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मेगा आंकलन और चिन्हांकन शिविर का आयोजन संपन्न हुआ

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जगदलपुर समग्र शिक्षा विभाग की ओर से जिला प्रशासन एवं जिला मिशन समन्वयक के सहयोग से विकासखंड स्तरीय दिव्यांग जनों के (विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के) लिए मेगा आंकलन और चिन्हांकन शिविर का आयोजन जिला शिक्षा मिशन समन्वयक ,जिला परियोजना कार्यालय, बीआरसी कार्यालय कुम्हारपारा में लगाया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांचवी वर्षगांठ के अवसर पर इस शिविर का आयोजन किया गया था। जिसमें दिव्यांग छात्रों का प्रमाणीकरण, शल्य चिकित्सा हेतु चिन्हांकन, सहायक उपकरण का वितरण, फिजियोथैरेपी ,स्पीच थेरेपी ,सिकल सेल का परीक्षण एवं चिन्हाकन इस शिविर में किया गया।शिविर में आंखों की जांच के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सरिता थॉमस अपने सहयोगी नेत्र सहायक अधिकारी के. हनुमंत राव और अमृत राव के साथ उपस्थित रही। इसी तरह अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लखन ठाकुर अपने सहयोगी फिजियोथैरेपिस्ट डॉक्टर रुपेश खेडुलकर के साथ उपस्थित रहे।

शिशु रोग विशेषज्ञ आर.के.एस. राज और मनोरोग विभाग से डॉक्टर रुखसार खान और मोनिका साहू उपस्थित रहे. नाक कान गला रोग विशेषज्ञ नवदीप सिंह ने भी अपनी सेवाएं शिविर में दी ।उदित साहू और सिकल सेल जांच के लिए mlt अंशुला मौजूद रही और अपना सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर कुल 17 बच्चों की सिकल सेल की जांच की गई जिसमें आठ बच्चे सिकल सेल पॉजिटिव पाए गए ।समग्र शिक्षा विभाग से राजेंद्र सिंह ठाकुर BRC हीरालाल नागेश, गोपाल बीसाई, और श्रीमती अनीता मिश्रा के द्वारा इस शिविर में पूर्ण सहयोग कर शिविर को सफल बनाया गया। इस अवसर पर महारानी लक्ष्मीबाई क्रमांक 1 की छात्रा कुमारी महिमा मांझी पिता सुशील मांझी (कक्षा ग्यारहवीं) को बैसाखी का वितरण भी किया गया।

मोदीजी आपके जांगला के ककाड़ीपारा के आदिवासी बच्चों के सपने रौंद डाले साय सरकार ने: विक्रम मंडावी

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  •  ककाड़ीपारा के ग्रामीणों का जज्बे को मिला विधायक विक्रम मंडावी का साथ
  • शिक्षा के अधिकार को ख़त्म कर रही है भाजपा सरकार: विक्रम मंडावी

जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत जांगला संकुल की प्राथमिक शाला ककाड़ीपारा को बंद किए जाने पर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कड़ी आपत्ति जताई है और भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

कांग्रेस के मुखर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा है बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक का ग्राम जांगला वही गांव है, जहां 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उसी जांगला संकुल अंतर्गत ककाड़ीपारा गांव में शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण के तुगलकी फैसले ने आदिवासी बच्चों के सपनों पर ताला जड़ने की कोशिश की है। इस फैसले के तहत गांव की प्राथमिक स्कूल को बंद कर दिया गया है और बच्चों को 5 किलोमीटर दूर जंगला स्कूल जाने को कहा गया है।

