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जीवनदायिनी तांदुला नदी को वास्तविक स्वरूप में वापस लाने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्यवाही शुरू

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जेसीबी से खेतों की मेड़ तोड़कर किया जा रहा नदी के समानांतर समतलीकरण, तांदुला नदी का लौटाया जाएगा पुराना वैभवराजस्व और पुलिस प्रशासन की टीम सुबह 05:30 बजे से कर रही है कार्यवाही, अतिक्रमणकारियों को दिया गया था 24 घंटे का अल्टीमेटम

बालोद, 24 मई 2026 बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए आज सुबह से ही प्रशासनिक अमला मैदान पर उतर चुका है। तहसीलदार द्वारा सभी 14 अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था।

समय सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 05:30 बजे से राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। नदी क्षेत्र की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को मशीनों के माध्यम से तोड़ा जा रहा है। इन अवैध खेतों को नदी के समानांतर समतल करने का कार्य तेजी से जारी है। समतलीकरण के बाद इस पूरे क्षेत्र में जलभराव किया जाएगा, जिससे तांदुला नदी को उसका पुराना वैभव और जल संचय क्षमता वापस मिल सकेगा।उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी इस क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने की मुहिम शुरू की गई थी, लेकिन तब खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की फसल लगी होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण से इसे रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल कट चुकी है, प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए पुनः इस कब्जा हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया है। राजस्व विभाग की जांच और ड्रोन सर्वे में पता चला था कि जो तांदुला नदी 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों के कारण कई जगहों पर सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश अतिक्रमणकारियों के पास अन्य जगहों पर अपनी जमीनें हैं और वे किराना दुकान, सैलून आदि जैसे मुख्य व्यवसाय चलाते हैं। कुछ लोगों द्वारा नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर इसे दूसरों को रेगहा पर देने की बात भी प्रमाणित हुई है। अवैध कब्जा हटाने का यह कड़ा कदम तांदुला नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद जरूरी हो गया था। जिला प्रशासन का मुख्य संकल्प नदी को उसके पुराने और वास्तविक स्वरूप में वापस लाना है, जो आज सुबह से जारी इस त्वरित और बड़ी कार्यवाही से साकार होता दिख रहा है। इस कार्यवाही के दौरान एसडीएम नूतन कंवर, एसडीओपी बोनिफस एक्का, तहसीलदार आशुतोष शर्मा, नायब तहसीलदार मुकेश गजेंद्र, थाना प्रभारी शिशुपाल सिंह, ट्रैफिक टीआई रविशंकर पाण्डेय, गुण्डरदेही थाना प्रभारी नवीन बोरकर, रक्षित निरीक्षक श्रीमती रेवती वर्मा, जल संसाधन विभाग के उप अभियंता विशाल राठौर सहित राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।

जब मिलता था पत्नी का लाइसेंस

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देना पड़ता था लाइसेंस शुल्क 1 रु., पंजीकरण शुल्क 8 आना और दस्तावेज शुल्क 4 आना

दूसरी पत्नी रखने पर बनवाना पड़ता था अलग से एक और लाइसेंस

अर्जुन झा

जगदलपुर एक दौर था, जब रेडियो और साइकिल खरीदने पर लाइसेंस की जरूरत पड़ती थी, लेकिन क्या आपको मालूम है कि पत्नी के लिए भी लाइसेंस बनवाना पड़ता था और दूसरी पत्नी रखने पर अलग से लाइसेंस की जरूरत होती थी? जी हां ऐसा ही होता था ब्रिटिश हुकूमत में। एक ऐसा ही लाइसेंस हमारे हाथ लगा है, जो अंग्रज सरकार के काले सच को उजागर करता है। अंग्रेजों ने हमारे पूर्वजों पर न सिर्फ जमकर जुल्म ढाये थे, बल्कि तरह तरह के शुल्क लगा कर उनसे जमकर धन की उगाही भी करते रहे।

