दल्लीराजहरा।नगर क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर इसका शिकार मासूम बच्चे बने हैं। वार्ड नंबर 10 में आवारा कुत्तों ने बच्चों पर हमला कर दिया, जिसमें एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह घटना नगर की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और पशु नियंत्रण प्रणाली की विफलता को उजागर करती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अचानक हुए हमले में बच्चों के कान एवं शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे चोट के निशान आए हैं। घायलों को तत्काल इलाज के लिए चिखलाकसा स्थित शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर निधि राम द्वारा उनका उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, घाव गंभीर थे, हालांकि समय पर इलाज मिलने से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर वे लंबे समय से शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गली-मोहल्लों, स्कूल जाने वाले रास्तों और बाजार क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं, जिससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है।नागरिकों का आरोप है कि शासन द्वारा पशु कल्याण और नियंत्रण के लिए योजनाएं, नसबंदी और टीकाकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव नजर नहीं आता। अधिकांश कार्य केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह गए हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालइस घटना के बाद पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगरवासियों का आरोप है कि शासन द्वारा नि:शुल्क पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बावजूद विभागीय स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है।लोगों का कहना है कि पालतू कुत्तों के टीकाकरण के नाम पर भी कई बार पैसे की मांग की जाती है। दवा, जांच और अन्य सुविधाओं के लिए अनौपचारिक शुल्क वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नागरिकों का तर्क है कि जब पालतू पशुओं की देखरेख की स्थिति ऐसी है, तो आवारा कुत्तों के नियंत्रण की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की तत्काल धरपकड़, नसबंदी और टीकाकरण की प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों व आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