इस अन्यायपूर्ण आदेश के खिलाफ ककाड़ीपारा के ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रशासन के फैसले को चुनौती देते हुए गांव की रसोइया पार्वती कोवासी को स्कूल की शिक्षिका की जिम्मेदारी सौंपी। पार्वती ही अब स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करती हैं और बच्चों को भोजन खिलाने के साथ-साथ बच्चों को क, ख, ग सिखाती हैं। बच्चों को मध्याह्न भोजन की व्यवस्था ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। तय दिन अनुसार गांव के हर परिवार द्वारा बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की जाती है। गांव के ही युवक हरिराम पोयाम बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सम्हाल रहे हैं।इस संघर्ष में ग्रामीणों को बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी का साथ मिल गया है। श्री मंडावी ने मंगलवार को ही ककाड़ीपारा स्कूल पहुंचकर बच्चों, रसोइया पार्वती और ग्रामीणों से मुलाकात की। विधायक विक्रम मंडावी स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन का राशन, बच्चों को स्कूल ड्रेस, कॉपी, पेन और खेल सामग्री आदि लेकर स्कूल पहुंचे थे। ये चीजें उन्होंने बच्चों को वितरित की। विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों में शिक्षा के प्रति जज़्बे को सलाम किया और हर संभव स्कूल के संचालन में सहयोग करने की बात कही। ग्रामीणों और बच्चों से चर्चा करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा, “शिक्षा देश के हर एक नागरिक का मौलिक अधिकार है, भाजपा सरकार युक्तियुक्तकरण के बहाने आदिवासी बच्चों से उनके संवैधानिक अधिकार छीन रही है।” विधायक विक्रम मंडावी ने ककाड़ीपारा के ग्रामीणों के प्रयासों को प्रेरणादायक बताते हुए शिक्षा को जन आंदोलन बनाने व हर गांव में स्कूल खोलने की मांग भाजपा की डबल इंजन की सरकार के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की है। साथ ही विधायक विक्रम मंडावी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया कि वे भी इन ग़रीब आदिवासी बच्चों के मन की बात सुनें। ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी को बताया कि कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद केवल टालमटोल जवाब मिलता रहा है। प्रशासन द्वारा आने वाले समय में स्कूल को पुनः संचालन नहीं किए जाने की स्थिति को देखते हुए हम ग्रामीणों द्वारा गांव के स्कूल को ग्रामीणों को आपसी सहयोग के द्वारा संचालन करने का फैसला लिया है।

कांग्रेस नेता ने भाजपाइयों को कहा- कुत्ते, गीदड़ और कांग्रेसियों को बताया शेर; मच गया बवाल

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  •  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की अभद्र टिप्पणी
  • आहत भाजपाइयों ने थाने में दर्ज कराई एफआईआर

जगदलपुर सियासत में राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक असहमति और मतभेद स्वभाविक है, मगर नेता अक्सर भाषाई मर्यादा लांघ जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में। यहां एक कांग्रेस नेता के सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। इस कांग्रेस नेता ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपाइयों को कुत्ता, गीदड़ और कांग्रेसियों को शेर बताया है।इसे लेकर भाजपाई खेमा उबल पड़ा है।

बीजापुर कांग्रेस नेता पुरषोत्तम सल्लूर ने अपने सोशल मीडिया फेसबुक अकाउंट में पिछले दिनों एक ऎसी पोस्ट की थी, जिसने भाषाई मर्यादा को तार तार करके रख दिया है। कांग्रेस नेता सल्लूर ने इस पोस्ट में टिप्पणी की है- “भाजपा में सारे कुत्ते गीदड़ को शेर बनाने में लगे हुए हैं और हमारे यहां सभी शेर हैं। बाकी सब समझदार।” यह अभद्र, अमर्यादित और अशोभनीय टिप्पणी भाजपाइयों को नागवार गुजरी है। भाजपा के लोगों ने कहा है कि यह अभद्र व अशोभनीय टिप्पणी कतई स्वीकार योग्य नहीं है, अक्षम्य है। राजनैतिक दलों में वैचारिक लड़ाई स्वभाविक है,साथ ही साथ अपने अपने सरकार में किए गए कार्यों को लेकर तार्किक बहस सहज रूप से किया जाना चाहिए, परंतु कांग्रेस की हमेशा मानसिकता और संस्कार कुंठिता भरा रहता है। इसलिए इस प्रकार की टिप्पणी करने से चूकते नही है, चूंकि वे अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को द्वेष भाव से देखते हैं। कांग्रेस नेता एवं पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुरषोत्तम सल्लूर द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पोस्ट पर भाजपाइयों की गई इस अभद्र, अशोभनीय टिप्पणी के विरोध में भाजपा युवा मोर्चा ने बीजापुर कोतवाली पहुंचकर कांग्रेस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। भाजपा युवा मोर्चा के नेताओं ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। तीन दिवस के भीतर कार्रवाई न होने की स्थिति में बीजापुर कोतवाली का घेराव की चेतावनी दी गई है। इस दौरान युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य फूलचंद गागड़ा, जिला पंचायत सदस्य मैथ्यूज कुजूर, पूर्व युवा मोर्चा महामंत्री गौतम राव, पार्षद अरविंद पुजारी, आईटी सेल सह संयोजक केजी सुधाकर, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मिथलेश नाग, मंडल उपाध्यक्ष संदीप तेलम, मंडल महामंत्री दीपक भट्ट, पार्षद संजय रिवानी, पार्षद हितेश साहनी, पार्षद मुकेश राठी, पार्षद विक्रम दूधी, पुरषोत्तम भंडारी, जितेंद्र तेलम, गनपत धुर्वा उपस्थित रहे।

