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जल, ज़मीन, खनिज हमारा और हमारे ही प्रदेश के युवाओं को नौकरी देने में उपेक्षा! डबल इंजन वाली सरकार का युवा विरोधी चेहरा उजागर: अजय बिसाई

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  •  एनएमडीसी भर्ती में छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोकना न्याय संगत नहीं 
  • हैदराबाद से की जा रही भर्ती प्रक्रिया का युकां ने किया पुरजोर विरोध 

जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार पर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़िया हितों की विरोधी होने का आरोप लगाते हुए युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय बिसाई ने कहा है कि हाल ही में एनएमडीसी भर्ती के विज्ञापन से स्पष्ट है कि भाजपा सरकारों की मंशा छत्तीसगढ़िया हित में नहीं है। कुल विज्ञापित 995 पदों में से 745 अर्थात लगभग 75 प्रतिशत पद छत्तीसगढ़ के किरंदुल और बचेली के खदानों के लिए हैं, लेकिन हैदराबाद से शुरू की गई इस भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए कोई प्राथमिकता तय नहीं है। ज़मीन हमारी, खनिज हमारा और हमारे ही प्रदेश के युवाओं को नौकरी देने में उपेक्षा! यह नहीं चलेगा।

जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष बिसाई ने कहा है कि सरकारी उपक्रम एनएमडीसी, बैलाडीला क्षेत्र के लौह अयस्क का दोहन करती है। सर्वाधिक सक्रिय माइंस छत्तीसगढ़ में ही संचालित हैं, एनएमडीसी के कुल मुनाफे का 80 प्रतिशत भाग केवल छत्तीसगढ़ से आता है, फिर भी मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है, जो तर्कसंगत नहीं है। मुख्यालय छत्तीसगढ़ में नहीं होने की वजह से ही कॉरपोरेट टैक्स में राज्य सरकार का हिस्सा, जीएसटी से राज्यांश जैसे अनेकों लाभ तेलंगाना को मिल रहा है। पूर्व में परिस्थितियों अलग थीं। बस्तर में हवाई सेवा, होटल और परिवहन सुविधाओं की कमी की वजह से एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद में बनाया गया था। लेकिन अब छत्तीसगढ़ में वे सभी सुविधाएं विद्यमान है। खदान छत्तीसगढ़ में है तो अब मुख्यालय भी प्रदेश में ही होना चाहिए। युवा नेता अजय बिसाई ने कहा है कि 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में रायपुर में एनएमडीसी मुख्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया था, इस प्रस्ताव की अनुशंसा केंद्र को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। इसके लिए छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय भी तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगातार प्रयास किए। एनएमडीसी की भर्ती परीक्षा नागपुर के स्थान पर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में आयोजित करने की शुरुआत हुई, मुख्यालय स्थानांतरित करने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात और अनेकों पत्राचार किए गए, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की केवल आश्वासन ही देती रही। युकां अध्यक्ष अजय बिसाई ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बैलाडीला क्षेत्र में भांसी, किरंदुल और बचेली में न केवल एनएमडीसी की लौह अयस्क की सभी प्रमुख खदानें हैं, बल्कि अब तो जगदलपुर के पास नगरनार में एनएमडीसी का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र भी स्थापित हो चुका है, वहां उत्पादन भी शुरू हो गया है, लेकिन मुख्यालय अभी भी तेलंगाना में ही स्थित है। हैदराबाद में बैठे अधिकारियों के दिशा निर्देश से छत्तीसगढ़ के पूरे कार्यों का संचालन हो रहा है। डबल इंजन की सरकार का दंभ भरने वाले भाजपा नेताओं, भाजपा के सांसदों और छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए, एनएमडीसी का मुख्यालय छत्तीसगढ़ स्थानांतरित करवाने केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए और भर्ती परीक्षा में छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्राथमिकता का प्रावधान किया जाना चाहिए।

