दल्ली राजहरा। गणेशोत्सव के समापन के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन और विभिन्न समितियों द्वारा आयोजित भंडारे एवं अन्य कार्यक्रमों को लेकर हिंदू सेना संगठन ने धार्मिक परंपराओं और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। हिंदू सेना ने उन सभी गणेश समितियों का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पितृ पक्ष प्रारंभ होने से पहले गणेश प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया। संगठन का कहना है कि गणेशोत्सव और पितृ पक्ष दोनों की अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं हैं, इसलिए आयोजकों को तिथि, समय और कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।संगठन संरक्षक श्रीमती आशा सिंह ने कहा कि गणेशोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन धार्मिक परंपरा और निर्धारित अवधि के अनुरूप श्रद्धापूर्वक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संगठनों और ब्राह्मण समाज छत्तीसगढ़ द्वारा भी समय-समय पर गणेश विसर्जन समय पर किए जाने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। यदि किसी समिति को झांकी, सांस्कृतिक कार्यक्रम अथवा शोभायात्रा आयोजित करनी है तो उसका स्वरूप और समय अलग निर्धारित किया जा सकता है, ताकि धार्मिक अनुष्ठान और सार्वजनिक मनोरंजन के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे।हिंदू सेना जिला अध्यक्ष श्रीमती नंदा पसीने ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण, श्रद्धा और तर्पण से जुड़ा महत्वपूर्ण समय माना जाता है। ऐसे में इस अवधि में गणेशोत्सव से संबंधित भोग-भंडारे अथवा अन्य कार्यक्रम आयोजित करने से पहले स्थानीय धार्मिक परंपराओं और विद्वानों की राय पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन किसी की आस्था या भावना को ठेस पहुंचाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक आयोजनों में परंपरा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करता है। उन्होंने समय पर गणेश विसर्जन करने वाली समितियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।हिंदू सेना मातृशक्ति शहर अध्यक्ष श्रीमती संगीता रजक ने कहा कि गणेश विसर्जन के दौरान डीजे और संगीत आयोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन विसर्जन का मूल उद्देश्य भगवान गणेश को श्रद्धापूर्वक विदाई देना है। उन्होंने कहा कि विसर्जन जुलूस में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और परिवार भी शामिल होते हैं, इसलिए आयोजकों को सार्वजनिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश श्रद्धालु पूरी आस्था और अनुशासन के साथ विसर्जन में शामिल होते हैं, लेकिन यदि कुछ लोग नशे की स्थिति में हुड़दंग, अशोभनीय नृत्य या अनुचित व्यवहार करते हैं तो आयोजक समितियों को ऐसे मामलों पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए।हिंदू सेना मातृशक्ति महामंत्री श्रीमती पुष्पा शांडिल्य ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की भव्यता केवल बड़े डीजे, अधिक भीड़, आतिशबाजी या देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और अनुशासन से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति और परंपराओं की बात करने वाले संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने आयोजनों में भी इन मूल्यों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। गणेशोत्सव समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बने, इसके लिए सभी समितियों को आयोजन के स्वरूप और उसके सामाजिक प्रभाव पर आत्ममंथन करना चाहिए।हिंदू सेना ने गणेश समितियों से अपील की कि आगामी आयोजनों में धार्मिक परंपराओं, प्रशासनिक नियमों, ध्वनि मर्यादा, महिलाओं एवं परिवारों की गरिमा तथा सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखा जाए। संगठन ने कहा कि भगवान गणेश के प्रति सच्ची श्रद्धा यही है कि उनकी विदाई भी आस्था, शांति और सम्मान के साथ की जाए।






