वर्तमान मे कोविड 19 का द्वितीय चरण मे जो विभत्स रूप सामने आया है उससे निपटने हेतु शासन द्वारा दिनांक 10/04/2021 दिन शनिवार से बालोद जिले मे सम्पूर्ण लॉकडाउन किया जा रहा है जिसमे दवाईयां छोड़ कर सभी दैनिक उपयोग की सामग्रिया लगभग बंद रहेगी |
मेरा आप सभी प्रबुध्धजनो से विनम्र निवेदन है की दैनिक उपयोगी वस्तुओं का भंडारण आवश्यक रुप से कर लेवें। इसके उपरांत लॉकडाऊन के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी, समस्या या फिर आवश्यकता हो तो दुरभाष के माध्यम तत्काल सुचित करे जिससे की आपकी समस्या का निराकरण कर मूझे आपकी सेवा का अवसर प्राप्त हो सके ।
आपकी सेवा….मेरा सौभाग्य
मानव सेवा हि……माधव सेवा है
अत्यंत आवश्यक हो तभी घर से निकलें, स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहे इस भयावह परिस्थिती मे भी मुस्कुराते रहें ।
विश्वव्यापी कोरोना महामारी के संक्रमण के मद्देनजर आज दिनांक 10.04.2021 के शाम 6:00 बजे से सम्पूर्ण बालोद जिला में लागू हो रहे लॉकडाउन के परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर महोदय व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय के द्वारा बालोद, दल्ली राजहरा, डौंडी लोहारा शहर में फ्लैगमार्च किया गया।
वर्तमान कोरोनावायरस संक्रमण को देखते हुए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वितरण किया चव्यनप्राश
माताओं के फीजिओथेरेपी के लिए नये बने सेंटर का निरीक्षण कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन आज स्थानीय वृद्धाश्रम के औचक निरीक्षण पर पहुंचे और व्यवस्था का जायजा लिया एवं वर्तमान कोरोनावायरस संक्रमण के चलते समाज एवं कल्याण विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए साथ ही उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया और माताओं को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए चव्यनप्राश का वितरण किया एवं फीजीयोथेरेपी के लिए आए नये मशीनों का भी निरीक्षण किया उन्होंने माताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने का आश्वासन दिया |
इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह जिला कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के जिलाध्यक्ष अवधेश झा समाज कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती वैशाली मरडवार एवं डा विवेक सिंह,जी आर ठाकुर,मंगल राम नाग,सरिता,खातुन,ज्योती सहित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे |
विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन की अनुसंशा पर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी एवं उधोग एवं आबकारी मंत्री कवासी लखमा जी ने स्वेच्छानुनान मद से हितग्राहियों को राशि वितरित की |
जिन जरूरतमंद हितग्राहियों को राशी वितरित की गई उनमें संजीव दत्ता 50000 उमेश पंड्या 15000 सुमित्रा गुप्ता 10000 चैन सिंह ठाकुर 15000 पुरषोत्तम नथ्थानी 15000 ईश्वर बघेल 15000,रामबती 5000 को प्रदान किया |
दल्लीराजहरा – दल्लीराजहरा एवं चिखलाकसा क्षेत्र (डौंडी ब्लॉक) में जिस प्रकार से कोविड 19 के संक्रमण से प्रभावित मरीजों कि संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है | कोरोना से प्रभावित मरीजों के उपचार हेतु एकलव्य महाविद्यालय लाल मैदान एवं शहीद अस्पताल को कोविड सेंटर बनाया गया है वर्तमान उक्त सेंटर में एक भी बेड खाली नहीं है जो कि पूर्ण रूप से भर चूका है | जिसके कारण कोरोना से संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने हेतु मजबूर होना पड़ रहा है | मरीज के होम आइसोलेशन में होने से घर एवं आसपास के घरों के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है |
कोरोना से प्रभावित मरीजों में लगातार वृद्धि एवं नागरिकों में भय कि स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए शीघ्र अतिशीघ्र कोविड सेंटर बनाने हेतु सांसद प्रतिनिधि जिलाध्यक्ष अजजा मोर्चा भाजपा विक्रम ध्रुवे द्वारा एसडीएम् को ज्ञापन सौंपा |
गुड़ाखू सेवन और गुटखा खाने वाले शौकीनों के लिए बुरी खबर सामने आ रही है. कोरोनाकॉल के प्रथम लॉकडाउन के दौरान इन दोनों सामग्रियों की जमकर कालाबाजारी देखने को मिली थी. ऐसा ही कुछ इस बार भी शुरू होने की संभावना अब चरम पर है.
