नारायणपुर शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय नारायणपुर के ग्रंथालय विभाग द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत प्रथम सेमेस्टर में प्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए मंगलवार को ग्रंथालय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रंथालय की उपयोगिता, नियमों एवं उपलब्ध संसाधनों की जानकारी प्रदान करना था।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.आर. कुंजाम ने विद्यार्थियों से पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बनाने और महाविद्यालय के ग्रंथालय का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें न केवल मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक होती हैं, बल्कि जीवन की चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने तथा उनसे सीख लेकर सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा भी देती हैं।ग्रंथपाल संजय कुमार पटेल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि ग्रंथालय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रंथालय एवं पुस्तकों के नियमित उपयोग के लिए प्रेरित करना तथा उन्हें ग्रंथालय के सामान्य नियमों और व्यवस्थाओं से परिचित कराना है। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्रंथालय में उपलब्ध पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं, प्रतियोगी परीक्षा संबंधी पुस्तकों, उपन्यासों, प्रेरणादायक साहित्य तथा हिंदी एवं अंग्रेजी समाचार पत्रों सहित विभिन्न अध्ययन संसाधनों की जानकारी दी।श्री पटेल ने पुस्तकालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के कथन का उल्लेख किया कि “एक बात जो आपको अच्छे से पता होनी चाहिए, वह है ग्रंथालय का पता।” उन्होंने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी अपनी आवश्यकता की सभी पुस्तकें और पत्रिकाएं खरीदने में सक्षम नहीं होते, ऐसे में ग्रंथालय उनके लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र साबित होता है, जहां आवश्यक अध्ययन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध रहती है।कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक आर.के. यादव, डॉ. सुमित श्रीवास्तव, डॉ. विजय लक्ष्मी गौर, संदीप पटेल, विकास चंद्र विशाल, संतोष राव, बुक लिफ्टर मेष राम ठाकुर, तकनीकी सहायक रजनू मंडावी सहित प्रथम सेमेस्टर के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