जूनापानी में सामने आए उल्टी दस्त, बुखार के दो नए मरीज, रविवार को भी लगाया गया स्वास्थ्य शिविर

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  • सोमवार को भी गांव में मुस्तैद रहेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम

जगदलपुर बस्तर जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्र चिड़पाल के आश्रित ग्राम जूनापानी में लगातार तीसरे दिन भी रविवार को स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। इस दौरान दो नए मरीज सुखमती मंडावी पति फगनू मंडावी उम्र 40 वर्ष को उल्टी एवं बुखार की शिकायत और भुवनेश्वरी पिता मोसु उम्र 18 वर्ष को बुखार एवं दस्त की दिक्कत के चलते स्वास्थ्य परीक्षण करने सहित रक्त जांच के पश्चात आवश्यक दवाई दी गई और स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान कर सतर्कता बरतने की समझाइश दी गई। सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि विगत 6 जून को जूनापानी के जिन चार मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तोकापाल में भर्ती कराया गया था ।

उन सभी को स्वास्थ्य लाभ होने पर वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया है, वे सभी स्वस्थ हैं। रविवार को ग्राम जूनापानी में स्वास्थ्य टीम द्वारा 12 घरों के 74 व्यक्तियों का सर्वे कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। वर्तमान में गांव में स्थिति सामान्य है और सेक्टर प्रभारी सुभाष राजवाड़े, आरएचओ रविंद्र बघेल और एएनएम पद्मिनी मौर्य द्वारा कल सोमवार को भी जूनापानी में स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बारिश के मद्देनजर जिले के समस्त खंड चिकित्सा अधिकारियों और अन्य सभी मैदानी अमले को लगातार क्षेत्र भ्रमण कर मौसमी बीमारियों की स्थिति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कॉम्बेट चिकित्सा दलों को भी सक्रिय रहने निर्देशित किया गया है।

आरएसएस की भाषा बोलने वाले अरविंद नेताम को स्वीकार नहीं करेंगे आदिवासी: दीपक बैज

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  •  आदिवासियों के मंच से बोलना चाहिए आदिवासी हित की बात
  •  अरविंद नेताम के वक्तव्य से बढ़ी सियासी हलचल 

अर्जुन झा-

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रममें भाग लेने और वहां आदिवासी हित की बात करने को लेकर सियासत शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि अरविंद नेताम अब आरएसएस की भाषा बोलने लगे हैं। आरएसएस की स्वीकार्यता आदिवासी समाज के बीच नहीं है।

उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम बीते 5 जून को आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी मौजूद थे। सम्मेलन में अरविंद नेताम ने आदिवासियों के धर्मांतरण और उनके हितों से जुड़े का मुद्दे उठाए थे। श्री नेताम ने कहा था कि धर्मांतरण रोकने और आदिवासी हित में आरएसएस ही बेहतर काम कर रहा है। उन्होंने आरएसएस की खुलकर तारीफ भी की थी। इसी वक्तव्य ने छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल मचा दी है। राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने अरविंद नेताम के इस वक्तव्य की सराहना करते हुए इसे कांग्रेस को आईना दिखाने वाला वक्तव्य बताया था। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस वक्तव्य को लेकर अरविंद नेताम पर तंज कसा है। दीपक बैज ने कहा है कि आदिवासी समुदाय को आरएएसएस की विचारधारा स्वीकार्य नहीं है, अरविंद नेताम जी वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और बड़े अनुभवी भी हैं। मगर अब वे आरएसएस की भाषा बोलने लगे हैं, जिसकी स्वीकार्यता आदिवासियों के बीच कतई नहीं है।एक समय था जब श्री नेताम आदिवासी हित में काम करते थे अब वे रास्ते से भटक गए हैं, हो सकता है यह उनकी उम्र का तकाजा हो।  बैज ने कहा कि आरएसएस की भाषा और विचारधारा कम से कम छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को तो यह हरगिज मंजूर नहीं है।  नेताम द्वारा आरएसएस की तारीफ करना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर आदिवासी हित की बात वे अपने और हमारे समुदाय के बीच जाकर उठाते तो बात समझ में भी आती। विदित हो कि दीपक बैज स्वयं बस्तर के बड़े आदिवासी नेता माने जाते हैं और कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के बीच उनकी कार्यशैली की तूती बोलती है। जनहित में दीपक बैज द्वारा निकाली गई पदयात्राओं का लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी तारीफ कर चुके हैं। कांग्रेस और राहुल गांधी आरएसएस के प्रखर विरोधी माने जाते हैं।

