यह कैसी युक्ति? नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही गश खाकर गिरे शिक्षक

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  •  शहरी स्कूल में नियुक्ति मिली है शिक्षक को, फिर भी गुरेज क्यों?

अर्जुन झा-

जगदलपुर एक ओर जहां शिक्षक शिक्षिकाएं और तमाम सरकारी विभागों के अधिकारी कर्मचारी शहरों में अपनी तैनाती के लिए तरसते हैं और इसके वास्ते तरह तरह के जतन भी करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक मास्साब ऐसे भी हैं, जिन्हें शायद शहरी स्कूल से गुरेज है। ये युक्ति थी या कि खौफ, कि नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही मास्साब गश खाकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत महारानी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत अब ठीक है। मास्साब के गश खाकर गिरने की वजह चाहे कुछ भी हो, मगर युक्तियुक्तकरण का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों और कांग्रेस को विरोध की धार तेज करने का एक और बहाना जरूर मिल गया है।

कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग में जारी युक्तियुक्तकरण के नाम से हो रही पदस्थापना से पूरे राज्य के शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। इसका पुरजोर विरोध भी कई शिक्षक संगठन साझा मंच बनाकर कर रहे हैं। उनकी और कांग्रेस की दलील है कि युक्तियुक्तकरण से छत्तीसगढ़ में हजारों स्कूल बंद हो जाएंगे, शिक्षकों के हजारों पद खत्म हो जाएंगे, सरकार शिक्षकों की नई भर्तियां नहीं करना चाहती इसलिए उसने युक्तियुक्तकरण की युक्ति अपनाई है। वहीं पर्दे के पीछेसे जो बातें सामने आ रही हैं उनके मुताबिक इस नई नीति का वही शिक्षक नेता कर रहे हैं, जो वर्षों से अपनी मनचाही शाला में जमे हुए हैं। उन्हें डर है कि युक्तियुक्तकरण के बहाने कहीं उन्हें भी दूर दराज की शालाओं में न भेज दिया जाए। ज्यादातर शिक्षक अपने गृहग्राम के आसपास की शालाओं में ही जमे रहनाचाहते हैं, मगर नई नीति में उनकी युक्ति काम नहीं आ रही है। ऐसा ही एक मामला बस्तर संभाग स्तरीय काउंसलिंग में देखने को मिला। बस्तर हायर सेकंडरी स्कूल कैंपस मेंचल रही काउंसलिंग के दौरान आज 19 जून को एक शिक्षक अपनी नई पदास्थापना वाले स्कूल का नाम सुनते ही बेहोश होकर गिर गए। उन्हें अन्य शिक्षकों द्वारा उठाकर महारानी अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां अब इन मास्साब की सेहत ठीक हो चली है। कैरगुड़ा माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ रहे शिक्षक मुकुंद ठाकुर के साथ यह घटना हुई है। उच्च श्रेणी शिक्षक मुकुंद ठाकुर को जगदलपुर के प्रतिष्ठित जगतू माहरा हायर सेकंडरी स्कूल में नई तैनाती दी गई है। जगदलपुर जैसे बस्तर संभाग के सबसे और सुविधा संपन्न शहर से इन मास्साब को गुरेज आखिर क्यों है, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई इसे “युक्ति” बता रहा है, तो कोई कुछ और। वहीं शिक्षकों के बीच चर्चा है कि मुकुंद ठाकुर को अपनी पुरानी शाला से बेदखल किया जाना रास नहीं आ रहा है। वहीं दूसरी ओर यह भी आरोप लग रहे हैं कि काउंसलिंग में किसी भी शिक्षक से न दावा आपत्ति मांगी जा रही है, न ही अधिकारी अपने कर्मचारियों की बात सुन रहे हैं। कर्मचारी विवश हैं नए स्कूलों में जाने के लिए। ऐसा ही एक मामला बस्तर जिले के बस्तर विकासखंड के कैरगुड़ा में पदस्थ शिक्षक मुकुंद ठाकुर के कथनानुसार वे अतिशेष ही नहीं हैं, फिर भी उन्हें जबरदस्ती अतिशेष कर दिया गया है। वे पूरे दस्तावेज लेकर भी आए थे। पर संयुक्त संचालक ने उनकी व्यथा नहीं सुनी। वे कर्मचारी संगठनों को भी अपनी परेशानी को बता रहे थे। और काफी परेशान थे। अधिकारी का ऐसे व्यवहार की शिकायत सभी शिक्षक कलेक्टर बस्तर के पास करने वाले हैं। शिक्षकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।इससे शिक्षक बहुत नाराज हैं। युक्तियुक्तकरण का कोई विरोध नहीं कर रहा है। नाराजगी तो युक्तियुक्तकरण में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तानाशाही से है।