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वन्यप्राणियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता: वन मंत्री केदार कश्यप

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हाथियों की मौत रोकने छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का विशेष प्रशिक्षन

जून के पहले हफ्ते जुटेंगे देश के शीर्ष विशेषज्ञ

रायपुर छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों, विशेष रूप से हाथियों और हाथी शावकों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप लगातार गंभीर और संवेदनशील पहल कर रहे हैं। वन मंत्री श्री कश्यप की विशेष चिंता और स्पष्ट मंशा के अनुरूप अब राज्य में वन्यजीवों की असमय मृत्यु रोकने तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए वन विभाग द्वारा एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की जा रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून के प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का विषय “मृत्यु से सीख: एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच के आवश्यक तत्व” रखा गया है। वन मंत्री केदार कश्यप का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यप्राणियों के स्वास्थ्य, उपचार, वैज्ञानिक जांच और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप को भी उतनी ही प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसी सोच के साथ यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शीर्ष विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञ अधिकारियों और डॉक्टरों को हाथियों तथा अन्य वन्यप्राणियों में होने वाली बीमारियों की पहचान, उपचार, पोस्टमार्टम की वैज्ञानिक प्रक्रिया, बिसरा परीक्षण और फॉरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे। वन मंत्री केदार कश्यप चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का वन अमला राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक क्षमता से सुसज्जित हो, ताकि किसी भी वन्यजीव की बीमारी अथवा मृत्यु की स्थिति में त्वरित और सटीक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

हाथी शावकों की मौतों का होगा विश्लेषण

विगत एक वर्ष में रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथी शावकों की हुई मौतों को वन मंत्री केदार कश्यप ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में हुई वन्यजीव मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण रिपोर्ट एवं विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वास्तविक मामलों पर चर्चा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रशिक्षण में राज्य के सभी चिड़ियाघरों, टाइगर रिजर्व, अभयारण्यों में पदस्थ पशु चिकित्सकों सहित हाथी प्रभावित वन मंडलों के डीएफओ, उप-वनमंडलाधिकारी, वन क्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा। वन मंत्री केदार कश्यप की प्राथमिकता है कि मैदानी स्तर पर कार्यरत अमला वैज्ञानिक रूप से इतना सक्षम हो कि वन्यजीवों के स्वास्थ्य संरक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहे।

हो चुका है प्रारंभिक प्रशिक्षण

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर इससे पूर्व 7 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों एवं डॉक्टरों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इसी पहल को और व्यापक एवं व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक जांच प्रणाली और प्रशिक्षित अमले के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हाथियों एवं अन्य वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा का दायित्व भी है।

शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले पर लगी रोक हटाने की मांग

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छग शासकीय शिक्षक फेडरेशन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

मोहला छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू व मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी के जिला सचिव मक्खन साहू के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने अपर कलेक्टर को छत्तीसगढ़ के शिक्षकों व कर्मचारियों के ट्रांसफर पर लगी रोक हटाने की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा।

छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू व जिला सचिव मक्खन साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि छत्तीसगढ़ के शिक्षकों व कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक लगी रहने से प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों का स्थानांतरण नही हो पा रहा है। तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा गंभीर पारिवारिक समस्याओं, माता-पिता की देखरेख, दिव्यांगता व स्वयं या परिवार की गंभीर बीमारियों और पत्नी पति-पत्नी के अलग-अलग जिलों में पदस्थ होने के कारण भारी मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि केबिनेट द्वारा वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को मंजूरी देकर माह जून में सीमित अवधि के लिए तबादले पर से प्रतिबंध हटा दिया जाए। जिला अपर कलेक्टर से शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण हेतु चर्चा व ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर साहू, जिला सचिव मक्खन साहू, दीनदयाल मौहान, वीरेंद्र कुमार ठावरे व जीवन साहू उपस्थित थे।

दीपक बैज की एंट्री से शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव बना हाई प्रोफाइल

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ऐसा फैला दीपक का उजियारा कि चौंधिया गईं हैं दिग्गजों की आंखें

राजमहल की राजनीति को ढहते और मोहरे को पिटते देख दौड़े चले आए कांग्रेस के बड़े नेता