दगे हुए कारतूस हैं नेताम

दीपक बैज ने कहा है कि अरविंद नेताम दगे हुए कारतूस मात्र हैं। भाजपा और आरएसएस उन्हें कंधे पर बंदूक रखकर बस्तर जनता को धर्म एवं जाति में उलझाए रखकर यहां की खनिज संपदा को बेचना चाहती है। मैंने नगरनार प्लांट, एनएमडीसी, बैलाडीला की लौह अयस्क खदानों, कांकेर बीजापुर की कोरंडम खदानों के निजीकरण के खिलाफ और बस्तर के जल जंगल, जमीन एवं खनिज संपदा की रक्षा के लिए जो आंदोलन किए उससे भाजपा और केदार कश्यप घबरा गए हैं। खदानों के निजीकरण के खिलाफ न तो केदार कश्यप की ओर से और न ही बस्तर के किसी भाजपा नेता की तरफ से आज तक कोई बयान नहीं आया है। अब वे अरविंद नेताम जैसे दगे हुए कारतूस को सामने लाकर जाति धर्म की राजनीति पर उतर आए हैं। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने चुनौती देते हुए कहा कि केदार कश्यप और भाजपा के लोग साबित कर दें कि बस्तर में धर्मान्तरण हो रहा है और खदानों का निजीकरण नहीं हो रहा है, अन्यथा वे राजनीति छोड़ दें। बस्तर को जलाने का प्रयास न करें।

मनरेगा की आड़ में फर्जीवाड़ा

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  • श्रमदान कराकर मनरेगा की राशि हड़पने साजिश
  • मनरेगा अधिकारी को ही काम का नहीं है पता 

-अर्जुन झा-

दल्लीराजहरा ग्राम विकास का माध्यम सरपंच होता है, लेकिन ग्राम विकास के बहाने सरपंच ही अगर एक मद का काम दूसरे मद में कराने लग जाएं तो मामला गंभीर बन जाता है, कुछ ऐसा ही मामला डौंडी ब्लाक के ग्राम पंचायत कांडे से उजागर हुआ है, जहां के सरपंच द्वारा मनरेगा कार्य के करीब सौ से अधिक मजदूरों को गौठान में पौधा लगाने के नाम पर दोहरा कार्य में लगा दिया गया।

