केंद्र सरकार द्वारा पुराने श्रम कानूनों को समाप्त करते हुए चार नए लेबर कोड लागू किए हैं । जो देश की ट्रेड यूनियनों को मंजूर नहीं है। इसलिए इन चारों लेबर कोड को रद्द करने की मांग को लेकर 12 फरवरी को देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं फेडरेशनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है । इसी आह्वान के परिपेक्ष में स्थानीय हिंदुस्तान स्टील इंप्लाइज यूनियन सीटू राजहरा ने भी आज मुख्य महाप्रबंधक आईओसी राजहरा को संबोधित एक हड़ताल नोटिस प्रबंधन को सौंपा है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए लेबर कोड को रद्द करने की मांग को लेकर लौह अयस्क खान समूह राजहरा के नियमित एवं ठेका कर्मचारी भी 12 फरवरी को हड़ताल में रहेंगे। उल्लेखनीय है कि देश के उद्योगपतियों के इशारे पर केन्द्र सरकार ने मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा करने वाले 29 व्यापक श्रम कानूनों को समाप्त करके चार नये लेबर कोड बना दिये हैं। नये लेबर कानूनों में मजदूरों के अधिकारों को कम करते हुए उद्योगपतियों को मजदूरों के शोषण की खुली छूट दे दी गई है। ये नये कानून लागू होने के बाद देश के उद्योगों में स्थायी नौकरियों का युग समाप्त हो जायेगा। क्योंकि नये कानून में फिक्स टर्म रोजगार को कानूनी मान्यता दे दी गई है। इसी तरह काम के घंटे को बढ़ाकर 10 घंटे काम लेने की छूट दे दी गई है। महिलाओं को रात्रि पाली में काम में लगाने की भी छूट दी गई है जिससे महिला मजदूरों का जीवन असुरक्षित हो जाएगा । कारखाना मालिक एवं उद्योग प्रबंधन की शिकायतों और उनकी जांच के तंत्र को नए कानून में बेहद कमजोर कर दिया गया है जिससे शोषण और अराजकता को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह उद्योगों में प्रधान नियोक्ता की जिम्मेदारियां को भी कमतर किया गया है, जिससे ठेका मजदूर के वेतन भत्ते की जिम्मेदारी से प्रधान नियोक्ता मुक्त हो जाएगा और कई ठेका कर्मी वेतन भत्तों के लिए कानूनी प्रक्रिया में उलझकर रह जाएंगे । जिन उद्योगों या संस्थानों मे 300 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं वहां पर बिना अनुमति छटनी व तालाबंदी की जा सकेगी। देश का 70% मजदूर वर्ग ऐसे ही उद्योगों व संस्थानों में कार्यरत है । देश के मजदूर वर्ग के शोषण को आसान बनाने के लिए, इन नए कानूनों में ट्रेड यूनियन बनाने की प्रक्रिया को अत्यधिक जटिल कर दिया गया है। हड़ताल के अधिकार को बेहद कठिन, लगभग समाप्त सा कर दिया गया है। इस तरह केंद्र की सरकार ने चार नए लेबर कोड में मजदूरों के हितों पर कुठाराघात करते हुए उद्योगपतियों को मजदूरों का पसीना लूटने की खुली छूट दे दी है। जिससे आगे चलकर नौकरी पेशा वर्ग गुलामी की जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाएगा । सरकार द्वारा इन कानूनों को संसद में पारित करते समय चर्चा तक नहीं कराई गई, जिससे स्पष्ट है कि सरकार के इरादे साफ नहीं थे। कानून बनने के बाद से लगातार मजदूर वर्ग के व्यापक विरोध के कारण 4 सालों तक इन कानूनों को अधिसूचित नहीं किया जा सका था। पिछले 9 जुलाई 2025 को भी देश के मजदूरों ने इन कानूनों के विरोध में एक बड़ी राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी । इसके बाद ऐसा लग रहा था कि सरकार इन कानूनों से मजदूर विरोधी प्रावधानों को जरूर हटायेगी । लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।बिहार चुनाव के बाद केंद्र सरकार ने आनन-फानन में बिना किसी तैयारी के 21 नवंबर 2025 को देश में इन कानूनों को अधिसूचित कर दिया । जिसका देश की ट्रेड यूनियने विरोध कर रही हैं, और इसी विरोध कार्रवाई के तहत देश की राष्ट्रीय ट्रेड यनियन इंटक,एटक, सीटू, एचएमएस, एक्टू,सहित 10 केंद्रीय यूनियनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों ने सरकार के इस कदम के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है और सरकार से मांग की है कि, मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड को रद्द किया जाए।