ब्रिटिश हुकूमत में बने कई कानून आजाद भारत में भी कुछ वर्षों तक बदस्तूर जारी रहे। इनमें रेडियो और साइकल के लाइसेंस और पैदल चलने तक के लिए लाइसेंस की जरूरत पड़ती थी। इनका शुल्क महज 10 और 20 पैसे हुआ करता था, मगर उस दौर में यही लोगों पर बहुत भारी पड़ता था, क्योंकि उस समय इनकम सोर्स बहुत कम थे। अब आपको जो जानकारी दे रहे हैं, उसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। अंग्रेज शासन काल में पत्नी लाइसेंस विभाग भी हुआ करता था और इस विभाग का अधिकारी मुख्य निरीक्षक हुआ करता था, जो पत्नी के लिए लाइसेंस जारी करता था। पत्नी वंश वृद्धि, गृहस्थ जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए रखी जाती थी, एक बार में एक ही पत्नी के लिए लाइसेंस जारी किया जाता था। दूसरी पत्नी रखने के लिए अलग से लाइसेंस लेना पड़ता था। लाइसेंस की अवधि 10 वर्ष की होती थी और इसके बाद लाइसेंस नवीनीकरण कराना पड़ता था। लाइसेंस केवल गृहस्थ पुरुषों को जारी किया जाता था। असत्य जानकारी देने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाता था। ऐसा ही एक दुर्लभ लाइसेंस हमें मिला है, जो चौक बाजार बनारस के अनाज एवं वस्त्र व्यापारी लाला घनश्याम दास पिता सेठ मुरारी लाल के नाम पर जारी हुआ था। 17 फाल्गुन संवत 1959 यानि सन 1902 ईस्वी को जारी हुआ था।

शुल्क और लाइसेंस की शर्तें

लाइसेंस का शुल्क 1 रुपया, पंजीकरण शुल्क आठ आना और दस्तावेज शुल्क चार आना समेत कुल दो रुपए अदा करना पड़ते थे। शर्तों के अनुसार एक समय में केवल एक पत्नी रखना विधि सम्मत माना जाता था। पत्नी के साथ सदव्यवहार करना, उसकी सुरक्षा, भरण पोषण, वस्त्र, आवास का इंतजाम करना लाइसेंसी की जिम्मेदारी होती थी। पत्नी को कष्ट देना, त्यागना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता था।. दूसरी पत्नी के लिए अलग से लाइसेंस बनवाना जरूरी था।

बाबा” तो दिल्ली के लायक हैं, युवा सम्हाल लेंगे छत्तीसगढ़ को

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सिंहदेव के सियासी बोल पर पीसीसी चीफ की सम्मानजनक सलाह

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव बाबा के सियासी बोल ने फिर छग कांग्रेस की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सधे अंदाज में कहा है कि बाबा तो बड़े अनुभवी और सम्माननीय नेता हैं। समय समय पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें बड़ी बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं, जिन्हे बाबा ने पूरी गंभीरता के साथ और सफलता पूर्वक निभाया है। वे पूर्णतः परिपक्व नेता हैं, उन्हें अब दिल्ली की जिम्मेदारी सम्हालनी चाहिए।

दरअसल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बाबा अक्सर अपने बयानों से कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाने का काम करते आए हैं। जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब बाबा जी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नाक में दम किए हुए थे। उनकी कुर्सी की भूख इस कदर बढ़ गई थी कि वे अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ लगातार बयानबाजी करते रहे।उनके हालिया बयान के आधार पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने उन्हें मार्गदर्शक बन कर दिल्ली की राजनीति करने की सलाह क्या दी कि बाबा के तेवर और सख्त हो गए। उन्होंने अपनी तुलना दीपक बैज से कर डाली कि हम भी हारे वो भी हारे फिर फर्क कैसा? दरअसल दकियानूसी सोच के कुछ कांग्रेस नेता जब जब सत्ता करीब आती दिखती है तब तब वे उसे बयानों और जुमलों के दम पर खुद को आगे करने का प्रयास शुरू कर देते हैं। वे भूल जाते है कि जनता उसे ही पसंद करती है जो लगातार उससे संपर्क में रहती है।