जब मीडिया की जानकारी में फर्जीवाड़े का यह मामला पहुंचा तो संबंधित स्थल पर जानकारी ली गई। सरपंच पायला ने बड़ी चतुराई के साथ जवाब दिया कि यह कार्य श्रमदान से किया जा रहा है।श्रमदान सुबह 6 बजे से 9 बजे तक हुआ और मैंने भी स्वयं श्रमदान किया है। लेकिन इसी कार्य में लगे मजदूरों को पूछने पर समस्त मजदूरों ने कहा कि यह कार्य वे सभी मनरेगा अंतर्गत सरपंच पायला के कहने पर कर रहे हैं। बड़ी बात ये है कि सरपंच के कथन की सच्चाई जानने जब मीडिया ने डौंडी मनरेगा अधिकारी नीरज वर्मा से बात की, तो उन्होंने साफ शब्दों में यह कहा कि मनरेगा के नाम से अन्यत्र स्थल में विभाग को बिना सूचना दिए काम कराया जा रहा है तो वह पूरी तरह फर्जी काम है। जिसकी जांच तत्काल कराए जाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि वे अभी दुर्ग में हैं। वे तकनीकी सहायक प्रशांत सोनबोईर को भेजकर मामले की जांच कराएंगे। जांच में मनरेगा की जगह अन्यत्र स्थल पर कार्य कराया जाना पाया गया तो समस्त मजदूर का मजदूरी दिवस वे रोक देंगे। ऐसे में यह कार्य फर्जी कार्य कहलाएगा। इस संदर्भ में जब वन विभाग के अधिकारी जीवन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्राम कांडे में पौधा लगाने बाबत ग्राम सरपंच ने कोई बातचीत नहीं हुई है और न ही पौधों की मांग सरपंच द्वारा की गई है। जबकि सरपंच ने पौधा संरक्षण करने की बात कही बगैर विभाग के परमिशन की कह रही है। मनरेगा की आड़ में सरपंच द्वारा पौधरोपण कराए जाने की बात किसी के गले उतर नहीं रही है। जाहिर सी बात है कि सरपंच की मंशा क्या हो सकती है?कहना यह होगा कि जिस जवाबदेही के साथ ग्रामीण अपने ग्राम का प्रमुख सरपंच को बनाते हैं, वह पद में आने के बाद किस तरह से कार्य को अंजाम देते आ रहे हैं? इस पर निश्चित ही जांच होनी चाहिए।

बिजली पोल गिरने से युवक की मौत

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दल्लीराजहरा – बिजली विभाग गुरूर में कार्यरत ठेंका श्रमिक की कार्य करते समय बिजली पोल गिरने के कारण हादसा होने के कारण गंभीर घटना हुई है। विद्युत विभाग गुरूर में कार्यरत ठेकेदारी में कार्य करने वाले ग्राम मटिया के आदिवासी मजदूर युगल किशोर ओटी पिता छगन लाल ओटी का गुरूर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डांडेसरा में घटिया बिजली खंभा खड़ा करने के दौरान दुर्घटना घटी इस दर्दनाक घटना में युगल किशोर ओटी की घटना स्थल पर ही मौत हो गई है। उक्त घटनाक्रम के बाद विद्युत विभाग में कार्यरत ठेंका मजदूरों ने अपने साथी मजदूर की मौत को लेकर खूब हंगामा किया है। हंगामा के चलते गुरूर थाना में कई नेताओं का हाईवोल्टेज ड्रामा चला। सूत्रों से प्राप्त जानकारी में दुर्घटना के समय मजदूर को कोई भी सेफ्टी प्रदान नहीं किया गया था,जिसके चलते इस दुर्घटना मजदूर की जान चली गई है। इस घटना के बाद बिजली विभाग में कार्यरत ज्यादातर मजदूरों में नाराज़गी देखी जा रही है। हालांकि संबंधित ठेकेदार ने पिड़ित परिवार को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की बात कह कर उक्त मामले में पल्ला झाड़ने की कोशिश लगा हुआ है। पिड़ित मजदूर के परिवार को उचित मुआवजा प्रदान नहीं करने पर मजदूरों ने आंदोलन की चेतावनी दी हैं।

एक पेड़ मां के नाम के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री किरण देव ने किया पौधारोपण

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  • पर्यावरण को बचाना हम सभी का कर्तव्य है – किरण देव
  • महारानी अस्पताल के शासकीय नर्सिंग कॉलेज परिसर एवं प्रताप देव वार्ड में किया गया पौधारोपण