एसडीएम कौशिक ने ली बीईओ, एबीईओ, बीआरसी और संकुल समन्यवकों की बैठक

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सोमवार को बीआरसी भवन जगदलपुर में कलेक्टर बस्तर के निर्देशानुसार एसडीएम भरत लाल कौशिक ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी और संकुल समन्वयकों की बैठक ली। बैठक में विभिन्न एजेंडो पर दिशा निर्देशदिए गए।

 

बैठक में एसडीएम श्री कौशिक ने एक एक बिंदु पर विस्तार से चर्चा की और उसे अमल में लाने हेतु निर्देश दिए। शालाओं में पुस्तकों के स्कैनिंग की वास्तविक स्थिति और पूर्ण रूप से पुस्तक वितरण की स्थिति पर एक एक स्कूल की जानकारी मांगी। वर्तमान में चल रही मासिक परीक्षा का हर संस्था में निरीक्षण करने हेतु निर्देश दिए गए। उन्होंने जाति प्रमाण पत्र के टारगेट को कैसे पूरा करें, इस हेतु भी विस्तार से अपनी बाते रखी। इसके पश्चात बीईओ अनिल दास ने संयुक्त संचालक बस्तर द्वारा दिए गए निर्देशों का परिपालन करने हेतु एक पेड़ मा के नाम नोटिफिकेशन को अपलोड करवाने और सभी स्कूलों में एक पेड़ मां के नाम लगवाने हेतु कहा। एबीईओ राजेश गुप्ता ने मध्यान्ह भोजन में गुणवत्ता लाने और कक्ष की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने हेतु कहा। श्री गुप्ता ने विनोबा एप की सतत मॉनिटरिंग करने और जानकारी देने हेतु भी निर्देश दिए। बीआरसी राजेंद्र ठाकुर ने संध्याकालीन क्लास की प्रतिदिन फोटोग्राफ़्स भेजने एवं और पाठ्यक्रम विभाजन कर अध्यापन कराने हेतु कहा। बैठक में जगदलपुर विकासखंड के समस्त सीएसी उपस्थित थे। यह जानकारी भूपेश पाणिग्रही ने दी।

इस गांव में लगा पादरी, पास्टर के लिए नो एंट्री का बोर्ड ; बस्तर में धर्मांतरण के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं आदिवासी

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  •  धर्म, संस्कृति, परंपराओं के विनाश से चिंतित हो उठी है आदिम जनजाति
  • गांवों में गठित की जा रही हैं निगरानी समितियां भी

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग में धर्मांतरण गंभीर चिंता का विषय बन गया है। ज्यादातर आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। चंगाई और प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्मांतरण का खेल चल रहा है। आलम यह है कि यहां मूल आदिवासियों की संख्या निरंतर घटती जा रही है, उनकी पूजा पद्धति, आस्था स्थलों, धर्म परंपराओं और संस्कृति का हास होता जा रहा है। वहीं अपनी माटी और संस्कृति से जुड़े आदिवासियों ने अब धर्मांतरण के खिलाफ शंखनाद कर दिया है। गांवों में बैठकें हो रही हैं। धर्मांतरण की गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आमदरफ्त पर नजर रखने के लिए निगरानी समितियां गठित की जा रही हैं। एक गांव में तो पादरी, पास्टर और मिशनरी से जुड़े लोगों के प्रवेश पर पाबंदी तक लगा दी गई है। इसके लिए बाकायदा गांव के बाहर मुख्य मार्ग पर बोर्ड भी लगाया गया है।

