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टेट और पेंशन की समस्या का हो निराकरण: सीजी टीए

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मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को टीचर्स एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन

जगदलपुर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश व्यापी कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले के एलबी संवर्ग के शिक्षकों ने अपनी मांग दोहराते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्यसचिव, शिक्षा सचिव एवं शिक्षा संचालक के नाम कलेक्टर बस्तर को अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन मे टेट परीक्षा अनिवार्यता के संबंध में शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट से 1 सितंबर 2025 को पारित निंर्णय जिसमें 5 वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है जबकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 17 अगस्त 2012 को जारी छत्तीसगढ़ राजपत्र शिक्षक पंचायत संवर्ग भर्ती तथा सेवा की शर्ते नियम 2012 के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है। इसके पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर 17 अगस्त 2012 के पूर्व के नियुक्त सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए छत्तीसगढ शासन द्वारा आवश्यक पहल करने की मांग की है। एल बी संवर्ग के शिक्षकों के पेंशन निर्धारण के लिए पेंशन हेतु सेवा अवधि की गणना संविलियन दिनांक 1 जुलाई 2018 से करने के कारण वर्ष 2028 के पूर्व सेवानिवृत होने वाले एलबी संवर्ग के शिक्षकों को पुरानी पेशन का लाभ नहीं मिल रहा है, अतः पूर्व सेवा प्रथम नियुक्ति अवधि की गणना करते हुए समस्त शिक्षक एलबी संवर्ग के लिए पुरानी पेंशन निर्धारित करने की मांग की गई।

संघ ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 2 सितंबर 2008 को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दिनांक 16 सितंबर 2009 को तथा उत्तराखड सरकार द्वारा 29 अक्टूबर 2010 को आदेश जारी कर 33 वर्षं की अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेंशन के स्थान पर 20 वर्ष अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेशन का प्रावधान किया गया है, सेवानिवृत होने पर छत्तीसगढ़ में 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा में पूर्ण पेंशन का नियम है। इसलिए भारत सरकार, उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड सरकार के समान 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा में अंतिम वेतन की 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान करने एवं उच्च न्यायालय बिलासपुर की डबल बेंच द्वारा याचिका पर 28 फरवरी 2024 को पारित निर्णय के तहत सभी पात्र एलबी संवर्ग के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति समयमान देने का आदेश जारी करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के प्रवीण श्रीवास्तव, लुदरसन कश्यप, मोहम्मद ताहिर शेख, अमित पॉल, शरद श्रीवास्तव, पवन भट्ट, गजराज सिंह, दुर्योधन पटेल, दिलीप कुमार भारती आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।

दिवाली पर मातम, तालाब में डूब गए तीन बच्चे

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तीनों बच्चों की मौत, दो बच्चे एक ही परिवार के

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के पदेड़ा गांव में दीपावली की खुशियां मातम में बदल गईं। बीजापुर ब्लाक की ग्राम पंचायत पदेडा़ के हिरोलीपारा निवासी तीन आदिवासी बच्चों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है। मंगलवार दोपहर नहाने के दौरान तीनों बच्चे तालाब में डूब गए। बताया जा रहा है कि एक बच्चा आंगनबाड़ी केंद्र में और दो बच्चे हिरोलीपारा की प्राथमिक शाला में पढ़ते थे।

इनकी उम्र 4 से 6 साल के बीच की थी। मृत बच्चों के नाम दिनेश कोरसा, नवीन हपका व मनीता हपका बताए गए हैं। दोनों बालक दूसरी कक्षा में पढ़ते थे, जबकि मनीता आंगनबाड़ी जाती थी। घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन व शिक्षा विभाग और पुलिस को दी गई है। प्रशासनिक पुलिस टीम मौके पर पहुंची। तीनों बच्चों के शवों को बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए बीजापुर लाया गया। पदेडा के पूर्व सरपंच गुड्डू कोरबा ने इस घटना की जानकारी दी और बताया कि घटना दोपहर में हुई है। बच्चे तालाब में नहाने गए थे, जहां वे हादसे का शिकार हो गए।गांव में गमगीन माहौल है।

पथरागुड़ा में दिखी गोंड़ समुदाय की परंपरा की शानदार झलक

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ईसर गौरा-गौरी विवाह का हुआ अदभूत आयोजन

