जिला अस्पताल में दूसरी मौत से हड़कंपअस्पताल से लापता मरीज की छत पर मिली लाश, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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संवाददाता सुनील कथूरिया

नारायणपुर जिला अस्पताल नारायणपुर में भर्ती मरीज की छत से गिरकर हुई मौत के मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि सोमवार सुबह अस्पताल परिसर से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आ गई। अस्पताल से लापता बताए जा रहे दूसरे मरीज की लाश भी अस्पताल की छत पर मिलने से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। लगातार दो दिनों में अस्पताल से जुड़े दो मौतों के मामलों ने जिला अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार, अस्पताल से लापता मरीज की पहचान दीनबंधु तिग्गा (निवासी बेनूर) के रूप में हुई है। सोमवार सुबह अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने नियमित सफाई कार्य के दौरान छत पर पानी की टंकियों के पीछे एक शव पड़ा देखा। सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन और पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में शव की पहचान दीनबंधु तिग्गा के रूप में की गई।गौरतलब है कि रविवार को अस्पताल में भर्ती मरीज गऊराम गांवर की अस्पताल की छत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उसी दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि उसके बगल के बेड पर भर्ती एक अन्य मरीज भी अस्पताल से गायब है, जबकि उसका सामान वार्ड में ही रखा हुआ था। अब उसी मरीज का शव अस्पताल की छत पर मिलने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल में भर्ती दो मरीज वार्ड से निकलकर छत तक कैसे पहुंचे? यदि छत तक पहुंच संभव थी तो वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? अस्पताल प्रशासन को मरीजों की अनुपस्थिति की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली? ऐसे कई सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।दो मरीजों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों से शहर में चिंता और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था की ऐसी स्थिति बेहद गंभीर है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है। दीनबंधु तिग्गा के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों मरीज छत तक कैसे पहुंचे, उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और कहीं दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध तो नहीं है।अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस किन-किन एंगल से मामले की जांच करती है और जिला अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी तथा संभावित लापरवाही को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

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