बस्तर संभाग में सात में से एक भी जिला ऐसा नहीं है, जो धर्मांतरण से अछूता हो। संभाग के सभी जिलों के गांव, कस्बों, शहरी क्षेत्रों में मिशनरी की गतिविधियां काफी बढ़ गईं हैं। बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों तक इनकी पैठ काफी बढ़ चुकी है। चर्चों की संख्या में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि हो गई है। बस्तर के आदिवासी तो जन्मजात भोलेभाले शांत और सरल स्वभाव के आ जाते हैं। वे जल्द ही हर किसी की बातों और प्रभाव में आ जाते हैं, चमत्कारों चमत्कृत विस्मित हो उठते हैं। उनके इसी भोलेपन का नाजायज फायदा धर्मांतरण कराने वाले लोग उठा रहे हैं। नक्सलियों के गढ़ तक में भी ऐसी गतिविधियां बेखौफ चल रही हैं। ऐसे घटनाक्रमों को लेकर अपनी जमीन, संस्कृति, धर्म, आस्था और परंपराओं से जुड़े कट्टर आदिवासी चिंतित हैं। वे अपने समुदाय का अस्तित्व बचाने लामबंद हो रहे हैं। वे समुदाय के लोगों को समझा बुझा रहे हैं कि अपनी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से मत डिगो, अपनी जड़ों से जुड़े रहो। ऎसी ही जमीनी पहल कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर

ग्राम साल्हे से सामने आई है। साल्हे में धर्मांतरण को लेकर आदिवासी समाज की सर्कल स्तरीय विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में साल्हे, ईरागांव, ठेकाढोड़ा सहित आसपास के ग्रामों के समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चर्चा की गई तथा समाज में इसकी रोकथाम को लेकर रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम, सर्व आदिवासी समाज के जिला उपाध्यक्ष ज्ञानसिंह गौर, जनपद सदस्य प्रमिला उसेंडी, साल्हे सरपंच संतोष पद्दा, ईरागांव सरपंच मनीता नेताम, नरेश कोमरा, पूर्व जनपद सदस्य जीवराखन सलाम, सर्कल अध्यक्ष रामकुमार कोला, सर्कल सचिव पुखराज आंचला, रतन मांडावी, विजय सोरी, हेमंत अमिला, कृष्णा कोसमा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। में बैठक सामाजिक एकता पर बल दिया गया। बैठक में एक स्वर में कहा गया कि क्षेत्र में बाहरी प्रभावों के चलते पारंपरिक संस्कृति और धर्म पर संकट उत्पन्न हो रहा है। समाज प्रमुखों ने लोगों से अपील की कि वे जागरूक रहें और अपनी पहचान व संस्कृति को बनाए रखने में सहयोग करें। बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि किसी स्थान पर धर्मांतरण की गतिविधियां सामने आती हैं, तो उसकी सूचना तत्काल समाजिक संगठन एवं प्रशासन को दी जाए। साथ ही ग्राम स्तरीय निगरानी समितियां भी गठित की जाएं, जो ऎसी गतिविधियों पर नजर रखेंगी। यह बैठक सामाजिक समरसता बनाए रखने तथा आदिवासी समाज की एकजुटता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

कुड़ाल गांव में नो एंट्री का बोर्ड

मिशनरी गतिविधियों को लेकर आदिवासियों और अन्य समुदायों के ग्रामीणों में आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। इसका एक बड़ा उदाहरण कांकेर जिले से ही सामने आया है। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कुड़ाल में लगा एक बोर्ड सबका ध्यान खींच रहा है। इस बोर्ड पर शीर्षक लिखा है- ₹पास्टर और पादरी काप्रवेश सख्त मना है। ” आगे लिखा है- ‘ग्राम कुड़ाल, थाना भानुप्रतापपुर जिला उत्तर बस्तर कांकेर भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है। हमारे गांव में पेशा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 लागू है, जिसके अंतर्गत ग्रामसभा को अपनी परंपरा एवं रूढ़िवादी संस्कृति का संरक्षण करने का अधिकार है। अतः ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर हमारे गांव कुड़ाल में ईसाई धर्म के पास्टर, पादरी एवं बाहर गांव से आने वाले किसी भी धर्मांतरित व्यक्ति के प्रवेश एवं ईसाई धर्म की प्रार्थना प्रयोजन एवं धार्मिक आयोजन पर रोक लगाई जाती है।’ कुल मिलाकर यह दृश्य बताता है कि आदिवासी समुदाय धर्मांतरण से किस कदर आहत है।