जगदलपुर आदिवासी ध्रुव गोड़ समाज एवं अन्य सहयोगी समाजों द्वारा जगदलपुर के पथरा गुड़ा में इस वर्ष भी देवों के देव बूढ़ा देव और मां पार्वती की शादी का महापर्व मनाया गया।इसके साक्षी बने शहरवासी। 1 सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग ईशर गौरा की शादी में शामिल हुए। लोग ईशर गौरा के जयकारे लगाते, नाचते गाते और आतिशबाजी करते हुए चल रहे थे। महिलाएं घर घर से कलश लेकर निकलीं और लंबी कतारों में चल रहीं थीं।सभी लोग अपने इष्ट देव के विवाह में शामिल होकर अपने आप को धन्य समझ रहे थे। यह पावन पर्व मनाने के पीछे एक किंवदंती है कि नई फसल आने की खुशी में नए धान की बाली ईसर गौरा को भेट कर अच्छी फसल की कामना करते हुए अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ईसर गौरी की शादी के बाद ही आदिवासी समाज में लोग अपने बच्चों की शादी करते हैं। यह भी मान्यता है कि सुरोती की रात से ही मौसम में बदलाव दिखने लगता है ठंड का अहसास होने लगता है। इस त्यौहार की एक सप्ताह पहले से तैयारी कर ली जाती है। घरों की लिपाई पोताई और रंग रोगन किया जाता है। ईसर राजा की शादी में कोई कसर बाकी न रहे, इस बात की पूरी सावधानी बरती जाती है। दूसरे दिन विसर्जन का कार्यक्रम होता है जिसमें महिला पुरुष नाचते गाते हुए अपने आराध्य देव का विसर्जन करते हैं। समाज के संभागीय अध्यक्ष संजय ध्रुव, संभागीय सचिव लिलेश्वर ध्रुव, जिला उपाध्यक्ष विक्रम चंद्रवंशी, परिक्षेत्र अध्यक्ष अशोक मंडावी, उपाध्यक्ष करण सिंह नेताम, युवा अध्यक्ष हेमंत चंद्रवंशी, ओमप्रकाश ध्रुव, माता के सेवादार सीताराम नेताम, नीलकंठ ठाकुर गोंचू राम ध्रुव, भगत राम ध्रुव रामनारायण ध्रुव, धनी राम भंडारी, संतोष भंडारी, रमेश नेताम, जितेंद्र नेताम, वेद कुमार, रूप नारायण ध्रुव, महिला प्रकोष्ठ की दया ध्रुव, राधा ध्रुव, गौरी ध्रुव, सुरुजबती नेताम, पायल नेताम, पुष्पा ध्रुव, नीलम ध्रुव, अनिता ध्रुव, सावित्री ध्रुव, लक्ष्मी ठाकुर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक सदस्यों सहित गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर इस महति कार्य को संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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किरण देव ने की गोवर्धन पूजा

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हैप्पी कामधेनु गौशाला कुंरदी में गोवर्धन पूजा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव भी शामिल हुए। उन्होंने गौमाता की पूजा अर्चना कर सभी को गोवर्घन पूजा की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने हैप्पी कामधेनु गौशाला में गौमाता की पूजा कर उनकी सेवा की । साथ ही किरण देव ने कहा कि हैप्पी कामधेनु गौशाला कुंरदी में गौमाता की सेवा कार्य लगातार कई वर्षों से कर रही है बहुत ही सेवा व पुनीत कार्य है सभी को साधुवाद व शुभकामनाएं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते गोवर्घन पूजा की बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

नियम विपरीत चल रहे जगदलपुर के चिकित्सा संस्थानों पर कार्रवाई

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क्लीनिक और लैब किए सील, ठोंका मोटा जुर्माना भी

जगदलपुर बस्तर जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सा संस्थानों में अनियमितताओं के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। कलेक्टर हरिस एस. के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक के नेतृत्व में नर्सिंग होम एक्ट 2013 और छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2010 के तहत गठित विशेष निरीक्षण दल ने जगदलपुर शहर के विभिन्न निजी क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक लैबों पर छापेमारी की। इस दौरान कई संस्थानों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद कठोर कार्रवाई की गई।