आज भारतीय रेडक्रास सोसायटी के पर्यावरण उपसमिति द्वारा महारानी अस्पताल परिसर के शासकीय नर्सिंग कालेज प्रांगण में एक पेड़ मां के नाम के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने पोधरोपण किया। एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम में शासकीय नर्सिंग कॉलेज में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री किरण देव ने आम के पोंधे का रोपण किया। इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री किरण देव ने कहा कि आज वर्तमान में हम सभी को मिलकर पर्यावरण का संरक्षण करना आवश्यक है। पर्यावरण को संतुलित करने में सभी की सहभागिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। श्री देव ने कहा एक पेड़ मां के नाम में सभी से अपील है कि सभी एक पेड़ अवश्य लगाएं और उस पेड़ का संरक्षण करे । पर्यावरण दिवस पर लगातार पौधारोपण का कार्यक्रम चलाया जाएगा । विश्व आज वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग का दंश झेल रहा है । जिसके लिए हम सभी को पर्यावरण को संतुलित रखना है । जिसके लिए हमें पौधे लगाना आवश्यक है । हमारे जीवन में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। इस दौरान सीएमओएचओ  बसाक, अध्यक्ष विद्युशेखर झा, डॉ प्रदीप पांडे डॉ सरिता थॉमस, यशवर्धन राव, आरेंयद्र आर्य, संपत झा,रतन व्यास रोशन झा, वाय एन कुकड़े , कोटेश्वर राव, श्रीमती अंजू झा, नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य, एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे ।

वही वन विभाग द्वारा शहर का प्रताप देव वार्ड में भी एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री किरण देव के द्वारा पौधारोपण किया गया। ‌ इस कार्यक्रम में वार्ड पार्षद श्रीमती उमा मिश्रा, डीएफओ उत्तम गुप्ता, रेंज ऑफिसर देवेंद्र वर्मा,अवधेश शुक्ला ,किशोर पारेख, आशुतोष पांडे, आरेंद्र आर्य, संपत झा, डॉ प्रदीप पांडे, श्रीपाल जैन, किशोर महावर, शिरीष मिश्रा, एवं वार्ड वासी उपस्थित थे ।

पूर्व मंत्री शंकर सोढ़ी की माताजी फनिता सोढ़ी का निधन

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जगदलपुर पूर्व मंत्री शंकर सोढ़ी की माताजी एवं पूर्व बस्तर सांसद स्व. मानकूराम सोढ़ी की धर्मपत्नी फनिता सोढ़ी का 85 वर्ष की आयु में 7 जून को आकस्मिक निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान अस्पताल वार्ड जगदलपुर से आज 8 जून रविवार को दोपहर 3 बजे मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी। वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद दीपक बैज, विधायक लखेश्वर बघेल, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य आदि ने फनिता देवी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है तथा प्रार्थना की है कि ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों मे स्थान दें और उनके परिवार को दुख की इस विकट घड़ी को दुख सहन करने की असीम शक्ति प्रदान करें।

जूनापानी में उल्टी दस्त का प्रकोप, गांव में स्वास्थ्य विभाग ने डाला डेरा; स्थिति अब पूरी तरह सामान्य

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जगदलपुर बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक अंतर्गत अंतर्गत जूनापानी में उल्टी-दस्त केस मिलने पर शुक्रवार को स्वास्थ्य शिविर का आयोजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेगानार के प्रभारी आरएमए सुभाष राजवाड़े की नेतृत्व में किया गया था। शिविर शनिवार को भी जारी रहा।

चिड़पाल उप स्वास्थ्य केंद्र के आरएचओ रविंद्र बघेल और एएनएम पद्मिनी मौर्य द्वारा जूनापानी के सभी 24 घरों में सर्वे कार्य किया गया और 122 लोगों की जांच की गई, जिसमें कोई भी नया मरीज नहीं पाया गया। शुक्रवार को रेफर किए गए चारों मरीज मासो पिता हूंगा 65 वर्ष, बुधरी पति मासो 64 वर्ष, रिकी पिता संतु 20 वर्ष और पूजा पिता हिड़मो 4 वर्ष का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तोकापाल में किया जा रहा है उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। इन सभी का गहन इलाज जारी है। सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि जूनापानी में सतत निगरानी रखी जा रही है और अब स्थिति सामान्य है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान कर सजगता बरतने की समझाइश दी गई है।बीएमओ दरभा डॉ मंडावी के निर्देश पर रविवार को भी जूनापानी में सर्वे कर स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

