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बस्तर के आदिवासी तरसते हैं पाई -पाई के लिए और मारे जा रहे नक्सलियों से मिलने लगा है नोटों का अंबार

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  • आखिर नक्सलियों के आ कहां से रही है इतनी रकम
  • दो मुठभेड़ों के बाद मिल चुके हैं 50 हजार रुपए

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर के आदिवासी जहां पाई पाई के लिए तरसते रहते हैं, वहीं नक्सली नोटों की गड्डियां लेकर जंगलों में घूमते हैं। आदिवासियों की आड़ में सरकार के खिलाफ खुली जंग लड़ रहे नक्सलियों के पास आखिर नोटों का अंबार पहुंच कहां से रहा है? उन्हें अत्याधुनिक हथियार और गोला बारूद मुहैया कौन करा रहा है? यह गंभीर चिंतन एवं जांच का विषय है और बस्तर के आदिसियों के लिए विचारणीय मसला भी। हालिया हुई दो मुठभेड़ों में मारे गए महज चार नक्सलियों के शवों के पास से 50 हजार रुपए बरामद किए जा चुके हैं।

बस्तर संभाग में सक्रिय नक्सलियों में ज्यादातर बाहरी हैं और उन्हें बाहरी एवं विदेशी मदद मिलने की खबरें गाहे बगाहे सामने आती ही रहती हैं। मुठभेड़ों के बाद मारे जाने वाले नक्सलियों और उनके अस्थायी कैंपों से बरामद हथियार भी इस बात की तस्दीक करते हैं। पुलिस और सुरक्षा बल चीन और अन्य देशों में निर्मित माऊजर, रायफल, गन आदि बड़ी संख्या में बरामद कर चुके हैं। अब नोटों की गड्डियों की बरामदगी का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछली दो मुठभेड़ों के बाद पुलिस मारे गए नक्सलियों की वर्दी की जेबों और बैग से 50 हजार रुपए बरामद कर चुकी है। ये 500- 500 के करारे नोट हैं। कुछ दिनों पहले बीजापुर जिले के जप्पेमरका और कमकानार के जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो ईनामी महिला नक्सली विज्जे ताती उर्फ सुक्का और नीला फरसा के पास से 500 -500 के 40 नोट यानि कुल 20 हजार रुपए मिले थे। 28 मई को बीजापुर जिले के ही मद्देड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरंजेड़ – बंदेपारा में हुई मुठभेड़ में मारी गई 8 लाख की ईनामी महिला नक्सली मनीला पुनेम उर्फ मनीला पदम और 1 लाख के ईनामी पुरुष नक्सली मंगलू कुड़ियम के पास से भी 500- 500 के 60 नोट यानि 30 हजार रुपए मिले हैं। इस तरह दोनों मुठभेड़ों के बाद नक्सलियों के पास से कुल 50 हजार रुपए मिल चुके हैं। वह भी जंगल में घूम रहे नक्सलियों से। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो नक्सली गुफाओं, कंदराओं और सुरक्षित ठिकानों में छुपे बैठे बड़े नक्सली लीडर्स के पास तो करोड़ों अरबों खजाना होगा। आखिर इन नक्सलियों के पास रकम कहां से आ रही है? उनकी आर्थिक मदद कौन कर रहा है? उनकी आमदनी का जरिया आखिर क्या है? ये तमाम सवाल जहां पुलिस के लिए जांच के बिंदु हो सकते हैं, वहीं बस्तर के आदिवासियों के लिए विचारणीय मुद्दे भी हैं। बस्तर के आदिवासियों और नक्सलियों के समर्थन में बार बार उठ खड़े होने वाले सियासतदानों को इस मसले पर गहन मंथन करना होगा। उन्हें इस बात पर गौर करना होगा कि जो नक्सली गरीब आदिवासियों के हक की और जल, जंगल, जमीन बचाने की लड़ाई लड़ने का दंभ भरते हैं, वे धनपति कुबेर कैसे बनते जा जा रहे हैं? जबकि बस्तर का आम आदिवासी आज भी पाई पाई का मोहताज है।

तालिबानी सजा आखिर क्यों?