निरीक्षण दल ने पाया कि कुछ चिकित्सा संस्थान बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे थे, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। निरीक्षण के आधार पर कुम्हारपारा में संचालित डॉ. मोहन राव क्लीनिक में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर क्लीनिक को तत्काल सील कर दिया गया और 50 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंक दिया गया। इसके साथ ही बालाजी डायग्नोस्टिक लैब द्वारा पूर्व में लगाए गए 20 हजार रुपए के जुर्माने का भुगतान न करने के कारण लैब को सील करने की कार्रवाई की गई। लालबाग में संचालित शिव शक्ति मेडिकल स्टोर के साथ संचालित क्लीनिक में छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2013 का पालन न करने पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने कहा, “यह कार्रवाई जिले के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य बस्तर की जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।” उन्होंने कहा कि इस तरह की औचक निरीक्षण और कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। हमारी प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी बिना किसी रियायत के जारी रहेंगी।इस अवसर पर जिला प्रशासन ने बस्तर के नागरिकों से आग्रह किया है कि वे उपचार के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत चिकित्सा संस्थानों का ही चयन करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गैर-पंजीकृत या अनधिकृत संस्थानों में उपचार कराने से स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। नागरिकों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी अनियमितता की सूचना प्रशासन को दें। जगदलपुर में प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को नागरिकों ने सराहा है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह कदम निजी चिकित्सा संस्थानों में मानकों का पालन सुनिश्चित करने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस तरह की निरीक्षण प्रक्रिया को और सघन किया जाएगा। सभी निजी चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पंजीकरण और अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा भविष्य में और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के शहीद जवानों को पुलिस स्मृति दिवस पर दी गई श्रद्धांजलि

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शहीदों के परिजनों का किया गया सम्मान भी

जगदलपुर 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस पर 1 सितम्बर 2024 से 31 अगस्त 2025 तक सम्पूर्ण भारत में सशस्त्र एवं अर्द्धसैनिक बलों के जिन जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं, उन शहीद जवानों को श्रद्धांजली दी जाती है। इस अवधि में कुल 191 जवानों ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। वहीं छत्तीसगढ से 16 जवान शहीद हुए हैं।

बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में नक्सली घटनाओं में एसटीएफ का 1, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल का 1, सीआरपीएफ 2 एवं बीजापुर जिला पुलिस बल के 4 जवानों सहित कुल 8 जवान शहीद हुए हैं। पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने शहीद जवानों की नामों का वाचन किया। वाचन उपरांत नामावली शहीद स्मारक को अर्पित की गई। शहीदों को सलामी देने के बाद शहीदों की याद में 2 मिनट का मौन धारण किया गया। सलामी उपरान्त जनप्रतिनिधियों, अधिकारी, कर्मचरियों एवं शहीद परिवारों द्वारा शहीद स्मारक पर रिथ एवं पुष्प अर्पण कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। सिआरपीएफ बीजापुर सेक्टर के उप महानिरीक्षक बीएस नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, सेनानी 15वीं वाहिनी भारत रक्षा वाहिनी छसबल धनोरा मयंक गुर्जर, कमांडेंट 229 केरिपु ब्रजेश सिंह, कमांडेंट 85 सीआरपीएफ सुनील कुमार राही, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऑप्स अमन कुमार झा, अपर कलेक्टर भूपेंद्र अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीजापुर चंद्रकांत गवर्ना एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीजापुर यूलैंडन यॉर्क शहीद परिवारों से रूबरू हुए।

उन्हे सम्मान स्वरूप श्रीफल एवं शॉल भेंट किए गए। शहीद परिवारों से उनके स्वत्वों के भुगतान के सबंध में जानकारी ली गई एवं विश्वास दिलाया गया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपनी समस्याओं से अवगत कराएं, आपकी समस्याओं के निराकरण हेतु हरसंभव प्रयास किया जाएगा। शहीद परिजनों के बच्चों को छात्रवृति व शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु सबंधित लिपिक को आवेदन पत्र शिक्षा विभाग को भरकर भेजने हेतु निर्देशित किया गया। इस अवसर पर पुलिस विभाग, अर्द्धसैनिक बल, जिला प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बीजापुर जिला अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में निवासरत रहे शहीद जवानों ने जिन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण की थी, उन स्कूलों में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के युवाओं ने शिवानंद आश्रम में मनाई दीपावली