सत्तर साल से भी ज्यादा उम्र के कांग्रेस नेता बाबा सत्ता के दिनों में रणछोड़ दास की उपाधि से नवाजे गए थे। अब उन्हें अचानक प्रदेश और पार्टी की चिंता सताने लगी है। ये वहीं बाबा हैं, जिन्होंने पूरे पांच साल तक ढाई आखर प्रेम की भाषा कभी नहीं बोली और पूरे पांच साल तक बीजेपी की बिसात पर ढाई ढाई घर चल कर भूपेश सरकार को परेशान करते रहे। इससे पूरे प्रदेश में यह संदेश गया कि इनसे तो अपना परिवार ही नहीं संभलता है तो ये प्रदेश क्या संभालेंगे? सत्ता से बाहर होते ही कांग्रेस को नए कलेवर में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा अपने युवा साथियों के साथ संवारा गया, लगातार पदयात्राएं करके दीपक बैज ने बीजेपी और उसकी सरकार की खामियों को जनता के सामने लाया। आदिवासी समाज को कांग्रेस के पक्ष में एकजुट करने और धर्म की राजनीति करने वालों के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन ये बुजुर्ग मासूम बन कर अपने शौक कभी इंग्लैंड तो कभी ऑस्ट्रेलिया में पूरे करते रहे। भारी बारिश, गर्मी में जब कार्यकर्ता सड़क पर आंदोलन करते रहे तो बाबा साहब अपना व्यापार सम्हालते रहे। छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव को महज ढाई साल बचे हैं और पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में शीतल बयार बहने लगी है तब बाबा को देश, प्रदेश, कांग्रेस और कार्यकर्ताओं की चिंता सताने लगी है।

यह चिंता उनके अकेले की नहीं है, बल्कि उन तमाम सत्ता लोभियों की है जिनके बाबा हमेशा लंबरदार बनकर काम करते आए हैं।आज शायद उन्हीं नेताओं के इशारे पर वे पुनः सक्रिय होकर सुचारू रूप से संघर्ष कर अपने युवा कार्यकर्ताओं व नेताओं के मार्गदर्शक बन कर संगठन को लगातार मजबूत बनाने का काम कर रहे पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को एक हारे हुए नेता बता रहे हैं। मासूमियत की चादर ओढ़े बाबा जी कब तक राजमहल की राजनीति करेंगे, सत्ता पाने और जनसेवा हेतु जनयात्रा करके जनता का सुख दुख जानना ही होता है। तभी जनता उन्हें अपना सरताज बनाती है। रायपुर में जब कुछ पत्रकारों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से बाबा की टिप्पणी पर सवाल किया तो उनका निहायत ही सधा हुआ और बाबा के प्रति सम्मानजनक जवाब आया। श्री बैज ने कहा- बाबा हम सबके आदरणीय हैं, अनुभवी नेता हैं, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें तमिलनाडु और पांडुचेरी का ऑब्जर्वर नियुक्त किया था। दोनों राज्यों में उन्होंने अच्छा काम किया। उन्हें अब दिल्ली की राजनीति करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क पर “मक्का- जाम

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सड़क पर सुखाया जा रहा है मक्का, आवागमन हुआ अवरुद्ध

किलोमीटर तक सड़क जाम जनप्रतिनिधि मौन

बकावंड बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सतोषा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क इन दिनों ग्रामीणों की सुविधा के बजाय “मक्का सुखाने के मैदान” में तब्दील हो गई है। सतोषा, चिकलपदर, गोटीगुड़ा और आसपास के कुछ बड़े किसानों द्वारा लगभग एक किलोमीटर तक सड़क पर मक्का फैलाकर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है।सड़क के दोनों किनारों पर लकड़ी और बांस लगाकर अस्थायी घेराबंदी कर दी गई है, जिससे आम लोगों, बाइक चालकों और चार पहिया वाहनों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह मक्का से ढकी दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क सुविधा देकर आवागमन आसान बनाना था, लेकिन यहां सड़क को निजी उपयोग में लेकर खुलेआम कब्जा कर लिया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी लंबी दूरी तक सड़क घेरकर मक्का सुखाने की अनुमति किसने दी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही काम कोई गरीब या सामान्य ग्रामीण करता तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर देता, लेकिन प्रभावशाली किसानों के मामले मे अधिकारी और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।ग्रामीणों ने इसे सड़क सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है।

उनका कहना है कि रात के समय सड़क पर फैले मक्का और लगाए गए अस्थायी अवरोध किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। लगातार दुर्घटना की आशंका बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क को निजी खेत और खलिहान की तरह इस्तेमाल करने वालों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर नियम केवल आम लोगों तक ही सीमित रहेंगे? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और सड़क को जल्द खाली कराने की मांग की है।

वर्सन:दिए हैं कार्रवाई के निर्देश

मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को सड़क खाली कराने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। करपावंड थाना प्रभारी को भी कार्रवाई के लिए कहा है।

1.20 लाख शिक्षकों की सेवा पुस्तिका का ऑडिट नही

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हर विकासखंड में लगाया जाए विशेष शिविर: टीए