बस्तर संभाग लंबे समय से लाल आतंक का दंश झेलता आ रहा है। पहले पहल यहां के बाशिंदे दो पाटों के बीच पिस रहे थे। पुलिस की मदद करते थे, तो नक्सली उन पर कहर ढाते थे और नक्सलियों की मदद करने पर पुलिस टार्चर करती और जेल में बंद कर देती थी। पुलिस और सुरक्षा बलों के रवैए में अब काफी बदलाव आ चुका है। ये अब आदिवासियों का दिल जीतकर नक्सली मांद तक पहुंच रहे हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी सीआरपीएफ और पुलिस द्वारा बीहड़ों और दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में कैंप स्थापित कर वहां के आदिवासियों को चिकित्सा, पेयजल, उनके बच्चों की शिक्षा आदि में योगदान दिया जा रहा है। इसके सार्थक परिणाम भी मिलने लगे हैं। एक तरफ पुलिस और सुरक्षा बल प्यार से आदिवासियों का दिल जीत रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नक्सली आज भी आदिवासियों को तालिबानी अंदाज में सजा देने से बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस मुखबिरी के शक में आदिवासी युवाओं को घर से निकालकर उनके बुजुर्ग मां बाप और पत्नी बच्चों के सामने कभी कुल्हाड़ी से काटकर तो कभी गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आदिवासियों की मौत पर छाती पीटने वाले लोग तब क्यों आवाज नहीं उठाते? उन्हें बुजुर्ग मां बाप, असमय विधवा हुई पत्नी और बेसहारा हो चुके बच्चों का दर्द आखिर क्यों उद्वेलित, आंदोलित नहीं करता?

आदिवासी भतरा समाज में आने वाली है बड़े बदलाव की बयार, फिजूलखर्ची और आडंबर से दूर रहेगा समाज

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  •  गोटीगुड़ा में हुई भतरा समाज की अहम बैठक
  • युवाओं और बेटियों की उच्च शिक्षा पर दिया जाएगा जोर, दूर होंगे कई चलन

अर्जुन झा

बकावंड आदिवासी भतरा समाज में अब बड़े बदलाव की बयार बहने वाली है। आडंबर, फिजूलखर्ची, रूढ़िवाद, शादी ब्याह और मृत्यु कर्म के अव्यवहारिक लेनदेन तथा मांस मदिरा के चलन से यह समाज अब उबरने वाला है। समाज में शिक्षा की नई क्रांति आने वाली है। बेटियों की शिक्षा को समाज में प्राथमिकता दी जाएगी।

विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत गोटीगुड़ा में आदिवासी भतरा समाज की बड़ी महत्वपूर्ण बैठक समाज के संभागीय अध्यक्ष शंभूनाथ कश्यप, संभागीय कोषाध्यक्ष लीलाधर कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष अनंत राम कश्यप, अस्तू राम कश्यप, धनेश्वर नेताम, रुपधर कर्मा, दशमत कश्यप, रतन भारती, मदन राम व अन्य समाज प्रमुखों की उपस्थिति में हुई। बैठक में विभिन्न ग्रामों के नाईक, पाईक एवं समाज प्रमुख उपस्थित थे। समाज के रीति रिवाजों के संबंध में चर्चा की गई। शादी विवाह से लेकर शिक्षा स्तर तक पर गहन मंथन किया गया। चर्चा में कहा गया की शादी विवाह में कपडों की लेनदेन, टीकावन (उपहार) में बर्तन भेंट का जिक्र हुआ। इस संबंध में कहा गया कि हमारे समाज के लोग अधिकतर शादी विवाह के दौरान टीकावन में बर्तन भेंट करते हैं। जो कि ठीक नहीं है। क्योंकि आज हर घर में सभी तरह के बर्तन, इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद रहते हैं। ऐसा करके हम दुकानदारों का धंधा चला रहे हैं। वहीं जिन्हें हम यह चीजें टीकावन में देते हैं, वह उनके लिए अनुपयोगी हो जाते हैं। इस प्रचलन को बंद कर देना चाहिए। शादी विवाह के टीकावन में बर्तन के स्थान पर नगद रुपए देना चाहिए। इससे शादी करने वाले परिवार की आर्थिक मदद हो जाएगी। वह परिवार उस रकम का उपयोग अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकेगा। समाज प्रमुखों ने उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि एक पीतल का गुंडी 1700 रुपए मे आती है। उसके बदले में इतनी ही राशि टीकावन रूप में दी जाए, तो शादी करने वाले परिवार को यह बड़ी मदद होगी। शादी मे कपड़ा लेनदेन, मांस मदिरा के चलन को भी प्रतिबंधित करने पर चर्चा की गई। कहा गया कि शादी विवाह अपनी हैसियत के अनुसार करना चाहिए। किसी भी प्रकार का दिखावा नहीं करना चाहिए। कर्ज लेकर या पैतृक जमीन जायदाद को बेचकर शादी विवाह दिखावा के लिए नहीं होना चाहिए।