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जगदलपुर बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के युवाओं ने दीपावली के अवसर पर शिवानंद आश्रम में बच्चों के साथ दीपावली मनाई। इस अवसर पर युवाओं ने बच्चों के लिए मिठाई, पटाखे और कपड़े लेकर आए थे।आश्रम के स्वामी जी ने बताया कि बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के युवा हर वर्ष दीपावली के अवसर पर आश्रम आकर बच्चों के साथ दीपावली का त्यौहार मनाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा देश की ताकत है और समाज में ऐसे युवाओं की सक्रियता से ही अच्छे बदलाव आ सकते हैं।स्वामी जी ने आगे बताया कि समाज के युवा विक्रम सिंह ठाकुर और गजेन्द्र सिंह ठाकुर सदैव ही समाजिक कार्य और धार्मिक कार्य में सक्रिय रहते हैं और समय-समय पर सभी प्रकार के सहयोग हेतु उपस्थित भी रहते हैं।

समाज के युवा प्रमुख विक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि समाज के युवा प्रत्येक त्यौहार में और अपने जन्मदिन मनाने भी यहां आते हैं और बच्चों के साथ मिलकर बहुत ही आनंद के साथ जन्मदिन और हर त्यौहार मनाते हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम में बच्चों के साथ खुशियाँ बाँटने के साथ-साथ उन्हें स्वामी जी से ज्ञान और मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है।विक्रम सिंह ठाकुर ने आगे कहा कि स्वामी जी से उन्हें राष्ट्रभक्ति और समाज के प्रति कर्तव्य और दायित्व की प्रेरणा मिलती है, जिससे उन्हें समाजिक कार्य करने में मार्गदर्शन प्राप्त होता है।इस अवसर पर प्रकाश ठाकुर, गजेंद्र ठाकुर, शैलेन्द्र ठाकुर सहित समाज के अन्य सक्रिय युवा उपस्थित रहे।आश्रम के स्वामी जी ने समाज के युवाओं की सक्रियता की प्रशंसा की और कहा कि वे समाज के लिए एक अच्छा उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि युवा समाज के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और समाज में अच्छे बदलाव ला सकते हैं।समाज के युवाओं ने कहा कि वे समाज के लिए काम करना जारी रखेंगे और समाज में अच्छे बदलाव लाने के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वे आश्रम के बच्चों के साथ खुशियाँ बाँटने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे और उन्हें स्वामी जी से ज्ञान और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए हमेशा आते रहेंगे।

गोवर्धन पूजा एवं गौरी-गौरा पर्व : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव

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आलेख : राकेश द्विवेदी

आस्था, लोकगीत और आनंद का संगम

दीपावली के दूसरे दिन, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है।विष्णु पुराण, वराह पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र पूजा का विरोध कर गोवर्धन पर्वत की आराधना करने से इस पर्व की शुरुआत हुई। तभी से यह दिन प्रकृति और गौ पूजन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

छत्तीसगढ़ में गौरी-गौरा विवाह उत्सव की धूम

छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव, चौक-चौराहों में यह दिन विशेष रूप से गौरी-गौरा विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से गोंड़ जनजाति से जुड़ी है, पर अब सभी समाजों में समान उत्साह से मनाई जाती है।दीपावली की संध्या पर महिलाएँ लोकगीत गाते हुए तालाब या नदी से पवित्र मिट्टी लाती हैं। उसी मिट्टी से रात्रि में गौरी (पार्वती) और गौरा (शिव) की प्रतिमाएँ बनाकर चमकीली पन्नियों से सजाई जाती हैं।रात्रि में पीढ़ों पर सजी मूर्तियों को सिर पर रखकर महिलाएँ व पुरुष बाजे-गाजे, नगाड़े और गीतों के साथ गाँव की गलियों से होकर गौरा चौरा तक ले जाते हैं। चौरा को लीप-पोतकर सजाया जाता है।फिर विवाह जैसे रस्में, नेग-चार, और पारंपरिक गौरा गीत गाए जाते हैं। यह लोक-उत्सव पूरी रात गीत, नृत्य और पूजा के साथ चलता है।