नक्सलियों के बहाए खून के धब्बे मिटाकर हरियाली के रंग बिखेर रही है सीआरपीएफ

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  •  सुकमा जिले में सघन वृक्षारोपण अभियान
  • बल के जवान लगा चुके हैं जिले में 25 हजार पेड़

अर्जुन झा-

जगदलपुर जिस धरती को नक्सलियों ने सालों साल तक रक्तरंजित कर रखा था, उस धरती पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स सीआरपीएफ रक्त धब्बे मिटाकर हरियाली की आभा बिखेर रही है। एंटी नक्सल ऑपरेशन में तैनाती के बाद से अब तक सीआरपीएफ जिले के अति नक्सल प्रभावित इलाकों में भी हजारों पेड़ लगा चुकी है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीआरपीएफ की द्वितीय वाहिनी ने वृक्षारोपण अभियान एवं विश्व पर्यावरण दिवस की थीम प्लास्टिक प्रदूषण को हटाने की मुहिम चलाई।द्वितीय वाहिनी छत्तीसगढ़ के अति नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में विगत कई वर्षों से सघन नक्सल विरोधी अभियान में तैनात है। यह फोर्स क्षेत्र की सुरक्षा व मानव सेवा में भी लगातार योगदान दे रही है। बरसात की शुरूआत में ही बड़े पैमाने पर फलदार व छायादार वक्षों का रोपण द्वितीय वाहिनी द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को द्वितीय वाहिनी के कमांडेंट रतिकांत बेहेरा के मार्गदर्शन में मुख्यालय शबरी नगर सुकमा परिसर के चारो तरफ एवं कैंप रामाराम, चिंतागुफा, मिनपा, एवं एफओबी मुर्कराजकोंडा व दुलेर में पौधरोपण कार्यकम आयोजित किया गया। जिसमें वाहिनी के श्पवन कुमार द्वितीय कमान अधिकारीद्वय पवन कुमार, व अनामी शरण एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमा, उप कमांडेंट भास्कर भट्टाचार्य, सहायक कमांडेंट राजीव कुमार और अन्य अधिकारियों व जवानों ने बड़ी संख्या में वृक्षारोपण किया। आम, अमरूद, ऑवला, नीम, कटहल, सीताफल, बरगद, गुलमोहर व अन्य छायादार पौध रोपे गए। साथ ही प्लास्टिक प्रदूषण को हटाने पर कार्य करते हुए बल के कैंपों में प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।एसुकमा की जैव विविधता को बचाने के लिए शबरीनगर सुकमा में प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए शपथ भो ली गई। इस अवसर पर कमान पवन कुमार ने जवानों को वृक्षों की उपयोगिता एवं आवश्यकता के बारे में बताया। कहा कि वृक्ष हैं, जीवन का आधार, इन्हें बचाना हमारा अधिकार और उन्होनें यह भी अवगत कराया कि द्वितीय बटालियन द्वारा मुख्यालय परिसर में इस वर्ष अभी तक 1500 पौधे लगाए जा चुके हैं सुकमा जिले के विभिन्न स्थानों पर अभी तक द्वितीय वाहिनी द्वारा लगभग 25 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। उनकी देखभाल बल के जवान कर रहे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरनाक है प्लास्टिक ऐसा मटेरियल है जो सालों तक नष्ट नहीं होता और धरती को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

न नोटिस दिया, न वजह पूछी, सीधे वाट्सएप पर भेज दिया सस्पेंशन ऑर्डर

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  •  यह प्रशासनिक कार्रवाई है या मानसिक उत्पीड़न?
  •  मामा की मृत्यु के दुख का पहाड़ अलग से गिरा बीईओ मानसिंह भारद्वाज पर
    अर्जुन झा

