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पर्यावरण संरक्षण के लिए बीईओ और एबीईओ की बेहतरीन कोशिश

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पर्यावरण पर छाए संकट के प्रति किया आगाह

विश्व पर्यावरण दिवस पर बीईओ कार्यालय में पर्यावरण संगोष्ठी

जगदलपुर।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकासखंड शिक्षा कार्यालय जगदलपुर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रत्येक संकुल से एक-एक शिक्षक एंबेसडर के रूप में तथा सभी संकुल समन्वयकों एवं कार्यालय के समस्त कर्मचारियों की उपस्थिति रही। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों पर विस्तार से चर्चा की। प्रत्येक संकुल से उपस्थित शिक्षक एंबेसडरों ने सीड बॉल निर्माण का प्रदर्शन कर सभी को प्रेरित किया।

साथ ही प्रत्येक संकुल को कम से कम 500 सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य दिया गया, ताकि आगामी मानसून में इनके माध्यम से अधिक से अधिक पौधारोपण किया जा सके। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने अपने उद्बोधन में प्रकृति के प्रति संवेदनशील एवं उदार दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें प्रेरक की भूमिका निभाते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। इसके पश्चात सीएमसी गोपाल सिंह नाग ने पर्यावरण संरक्षण में पौधों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में बदलती परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन के दौर में पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने शासन द्वारा संचालित “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया तथा विद्यालय परिसरों एवं अन्य ऐसे स्थानों पर पौधारोपण करने का आह्वान किया जहां हरियाली की कमी है। उन्होंने अपने जन्मदिवस के अवसर पर उनके द्वारा लगाए गए लगभग 500 पौधों के संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रेरणादायक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में देवराज खुंटे ने कहा कि विकास की दौड़ में वृक्षों की कटाई एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं उनके संरक्षण के माध्यम से पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

ग्रीन स्कूल पर करें फोकस: दास

अंत में विकासखंड शिक्षा अधिकारी अनिल दास ने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में परिस्थितियां और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रकृति के संरक्षण का महत्व कितना अधिक है। साथ ही उन्होंने भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त की और सभी से जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण का संकल्प लेने का आह्वान किया। दास ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय को “ग्रीन स्कूल” के रूप में विकसित करना हमारा सामूहिक दायित्व है। संगोष्ठी के उपरांत कार्यालय परिसर में शिक्षिकाओं द्वारा वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधकर वृक्षों की रक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। साथ ही कार्यालय परिसर में पौधारोपण कर यह संदेश दिया गया कि भविष्य में भी विभिन्न स्थानों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर समाज के समक्ष प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे।कार्यक्रम में विकासखंड जगदलपुर के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल दास, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता, मंडल संयोजक दीपक मौर्य, गोपाल नाग समस्त संकुल शैक्षिक समन्यवयक,संकुल से आये शिक्षक,कार्यालय के समस्त स्टाफ मौजूद थे।

दल्ली राजहरा, दिनांक 06 जून 2026आदिवासी महासम्मेलन की तैयारी को लेकर विधायक अनिला भेड़िया ने ली कांग्रेसजनों की बैठक

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डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खलारी में आगामी 11 जून 2026 को आयोजित होने वाले आदिवासी महासम्मेलन की तैयारियों को लेकर क्षेत्रीय विधायक अनिला भेड़िया ने दल्ली राजहरा में कांग्रेसजनों की महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में महासम्मेलन को सफल बनाने तथा दल्ली राजहरा क्षेत्र से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक को संबोधित करते हुए विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि यह महासम्मेलन आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर हो रहे हमलों का प्रभाव केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के नागरिकों के अधिकारों और हितों से जुड़ा विषय है। इसलिए आदिवासी महासम्मेलन में दल्ली राजहरा क्षेत्र के सर्व समाज के लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।बैठक में मुख्य रूप से ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रतिराम कोसमा, रवि जायसवाल, काशी राम निषाद, रामजतन भारद्वाज, श्रीनिवास राव, अजय छाजेड़, भूपेंद्र दिल्लीवार, रोशन पटेल, लक्ष्मण प्रसाद शर्मा, विजय जोगदंड, राजकुमार साहू, युवराज साहू, कृष्णा यादव, अनूप बाम्बेस्वर, महिंद्रन “अप्पू”, तिलक मानकर, संजय सोनवानी, कुलदीप नोन्हारे एवं अशोक भुआर्य सहित अनेक कांग्रेसजन उपस्थित रहे।बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने 11 जून को ग्राम खलारी में आयोजित आदिवासी महासम्मेलन को सफल बनाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर पैलेट प्लांट में 200 पौधों का रोपण