अर्जुन झा-

जगदलपुर जिस शिवनंदनपुर नगर को चार दिन पहले तक छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों के लोग जानते तक नहीं थे, वही शिवनंदनपुर अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की एंट्री के बाद पूरे राज्य और कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली तक में सुर्खियों में आ गया है। जो भाजपा शिवनंदनपुर नगर पंचायत के प्रथम चुनाव को बहुत ही हल्के में ले रही थी, उसके लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती बन गया है। दरअसल रातोंरात सूरजपुर, सरगुजा तक “दीपक” का उजियारा इस कदर फैल गया है कि भाजपा के साथ ही कांग्रेस के भी कई दिग्गजों की आंखें चौंधिया गईं हैं, उनकी बेचैनी बढ़ गई है। राजमहल की राजनीति को ढहते और मोहरे को पिटते देख कांग्रेस के भी अन्य बड़े खिलाड़ी नेता दौड़े दौड़े विश्रामपुर पहुंच गए। विश्रामपुर ने कांग्रेस और भाजपा के आला नेताओं का चैनो- आराम छीन लिया है। तपती गर्मी में एसी के शीतल बयार से निकल कर उन्हें अब विश्रामपुर में डेरा डालना पड़ रहा है। ये है दीपक का करिश्मा। यह दीपक कोई अलादीन का चिराग नहीं, पर उससे कतई कमतर भी नहीं है। यह दीपक है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, जो मुश्किल वक्त में एक आम कार्यकर्ता के साथ भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं। उनकी यही क्रियाशीलता ने समूचे सूरजपुर, सरगुजा का चमकता सितारा बना दिया है।

सरगुजा, सूरजपुर में कांग्रेस शून्य की स्थिति पर जा पहुंची थी। पार्टी की अंदरूनी राजनीति में भले ही तीन दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बाबा और पीसीसी चीफ दीपक बैज अपनी अलग अलग विचारधारा और रणनीति के तहत काम करते हैं और एक दूसरे के परस्पर विरोधी माने जाते हैं। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने पिछले तीन दिनों में हम आपके साथ हैं के उद्देश्य के साथ कार्यकर्ताओं और जनता का दिल जीत लिया है। विश्रामपुर के कांग्रेस नेता पर हुई एफआईआर को लेकर दीपक बैज ने जो कड़े तेवर दिखाए हैं, उससे खासकर युवा उनसे बेहद प्रभावित हो उठे हैं। दिन हो या रात, धूप हो या छांव इसकी परवाह न करते हुए दीपक बैज जिस दमदारी के साथ कार्यकर्ताओं और आमजन के बीच उपस्थिति दर्ज कराते हैं, उनकी इसी शैली ने उन्हें जनप्रिय नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।बिश्रामपुर में अपने शिष्टाचार से लबालब भरे उद्बोधन से उन्होंने सत्ता पक्ष को समझा दिया कि गलत ढंग से किसी को भी फंसा कर कुटिल राजनीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे खाकी हो या भगवा उन्हें उज्ज्वल रह कर ही जनहित में कार्य करना पड़ेगा। जिस सरगुजा में कांग्रेस शून्य की स्थिति में थी आज वहां पार्टी रातों रात अचानक शून्य से शिखर तक जा पहुंची है।

वहां कांग्रेस अब ताल ठोंक कर सरकार से सवाल पूछ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव बाबा ने भी देर ही सही मौके पर पहुंच कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की आमरण अनशन की घोषणा से नगर चुनाव में एक मोड़ ला दिया है। जिस चुनाव को सत्तापक्ष गंभीरता से नहीं ले रहा था, उस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष ने जान फूंक दी है। बस्तर की धरा से धूमकेतु की तरह कांग्रेस की राजनीति में उभरने वाले दीपक बैज अब सरगुजा में भी कार्यकर्ताओं के बीच अपना जोशीला प्रकाश फैलाने में सफल हो गए हैं।पदयात्राओं, आमरण अनशन के जरिए प्रदेश में कांग्रेस को स्थापित करने वाले दीपक बैज अब सरगुजा में भी अपनी उपस्थिति से लोगों में अहसास कराया कि कांग्रेस जन जन के साथ है।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उप मुख्यमंत्री सरगुजा महाराज टीएस सिंहदेव बाबा, छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ दीपक बैज, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत,पूर्व मंत्री प्रेमसाय टेकाम, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह के शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के समर्थन में एकजुट होकर खड़े हो जाने से अब भाजपा चक्रव्यूह में फंस चुकी है।