पगड़ी रस्म में नगद रकम दें

इसी प्रकार अंतिम क्रियाकर्म में भी पगड़ी रस्म के दौरान पैसा का चलन होना चाहिए। कपड़े देने की जगह दुखी परिवार को नगद रकम देनी चाहिए। अगर आप 100 रूपए का कपड़ा पगड़ी रस्म के लिए खरीदते हैं, तो कपड़ा न देकर उतने ही रुपए हम यदि पगड़ी रस्म में दे दें तो यह शोक संतप्त परिवार के लिए बहुत ही आर्थिक मदद होगी। हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा। सामाजिक लेनदेन विवाह पर भी चर्चा की गई। शिक्षा के क्षेत्र में अधिक से अधिक कन्या साक्षरता पर विशेष जोर दिया गया। समाज के जागरूक और शिक्षित जनों ने कहा कि हमारे समाज के बच्चे 12वीं पास होने के बाद आगे की शिक्षा ग्रहण नहीं करते हैं। इस पर गहनता से विचार कर हमें ध्यान देना चाहिए। आगे की पढ़ाई करना चाहिए।उच्च शिक्षित होकर ही हम अपने अधिकारों के लिए बेहतर पहल कर पाएंगे और समाज को प्रगतिशील बना सकेंगे।हमारे समाज के लिए आरक्षण लागू है। आरक्षण से हमें बहुत सारी सुविधाएं मिलती हैं। उन सुविधाओं का हमें लाभ उठाना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम खानपान पर भी चर्चा की गई। कहा गया कि क्रियाकर्म में सांस्कृतिक कार्यक्रम उड़िया नाटक को बंद कर देना चाहिए। इस अवसर पर भतरा समाज के संभागीय अध्यक्ष शंभूनाथ कश्यप, संभागीय कोषाध्यक्ष लीलाधर कश्यप, ब्लॉक अध्यक्ष अनंत राम कश्यप, अस्तूराम कश्यप, धनेश्वर नेताम, रूपधर कर्मा, दशमत कश्यप, रतन भारती, मदन राम समेत विभिन्न ग्रामों के सरपंच, सिरहा, पुजारी, ग्रामीणों महिलाओं और माता बहनों की जबरदस्त उपस्थिति रही।

डीबी ग्रुप की नई पहल बेजुबान जीव जंतुओं के लिए विभिन्न जगहों पर पानी के लिए कोटना का वितरण किया

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तेज गर्मी को ध्यान में रखते हुवे शहर के सेवक जो मानव सेवा के साथ अब बे जुबान और डॉग (श्वान) सेवा भी कर रहे है जरूरतमंद लोगों को रक्तदान कर के नव जीवन देते है और अब बे जुबान के लिए पानी का व्यवस्था किया जा रहा है डोनेट ब्लड वेलफेयर फाउंडेशन डीबी ग्रुप के द्वारा शहर में जहा पर बे जुबान को पानी की जरूरत है टीम के द्वारा पानी का पात्र कोटना का व्यवस्था किया गया है संस्था के प्रदेश अध्यक्ष दीपक साहू ने बताया डीबी स्टार महिला टीम का गठन किया गया महिलाओ के सम्मान और समाज में उनकी महत्व को ध्यान में रख कर महिला टीम बनाया गया है आज हमारे साथ मिल कर नेक कार्य में अपना पूरा सहयोग देते है।