कहां हैं नन मामले में शोर मचाने वाले

एक दिन पहले ही दो ननों को ह्यूमन ट्रैफिकिंग और धर्मांतरण के आरोप में दुर्ग स्टेशन पर जीआरपी द्वारा हिरासत में लिए जाने को लेकर संसद में कांग्रेस और यूडीएफ ने जमकर हंगामा मचाया था। मीडिया में बयानबाजी कर भाजपा सरकारों पर हमला बोला गया। ये नन बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी युवतियों को कथित नर्सिंग ट्रेनिंग के लिए बाहर ले जा रही थीं। बजरंग दल की शिकायत पर जीआरपी ने यह कार्रवाई की है। मामले की सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी, मगर दो ननों के लिए आंसू बहाने वाले कांग्रेस और यूडीएफ के तथाकथित सेक्युलर नेताओं को बस्तर के लाखों आदिवासियों के आंसू क्यों नजर नहीं आते? वे धर्मांतरण और उन्हें आदिवासी समुदाय की घटती आबादी नजर क्यों नहीं आती? इन दिनों जेल की हवा खा रहे बस्तर के एक आदिवासी नेता एवं कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री ने तो ताल ठोंकते हुए दावा किया था- “बस्तर में एक भी धर्मांतरण नहीं हुआ है, कोई साबित कर दे तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” तो क्या जमीन से जुड़े बस्तर के आदिवासी झूठ बोल रहे हैं?

छग दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ ने मांगों को लेकर मुलाकात

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आज नयापारा विधायक कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव से छग दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर मुलाकात कर अपनी बात रखी।

छ0ग0 से गौवंश की तस्करी करने वाले गिरोह का खुलासा

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  • 02 आरोपियो को महाराष्ट्र से गिया गया गिरफ्तार
  • 06 आरोपियो को गिर0 कर भेजा गया ज्युडिशियल रिमाण्ड पर

दिनांक 17.06.2025 को मुखबिर से सूचना मिला था कि ग्राम डुडिया के पास रोड किनारे एक मारूति सुजुकी कार रिट्ज क्रमांक एमएच 02 बीआर 4917 मे दो नग गाय को ठुंसकर भरा गया है, जिसे देखने से प्रतित हो रहा है कि किसी अज्ञातz व्यक्ति के द्वारा गौवंश को कत्लखाना ले जाया जा रहा था। सूचना पर थाना अर्जुन्दा पुलिस द्वारा तस्दिक हेतु घटना स्थल डुडिया जाकर देखा तो 02 नग गाय कार के अंदर ठुंसकर,पैरो को बांधकर भरा गया था। वाहन चालक मौके से कार खराब होने के कारण फरार हो गया था। थाना अर्जुन्दा मे अज्ञात अरोपियो के विरूद्व अपराध क्रमांक 98/2025 धारा छ0ग0 कृषिक पशु परि0अधि0 4, 6, 10, पशु क्रुरता निवारण अधिनियम 11 (डी) पंजीबद्व कर विवेचना मे लिया गया। 02 नग गौवंश का स्वास्थय परीक्षण कराकर सुरक्षार्थ महावीर गौशाला बालोद मे दाखिल किया गया।