कुछ पान दुकान संचालकों ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गुड़ाखू की एक डिब्बी Rs 7 में वह विक्रय कर रहे हैं और इसका पूड़ा Rs 252 मैं आता है. लेकिन अब इसी पूड़े के लिए थोक विक्रेता Rs 330 से Rs 500 तक ले रहे हैं. वहीं, एक प्रतिष्ठित गुटखा कंपनी का Rs 5 का पाउच वे Rs 125 पूड़े के हिसाब से लेते थे. लेकिन, अब यही पूड़ा Rs 150 का हो गया है. कमोबेश यही स्थिति कुछ अन्य सामग्रियों की भी है.
लॉकडाउन से पूर्व, इन छोटे व्यापारियों को अब यह चिंता सताने लगी है कि जिस पूड़े में वे Rs 20-50 कमा पाते थे; अब वह आमदनी भी बंद या कम होने की कगार पर है क्योंकि इन्हें मजबूरी में Rs 20 में गुटके के 3 पाउच बेचना पड़ रहा है.
अपुष्ट सूत्रों की माने तो शहर से दूर आसना ग्राम में राजधानी से थोक में आने वाले गुड़ाखू-गुटके की वाहनों को यहां के थोक विक्रेता पहले ही खाली कर रहे हैं और किसी अन्य स्थान पर स्टॉक कर रहे हैं, ताकि इसे बाद में अधिक दामों पर बेचा जा सके.
जानकारी देते हुए निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि सामग्रियों की जमाखोरी, कानून के विरुद्ध है और अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसा किसी के द्वारा अगर किया जाता है तो निश्चित तौर पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी.
दल्लीराजहरा – वार्ड क्र 10 गाडरपूल के आगे खड़ी बोलेरो पिकअप वाहन में बाइक सवार द्वारा टक्कर मारने से युवक मौत हो गई | घटना कल रात्रि 10 बजे गाडरपुल के आगे लल्लन जयसवाल के पास की है मृतक अपने बाइक क्र CG07 LM 8705 से गाडरपूल की ओर जा रहा था कि तभी मेन रोड पर खड़ी बोलेरो पिकअप वाहन CG08 AC 3531 में जा घुसा और टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि
मृतक के सर एवं अन्य हिस्सों में काफी चोट लगी जिसे तत्काल शहीद अस्पताल ले जाया गया जहाँ उपचार के दौरान मृत्यु हो गई | मृतक का नाम कृष्णकांत ठाकुर पिता हरिराम ठाकुर उम्र 28 वर्ष निवासी दल्ली राजहरा का है जो कि CISF में नोकरी करता था | मृतक के बारे में सुचना देने वाले का नाम नारायण पिता फूलसिंह हल्बा 45 वर्ष वार्ड बॉय शहिद हॉस्पिटल है |
सुन्दरराज पी. पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रंेज, विनीत खन्ना, पुलिस उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज, उ0ब0 कांकेर, पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर मोहित गर्ग, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चन्द्राकर, नारायणपुर के निर्देषन में जिले में तैनात जिला बल, छसबल, आईटीबीपी, बीएसएफ सुरक्षा बलों द्वारा लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है इसी तारतम्य में दिनांक 10.04.2021 को थाना कुरूषनार से जिला बल एवं आइटीबीपी की संयुक्त पुलिस पार्टी आर0ओ0पी0 एवं रोड डी-माइनिंग की कार्यवाही पर कुरूषनार से नारायणपुर की ओर रवाना हुई थी।
रोड डी-माइनिंग की कार्यवाही के दौरान थाना कुरूषनार से करीबन 04 कि0मी0 दूरी पर कोषा सेंटर खालेपारा के पास रोड से सटे जंगल में दो अलग-अलग स्थानों पर 02 नग टिफीन बम (01 टिफीन बम वजनी करीबन 02 कि0ग्रा0 एवं 01 टिफीन बम वजनी करीबन 01 कि0ग्रा0 ) लोकेट किया गया। बीडीएस टीम नारायणपुर द्वारा दोनों आईईडी को सावधानी पूर्वक डिफ्यूज किया गया और माओवादी नक्सलियों के सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के नापाक मन्सुबें को असफल किया गया।