पानी पात्र कोटना महिला टीम के सहयोग से ही इसका खर्चा उठाया गया है अभी शहर में 20 कोटना बाटा गया है आने वाले समय में जरूरत के हिसाब से और बढ़ाया जा सकता है महिला टीम के द्वारा पौधा रोपण भी किया गया था जिसकी देख भाल महिला टीम अपनी जिम्मेदारी से निभा रहे है अगले कुछ दिनों में डॉग (श्वान) फीडिंग बॉक्स लगाया जाएगा ताकि डॉग (श्वान)को एक जगह पर भोजन प्राप्त हो सके जिससे डॉग (श्वान)अपना व अपने बच्चे का जीवन बचा सके संस्था के उपाध्यक्ष हेमन्त गौतम व भरत देवांगन ने कहा डीबी ग्रुप के द्वारा लगतार रक्त की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है शिविर के मध्यम से पूर्ति किया जाता है रक्तदान के लिए लोगो को जागरूक किया जाता है संस्था का उद्देश्य मानव सेवा और जन जागरूकता करना है स्टार महिला टीम की सदस्य नाज मेमन ममता मानकर अनुराधा सिंग ने बताया हमारे टीम के द्वारा सदस्यता अभियान चलाया जाएगा जिसमे शहर की बाकी महिलाए भी जुड़े और अच्छे कार्य का हिस्सा बने मानव सेवा के साथ अब बेजुबान जानवरो का सेवा कर सके उसी उद्देश्य के साथ हर वर्ग के लोगो को जोड़ना होगा ताकि महिआए भी खुल कर सेवा कर सके और पुण्य के भागीदार बने पानी पात्र कोटना वितरण में महिलाओ ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया शहर के लोग दयालु और मिलनसार है महिलाओ को प्रोत्साहित कर रहे है अपना सहयोग दे रहे है आने वाले समय में डीबी ग्रुप के साथ मिलकर नेक सेवा कार्य करना चाहते है आप सभी से अपील करते है बे जुबान को मारे मत उनको भी हक है डीबी ग्रुप टीम अपना योगदान सेवा कार्य देते रहेंगे टीम के सदस्य राजेश्वरी साहू देवांतिन पारकर रेणुका साहू शिवानी मानिकपुरी सावित्री सोनी सुनीता कडपति दामिनी साहू पम्मी सलामे माधुरी करपाल अनिता साहू सुषमा साहू द्रोपति साहू पुष्पा शंडियाल सूरज गुप्ता शिवा सूर्यवंशी लक्ष्मण देवांगन नियाज़ खान कोमल ठाकुर क्षितिज हुमने संतोष रात्रे सुमित जैन पवन सोनी ऋषि ठाकुर अरविंद सौरभ दानेश आर्य

नाबालिग से दुराचार, गर्भवती हुई तो शादी से इंकार, आरोपी युवक गिरफ्तार

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  • बकावंड पुलिस ने 24 घंटे में पकड़ लिया आरोपी को

बकावंड स्थानीय पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को महज 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल की राह दिखा दी।

पुलिस थाना बकावंड में दर्ज धारा-376 (2) (n) भादवि 6 पाक्सो एक्ट के प्रकरण में पीड़िता निवासी सरगीपाल बाजार की रिपोर्ट पर आरोपी रूबेन कश्यप पिता मंगल कश्यप जाति महारा उम्र 20 वर्ष निवासी सरगीपाल को गिरफ्तार किया गया है। रूबेन पर आरोप है कि उसने पीड़िता को शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया और गर्भ ठहरने पर पीड़िता को रखने व शादी करने से इनकार कर दिया। पीड़िता की लिखित शिकायत पर पुलिस थाना बकावंड में दिना

27 मई को अपराध पंजीकृत कर विवेचना में लिया गया पुलिस अधीक्षक बस्तर जगदलपुर शलभ कुमार सिन्हा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के दिशा निर्देश एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी घनश्याम कामड़े के पर्यवेक्षण एवं थाना प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह कंवर के नेतृत्व में पुलिस थाना बकावंड के एएसआई मधुसूदन सिंह ठाकुर, प्रधान आरक्षक नकुल कश्यप, आरक्षक भीषम ठाकुर, महिला आरक्षक निकिता मिश्रा ने आरोपी रूबेन कश्यप सरगीपाल को 24 घंटे के भीतर 28 मई को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया।

लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर 10 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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  •  बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में अभियान का बड़ा असर

जगदलपुर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिला पुलिस व सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर फिर दस नस्क्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

जिला पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा भटके हुए माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए लगातार संपर्क एवं संवाद कर शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार गांव गांव में किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।नक्सलियों की अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा स्थानीय आदिवासियों पर उनके द्वारा की जाने वाली हिंसा से तंग आकर नक्सलवाद की ओर भटके युवा अब समाज की मुख्यधारा में जुड़ने लगे हैं।इसी कड़ी में प्रतिबंधित माओवादी संगठन इंद्रावती एरिया कमिटी के 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण की इच्छा जाहिर करते हुए लोन वार्राटू (घर वापस आईए ) अभियान के तहत दिनांक 29 मई को पुलिस कार्यालय दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। इन माओवादियों को आत्मसमर्पण कराने में डीआरजी एवं बस्तर फ़ाईटर्स दंतेवाड़ा का विशेष योगदान रहा। लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 180 ईनामी माओवादियों सहित कुल 815 माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं।

बीजापुर मुठभेड़ में आठ लाख की ईनामी महिला नक्सली कमांडर सहित दो नक्सली मारे गए

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जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के मद्देड़ थाना क्षेत्र के बांदेपारा की पहाड़ी पर बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल ने आठ लाख की इनामी डिवीजनल कमेटी सदस्य नक्सल कमांडर मनीला सहित दो महिला नक्सलियों को मार गिराया है।

घटनास्थल से दो नक्सलियों के शव व दो हथियार मिले हैं।

बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि करते बताया कि घटना स्थल के आसपास मुठभेड़ अब भी जारी है।

नेगानार ग्राम पंचायत में सरकारी रकम हजम करने की संस्कृति, नहीं बन पाया सांस्कृतिक भवन

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  •  स्वीकृत राशि निकालने के बाद भी दो साल से अटका पड़ा है निर्माण कार्य
    अर्जुन झा
    बकावंड विकासखंड बकावंड की अधिकांश ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की संस्कृति खूब फल फूल रही है। यह सब जनपद पंचायत बकावंड के सीईओ के संरक्षण में हो रहा है। सीईओ ने सरपंच और सचिवों को खुली छूट दे रखी है।
    ऐसा ही एक मामला विकासखंड के नेगानार ग्राम पंचायत में सामने आया है, जहां स्वीकृत राशि प्राप्त कर लेने के बाद भी सांस्कृतिक भवन का निर्माण दो साल से अधूरा पड़ा है। नेगानार के मांझी पारा में विधायक निधि से सांस्कृतिक भवन निर्माण के लिए सन 2022 -23 में 3 लाख 40 हजार रूपए की स्वीकृति बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने प्रदान की थी। इसमें से आधी रकम ग्राम पंचायत द्वारा आहरित की जा चुकी है, मगर काम दस प्रतिशत भी नहीं कराया गया है। नींव भराई के बाद एक कमरे के लिए आधी अधूरी दीवारें भर खड़ी कर दी गई हैं। वहीं सामने मंच के नाम पर लगभग आधा फुट ऊंचाई वाला प्लेटफार्म बनाने का उपक्रम मात्र किया गया है। दो साल बीत जाने के बाद भी काम जस का तस पड़ा है।

1 वर्ष के बाद भी आज तक अधूरा पड़ा है सार्वजनिक संस्कृति भवननिर्माण के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव द्वारा 1 लाख 70 हजार रुपए निकाल कर लिया गया है, मगर काम महज करीब 20 हजार का ही कराया गया है।इस मामले में पंचायत सचिव कश्यप दलील दे रहे हैं कि लेबर मिस्त्री नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण काम नहीं कराया जा सक रहा है। कार्य जल्द पूरा करा लिया जाएगा। इस विषय में बस्तर के विधायक लकेश्वर बघेल से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक भवन का निर्माण अटके रहने की जानकारी मुझे आपके माध्यम से पता चल रहा है। मैं सरपंच सचिव जल्दी काम पूरा कराने के लिए बोल दूंगा।
वर्सन
जल्द होगा काम पूरा
अभी आंगनबाड़ी का काम चल रहा है। आंगनबाड़ी भवन का काम पूरा होते ही सांस्कृतिक भवन का काम भी पूरा करा लिया जाएगा।
-एसएस मंडावी,
सीईओ, जनपद पंचायत बकावंड