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दल्लीराजहरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भिलाई इस्पात संयंत्र की शाखा दल्ली माईन्स स्थित पैलेट प्लांट परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 200 पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान आकर्षक, फूलदार, छायादार एवं सघन प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिल सके।कार्यक्रम में एसजेएसपीएल प्लांट हेड रामशरण अग्रवाल ने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए वृक्षारोपण समय की आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने बताया कि प्लांट परिसर एवं आसपास की खाली भूमि पर आगामी दिनों में भी सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा, ताकि क्षेत्र को अधिक हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।इस अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र दल्ली माईन्स के जीएम सुकान्तो मंडल, फैक्ट्री मैनेजर पी.सी.एस. राव, प्लांट के कर्मचारी, श्रमिक तथा स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए लगाए गए पौधों की देखभाल का भी संकल्प लिया।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल का उदाहरण प्रस्तुत किया।

संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत बकावंड ब्लॉक के सोलह गांवों का होगा सर्वांगीण विकास

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जनजातीय समाज के समग्र विकास पर केंद्रित है यह परियोजना

बकावंड बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप की पहल पर ‘संसदीय संकुल विकास परियोजना’ का क्रियान्वयन शुरू हो गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनजाति समाज के आर्थिक, सामाजिक और सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। इसी तारतम्य में बकावंड ब्लॉक के ग्राम पाथरी कोलावल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में संसदीय संकुल विकास परियोजना के विकास सहयोगी पप्पू चालकी ने ग्रामीणों को परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विशेष परियोजना के तहत बकावंड ब्लॉक की कुल सोलह ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है, जहाँ विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। बैठक के साथ साथ विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय स्कूल परिसर में पौधरोपण का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।इस दौरान ग्राम पंचायत पाथरी कोलावल के सरपंच समदू राम कश्यप, रोहन घोष, पूर्व सरपंच मंगलू राम कश्यप, समस्त पंच, आराम पुजारी, ईश्वर कश्यप, नेहरू नेताम, सुदर्शन कश्यप, जयसिंह, डमरू, जयराम, पासरुराम, पुरसो कश्यप, फूलसिंह नेताम सहित ग्राम पंचायत सचिव, वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

हाथियों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा: केदार कश्यप

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राष्ट्रीय कार्यशाला का वन मंत्री ने किया वर्चुअल शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में बढ़ी हाथियों की संख्या, विचरण क्षेत्र अब दुर्ग संभाग तक

रायपुर छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वन्यजीव विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में प्रदेश में हाथियों की संख्या लगभग 240 थी, जो बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 तक पहुंच गई है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार जनभागीदारी, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हाथियों के संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन के माध्यम से वन्यजीव प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अधिकारियों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराती हैं,

जिससे संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिलती है।कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली तथा देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों के संरक्षण, परीक्षण की प्रक्रिया, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव प्रदेश में हाथियों के संरक्षण, उनकी सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है। वनमंत्री केदार कश्यप ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में और बेहतर कार्य करने के लिये प्रेरित किया।

जनजागरण साइकिल रैली 7 को

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स्वास्थ्य, पर्यावरण और जागरूकता का संदेश

जगदलपुर कलेक्टर बस्तर की पहल एवं खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में 7 जून रविवार को प्रातः 7 बजे विशाल जनजागरण साइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना तथा दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। रैली का शुभारंभ लालबाग मैदान से होगा। इसके पश्चात प्रतिभागी कोतवाली चौक, चांदनी चौक, संजय मार्केट चौक, मां दंतेश्वरी मंदिर, दामोदर पेट्रोल पंप, दलपत सागर, समुंद चौक होटल ग्रैंड शिल्पी, सर्किट हाउस रोड एवं पंच चौक होते हुए पुनः लालबाग मैदान पहुंचेंगे। रैली के दौरान शहरवासियों को स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा साइकिल के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा।