कांग्रेस को आदिवासी हितों की चिंता नहीं, सिर्फ राजनीतिक भ्रम फैलाने की आदत – केदार कश्यप

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डी-लिस्टिंग पर कांग्रेस का विरोध आदिवासी अधिकारों के खिलाफ, वर्षों तक आदिवासियों का शोषण करने वालों को अब जवाब देना चाहिए

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के डी-लिस्टिंग मामले में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस को न आदिवासियों की चिंता है और न ही उनके अधिकारों की रक्षा से कोई लेना-देना। कांग्रेस ने दशकों तक आदिवासी समाज के नाम पर केवल राजनीति की, उनका शोषण किया और उन्हें विकास से दूर रखा।वन मंत्री कश्यप ने कहा कि आज जब देशभर का जनजातीय समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, तब कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि वह वास्तविक आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ है या उन लोगों के साथ जो आदिवासी सुविधाओं का अनुचित लाभ लेकर मूल वनवासी समाज के हिस्से को कमजोर कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डी-लिस्टिंग का मुद्दा किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि वास्तविक जनजातीय समाज के हित और अधिकारों की रक्षा का विषय है। कांग्रेस इस गंभीर विषय को भी वोट बैंक की राजनीति और भ्रम फैलाने का माध्यम बना रही है। कांग्रेस को यह याद रखना चाहिए कि आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है और वह राजनीतिक पाखंड को अच्छी तरह समझता है।वनमंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में आदिवासी क्षेत्रों में न शिक्षा पहुंची, न स्वास्थ्य सुविधाएं और न ही रोजगार के अवसर। वन अधिकार कानून और पेसा कानून के नाम पर कांग्रेस ने केवल झूठे वादे किए। कांग्रेस के समय आदिवासी इलाकों में भ्रष्टाचार, बिचौलिया तंत्र और शोषण चरम पर था। आज भाजपा सरकार आदिवासी समाज को सम्मान, अधिकार और विकास देने का काम कर रही है तो कांग्रेस को यह रास नहीं आ रहा।वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को भाजपा से सवाल पूछने से पहले यह बताना चाहिए कि इतने वर्षों तक केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहने के बावजूद उसने आदिवासी हितों की रक्षा के लिए कौन सा ठोस कदम उठाया? कांग्रेस ने आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक समझा, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आदिवासी गौरव, संस्कृति और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित जनजाति समाज समागम में उमड़ी भारी जनभागीदारी यह साबित करती है कि देश का आदिवासी समाज डी-लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर गंभीर है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो रहा है। कांग्रेस इस जनभावना का अपमान कर रही है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दीपक बैज और कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज को बांटने और भ्रमित करने की राजनीति बंद करें। आदिवासी समाज अब कांग्रेस के झूठ और बहकावे में आने वाला नहीं है। भाजपा सरकार जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

आमदनी स्थिर, खर्च बेलगाम’: महंगाई के खिलाफ एटक का हल्लाबोल, CM के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन

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बढ़ती महंगाई के विरोध में संयुक्त खदान मजदूर संघ (एटक) ने सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। शाखा अध्यक्ष श्रीनिवासलु के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने मांग की कि खाद्य सामग्री, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, दाल-तेल जैसी जरूरी चीजों के दाम तुरंत नियंत्रित किए जाएं।ज्ञापन में कहा गया कि लगातार बढ़ती महंगाई से मध्यम और गरीब वर्ग का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मजदूर, कर्मचारी, किसान और आम नागरिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। आमदनी वहीं की वहीं है, लेकिन खर्च हर दिन बढ़ रहा है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

26 मई को ‘विरोध दिवस’: पूरे प्रदेश में प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ एटक ने 26 मई को ‘महंगाई विरोध दिवस’ के रूप में मनाते हुए राज्यव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। संघ ने प्रशासन से जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने, PDS सिस्टम मजबूत करने और जनता को राहत देने की मांग की है।

एटक की 7 सूत्री मांगें:

1. आवश्यक वस्तुओं की कीमत पर नियंत्रण लगाया जाए2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए 3. रोजगार बढ़ाएं, ठेका प्रथा बंद हो4. मजदूर-कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाए5. सरकारी क्षेत्र का निजीकरण रोका जाए6. किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य मिले7. सभी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा तय हो

बालोद के व्यापारी की कार से 65 लाख से ज्यादा नकदी जब्त, हाईवे चेकिंग में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक व्यापारी की कार से पुलिस ने करीब 65 लाख रुपए से अधिक की नकदी बरामद की है। रायपुर-जगदलपुर नेशनल हाईवे-30 पर नियमित वाहन चेकिंग के दौरान यह कार्रवाई की गई। मामला पुरुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।जानकारी के अनुसार, केशकाल से बालोद की ओर आ रही एक कार को पुलिस ने ग्राम मरकाटोला के पास रोककर जांच की। तलाशी के दौरान वाहन में रखे दो अलग-अलग झोलों से 500-500 रुपए के नए नोटों की बड़ी खेप मिली। भारी मात्रा में नकदी मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।

पुलिस जांच में कार सवार युवक की पहचान बालोद निवासी व्यापारी अमित जैन के रूप में हुई है। पुरुर थाना प्रभारी जोगेंद्र साहू ने बताया कि वाहन से कुल करीब 65 लाख रुपए नगद बरामद किए गए हैं। रकम की गिनती में पुलिस टीम को लगभग तीन घंटे का समय लगा।पुलिस के मुताबिक, व्यापारी नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या संतोषजनक जानकारी मौके पर प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पूरी रकम को जब्त कर लिया गया। मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आयकर विभाग को भी दे दी गई है।फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग इस बात की जांच में जुटे हैं कि इतनी बड़ी राशि कहां से लाई जा रही थी और इसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

बंदूकों की तड़तड़ाहट से होठों की मुस्कुराहट तक का सफर

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तुंगल इको-पर्यटन केंद्र बना पुनर्वास, रोजगार और सम्मान की नई पहचान

तुंगल नेचर कैफे से बदली 10 नक्सल प्रभावित महिलाओं की तकदीर

तुंगल डेम की खूबसूरती से खिंचे चले आए 10 हजार से ज्यादा सैलानी

-अर्जुन झा-

जगदलपुर नक्सलमुक्त बस्तर से अब ऎसी ऎसी तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं, जो दिल को सुकून देती हैं। बदलते बस्तर की ये तस्वीरें और खबरें बताती हैं कि अब बस्तर राज्य के किसी भी संभाग से तरक्की के मामले में पीछे नहीं रहेगा और देश का सबसे समृद्ध एवं प्रगतिशील आदिवासी संभाग बनकर उभरेगा।ऎसी ही एक बेमिसाल तस्वीर आई है बस्तर संभाग के सुकमा जिले से, जहां नक्सल आतंक के बीच अपनी पहचान खो चुका एक बांध अब फिर से जीवित हो उठा है। यही नहीं, यह बांध अब पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान भी बन गया है।

सुकमा का तुंगल, जो कभी उपेक्षा और वीरानी का प्रतीक था, आज उम्मीद, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल कभी जर्जर हालत में अपनी पहचान खो चुका था, लेकिन जिला प्रशासन और वन विभाग की पहल ने इसकी तस्वीर बदल दी है। प्राकृतिक सौंदर्य से सजे इस इको-पर्यटन केंद्र को नए स्वरूप में विकसित किया गया, जहां अब बड़ी संख्या में पर्यटक प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने पहुंच रहे हैं। ओडिशा के मलकानगिरी तक से पर्यटकों का यहां आना इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। तुंगल डैम में शुरू की गई कयाक, पैडल बोट और बांस राफ्टिंग जैसी गतिविधियों ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोले हैं। तुंगल की सबसे बड़ी पहचान इसके पर्यटन आकर्षण नहीं, बल्कि यहां से जुड़ी वे 10 महिलाएं हैं, जिन्होंने संघर्ष और दर्द से निकलकर आत्मनिर्भरता की नई राह चुनी।

