एक व्यापरी के बहिष्कार का ऐलान
अर्जुन झा
दल्ली राजहरा नगर के दो प्रतिष्ठित व्यापारी कभी गहरे दोस्त हुआ करते थे, आज वे एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन बैठे हैं। आलम यह है कि इनमे से एक व्यापारी का हुक्का पानी तक बंद करने का ऐलान कर दिया गया है। इस अजीब जंग की शुरुआत आपसी दुश्मनी से हुई है और अब इसे व्यापारिक तथा सामाजिक रूप देने की कोशिशें की जा रही हैं। लोगों को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार राजहरा व्यापारी संघ अध्यक्ष गोविंद वाधवानी और स्टील सिटी होटल के संचालक की मित्रता संगठन में जग जाहिर थी, किंतु स्वजातीय व्यापारी के किसी जमीन मामले को लेकर अध्यक्ष इस कदर अपने व्यापारी मित्र प्रवीण जैन से व्यथित हुए कि उन्होंने संघ के भीतर ही अन्य व्यापारी साथियों की अनदेखी करते हुए होटल स्टील सिटी में नहीं जाने कई समाज से अपील की है। जिसमें उनके ही स्वजातीय समाज ने पत्र लिख कर इस प्रतिष्ठान में अपने समाज को नहीं जाने का फतवा जारी कर दिया है। वहीं शहर के एक और समाज के कुछ लोगों द्वारा भी इसी तरह की हरकत करने की बात सामने आ रही है। एक कहावत है कि समाज लोगों के बीच भगवान का रूप होता है किंतु व्यापारी संघ जिस प्रकार से अपने अपने हितों को देख कर टकराव की मुद्रा में आमने सामने हैं उससे शहर के आम आदमी और छोटे व्यापारी परेशान है। अब खबर आई है कि उक्त होटल के संचालक को आवश्यकता की वस्तुएं पहुंचाने वाले छोटे और फुटकर व्यापारियों को समान देने से रोकने और नहीं मानने पर सार्वजनिक रूप से अर्थदंड लगाने की बात कही जा रही है शहर के लोगों ने कहा कि पहली बार ऐसे घोषित रूप से एक व्यापारी दूसरे व्यापारी को निपटाने उसका हुक्का पानी बंद करके उसके सामाजिक बहिष्कार की बात कह रहा है। आज शहर का व्यापारिक समाज दो नहीं बल्कि कई गुटों में बंट कर अपनी व्यापारिक संभावनाओं पर खुद विराम लगा रहा है।


आश्चर्य की बात तो यह है कि शहर का प्रबुद्ध वर्ग दोनों के बीच शांति स्थापित करना छोड़ यह देख रहा है उसकी लड़ाई में हमारा क्या फायदा या नुकसान है। उजड़ते शहर में कोई व्यापारी अपनी करोड़ों की पूंजी लगाकर अपना रोजगार लगाता है तो शहर के दर्जनों लोगों को रोजगार भी देता है जिससे उनके परिवार अपना जीवनयापन करते हैं। अब इन दो व्यापारियों की फतवेबाजी के बीच शहर के छोटे छोटे एक दूसरे के समर्थक व्यापारियों के बीच ऐसी कटुता आई है कि वो एक दूसरे को निपटने और निपटा lने की भावना से ग्रसित हो गए हैं। शहर के ही कुछ समाजसेवियों ने कहा कि शहर के राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियन को सामने आकर इनके बीच की आपसी प्रतिद्वंदिता को खत्म करनी चाहिए, वरना दल्ली राजहरा की बची खुची साख भी मिट्टी में मिल जाएगी। व्यापारी आपसी दुश्मनी भूल कर काम करेंगे, तो इसका लाभ समाज के हर तबके को मिलेगा। वरना कटुता बनी रही, तो आगे चलकर यह जातीय और सामाजिक संघर्ष की वजह भी बन सकती है।