विदाई और गोवर्धन पूजा

अगली सुबह, परंपरा अनुसार गौरी-गौरा की विदाई तालाब में विसर्जन के साथ होती है। इसके बाद घर-घर में गोवर्धन पूजा प्रारंभ होती है।गाय के गोबर से शिखरयुक्त गोवर्धन पर्वत बनाकर उसे पुष्पों और वृक्ष-शाखाओं से सजाया जाता है।गायों और पशुधन को नहलाकर, गहनों और मालाओं से सजाकर भगवान श्रीकृष्ण की षोडशोपचार पूजा की जाती है।फिर 56 भोग सहित अनेक व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं और पशुधन को भी खिलाया जाता है।छत्तीसगढ़ में इसे देवारी पर्व के नाम से भी जाना जाता है, जो कृषि, पशुपालन और लोकजीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है।

राऊत समाज की रौनक : नृत्य, गीत और सुहाई

छत्तीसगढ़ का राऊत समाज (यदु वंशज) इस दिन विशेष रूप से उत्सव मनाता है। वे स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं। उनकी पोशाक — मोरपंख युक्त पगड़ी, पैरों में घुंघरू और हाथ में लाठी — पूरी तरह श्रीकृष्ण की शैली को दर्शाती है।दशहरा के बाद शुभ मुहूर्त में राऊत समाज दैहान (गाय-बछड़ों के ठहरने के स्थान) में अखरा बनाकर अपने इष्टदेव की स्थापना करता है।लाठी लेकर नाचते-गाते हुए वे रामचरितमानस के दोहे गाते हैं।राऊत लोग हर घर जाकर गायों को सुहाई (पलाश की जड़ और मोरपंख से बना हार) पहनाते हैं, दोहे गाते हैं और आशीर्वाद देते हैं।इसके बदले में लोग उन्हें अन्न, वस्त्र और दक्षिणा भेंट करते हैं।

गोवर्धन खुंदना और लोक-स्नेह

गाँव के अंत में गोवर्धन खुंदना की रस्म होती है, जिसमें गाय-बैल गोबर से बने गोवर्धन पर्वत के ऊपर से गुज़ारे जाते हैं।इसके बाद सभी लोग उसी गोबर से तिलक लगाकर एक-दूसरे को गले मिलते हैं और शुभकामनाएँ देते हैं।यह पर्व केवल पूजा नहीं, बल्कि ग्राम एकता, पशु प्रेम और लोक संस्कृति का संदेश देता है।*परिवार और समाज का मिलन पर्व*इस दिन गाँव-गाँव में हर्ष और उल्लास का वातावरण रहता है। जो लोग रोज़गार या व्यवसाय के लिए दूर-दराज़ रहते हैं, वे भी अपने परिवार सहित गाँव लौटते हैं ताकि देवारी पर्व को अपने मूल निवास में मिलजुलकर मना सकें।गोवर्धन पूजा और गौरी-गौरा उत्सव छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था, संस्कृति और समाजिक एकता का अनमोल प्रतीक है — जो आधुनिकता के बीच भी अपनी परंपराओं की सुगंध को जीवित रखे हुए है। “गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोकजीवन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।”

शिक्षा मंत्री यादव के आह्वान पर डीईओ बघेल ने स्कूल में मनाया दीपोत्सव

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ज्ञान का मंदिर भी आलोकित उठा दीयों की रौशनी से

अर्जुन झा

जगदलपुर संस्कृत में एक श्लोक है – ‘विद्या ददाति विनयं, विनयाद याति पात्रताम, पात्रा त्वात धनमा न्पोती, धनात, धरमः ततः सुखम।’ इसका अर्थ है विद्या से हमें विनयशीलता प्राप्त होती है और विनम्र व्यक्ति ही योग्यता हासिल करता है। योग्यता और पात्रता के आधार पर ही हम धन प्राप्त कर सकते हैं। धन से हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। सार यही कि विद्या और ज्ञान से ही व्यक्ति सफल, सुखी एवं समृद्ध बन पाता है। दीपावली पर हम सभी अपने घरों पर तो दीये जलाते हैं और माता लक्ष्मी से सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना करते हैं, मगर उस मंदिर को भूल जाते हैं, जो हमें हर तरह से काबिल बनाता है। इस वर्ष की दिवाली से प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने ज्ञान के मंदिर स्कूलों में भी दीये जलाने की अपील की है। इस अपील पर अमल करते हुए बस्तर संभाग में पहली बार बस्तर के जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने स्कूलों में दीये जलाकर ज्ञान की देवी सरस्वती के दरबार को रौशन करने की परंपरा शुरू की है। शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए शिक्षा मंत्री के आह्वान पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री बघेल द्वारा शुरू की गई यह पहल सराहनीय है।

