर्सन:

जांच रिपोर्ट आते ही कार्रवाई

सुकमा कलेक्टर  ध्रुव ने बताया कि कई पंचायतों में हुई भ्रष्टाचार मामले का जांच कराने जिला पंचायत सीईओ को निर्देशित किया जा चुका है। जांच कराई जा रही है। अभी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जिला पंचायत से जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।