जगदलपुर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने प्रदेश के 1.20 लाख एलबी संवर्ग के शिक्षकों की सेवा पुस्तिका के ऑडिट से जुड़ी लंबित समस्याओं को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक और कोष लेखा एवं पेंशन संचालक को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

.एसोसिएशन ने मांग की है कि शिक्षकों को परेशानी से बचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विशेष कैंप आयोजित किए जाएं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र परिक ने संयुक्त रूप से बताया कि सेवा पुस्तिका का समय पर और त्रुटिरहित ऑडिट होना शिक्षकों के भविष्य के लिए बेहद अनिवार्य है।संविलियन पूर्व की सेवा की गणना, पदोन्नति, समयमान, समतुल्य वेतनमान, सातवां वेतनमान और आगामी समय में सेवानिवृत्ति के मामलों को देखते हुए यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए। अभी जो सिस्टम है उसमे डीडीओ द्वारा सेवा पुस्तिका को कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर, तथा कुछ जिलों में स्वयं शिक्षक द्वारा कोष लेखा एवं पेंशन के संभागीय कार्यालय ले जाकर आडिट कराया जाता है। सेवा पुस्तिका के समयबद्ध ऑडिट और सत्यापन के लिए शिक्षकों को अवांछित वित्तीय भार का सामना करना पड़ता है। अक्सर यह देखा गया है कि ऑडिट कार्य को गति देने के लिए शिक्षकों से आर्थिक सहयोग या अनुचित साधनों की अपेक्षा की जाती है। सेवा पुस्तिका के ऑडिट को पूर्णतः निःशुल्क और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि शिक्षकों को किसी भी प्रकार का आर्थिक मानसिक तनाव न झेलना पड़े।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:

एसोसिएशन ने खंड शिक्षा कार्यालय स्तर पर कैंप का आयोजन कराने ताकि शिक्षकों को अपनी सेवा पुस्तिका के ऑडिट के लिए जिला मुख्यालय या कोष लेखा कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए प्रत्येक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विशेष कैंप लगाया जाए, जिससे शिक्षकों के समय की बचत हो और कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो सके।शिक्षकों की संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि शिक्षाकर्मी, पंचायत, नगरीय निकाय का ऑडिट स्थानीय नियमों के तहत स्थानीय निधि संपरीक्षा के माध्यम से कराया जाए। शासकीय सेवा में संविलियन होने के बाद की संपूर्ण सेवा अवधि का ऑडिट कोष लेखा एवं पेंशन के माध्यम से कराया जाए , ताकि भविष्य में पेंशन व अन्य स्वत्वों के भुगतान में कोई तकनीकी बाधा न आए।

पेंशन और एरियर के मामले अटके

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने विशेष आग्रह करते हुए कहा कि सेवा पुस्तिका का ऑडिट न होने के कारण वर्तमान में कई शिक्षकों के एरियर भुगतान, और सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षकों के पेंशन निर्धारण के मामले अटके हुए हैं। इससे शिक्षकों में भारी आक्रोश और चिंता है। एसोसिएशन ने शासन से मांग की है कि प्रदेश के एलबी संवर्ग के शिक्षकों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

मोबाइल फोरेंसिक वैन सेवा का शुभारंभ

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जगदलपुर बोधघाट रोड जगदलपुर स्थित क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला में छत्तीसगढ़ शासन गृह (पुलिस) विभाग क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला एवं जिला पुलिस बस्तर के संयुक्त तत्वावधान में मोबाइल फोरेंसिक वैन का शुभारंभ किया गया। महापौर संजय पांडेय, निगम अध्यक्ष खेमसिंह देवांगन, एमआईसी सदस्य निर्मल पाणिग्रही, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, निरीक्षक, पुलिस अधिकारी सहित स्टाफ मौजूद रहे।

जानलेवा सफर

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जगदलपुर नक्सलमुक्त हो जाने के बाद भी बस्तर में इस तरह के सवारी वाहन चालक यात्रियों की जान से सरेआम खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जीपों में अंदर तो ठूंस ठूंस कर सवारियां भरी ही जाती हैं, हुड पर अगल बगल भी बेतहाशा यात्रियों को लटका कर ले जाया जाता है। मौत के इस सफर को रोकने न तो पुलिस विभाग कोई कदम उठा रहा है और न ही सड़क परिवहन विभाग।

राजहरा खदान का देव माइनिंग ठेका कार्य जल्द प्रारंभ किया जाए। सीटू ने ज्ञापन सौंपा और प्रबंधन से विस्तृत चर्चा की