यह साइकिल रैली केवल एक खेल गतिविधि नहीं बल्कि एक सामाजिक जनजागरण अभियान है, जिसके माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम करने तथा पर्यावरण के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के इस दौर में साइकिल का उपयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। रैली में जिले के खिलाड़ी, युवा, विद्यार्थी, विभिन्न सामाजिक संगठन, खेल प्रेमी एवं आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। आयोजन के माध्यम से सड़क सुरक्षा, फिटनेस और जनसहभागिता का संदेश भी दिया जाएगा। जिला खेल अधिकारी सुशांत पॉल ने बताया कि जनजागरण साइकिल रैली का उद्देश्य केवल साइकिल चलाना नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना है। साइकिल एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति को स्वस्थ रखने के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से साइकिल चलाने से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है तथा युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। उन्होंने जिले के सभी युवाओं, खिलाड़ियों, छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस रैली में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही ऐसे अभियान सफल होते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। “स्वस्थ शरीर, स्वच्छ पर्यावरण और जागरूक समाज” के संदेश के साथ आयोजित यह जनजागरण साइकिल रैली शहरवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी तथा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार करेगी।

जिससे अंग्रेज भी खार खाते थे, वह दुर्लभ पेड़ मिला बस्तर के जंगलों में

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आदिवासी लड़ाकों के लिए संजीवनी था यह पेड़

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में एक ऐसा दुर्लभ पेड़ मिला है, जिससे अंग्रेज खार खाते थे और उस प्रजाति के सारे पेड़ों को नष्ट करने पर वे आमादा हो गए थे। इस पेड़ में एक नहीं अनेक खासियतें हैं और इन्हीं खासियतों की वजह से यह पेड़ अंग्रेजों की आंखों में चुभता था। गुस्से में आकर अंग्रेजों ने ऐसे तमाम पेड़ों को नष्ट कर देने का फरमान जारी किया था, लेकिन बस्तर के आदिवासी योद्धा इस प्रजाति के कुछ पौधे चोरी छुपे यहां ले आए थे।

ब्रिटिश शासनकाल में सतपुड़ा के जंगलों में ब्रिटिश सैनिकों से गोंड व कोरकू जनजाति के लड़ाकों की अक्सर भिड़ंत होती रहती थी। लड़ाई में घायल होेने के बावजूद इस जनजाति के लोग जंगली मिली जड़ी बूटियों के उपयोग से अपने घाव को भर कर युद्ध के लिए फिर तैयार हो जाते थे। इससे परेशान ब्रिटिश सैनिकों ने जब स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि दहिमन नाम के पौधे की पत्तियां इन लड़ाकों के लिए संजीवनी है, वे इससे अपनी चोट का उपचार कर लेते हैं।इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने अपनी एक पूरी रेजीमेंट को इस काम पर लगा दिया कि सतपुड़ा के जंगल में जहां -जहां यह पौधा दिखे इसे समूल नष्ट कर दिया जाए। नतीजा यह हुआ कि दहिमन नाम के इस पौधे के अस्तित्व पर संकट आ गया। उसी कालखंड में कुछ जानकार इस पौधे को छिपाकर अन्य जगह पर ले गए और इसका रोपण कर इसे बचाने का प्रयास किया। इसी प्रक्रिया में इस प्रजाति के पौधे बस्तर तक भी आ पहुंचे और आज विशाल पेड़ बनकर खड़े हैं।

ये हैं दहिमन की खासियतें

दहिमन पेड़ के पत्ते रक्त स्त्राव, सर्पदंश व नशा उतारने में असरदार माने जाते हैं। बस्तर के ग्रामीण इस पौधे को दहिमन, दही पलाश व ढेंगन के नाम से जानते पहचानते हैं। वे पत्तों पर रेंगने वाली चीटियों को सूखाकर, भूनकर और चूर्ण बनाकर मिर्गी, माइग्रेन व सुरक्षित प्रसव के लिए उपयोग में लाते हैं। यह जख्म को सुखाने के साथ ही सर्पदंश व नशा उतारने में भी कारगर माना जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस घर में शराब बन रही हो, उस घर की छप्पर पर यदि इसकी डंगाल डाल दी जाए तो शराब नहीं पकती है। इसके अलावा इस पेड़ की छांव में बैठकर शराब पीने से नशा काफूर हो जाता है।