राजहरा मुस्लिम जमात के नसीर भाई हज के सफर मे

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आज दल्ली राजहरा मस्जिद में आम जमात जी तरफ से हज के मुबारक सफर पर जा रहे शहर के नासिर भाई एवं उनकी बेगम शाहिद रहमान का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया। इस दौरान सभी शहर वासियों ने दोनों हाजियों के हक में दुआ किया और हज के सफर पर जा रहे हाजियों से आम जमात के हक में दुआ करने की गुजारिश किया गया। हाजियों के रुखसत के मुबारक मौके पर राजहरा मुस्लिम जमात से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मौजूद थे। हज यात्रियों को आम जमात ने बाइक रैली के रूप में मानपुर चौक और कुसुम तक छोड़ा गया। इस दौरान कुसुमकसा जमात की तरफ से भी हाजियों का इस्तेकबाल किया गया।

 

गले की समस्या से जूझ रहे पत्रकार दीपक यादव के इलाज में आगे मदद और शासन से सहायता राशि दिलाने के लिए विधायक संगीता सिन्हा ने दिया आश्वासन

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  • हालात बताते रो पड़ी पत्रकार की पत्नी माधुरी तो गले लगा कर विधायक बोली “चिंता मत करो, मैं हूं ना,,,,
  • आचार संहिता हटते ही पहला काम आपका करवाऊंगी

बालोद/गुरुर। ग्राम जगन्नाथपुर के रहने वाले एक पत्रकार दीपक यादव का हाल ही में गले का दो ऑपरेशन हुआ है। जिसका वे विगत 22 अप्रैल 2024 से इलाज करवा रहे हैं। उनके गले में मवाद जमा होने और टांसिल की समस्या थी। जिसका इलाज जारी है और आगे सर्वाइकल स्पाइन (रीढ़ की हड्डी में नस दबने से) संबंधित भी इलाज होना है। इस संबंध में उनका दुर्ग के गला रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में इलाज चल रहा है। इसके अलावा ऑपरेशन के बाद घर पर भी इलाज जारी है। लंबे समय से चल रहे इलाज के चलते परिवार को आर्थिक मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। तो वही कई लोगों ने इंसानियत दिखाते हुए सहयोग करके इलाज में मदद भी की है। शासन प्रशासन से मदद की आस के साथ पत्रकार दीपक यादव की पत्नी माधुरी यादव ने संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा को जगन्नाथपुर में सेन समाज के कार्यक्रम में आगमन के दौरान ज्ञापन सौंपा और उन्हें विधायक निधि से शासन से मदद दिलाने की मांग की। विधायक संगीता सिन्हा ने मौके पर संवेदनशीलता के साथ उनकी बातों को सुना और पत्रकार दीपक के बारे में हालचाल पूछा।

रो पड़ी पत्नी तो विधायक ने गले लगाया

पति का अस्पताल गए होने और अब तक के हालात बताते हुए पत्नी माधुरी मौके पर रो पड़ी तो विधायक ने तत्काल उन्हें गले से लगा लिया और ढांढस बंधाते हुए कहा कि चिंता मत करो, मैं हूं ना। मैं संभाल लूंगी। आचार संहिता हटने के बाद सबसे पहला काम आपका ही कराऊंगी। मुझे मामले की जानकारी मिल चुकी थी। शासन प्रशासन और अपनी ओर से जल्द से जल्द मदद दिलाने और आगे इलाज में भी हर संभव सहयोग करने का आश्वासन विधायक संगीता सिन्हा ने दिया। जिसके लिए पत्रकार की पत्नी माधुरी यादव ने उनका आभार जताया। इस दौरान जगन्नाथपुर के सरपंच अरुण साहू, सांकरा के सरपंच वारुणी शिवेंद्र देशमुख, विधायक प्रतिनिधि कमलेश श्रीवास्तव और अन्य मौजूद रहे । सभी ने माधुरी यादव की मांग को जायज बताते हुए शासन प्रशासन से जल्द मदद दिलवाने की बात कही।