प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय श्रीमती मोनिका ठाकुर के निर्देशन व पुलिस अनुविभागीय अधीकारी गुण्डरदेही राजेश बागडे के पर्यवेक्षण मे उप निरीक्षक जोगेन्द्र साहू थाना प्रभारी अर्जुन्दा के नेतृत्व मे आरोपी पतासाजी हेतु सायबर एवं थाने की संयुक्त टीम का गठन किया गया। गठित टीम के द्वारा त्रिनयन एप की सहायता से बालोद जिले के सीसीटीव्ही फुटेज को खंगालने से आरोपियो का सुराग मिला जिसका पिछा करते हुए राजनांदगांव, नागपुर मार्ग मे लगे करीब 50 सीसीटीव्ही कैमरा के फुटेज का अवलोकन किया गया, सर्वप्रथम साकोली नागपुर टोल प्लाजा मे आरोपी वाहन को घटना दिनंाक के दिन राजनांदगांव मार्ग मे आने का फुटेज प्राप्त हुआ, साकोली टोल प्लाजा से भी उक्त रिट्ज वाहन के क्रास करने के फुटेज मिले। पुलिस टीम के द्वारा महाराष्ट्र नागपुर मे थाना कलमना पुलिस की मदद से आरोपियो कि पहचान आबिद अंसारी एवं विकास सिक्रेट डिसोजा दोनो निवासी बेलेनगर थाना कलमना जिला नागपुर के रूप मे हुई। तब दोनो आरोपियो के घर देर रात्रि दबिश देकर दोनो को हिरासत मे लेकर पुछताछ किया गया जिन्होने अपराध करना स्वीकार किया तथा घटना मे शामिल अन्य 04 आरोपीगणो के बारे मे जानकारी दिया। अन्य आरोपिगण छ0ग0 के होने से वापस छ0ग0 आकर घटना मे शामिल चारो आरोपी क्रमशः 01. विकास गिरी गोस्वामी निवासी उतई 02.फगुआ धनकर निवास ग्राम नाहंदा थाना गुण्डरदेही 03. हिमंाचल यादव निवासी गुरेदा थाना गुण्डरदेही 04. खेमलाल देवांगन निवासी गुरेदा को हिरासत मे लिया गया पुछताछ मे सभी ने घटना मे शामिल होना स्वीकार किया जिन्हे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड मे भेजा गया।

उक्त कार्यवाही मे उप निरीक्षक जोगेन्द्र साहू थाना प्रभारी अर्जुन्दा, प्र0आर0 छत्रपाल डहरिया, आर0 दमन वर्मा, आर0 पंकज तारम, सायबर सेल बालोद से आर0 विपीन गुप्ता, आर0 भोपसिंग साहू की विशेष भुमिका रही।

नाम आरोपी

1. मो0आबिद अंसारी पिता स्व0 मो0अंसारी उम्र 36 वर्ष

2. विकास सिकरिट डिसुजा पिता स्व0 सिकरिट डिसुजा उम्र 36 वर्ष साकिनान प्लाट न0 41 माजिद के पास बेले नगर कलमना थाना कलमना जिला नागपुर महाराष्ट्र

3. विकास गीरी गोस्वामी पिता रोहित गीरी गोस्वामी उम्र 33 वर्ष साकिन वार्ड न0 उतई थाना उतई जिला दुर्ग छ0ग0

4. हिमांचल यादव पिता प्रभुराम यादव उम्र 28 वर्ष साकिन गुरेदा थाना गुण्डरदेही जिला बालोद छ0ग0

5. खेमलाल देवांगन पिता गयाराम देवांगन उम्र 61 वर्ष साकिन गुरेदा थाना गुण्डरदेही जिला बालोद छ0ग0

6. फगुवा पिता बेनीराम धनकर उम्र 38 वर्ष साकिन नाहंदा थाना गुण्डरदेही जिला बालोद छ0ग0।

जप्ती

01. दो नग गौवंश मवेशी घटना स्थल से

02. चार नग मोबाइल

03. घटना मे प्रयुक्त – मारूती सुजुकी रिट्ज वाहन क्र0 एमएच 02 बीआर 4917

ग्राम ओरमा के शिव मंदिर में हुए तोड़फोड़ के आरोपी को पकड़ने में बालोद पुलिस को मिली सफलता

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  •  ग्राम ओरमा के शिव मंदिर में हुए तोड़फोड़ के आरोपी को पकड़ने में बालोद पुलिस को मिली सफलता।
  • आरोपी द्वारा अपनी व अपनी बहनों की शादी नही होने से ईश्वर को दोषी मानकर किया गया था तोड़फोड़।

