प्रार्थना सभा और चर्च के लिए भी जमीन नहीं
धर्मांतरण के खिलाफ पुनपल्ली की ग्रामसभा ने लिए कड़े फैसले
अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर के सुदूर एक कोने से आई यह खबर कोई आम खबर नहीं है, बल्कि बाहरी धार्मिक आक्रमण के चलते बस्तर की आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और पूजा पद्धति पर हो रहे हमले को रोकने और आदिम संस्कृति, पूजा पद्धति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए ग्रामीणों द्वारा स्वस्फूर्त होकर उठाए गए कड़े कदम की बड़ी बानगी है। इस गांव के ग्रामीणों ने अब धर्मांतरित हो चुके लोगों और धर्मांतरण गतिविधियां चलाने वालों को गांव की एक इंच भी जमीन नहीं देने का बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।

बस्तर संभाग के सुकमा जिला अंतर्गत अति नक्सल प्रभावित रही दोरनापाल तहसील की ग्राम पंचायत पुनपल्ली में गांधी जयंती पर आयोजित विशेष ग्रामसभा में ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से कुछ ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जो धर्मांतरण के कुचक्र में बुरी तरह फंस चुके पूरे बस्तर संभाग समेत समूचे छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों के लिए नजीर बन गए हैं। कोंटा जनपद की ग्राम पंचायत पुनपल्ली में विशेष ग्रामसभा आयोजित कर ग्राम की पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हित तथा स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। ग्रामसभा में लिए गए निर्णयों को सार्वजनिक करने के लिए ग्राम पंचायत पुनपल्ली में विशेष ग्रामसभा का सूचना पटल भी लगाया गया है। ग्रामसभा में निर्णय क्रमांक 6 को बड़ा अहम माना जा रहा है।निर्णय क्रमांक 6 में ग्रामसभा द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 का उल्लेख करते हुए अनुसूचित क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों एवं भूमि से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी दी गई है।ग्रामसभा के प्रस्ताव में कहा गया है कि ईसाई एवं धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने, चर्च के लिए, प्रार्थना सभा एवं चंगाई सभा के लिए ग्राम की भूमि उपलब्ध नहीं कराने तथा ईसाई एवं धर्मांतरित व्यक्तियों को ग्रामसभा की एक इंच भी जमीन नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया गया है। ग्रामसभा के निर्णयों के पालन तथा किसी भी विवाद की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।ग्रामसभा द्वारा पारित उक्त निर्णय को सूचना पटल के माध्यम से सार्वजनिक किया गया है, ताकि ग्रामीणों एवं संबंधित व्यक्तियों को ग्रामसभा के निर्णय की जानकारी हो सके।
धर्म प्रचारकों का प्रवेश निषेध
ग्राम पंचायत पुनपल्ली में लगाए गए सूचना पटल पर लिखा गया है कि पादरी, ईसाई धर्म प्रचारकों द्वारा धर्मांतरण, प्रार्थना सभा एवं अन्य गतिविधियों के लिए ग्राम पुनपल्ली में प्रवेश वर्जित रहेगा। सूचना पटल में ग्रामसभा द्वारा पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं सामाजिक विरासत के संरक्षण का उल्लेख किया गया है। सूचना पटल पर ग्रामीणों से ग्राम सभा के निर्णय एवं स्थानीय कानूनों का सम्मान करने का अनुरोध भी किया गया है। विशेष ग्रामसभा में ग्राम की पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान तथा सामुदायिक हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। ग्रामसभा के निर्णयों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर ग्रामीणों एवं संबंधित व्यक्तियों को स्थानीय निर्णयों की जानकारी दी गई है।
ग्रामसभा द्वारा पारित निर्णयों के संबंध में किसी भी विवाद या कानून व्यवस्था की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक एवं विधिक अधिकारियों को सूचना देने तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की बात भी कही गई है। ग्रामसभा में प्रमुख रूप से सरपंच सोनमती माड़वी, ग्रामसभा अध्यक्ष बारसे सोमा, उपसरपंच मुचकी नंदा, ग्राम पटेल बारसे पांडू, पूर्व सरपंच मीडियम जोगा, वार्ड पंच पोडियम भीमा, ग्राम पुजारी बारसे मल्ला, जनपद पंचायत सदस्य मड़कम भीमा एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
वर्सन:
पारंपरिक व्यवस्था के लिए निर्णय
ग्रामसभा ने अपनी पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता, और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लियाहै। ग्रामसभा के निर्णयों का सम्मान हो और सभी विषयों का समाधान विधि एवं संवैधानिक के अनुरूप हो यही हमारी प्राथमिकता है।