बस्तर जिले में लक्ष्मी पूजा के दिन शिक्षा मंत्री की अपील पर दीपोत्सव कार्यक्रम की सभी ने सराहना की। विशेषकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल के साथ स्कूल में दीये जलाकर बच्चे बेहद खुश थे। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्कूल को देवालय बताते हुए अपील की थी कि इस दीपावली में स्कूल के नाम एक दीया जलाएं। बस्तर के जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने भी शिक्षा मंत्री यादव के आह्वान पर अमल करते हुए संकुल केंद्र गढ़िया के प्राथमिक विद्यालय नेगीरास में एक दिया स्कूल के नाम अर्पित किया। डीईओ बघेल के साथ ब्लॉक समन्वयक पीआर सिन्हा, करकपाल के स्कूल समन्वयक और गढ़िया सीएसी और बच्चों के साथ इस देवालय में लक्ष्मी पूजा के दिन रात्रि प्रहर दीपोत्सव मनाया गया। डीईओ श्री बघेल ने बताया- मैने 1977 से पांचवीं बोर्ड की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी। इसी स्कूल में मिले ज्ञान के दम पर आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने सभी शिक्षकों एवं ग्रामीणों से हर वर्ष दीपावली पर स्कूलों में भी दीये जलाने की अपील की।

महामाया माइंस स्थानीय लोगोंऔर आस पास के ग्रामीणों के लगातार चक्काजाम के चलते उक्त ठेका श्रमिको का ड्यूटी जाना हुआ बंद महाप्रबंधक को दिया ज्ञापन

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दिनांक-16-10-2025 से महामाया माइंस के आस-पास क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा लगातार चक्काजाम कर अपने माँगों के लिए आंदोलन किया जा रहा है, जिस कारण हमारे संगठन छत्तीसगढ़ राज्य खदान श्रमिक संघ एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के ठेका श्रमिक जो मेसर्स एन.सी. नाहर महामाया माइंस में कार्यरत है वे सभी अपने कार्य क्षेत्र में ड्यूटी पर नहीं जा पा रहे है, और उनकी हाजरी भी नहीं लग रही हैऔर अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि उसी महामाया माइंस में कार्यरत नियमित कर्मचारियों की हाजरी प्रतिदिन राजहरा माइंस आफिस में लगाया जा रहा है, उक्त परिस्थितियों में हमारे संगठनों के कार्यरत श्रमिकगण बेरोजगार की श्रेणी में आ गये है

उनके सामनें रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो रही है महामाया माइंस के ग्रामीणों द्वारा किये जा रहे आंदोलन के निर्णय होने तक पूर्व में कार्यरत सभी ठेका श्रमिकों का भी हाजरी नियमित कर्मचारियों की तरह लगाया जाय, एवं वेतन भुगतान करानें की व्यवस्था भी सुनिश्चित किया जाय।इस विषय में छत्तीसगढ़ राज्य खदान श्रमिक संघ एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के तत्वाधान में श्रमिकों ने बी एस पी माइंस ऑफिस चौक में भारी संख्या में आ कर नारे बाजी की तथा धरना प्रदर्शन किया उसके पश्चात महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर इस विषय में चर्चा की इस अवसर पे छत्तीसगढ़ राज्य खदान श्रमिक संघ के महासचिव-अनिल यादव जी, अध्यक्ष राजेन्द्र बेहरा जी, छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ से सोमनाथ जी चंदू लाल,हरिशंकर दुबे,सुरेश साहु, बलवंत राय,अमरीक,सालिक राम,हरिशंकर राव, शेखअहमद ,नसरुद्दीन ,रेखचंद, गांधी साहु,ईशु एवं सभी कार्यरत ठेका श्रमिक उपस्थित थे।

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