मामले की विवरण इस प्रकार है कि प्रार्थी नेमलाल साहू पिता बुध्दलाल साहू उम्र 49 वर्ष ने रिपोर्ट दर्ज कराया कि ग्राम ओरमा वार्ड क्रमंाक 01 में स्थिति तालाब के पास शिवलिंग व नंदी की मूर्ति गांव के सहयोग स्थापित किया गया था जिसमें गांव के लोग पूजा अर्चना करते हैं, दिनांक 23.07.2025 के करीबन रात्रि 11ः00 बजे तक गांव के लोग वहां पर बैठे थे, तब तक मंदिर में स्थित शिवलिंग एवं नंदी का मूर्ति सही था, किन्तु दिनांक 24.07.2025 के प्रातः 05ः00 बजे गांव के लोग पुजा करने गये तो देखे कि मंदिर में तोड़ फोड कर क्षति पहुंचाया गया है कि रिपोर्ट पर थाना बालोद में अपराध क्रमांक 301/2025 धारा 298 बीएनएस कायम कर विवेचना में लिया गया ।

मामला को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक बालोद श्री योेगेश पटले के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद श्रीमती मोनिका ठाकुर के पर्यवेक्षण में पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बालोद देवांश सिंह राठौर एव थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा के नेतृत्व में थाना एवं सायबर सेल बालोद की टीम गठित किया गया था।

सूचना मिलते ही एसडीओपी बालोद, थाना प्रभारी बालोद एवं सायबर के स्टाफ घटना स्थल पहंुचे l घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर ग्रामीणों से जानकारी ली गई एवं ग्रामीणों को आरोपी की गिरफ्तारी जल्द से जल्द गिरफ्तार करने आश्वासन देकर किसी भी प्रकार की जानकारी होने पर पुलिस को अवगत कराने के संबंध में समझाइश दी गई। पुलिस द्वारा लगातार आरोपी की पतासाजी करने के बाद संदेही नरेन्द्र निषाद उर्फ लल्लू पिता रामलाल निषाद उम्र 38 वर्ष निवासी शीतला पारा ग्राम ओरमा थाना व जिला बालोद को पुछताछ किया जो गोल मोल जवाब दे रहा था जिसे बारीकी से पुछताछ करने पर अंततः टूटकर बताया कि दिनांक 23.07.2025 को यह राज मिस्त्री काम कर शराब पीकर अपने ग्राम ओरमा गया, ग्राम ओरमा में भी शराब पीया और घर में खाना खाकर आराम करते सोचने लगा कि मेरी शादी एवं मेरी दो बहनों की शादी नहीं हो रही है इस बात के लिए भगवान दोषी है सोचकर गुस्से में करीबन 12ः00 बजे ग्राम ओरमा के शिव मंदिर में मूर्ति खंडित कर तालाब में फेंक दिया एवं मनोज निषाद के साथ पूर्व में हुए विवाद की गुस्सा से मनोज निषाद के चार नग सायकल को तालाब में फेंक दिया। आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार करने पर विधिवत् गिरफ्तार किया गया है। जिसे न्यायिक रिमांड पर भेजा जाता है।

 

उक्त गठित टीमो द्वारा तत्परता से आरोपी को पकड़ने में थाना बालोद पुलिस एवं सायबर सेल बालोद स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

एबीईओ राजेश गुप्ता ने किया शालाओं का औचक निरीक्षण

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जगदलपुर एबीईओ राजेश गुप्ता द्वारा आज 28 जुलाई को संकुल आसना के छेपडागुड़ा और आसपास के स्कूलों का निरीक्षण किया गया।

प्रशासनिक कसावट लाने और शालाओं में बच्चो की कौशल दक्षता के विकास को ध्यान में रखते हुए सहायक खंड शिक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने यह निरीक्षण किया। छेपडागुड़ा के बच्चों से श्री गुप्ता ने गणित के सवाल पूछे और सही जवाब देने वाले बच्चों को शाबासी दी। एबीईओ श्री गुप्ता द्वारा शिक्षकों की डेली डायरी का भी अवलोकन किया गया। श्री गुप्ता ने राज्य शासन के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करने, पुस्तक विवरण, मासिक परीक्षा की तैयारी, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, और शाला परिसर को साफ सफाई के भी निर्देश दिए।

नक्सलियों के मददगार बनकर काम कर रहे पंचायत सचिव, पहुंचाते हैं राशन

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  •  आत्मसमर्पित नक्सलियों का बड़ा खुलासाः दो सचिवों को पुलिस ने किया तलब

