अधूरे टूटे आमाडुला बांध के पुनर्निर्माण की उठी मांग, निरीक्षण करने पहुंचे जल संसाधन विभाग के अधिकारी

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शासन स्तर पर भेजे गए दस्तावेज, स्वीकृति और फंड मिलने का इंतजार; वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जी राम जी योजना से काम कराने की तैयारी

बालोद। जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी के अंतर्गत ग्राम आमाडुला में स्थित बांध के टूटने और अधूरा पड़े होने से किसानों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बांध का निर्माण पूरा होने से पहले ही पानी के तेज बहाव के कारण इसका गेट वाला हिस्सा टूट गया था, जो बहकर किसानों के खेतों तक पहुंच गया। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि बांध का निर्माण पूरा होने से उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा, लेकिन बांध के टूटने के बाद उनकी यह उम्मीद अधूरी रह गई। अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बांध के पुनर्निर्माण की मांग तेज कर दी है।बांध के टूटने से किसानों के खेतों में मिट्टी जमा होने और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा समय-समय पर किसानों के खेतों में जमा मिट्टी की सफाई कराई जाती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बांध की मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण किसानों को बार-बार परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का मानना है कि बांध को व्यवस्थित रूप से तैयार किया जाए तो सिंचाई के साथ-साथ क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार और निस्तारी के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है।ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत आमाडुला के सरपंच कमलेश दुग्गा, डौंडी जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी तथा जनपद पंचायत डौंडी के उपाध्यक्ष भोलाराम नेताम ने पूरे मामले से जल संसाधन विभाग को अवगत कराया। जनप्रतिनिधियों की मांग और ग्रामीणों की परेशानियों को संज्ञान में लेते हुए विभाग के एसडीओ सुरेश कुमार घिरेंद्र तथा इंजीनियर मौके पर पहुंचे और टूटे हुए बांध का निरीक्षण किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष बांध का निर्माण कार्य पूरा कराने तथा समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग रखी।निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि बांध से संबंधित आवश्यक दस्तावेज शासन स्तर पर भेजे जा चुके हैं। अब स्वीकृति मिलने और फंड उपलब्ध होने का इंतजार है। राशि प्राप्त होते ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। वहीं, तब तक ग्रामीणों को राहत देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत जी राम जी योजना के माध्यम से कार्य कराने के लिए प्रस्ताव मंगवाकर स्टीमेट तैयार करने की योजना है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर बांध के टूटे हुए हिस्से के ऊपर की ओर तटबंध बनाने का काम कराया जा सकता है, जिससे बांध में पानी को रोकने में मदद मिलेगी।ग्रामीणों को उम्मीद है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तटबंध का निर्माण होने से पानी का अनावश्यक बहाव रोका जा सकेगा और आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने के साथ निस्तारी के लिए पानी उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। हालांकि, ग्रामीणों की प्रमुख मांग बांध का स्थायी रूप से पुनर्निर्माण कर उसे पूरा करने की है, ताकि भविष्य में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और उन्हें बार-बार होने वाले नुकसान से राहत मिल पाए।निरीक्षण के दौरान सरपंच कमलेश दुग्गा, जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष भोलाराम नेताम, लक्ष्मण दुग्गा, केशव तारम, जल संसाधन विभाग के एसडीओ सुरेश कुमार घिरेंद्र, विभागीय इंजीनियर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब ग्रामीणों की नजर शासन से मिलने वाली स्वीकृति और प्रस्तावित वैकल्पिक कार्यवाही पर टिकी हुई है।

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