“तुंगल नेचर कैफे” के जरिए आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी इन महिलाओं में कुछ ने कभी नक्सलवाद का रास्ता अपनाया था, जबकि कुछ नक्सली हिंसा की पीड़ा झेल चुकी थीं। कैफे मे चाय, कॉफी, नाश्ता, मैगी, पास्ता और आर्डर पर खाना भी बनाया जाता है।जिला प्रशासन द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन की दिशा बदल दी है। उन्होंने केवल खाना बनाना या कैफे चलाना ही नहीं सीखा, बल्कि आत्मविश्वास के साथ लोगों से संवाद करना और सम्मान के साथ जीवन जीना भी सीखा। कुहराम रामे, मुचाकी सोमे, मडकम पोज्जे, माड़वी बुदरी और कलमू पायके जैसी महिलाएं, जो कभी बंदूक के साये में थीं, आज मुस्कुराकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं। वहीं मडकम रामे, पोडियम सरोज, अनीता मुचाकी, ललिता यादव और पुनेम भरत जैसी महिलाएं, जिन्होंने हिंसा का दर्द झेला, अब अपने परिवार और समाज के लिए उम्मीद की नई मिसाल बन रही हैं। 31 दिसंबर 2025 को शुरू हुए तुंगल इको-पर्यटन केंद्र ने कुछ ही महीनों में सफलता की नई कहानी लिख दी है। 25 मई 2026 तक यहां 10 हजार 369 पर्यटक पहुंच चुके हैं। लेकिन इस केंद्र की असली सफलता इन आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन बदली हुई ज़िंदगियों में है, जिनमें अब डर की जगह आत्मविश्वास, और संघर्ष की जगह सम्मान ने ले ली है। तुंगल आज सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सही अवसर, विश्वास और मार्गदर्शन मिले तो हर जीवन नई शुरुआत कर सकता है।

किसी यातना गृह से कम नहीं है यह छात्रावास

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गर्ल्स पॉलीटेक्नीक कॉलेज के हॉस्टल की व्यवस्थाएं बदतर

दूषित पानी से बीमार पड़ने पर दी जाती हैं एक्सपायर्ड दवाएं

-अर्जुन झा-

जगदलपुर छात्रावास वह जगह है, जहां छात्र छात्राएं आराम और सुख सुविधाओं के बीच रहकर पढ़ाई कर सकें, अपना भविष्य संवार सकें। वहीं बस्तर में कुछ छात्रावास तो यातना गृह में तब्दील हो चुके हैं। इन यातना गृहों में न पीने के लिए स्वच्छ पानी है, न कूलर, पंखे हैं। आलम तो यह कि दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने पर छात्राओं को एक्सपायर्ड दवाएं दी जाती हैं। यानि एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा। ऐसा ही एक यातना गृह जगदलपुर में भी है। बेटियों को उच्च तकनीकी शिक्षा दिलाने के लिए शासन द्वारा जगदलपुर में महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज खोला गया है। यहां अध्ययनरत छात्राओं के लिए छात्रावास की भी व्यवस्था की गई है। शासन छात्राओं को तकनीकी शिक्षा दिलाने हेतु संकल्पित भी है। इसके लिए अच्छे हॉस्टल भी बनाए गए हैं।जगदलपुर के धरमपुरा स्थित महिला पॉलीटेक्नीक छात्रावास में पचासों छात्राएं रह कर अध्ययन करती हैं। इस हॉस्टल में अधीक्षिका की लापरवाही के कारण भीषण गर्मी के इस दौर में पीने, नहाने और कपड़े धोने के पानी के लिए छात्राओं को बुरी तरह परेशान होना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार छात्राएं पीने के पानी से लेकर अपने नित्यकर्म के पानी के लिए घंटों टैंकर का इंतजार करती रहती हैं। छात्राएं बताती हैं कि छात्रावास की पानी टंकी की सफाई कई माह से नहीं की गई है, नतीजतन टंकी से गंदा और बेहद बदबूदार पानी आता है। इस पानी का उपयोग करने से छात्राएं रोगग्रस्त हो रही हैं। कभी कभी हॉस्टल अधीक्षिका जो दवाई देती है वह भी एक्सपायरी होती हैं। भोजन की व्यवस्था भी राम भरोसे है। क्योंकि अधीक्षिका द्वारा प्रतिमाह रसोई खर्च करीब 2 हजार हजार रुपए प्रति छात्रा लिए जाते हैं। बदले में मिलता है स्तरहीन और बेस्वाद भोजन। जल संकट और अन्य दिक्कतों के चलते गर्मी प्रारंभ होते ही दर्जनों छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया है, क्योंकि गर्मी से राहत के लिए हॉस्टल में कूलर तो दूर की बात, पंखे तक नहीं हैं और पानी की तंगी अलग से परेशान किए हुए है। सुशासन सरकार में शिक्षा के साथ उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं पर विभागीय अत्याचार इतना बढ़ गया है कि वे छात्रावास को यातना गृह समझने लगी हैं।