18 पेज का दी है आवेदन के साथ इलाज का पूरा विवरण

माधुरी यादव ने मदद करने के लिए विधायक को दिए ज्ञापन में आवेदन के साथ कुल 18 पेज का पूरा विवरण दी है। जिसमें दीपक यादव और उनके परिवार को हो रही परेशानी , डॉक्टर्स की रिपोर्ट,सिटी स्कैन रिपोर्ट,एमआरआई , इलाज में हुए खर्चों का पूरा जिक्र है। माधुरी ने बताया कि वह जगन्नाथपुर में सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापन का कार्य करती हूं। गरीबी रेखा के तहत जीवन यापन करते हैं। मेरे पति दीपक यादव स्वतंत्र पत्रकारिता (डेली बालोद न्यूज में) करते हैं। जो कि 2007 से श्रमजीवी पत्रकार हैं। विगत 22 अप्रैल 2024 से उनके जीभ में छोटा सा छाला होने के बाद गले में अचानक मवाद जमा होने से आहार और श्वास नली अवरुद्ध हो गया इसके इलाज हेतु दुर्ग के गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मयूरेश वर्मा (एसवीएम अस्पताल) ले गए थे। जहां दुर्ग के सेंटर में सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य जांच उपरांत रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि उनके गले में मवाद का गोला बन चुका है साथ ही टॉन्सिल बाएं साइड से काफी बड़ा हो चुका है और सरवाइकल स्पाइन की भी समस्या है। जिससे गर्दन के पीछे हड्डियों और नसों को काफी नुकसान पहुंचा है।

लास्ट स्टेज में पहुंचे थे अस्पताल, जान बचना था मुश्किल

जब उन्हें अस्पताल ले गए थे तो वे सांस लेने में भी दिक्कत महसूस कर रहे थे। मवाद के गोले के कारण आहार और सांस नली दोनो बंद हो रहे थे। लास्ट स्टेज में होने के कारण तत्काल डॉक्टर ने उन्हे एडमिट किया और इलाज शुरू किया।

आयुष्मान कार्ड में नही टॉन्सिल के इलाज का पैकेज

चूंकि टॉन्सिल के इलाज का पैकेज आयुष्मान कार्ड में नहीं था इसलिए स्वयं के खर्चे पर इलाज करवाना पड़ा। अचानक पैसों की व्यवस्था नहीं होने से लोगों से उधारी लेकर काम चलाना पड़ा। इस बीच 25 अप्रैल से 13 मई के बीच उनके (दीपक यादव) गले का दो ऑपरेशन हुआ। पहला मवाद निकालने का और दूसरा टॉन्सिल का। जिसमें अब तक करीब सवा लाख तक खर्च आ चुका है। आगे इलाज जारी है। प्रति मंगलवार को उन्हें अस्पताल शिफ्ट किया जाता है। घर पर भी ड्रिप, दवाई आदि के जरिए इलाज जारी है। टॉन्सिल का दूसरा ऑपरेशन बड़ा था इसलिए उन्हे खाने पीने में भी दिक्कत है।

अब तक खाना नहीं खा पाते, लिक्विड और ड्रिप के भरोसे जिंदगी

22 अप्रैल से वे भोजन ग्रहण नहीं कर पा रहें हैं। दवाई, दूध, दाल पानी के भरोसे हैं। आगे उनका सरवाइकल स्पाइन (रीढ़ की हड्डियों के बीच नस दबने से संबंधित) का इलाज भी होना है। जिसमें पांच से छह महीने तक दवाई से इलाज चलेगा। इस बीच नस की समस्या ठीक नही हुई तो उसका भी ऑपरेशन करना पड़ेगा। इन सबमें करीब पांच लाख तक खर्च आ सकता है। मैं गरीबी रेखा के तहत जीवन यापन करती हूं। हमारे घर में पति के अलावा और कोई पुरुष सदस्य कमाऊ नहीं है। इलाज में काफी खर्च हो जाने से आगे आर्थिक समस्या आ रही है। इसलिए मेरी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके मुझे विधायक निधि से सहयोग/ सहायता राशि दिलाया जाए।

