मूली के छात्रावास के निर्माण कार्य पर सवाल
अर्जुन झा
बकावंड आदिम जाति विकास विभाग के जरिए सरकार जनजातीय बच्चों की शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए खर्च करती है, मगर जमीनी हकीकत कुछ और किस्सा बयां कर रही है। लाखों रुपए फूंक दिए गए, फिर भी छात्रावास भवन की छत से पानी टपक रहा है, बच्चे बीमार हैं, मगर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। ये हकीकत विकासखंड बकावंड के ग्राम मूली स्थित 59 सीटर बालक छात्रावास की है।
मूली गांव के छात्रावास में लगभग 17.50 लाख रुपयों की लागत से कराए गए निर्माण एवं मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बच्चों की शिकायत के बाद हमारी टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर हालात देखे, तो वहां की हालत बड़ी दयनीय नजर आई। भवन में लगाई गई टाइल्स कई जगह से उखड़ी हुई मिलीं, जबकि छत से पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई। निरीक्षण के दौरान छात्रावास अधीक्षक नीलाराम कश्यप से व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई तथा बच्चों से सीधे चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनी गईं। निरीक्षण के समय कुछ बच्चे बीमार भी मिले, जिनके समुचित उपचार की व्यवस्था नहीं थी।बच्चों के अनुसार हाल ही में छात्रावास में टीन शेड, टाइल्स, टॉयलेट, बाथरूम, रंगाई-पोताई सहित विभिन्न मरम्मत एवं निर्माण कार्य कराए गए थे। इसके बावजूद कुछ ही समय में निर्माण कार्य खराब होने लगा है, जिससे कार्य की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।मामले की शिकायत आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त गणेश सोरी से करते हुए निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, बिल-वाउचर एवं माप पुस्तिका की जांच, संबंधित कार्यों के भुगतान पर रोक तथा अनियमितता पाए जाने पर ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। सहायक आयुक्त ने शिकायत पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो बच्चों के हित में आगे भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
वर्सन
होगी जांच करेंगे कार्रवाई
शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए व्यक्तियों और विभागीय कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी कराई जाएगी।