वर्सन

दूर कर रहे हैं कमियां

कुछ दिन पूर्व ही छात्रावास की अव्यवस्थाओं की जानकारी मुझे मिली है। स्वच्छ पानी की व्यवस्था हेतु टंकी की सफाई कराई गई है। वाटर प्यूरीफायर मशीन को ठीक कराया गया है। कॉलेज आदिम जाति कल्याण विभाग से संबंधित नहीं है अतः छात्राओं को मेस चार्ज वहन करना पड़ता है, एक्सपायरी दवाई की जानकारी मुझे अभी मिली है मै दो दिन के भीतर ही अधीक्षिका के साथ बैठक कर व्यवस्था दुरुस्त करवा दूंगा।

शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव का संचालन थाने से करेगी कांग्रेस: दीपक बैज

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सत्ता पक्ष की दलाली बंद करे पुलिस: दीपक बैज

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के विश्रामपुर की शिवनंदनपुर नगर पंचायत के लिए पहली बार हो रहे चुनाव में पुलिस की कार्यप्रणाली ने कांग्रेस को भाजपा सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है। चुनाव के ठीक पहले भाजपा जिला अध्यक्ष के आवेदन पर कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ दुर्भावना पूर्वक बिना जांच के आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किए जाने को लेकर कांग्रेस ने अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज तत्काल शिवनंदनपुर पहुंच गए। वहां उन्होंने थानेदार को जमकर फटकार लगाई।

दीपक बैज ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और टीआई को खुलकर कहा कि हमने भी सरकार चलाई है, आप बिना जांच पड़ताल के आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज कर देते हैं। यह सरारसर अन्याय है। आप एनएसए लगा दीजिए, देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लीजिए हम कांग्रेस के लोग डरने वाले नहीं हैं,. हम वो लोग हैं, जिन्होंने झीरम घाटी में गोलियां खाई हैं, हमारे नेताओं ने शहादत दी है। श्री बैज ने कहा कि कहा भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। आप लोग भाजपा और सरकार की दलाली कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें आती जाती रहती हैं, आपको यहीं रहना है। कल हमारी भी सरकार बनेगी। दीपक बैज में ऐलान कर दिया कि अब नगर पंचायत चुनाव का संचालन कांग्रेस थाना परिसर से ही करेगी। इसके बाद आक्रोशित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज तमाम कांग्रेसजनों के साथ थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गए। दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन पर बिना जांच के सीधे एफआईआर किया जाना भाजपा सरकार के तानाशाही रवैये को दिखाता है।

चुनाव में हार के डर से भाजपा सरकार सत्ता और पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस नेताओं पर फर्जी केस और आर्म्स एक्ट जैसी धाराएं लगाकर डराने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि प्रदेश में अपराधी खुले घूम रहे हैं। यह राजनीतिक प्रतिशोध और दोहरा कानून कांग्रेस किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। भारतीय जनता पार्टी शिवनंदनपुर चुनाव में हार रही है। उनके खिलाफ माहौल बना हुआ है, इसलिए जबरदस्ती हमारे नेताओं पर कार्रवाई कर डर और भय का वातावरण बनाया जा रहा है, ताकि चुनाव को प्रभावित किया जा सके। यहां के थानेदार भारतीय जनता पार्टी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं, जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने मांग की है कि आर्म्स एक्ट की धारा हटाई जाए,कांग्रेस के आवेदन पर भी तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और गलत तरीके से एफआईआर दर्ज करने वाले टीआई को तत्काल निलंबित कर यहां से हटाया जाए।

