ग्रामीणों से बकरे लिए, लाखों वसूले पटवारी ने, काम किसी का कराया नहीं

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दर्जनों ग्रामीणों से बेतहाशा रकम वसूल कर गायब हो गया पटवारी

अर्जुन झा

बकावंड छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव बढ़ाने और स्थानीय लोगों में नक्सलियों के प्रति झुकाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह वन विभाग के लोग और पटवारी रहे हैं। इनकी प्रताड़ना और बेजा वसूली से त्रस्त होकर बस्तरवासियों ने माओवादियों का साथ देना शुरू किया था। हालांकि नक्सलियों ने भी बाद में स्थानीय लोगों का शोषण और अपनी तिजोरी भरने का काम शुरू कर दिया। बस्तर से माओवाद भले ही समाप्त हो गया है, लेकिन पटवारियों द्वारा स्थानीय लोगों की प्रताड़ना का दौर बदस्तूर जारी है। ताजा मामला बस्तर जिले की बकावंड तहसील से सामने आया है, जहां एक पटवारी पर ग्रामीणों का जमकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

बकावंड तहसील अंतर्गत कोलावल हल्का के पटवारी पर ग्रामीणों से जमीन संबंधी कार्यों के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि पट्टा, नामांतरण, सीमांकन, सरकारी दस्तावेज और अन्य राजस्व संबंधी कार्य कराने का भरोसा देकर पटवारी ने कई ग्रामीणों से मोटी रकम वसूल ली, लेकिन न तो काम किया और न ही पैसे लौटाए। अब ग्रामीण न्याय की उम्मीद में सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित भूमि संबंधी मामलों को जल्द निपटाने का आश्वासन देकर पटवारी ने लोगों से अलग-अलग रकम ली। किसी ने अपनी मेहनत की कमाई पटवारी को दे दी, किसी ने तो बैल तक बेच दिए ताकि जमीन का पट्टा और अन्य जरूरी दस्तावेज बन सकें, लेकिन पैसा लेने के बाद पटवारी कथित रूप से गायब हो गया और अब उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है। पटवारी के खिलाफ एसडीएम से शिकायत की गई है। पीड़ित ग्रामीण लालाराम का कहना है कि बीते डेढ़ साल पूर्व उसे अपने नजूल भूमि का पट्टा बनवाना था। इसके एवज में पटवारी उपेंद्र बघेल ने 30 हजार रुपये की मांग की थी। इसमें 10 हजार रुपए एडवांस दिए गए। एडवांस देने के बाद पटवारी गांव से गायब हो गया। न कॉल रिसीव करता है और नाही उसकी कोई जानकारी है, हम चाहते हैं कि हमारा पैसा वापस मिले। ग्रामीण मंगतू का कहना है कि उसे अपने जमीन का दस्तावेज बनवाना था, जिसके एवज में उसने पटवारी को एक बकरा दिया और 40 हजार रुपये नगद राशि भी दी, लेकिन कोई कार्य नहीं हुआ और पटवारी गायब है। एक अन्य पीड़ित ग्रामीण बनसिंग का कहना है कि उसे पटवारी से पट्टा बनवाना था, जिसके लिए उसने 15 हज़ार रुपए पटवारी को दिए, लेकिन न ही पट्टा बना और न ही पैसे वापस हुए। पीड़ित ग्रामीण संपत ने बताया कि उसे अपने जमीन का पट्टा बनवाना था, जिसके लिए पटवारी ने 30 हजार रुपए की मांग की थी। पट्टा बनाना जरूरी था। पटवारी को रुपए देने के लिए उसने अपने 1 जोड़ी बैल को बेच दिया। बेचे गए बैल से 45 हजार रुपये मिले थे, जिसमें से 30 हजार रुपए पटवारी को दिए लेकिन पट्टा नहीं बना। पीड़ित ग्रामीण रूपसाय ने बताया कि पट्टे के लिए पटवारी ने किश्तों में उससे कुल 55 हजार रुपये वसूल लिए। फिर भी पट्टा बना ही नहीं और पटवारी पैसे लेकर गायब हो गया है।

जमीन दलाली भी करता है पटवारी

पीड़ित ग्रामीण बुधराम नेताम का कहना है कि करीब 2 वर्ष पूर्व कोलावल हल्का के मैलबेड़ा, रताखंडी, भिरेंडा, कोलावल गांव के लोगों को पट्टे बनवाने, नाम कटवाने, नाम जुड़वाने, संशोधन करवाने , सीमांकन जैसे अन्य राजस्व से जुड़े कार्यों के एवज में पटवारी ने कई लोगों से लाखों रुपये की वसूली किश्तों में की है। यह भी आरोप है जमीन खरीदी बिक्री के मामलों में भी पटवारी खुद डील करता था। एक जमीन को 6 लाख रुपये में बिकवाया और खुद 2 लाख रुपये उसी के हाथो से लिया, लेकिन जमीन के सही दस्तावेज नहीं होने के कारण क्रेता ने जमीन लेने से मना कर दिया। ऐसे में विक्रेता को 6 लाख रुपये वापस करना पड़े। पटवारी द्वारा वसूल लिए गए 2 लाख रुपये किसान को अपनी जेब से भरने पड़े।जिसका गवाह वो खुद अपने आप को बता रहा है। रताखंडी निवासी मंगतू से भी बकरा और 40 हजार रुपये पटवारी ने ले लिए। पूरे गांव के ग्रामीण यह चाहते हैं कि जितने भी ग्रामीण पटवारी से प्रभावित हुए हैं उन्हें उनका पैसा वापस मिले और उच्च अधिकारी पटवारी पर कार्रवाई करें। मामले की एसडीएम बकावंड से शिकायत की गई है। यदि मांगे पूरी नहीं होगी तो आगामी दिनों में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

वर्सन

पटवारी कहीं भी रहे, छोड़ेंगे नहीं

पटवारी उपेंद्र बघेल के खिलाफ शिकायत मिली है। जांच की जाएगी और सभी तथ्यों को सामने लाकर उचित कार्रवाई की जाएगी। चाहे संबंधित पटवारी कहीं भी पदस्थ रहे, उसी गांव में जाकर लोगों से बयान भी लिया जाएगा।

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