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दल्लीराजहरा डीजल की कमी के कारण विगत एक सप्ताह से राजहरा लौह अयस्क समूह में विभिन्न ठेका कार्य बंद हो गए थे। जिसमें से राजहरा यंत्रीकृत खान की कोकान साइट जो देव माइनिंग कंपनी द्वारा संचालित है, उसका कार्य आज तक प्रारंभ नहीं हो पाया है। जिसके कारण जहां एक और उत्पादन का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ो ठेका श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं । जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। लेकिन इस मामले में अभी तक ठेकेदार और प्रबंधन के द्वारा किए जा रहे प्रयासों और परिणाम की कोई भी जानकारी यूनियन व श्रमिकों को नहीं दी जा रही है। कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आने से जहां एक ओर ठेका श्रमिकों में आक्रोश बढते जा रहा है, वहीं दूसरी ओर तरह-तरह की शंकाओं को भी बल मिल रहा है। डीजल की कमी के कारण ही कलवर,डुलकी, महामाया, दल्ली,झरनदल्ली, इत्यादि में भी काम बंद था। लेकिन इन सभी कार्यक्षेत्र में विगत दिनों से कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। परंतु केवल राजहरा यंत्रीकृत खान का ठेका कार्य आज तक प्रारंभ नहीं हो सका है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सीटू यूनियन के पदाधिकारी एवं श्रमिकों ने राजहरा खदान के प्रभारी महाप्रबंधक जयप्रकाश सर को ज्ञापन सौंपा और मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। यूनियन ने स्पष्ट कहा कि जब अन्य सभी खदानों का कार्य प्रारंभ हो चुका है तो केवल राजहरा खदान का काम बंद रखना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। अगर डीजल की परेशानी है तो सब जगह है, केवल राजहरा के लिए नहीं है। इसी के साथ यूनियन ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना किसी पूर्व सूचना के ठेकेदारों द्वारा अचानक काम बंद किया गया है, जो कि अवैधानिक कामबंदी के दायरे में आता है। इसलिए काम बंदी के दौरान श्रमिकों का वेतन भुगतान नियमानुसार किया जाना चाहिए । भविष्य में इस तरह काम बंद ना हो इसे भी प्रबंधन को सुनिश्चित करना चाहिए। जिस पर महाप्रबंधक प्रभारी श्री जयप्रकाश जी ने कहा कि डीजल की कमी के संबंध में आज ही एक विस्तारित बैठक ठेकेदारों के साथ रखी गई है, जिसमें जल्द से जल्द सकारात्मक निराकरण कर लिया जाएगा। कामबंदी के दौरान श्रमिकों के वेतन के संबंध में कार्मिक विभाग से चर्चा कर जो नियम में होगा वह भुगतान करने में प्रबंधन पीछे नहीं हटेगा । भविष्य में काम बंदी ना हो इस संबंध में भी प्रबंधन गंभीरता से विचार कर रणनीति तैयार कर रहा है। जिसके परिणाम जल्द ही सामने आएंगे। इस बैठक में ठेका कार्य में मशीनों के रखरखाव में हो रही कमजोरी पर भी चर्चा की गई। प्रबंधन ने सभी मुद्दों को गंभीरता से लेने और सकारात्मक निराकरण करने का आश्वासन दिया है।सभी खदानों में अचानक की गई कामबंदी के दौरान सभी ठेका श्रमिकों का वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मुख्य महाप्रबंधक खदान को भी एक ज्ञापन सौंपा गया है।ज्ञानेन्द्र सिंहअध्यक्षसीटू राजहरा।

राहुल गांधी के अमर्यादित बयान के विरोध में भाजयुमो ने फूंका पुतला, कहा “संवैधानिक मर्यादाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं”

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जगदलपुर: कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा देश के शीर्ष नेतृत्व पर की गई अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। इस अभद्र टिप्पणी के विरोध में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने आसना चौक पर एकत्रित होकर राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। भाजयुमो जिला अध्यक्ष अभिलाष यादव ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला।भाजयुमो जिला अध्यक्ष अभिलाष यादव ने कहा कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति की गई अमर्यादित एवं अशोभनीय टिप्पणी न केवल निंदनीय है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का भी घोर अपमान है।