1 महीने 1 हफ्ते से जारी है जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष, मैसेज करके बता रहे अपनी कहानी, करीब 1 महीने तक तो बोल भी नहीं पा रहे थे

आपको बता दें कि दीपक यादव करीब 1 महीने तक बोल भी नहीं पा रहे थे। वहीं वर्तमान में भी वे भोजन ग्रहण करने की स्थिति में नहीं है। ड्रिप, दवाई और लिक्विड आहार जैसे दूध, दाल पानी, साबूदाना के भरोसे चल रहे हैं। उन्हें इलाज कराते एक महीने एक हफ्ते से ज्यादा दिन हो चुके हैं। इस बीच लोगों द्वारा भी उनकी काफी मदद की गई है। बोल ना पाने की स्थिति में उन्होंने अपनी भावनाएं सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों तक पोस्ट करके पहुंचाई है और अपनी जिजीविषा की कहानी बताई है कि कैसे वे हालातो का सामना कर रहें और लोगों के सहयोग, दुआओं और प्रार्थनाओं से उन्हें ताकत मिल रही है। दीपक ने मैसेज करके बताया कि कितना कठिन होता है जुबान होकर भी बोल न पाना, कितना मुश्किल होता है खाना होकर भी ना खा पाना। 1 महीने बाद वे अब धीरे-धीरे बोलने की कोशिश कर रहें। पर अभी भोजन ग्रहण करने की स्थिति में नहीं आए हैं। टॉन्सिल का दूसरा ऑपरेशन काफी बड़ा होने के कारण आहार नली का घाव भरने में समय लग रहा है।

जिजीविषा ने बनाया है हौसला

उन्होंने भावुक होकर मैसेज के जरिए कहा कि एक पत्रकार का जीवन सार्वजनिक होता है। लोगों की समस्याओं के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहे हैं। आज उन पर मुसीबत आई तो लोगों ने भी संवेदनशीलता से उनका साथ दिया जिससे वे खुद को अकेला महसूस नहीं करते। जिजीविषा जिसका मतलब जीने की असीम इच्छा होती है इस सोच और भाव ने उन्हें अब तक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की है और जिंदा रखा है। एक पत्रकार होने के नाते अपना जीवन तभी सार्थक समझता हूं जो समाज के काम आए और समाज भी मुझे करीब से समझे । शायद यही वजह रही कि मुझ पर मुसीबत आई तो सब मेरा साथ देने के लिए आगे आ गए। जिन्हें मैं जानता तक नहीं ऐसे लोगों ने भी मुझे मदद की है। डॉक्टर की टीम से लेकर दवा और दुआ के साथ आर्थिक सहयोग करने वालों को मैं धन्यवाद देता हूं। बोल नहीं पा रहा लेकिन कई भावनाएं उनके भीतर है। इसलिए वे पोस्ट करके अपने मन की बातें रखते आ रहे हैं।

डॉक्टर बोले 15 दिन और लग सकते हैं आहार नली ठीक होने में

28 मई मंगलवार को डॉक्टर मयूरेश वर्मा ने उन्हे गला (आहार नली) पूरी तरह ठीक होने में करीब 15 दिन और लगने की बात कहते हुए दवाई दी है। शासन प्रशासन से मदद मिलने में फिलहाल देर है जिसके चलते लोगों के सहयोग राशि से ही इलाज को जारी रखे हुए हैं।

ट्रेन से कटकर युवक की मौत

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दल्लीराजहरा :- ट्रेन से कटकर युवक की मौत l घटना सुबह 10:30 बजे बताया जा रहा जो की दुर्ग से दल्लीराजहरा की आने वाली ट्रेन से कुसुमकसा पुलिया पर ट्रेन से कटकर युवक की मौत हो गई । मृतक का नाम सुरेंद्र मानिकपुरी उम्र 32 वर्ष निवासी कुसुमकसा बताया जा रहा है । तीन माह पूर्व उसके यहां बच्ची का जन्म हुआ था। मृतक यूको बैंक में दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत था। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच चुकी है ।आगे कार्यवाही की जा रही है।

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