ढूंढा बॉयो साइंटिस्ट ने

जगदलपुर से सटे माचकोट रेंज के जंगल में बॉयोसाइंस के प्रोफेसर डॉ. एमएल नायक, पीजी कॉलेज के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील दत्ता, डॉ. राजेंद्र सिंह व डॉ. पीआरएस नेगी ने ग्रामीणों से इस पौधे के संबंध में सुना था। टीम ने अपने अनुसंधान के दौरान माचकोट के जंगल में दहिमन पौधे को खोज निकाला। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगभग नष्ट होने के कगार पर इस पौधे के संरक्षण व संवर्धन के लिए वे प्रयास कर रहे हैं। प्रोफेसर्स ने बताया कि इस पौधे का बॉटनीकल नाम कार्डिया मेकलियोडी है। यह एंटी वेनम, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल एंटी एलरगेसिक, एंटी ऑक्सीडेंट व एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। दहिमन की पत्तियां, छाल व जड़ का उपयोग कई तरह की बीमारियों में बेहद कारगर है। दहिमन के अनुसंधान में शामिल डॉ. सुशील दत्ता ने बताया कि माचकोट में इसका पाया जाना बेहद आश्चर्यजनक है। ऐसे पौधों को बचाना जरूरी है।

बस्तर आईटीआई में विभिन्न ट्रेडों के लिए ऑनलाइन प्रवेश शुरू, 15 जून तक कर सकते हैं आवेदन

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जगदलपुर युवाओं को तकनीकी शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बस्तर ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 एवं 2027-28 के लिए विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक ट्रेडों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। संस्थान द्वारा जारी सूचना के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

संस्थान प्रबंधन ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष भी संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। अभ्यर्थी घर बैठे अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें छत्तीसगढ़ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट cgiti.admission.nic.in पर जाकर पंजीयन करना होगा। आईटीआई बस्तर में युवाओं की रुचि और उद्योगों की मांग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तकनीकी एवं रोजगारपरक ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं। इन ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा स्वरोजगार के साथ-साथ निजी एवं सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी आईटीआई में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को नई दिशा देते हैं।

संस्थान प्रशासन ने बताया कि आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत जानकारी एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार मेरिट सूची जारी की जाएगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। प्रबंधन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें तथा समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें। अंतिम दिनों में सर्वर पर अधिक दबाव या तकनीकी समस्याओं की संभावना को देखते हुए पहले ही आवेदन करना हितकर रहेगा। बस्तर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों युवाओं के लिए आईटीआई में प्रवेश का यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए संस्थान से प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रोजगार और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए यह प्रवेश प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संस्थान ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से समय सीमा के भीतर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

बीईओ ऑफिस कैंपस में किया गया पौधारोपण

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बकावंड विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर बकावंड में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर यादव तथा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। उपस्थितजनों को पौधों के संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प भी दिलाया गया।

भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने किया कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद तिवारी का स्वागत

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जगदलपुर नगर के इंदिरा गांधी वार्ड से उप चुनाव में विजयी कांग्रेस पार्षद रामकृष्ण तिवारी का भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने किया स्वागत कर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को बड़ा संदेश दिया है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विरोधी पक्ष के नेताओं का भी सम्मान करना, सुख दुख में साथ खड़े हो जाना एक उत्कृष्ट राजनैतिक संकेत माना जाता है।

कुछ ऐसा ही बड़ा संदेश और भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिला स्तर की नेत्री दीप्ति पांडेय ने दिया है।इंदिरा वार्ड के उप चुनाव में विजयी हुए कांग्रेस प्रत्याशी रामकृष्ण तिवारी अचानक दीप्ति पांडेय के घर पहुंचे।. दीप्ति पांडेय ने श्री तिवारी की आरती उतार कर उनका स्वागत किया। हालांकि कुछ मौका परस्त लोग इसकी राजनीतिक रूप से आलोचना कर सकते हैं, मगर सार्वजनिक जीवन में विरोधी का भी सम्मान करने की परंपरा भारतीय जनता पार्टी में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से चली आ रही है। विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी विरोधी दल के सम्मान में कोई कसर बाकी नहीं रखते थे। वे हमेशा विरोधी दलों के नेताओं के भी सुख दुख में साथ खड़े नजर आते थे। यही वजह है कि प्रखर विरोधी नेता भी व्यक्तिगत तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी जी का सम्मान करते थे। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी पार्टी की इसी परंपरा पर चल रहे हैं। हाल के दिनों में हमने देखा कि कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी जब बीमार होकर अस्पताल में भर्ती थीं, तब प्रधानमंत्री श्री मोदी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। जगदलपुर की भाजपा नेत्री दीप्ति पांडेय ने भी पार्टी की इसी परंपरा का अनुसरण किया है।

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