बैज के कायल हो गए नागरिक

विश्रामपुर थाने के सामने पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृव में कांग्रेसजनों का धरना सतत जारी है। बैज ने ऐलान किया है कि मांग पर अमल न होने पर आज शाम 6 बजे से वे और कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि सरकार फर्जी एफआईआर को तत्काल रद्द करे, आर्म्स एक्ट की धारा हटाए, दोषी थानेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सरगुजा संभाग में पीसीसी चीफ दीपक बैज की राजनीतिक सूझबूझ के वहां के युवा पार्टी कार्यकर्ता कायल हो गए हैं। एक सामान्य कार्यकर्ता के साथ हुए अन्याय की लडाई में खुद प्रदेश कांग्रेस प्रमुख के मौके पर आकर खड़े हो जाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल उच्च स्तर पर पहुंच गया है। दीपक बैज की इस सदशयता और पार्टी एवं पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पण भावना ने सरगुजा संभाग के आम नागरिकों का भी दिल जीत लिया है। लोग कह रहे हैं कि असली सेनापति ऐसा ही होता है।

हिरनमयी मेडिकल स्टोर है ग्रामीणों का जीवनदाता, कार्रवाई का कड़ा विरोध

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मेडिकल स्टोर के पक्ष में सरपंचो ने कलेक्टर को दिया आवेदन

बकावंड विकासखंड बकावंड में सुशासन सरकार में जनसेवा की मिसाल कायम कर रहे डिमरापाल के हिरनमयी मेडिकल स्टोर के खिलाफ झूठी शिकायत के आधार पर की जा रही कार्रवाई का विरोध आसपास के करीब आधा दर्जन पंचायतों के ग्रामीण और पंच सरपंचों ने पुरजोर विरोध किया है। इस संबंध में सरपंचों ने कलेक्टर को आवेदन भी दिया है।

पिछले दिनों ग्राम डिमरापाल में संचालित हिरनमयी मेडिकल स्टोर के संचालक के विरुद्ध स्वास्थय विभाग को कथित शिकायत मिली थी कि मेडिकल स्टोर संचालक बगैर डाक्टर की पर्ची के मरीजों को दवाइयां देता है तथा उसके इलाज से किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है। इस तथाकथित शिकायत की स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच की जा रही है। ग्राम पंचायत डिमरापाल के सरपंच, उप सरपंच एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा मेडकल स्टोर के संचालक के पक्ष में आवेदन दिया गया था। आवेदन में कहा गया था कि उक्त मेडिकल स्टोर के होने से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के लोगों को आपातकालीन स्थिति में आवस्यक जीवन रक्षक दवाइयां प्राप्त होती हैं।

ग्रामीणों के हितों को देखते हुए मेडिकल स्टोर के विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए। इसी कड़ी मे आसपास की डिमरापाल, जैबेल, फरसरा, मरेठा, बड़े जीराखाल समेत करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के पंच, सरपंचों और ग्रामीणों ने कलेक्टर बस्तर को आवेदन देकर जानकारी दी है कि हिरनमयी मेडिकल स्टोर द्वारा इमरजेंसी मे उन्हें मेडिसिन प्राप्त होती है एवं संचालक 24घंटे उपलब्ध रहते हैं और बीमार एवं घायल ग्रामीणों की जान बचाने में सहायक बनते हैं।वे जनसेवा का कार्य करते हैं। अतः मेडिकल स्टोर संचालक के इस पुनीत कार्य को देखते हुए तथा ग्रामीणों के हित मे हिरनमयी मेडिकल स्टोर एवं उसके संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए।

नहीं मिला कोई साक्ष्य

विदित हो कि स्वास्थ्य विभाग को कथित शिकायत प्राप्त होने के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और ड्रग इंस्पेक्टर के नेतृत्व में टीमें गठित कर टीमों द्वारा क्रमशः दिनांक 29 अप्रैल, 1 मई और 5 मई को मेडिकल स्टोर में जांच की गई। मगर जांच में शिकायत के पक्ष में कोई भी साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ, न ही मृतक के परिजनों द्वारा कोई शिकायत की गई है। सरपंचों व ग्रामीणों ने कलेक्टर बस्तर के अलावा अनुविभागिय अधिकारी राजस्व, मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी एवं खंड चिकित्सा अधिकारी को भी आवेदन देकर मेडिकल स्टोर व संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का आग्रह किया है।

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