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर संभाग में एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। जो पंचायत सचिव सरकार से मोटी तनख्वाह लेते हैं और सरकारी योजनाओं की रकम से अपने घर भरते हैं, वे नक्सलियोंके बड़े मददगार और हिमायती हैं। ऐसे कुछ देशद्रोही सचिव नक्सलियों के किए रसद का इंतजाम करते हैं। यह चौकाने वाला खुलासाकिसी और ने नहीं बल्कि खुद आत्मसमर्पित नक्सलियों ने किया है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने सुकमा जिले के दो पंचायत सचिवों को तलब किया है।

                पंचायत सचिवों द्वारा नक्सलियों को राशन एवं अन्य सामग्री सप्लाई और नगद रकम का सहयोग किए जाने का चौकाने वाला मामला बस्तर संभाग के सुकमा जिले में सामने आया है। इस खुलासे के बाद सुकमा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसी तारतम्य में कोंटा विकासखंड के दो पंचायत सचिवों को थाने में तलब किया गया था। हालांकि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है। जिन सचिवों के नामों का खुलासा किया गया है उनकी पंचायतों में हुई अनियमिताओं की जांच के आदेश तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ श्री तिवारी द्वारा जारी किया गया था। ऐसे 3 पंचायतों की जांच रिपोर्ट अब तक जिला कार्यालय में जमा नहीं कराई गई है। इनमें से एक पंचायत की जांच में 50 लाख से अधिक का बिल वाउचर ही प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे। यानि सीधे 50 लाख का फर्जीवाड़ा। ज्ञात हो कि 12 जुलाई को सुकमा पुलिस के समक्ष 1 करोड़ 18 लाख के ईनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इन नक्सलियों ने एक पंचायत सचिव द्वारा नक्सलियों की मदद की जाने की जानकारी पुलिस को दी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खुलासे के बाद सुकमा पुलिस मामले की जांच कर सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले से जिन सचिवों के तार जुड़े होने का खुलासा हुआ है उन दो सचिवों को पिछले दिन थाना तलब किया गया था। दोनों सचिवों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। उन्हें हिदायत दी गई है कि जब भी पूछताछ के लिए बुलाया जाए थाना आना होगा।

दागी सचिव की जांच फाइल बंद?

सुकमा जिला पंचायत के कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस एक पंचायत सचिव का नाम इन दिनों पुलिस की सुर्खियों में है उसकी पंचायत सहित अन्य दो पंचायतों के कार्यों की जांच के निर्देश तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ आईएएस अधिकारी श्री तिवारी द्वारा दिए गए थे। इन तीनों पंचायतों की जांच से पूरी भी कर ली गई है, लेकिन जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत सुकमा में अब तक जमा नहीं कराई गई है। ये तीनों पंचायतें कोंटा विकासखंड में स्थित हैं। तीनों पंचायतों की जांच में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा भी हुआ था। इनमें एक पंचायत सचिव द्वारा 50 लाख से अधिक का बिल वाउचर ही प्रस्तुत नहीं किया गया था। उक्त पंचायतों का जांच वर्ष 2018-2019 से 2021-23 तक हुई अनियमिता की कराई गई थी। जांच में पंचायत सचिव कटघेरे में तो हैं ही अब एक दो अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, जो वर्षों से सुकमा में जमे हुए हैं।

जांच अधिकारी सचिव पर मेहरबान

 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी भी उक्त पंचायत सचिव को बचाने में लगे हैं। यही वजह है कि जांच रिपोर्ट जिला पंचायत में जमा नहीं कराई जा रही है। वहीं पंचायत सचिव जांच अधिकारी को मैनेज करने दौड़ लगा रहे हैं। ताजा खुलासे से जाहिर होता है कि पंचायत सचिव ग्राम विकास विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों से मिलने वाले धन की हेराफेरी कर पंचायत सचिव न सिर्फ अपना घर भर रहे हैं, बल्कि उसी धन से नक्सलियों की मदद भी कर रहे हैं। बस्तर संभाग की ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार केंद्र सरकार से मिलने वाली 15वें वित्त की राशि में हो रहा है। राज्य और केंद्र सरकार को इस ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान देना होगा।

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