अभिलाष यादव ने आगे कहा कि जिस पद की गरिमा और जिम्मेदारी का निर्वहन नेता प्रतिपक्ष को करना चाहिए, उसी पद की मर्यादा को राहुल गांधी ने अपनी असभ्य एवं अलोकतांत्रिक भाषा से तार तार करने का काम किया है। देश की जनता ऐसे अहंकारी, गैरजिम्मेदार और स्तरहीन राजनीतिक आचरण को कभी स्वीकार नहीं करेगीl कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए lइस दौरान भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला पदाधिकारी,मण्डल अध्यक्ष,वरिष्ठ भाजपा नेता और भारी संख्या में युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहेl

चित्रकोट में विवादित पोस्ट से तनाव गहराया, सरपंच समर्थकों ने बजरंग दल को कहे अपशब्द

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कांग्रेसी सरपंच पर गांव का माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप

पूर्व सरपंच और माहरा समाज के लोगों ने सरपंच पर लगाया मतांतरितों को संरक्षण देने का आरोप

अर्जुन झा

जगदलपुर चित्रकोट क्षेत्र में गत दिनों एक ईसाई मतांतरित व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव के कफन दफन को लेकर उपजा विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। दरअसल चित्रकोट के कांग्रेसी सरपंच भंवर मौर्य पर धर्मांतरण करने वालों की हिमायत करने और सरपंच समर्थकों द्वारा बजरंग दल पर सोशल मीडिया के माध्यम से अमर्यादित टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इसे लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने चित्रकोट सरपंच व कांग्रेस नेता भंवर मौर्य और उनके समर्थकों के खिलाफ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए थाना लोहंडीगुड़ा व चित्रकोट पुलिस चौकी में एफआईआर दर्ज कराने हेतु आवेदन दिया है।

माहरा समाज के युवा सिकंदर कश्यप ने कहा है कि चित्रकोट क्षेत्र में एक ईसाई मतांतरित व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। मृतक के परिजनों द्वारा शव को ईसाई कब्रिस्तान ले जाने के बजाय हिंदू समाज के मुक्तिधाम में कफन दफन करने की योजना बनाई जा रही थी। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के जिला व स्थानीय पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और समाज प्रमुखों की उपस्थिति में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अन्य धर्म के व्यक्ति का अंतिम संस्कार हिंदू समाज के मुक्तिधाम में नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान चित्रकोट के वर्तमान सरपंच भंवर मौर्य ने नियमों के विपरीत जाकर ईसाई मतांतरित परिवार का पक्ष लिया, जिसका स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। अंततः प्रशासन के हस्तक्षेप और भारी विरोध के बाद शव को जगदलपुर स्थित ईसाई कब्रिस्तान ले जाया गया। बजरंग दल जिला सह संयोजक सनी रेली ने बताया कि मामला शांत होने के बाद सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के उद्देश्य से सरपंच भंवर मौर्य के समर्थकों द्वारा एक वीडियो बनाया गया है।

इस वीडियो को इंस्टाग्राम आईडी ग्राम पंचायत चित्रकोट से पोस्ट किया गया है। वीडियो में गलत कृत्यों का विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को “गांव का माहौल खराब करने आए बेरोजगार दल” और सरपंच को ‘शेर’ के रूप में दर्शाया गया। इस पोस्ट के नीचे सरपंच समर्थकों और युवा कांग्रेस के नेता सहित कुछ अन्य दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदू संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित और अपशब्दों का प्रयोग किया गया, जिसकी स्क्रीनशॉट पुलिस को सौंपी गई है। पूर्व सरपंच बुटकी बाई ने वर्तमान सरपंच भंवर मौर्य पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि भंवर मौर्य गांव की रीति नीति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा है।माहरा समाज के पदाधिकारी घनश्याम नाग ने भी इस कृत्य की निंदा करते हुए समाज की परंपराओं के साथ खिलवाड़ न करने की चेतावनी दी है।इस दौरान अजय बघेल, नानीराम, किशोर सुर, झितरू कश्यप, कोसरु कश्यप, रुपनाथ कश्यप, लछिंद कश्यप, जनिल ठाकुर, मनीराम कावड़े, रतिराम चौहान, मानकू राम, जगत राम नाग, अनिल नाग, सिकंदर कश्यप, घनश्याम नाग, होमेश राठौर, योगेश रैली, मुन्ना बजरंगी, विवेक शुक्ला, गुड्डू, सहदेव, श्रीधर, लखन ठाकुर ,विनोद पटेल सहित बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता और चित्रकोट के ग्रामवासी उपस्थित थे।

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