जगदलपुर न शोकॉज नोटिस भेजा, न चूक की वजह पूछी, सफाई का मौका भी नहीं दिया और एक राजपत्रित अधिकारी को सीधे निलंबित कर दिया गया। सस्पेंशन ऑर्डर अधिकारी के वाट्सएप पर भेजा गया, वह भी ऐसे मौके पर जब अधिकारी अपने निकट परिजन के निधन का दुख झेल रहा है। इस कार्रवाई को प्रशासनिक कार्रवाई कम मानसिक उत्पीड़न कहा जाना बेहतर होगा।
छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा विभाग में जारी शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया न सिर्फ शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है, बल्कि अधिकारियों के लिए बिन बुलाए बला भी साबित हो रही है। इस प्रक्रिया के पीड़ित एक अधिकारी हैं बीईओ मानसिंह भारद्वाज, जो विकासखंड शिक्षा कार्यालय जगदलपुर में पदस्थ हैं। बीईओ मानसिंह भारद्वाज को संभाग आयुक्त के अनुमोदन पर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने महज इसलिए निलंबित कर दिया है, क्योंकि

भारद्वाज ने जिला स्तरीय समिति को स्कूलों और शिक्षकों की जो सूची भेजी थी, उसमें कुछ खामियां रह गई थीं। सूची में एक वरिष्ठ शिक्षक को कनिष्ठ और कनिष्ठ शिक्षक को वरिष्ठ बताया गया था तथा एक स्कूल का ग्रेड ई की जगह टी बताते हुए रिक्त पदों की जानकारी दी गई थी। यह लिपिकीय त्रुटि भी हो सकती है, मगर इतनी छोटी सी चूक के लिए बीईओ मानसिंह भारद्वाज से न स्पष्टीकरण मांगा गया और न शो कॉज नोटिस जारी किया गया। बस इतनी सी भूल के लिए राजपात्रित अधिकारी श्री भारद्वाज को सीधे निलंबित कर दिया गया, वह भी तब जब वे नियमानुसार अवकाश लेकर बाहर गए हुए थे। बताते हैं कि मानसिंह भारद्वाज कुछ दिनों पहले पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने मध्यप्रदेश के सिवनी गए हुए थे। इसी बीच वहां उनके मामा का निधन भी हो गया। दोनों कार्यक्रमों में शामिल होकर भारद्वाज जगदलपुर लौट रहे थे, तभी उन्हें अपने वाट्सएप सोशल मीडिया अकॉउंटपर सस्पेंशन आर्डर मिला। प्रशासनिक अधिकारियों ने मानसिंह भारद्वाज के निलंबन में जो जल्दबाजी दिखाई है, वह भी चर्चा का विषय बन गई है। निकट के परिजन के निधन का दुख झेल रहे बीईओ मानसिंह भारद्वाज को बिना सफाई का मौका दिए निलंबित कर दिए जाने से राजपात्रित अधिकारी संघ के साथ ही शिक्षकों में भी गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

सृजनशील अधिकारी हैं भारद्वाज
जगदलपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज अपनी सृजनशीलता, रचनात्मक गतिविधियों और शिक्षक शिक्षिकाओं के प्रति संवेदनशीलता के लिए सुविख्यात हैं। कलेक्टर हरिस एस, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन और जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल की मंशा के
अनुरूप वे सदैव कार्य करते आए हैं। उनकी रचनात्मकता का सबसे बड़ा नजारा जगदलपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में देखा जा सकता है। उन्होंने अपने स्टॉफ के साथ मिलकर कार्यालय परिसर को तरह तरह के पेड़ों से आच्छादित कर रखा है। कार्यालय साफ सुथरा और हरा भरा नजर आता है। मानसिंह भारद्वाज की इस इको फ़्रेंडली पहल को देखते हुए केंद्र सरकार की संयुक्त सचिव ऋचा शर्मा और तत्कालीन कलेक्टर डॉ. फैयाज़ तंबोली ने दो लाख रुपए का कैश प्राइज देकर सम्मानित किया था। वहीं  भारद्वाज राजपात्रित अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष भी हैं। उनके नेक कार्यों को दरकिनार करते हुए उन्हें सस्पेंड किए जाने से आम नागरिक भी हैरान हैं।

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