माओवादी नक्सलियों में सुरक्षा बलों से आमने-सामने की लड़ाई करने कि हिम्मत नहीं होती, वे अपनी मौत के डर के कारण छीपकर वार करना ही जानते है, इसलिए माओवादी नक्सली बहुतायात मात्रा में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आईईडी का प्रयोग करते है। नक्सलियों की इस रणनीति को जानते हुए सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर रोड डी-माईनिंग की कार्यवाही कर माओवादियों द्वारा आईईडी लगाये जाने के संभावित स्थानों पर सर्चिंग की कार्यवाही की जा रही है, जिससे पिछले कुछ दिनों में लगातार नक्सलियों द्वारा लगाये गये आईईडी बरामद करने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है।
जगदलपुर-बस्तर जिले में प्रशासन के नए आदेश अनुसार व्यापार संचालन हेतु प्रातः 8 बजे से शाम 6 बजे तक समय निर्धारण किया है कोरोना काल मे छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष ने प्रातः 2 घण्टे अतिरिक्त व्यापार संचालन की अनुमति हेतु मांग की है।
युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव ने बस्तर कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा की जिला प्रशासन के द्वारा बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए समस्त व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर हाल ही में आदेश जारी करके प्रातः 8ः00 बजे से लेकर संध्या 6ः00 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।
संबंधित आदेश के जारी होने के पश्चात् शहर में सुबह के दौरान नाश्ता इत्यादि का ठेला गाड़ी लगाने वाले सैकड़ों परिवार एवं व्यायाम शाला (जिम) संचालक काफी असमंजस की स्थिति में हैं। क्योंकि प्रशासन के द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का समय प्रातः 8ः00 बजे से निर्धारित हैं। जबकि इन सभी का व्यवसाय ही प्रातः 6ः00 बजे से शुरू होता है और लगभग दो-तीन घण्टे में ही पूरा हो जाता है और इतने समय में ही अपना व्यवसाय चलाकर यह सभी परिवार अपना जीवन-यापन करते हैं।
प्रशासन के द्वारा समय निर्धारण को लेकर जारी किये गए आदेश से ऐसे छोटे-गरीब व्यवसायी कोरोना वायरस से पहले भूख से ही मर जायेंगे। क्योंकि यह आदेश उन सभी गरीबों के लिए सम्पूर्ण लाॅकडाउन से कम नहीं है।
प्रसाशन बस्तर जिले के छोटे-गरीब व्यावसायियों के प्रति उदारतापूर्वक विचार करके व्यवसाय संचालन के समय में परिवर्तन करते हुए प्रातः 6ः00 बजे से संचालन की अनुमति दे ताकि वह भी बिना किसी चिंतामय वातावरण के व्यवसाय करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
बीजापुर:–एक असम की लेखिका ने लिखा कि जो जवान बीजापुर एनकाउंटर में शहीद हुए उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि वो वेतन लेकर काम करते हैं । हालांकि महोदया गिरफ्तार हो गयी हैं लेकिन उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि फिर तो सीमा पर शहीद होने वाले सैनिक को भी शहीद का दर्जा नहीं देना चाहिए क्योंकि वो भी सैलरी लेता है ? सिर्फ आपके जैसे कीबोर्ड वारियर्स जो कमरे में बैठ कर वैचारिक उल्टियाँ करते हैं उनकी गिरफ्तारी पर ही आपको क्रांतिकारी का दर्जा मिलना चाहिए ।
एक बहुत ही “उच्च कोटि” के सामाजिक कार्यकर्ता ने लिखा कि सिपाही बंदूकधारी मजदूर होता है । अपने बच्चों को पालने के लिए बंदूक उठाता है और जंगल में जाकर आम जनता को मारता है । बिलकुल सही कहा आपने कि अपने परिवार का पेट पालने के लिए ही हम पुलिस में आते हैं, सैलरी के लिए ही लेकिन जब वर्दी पहनते हैं तो उसके अंदर से कैसी फीलिंग आती है वो आप कभी समझ नहीं सकते । देश के लिए कुछ करने का जज़्बा उस सैलरी पर भारी पड़ जाता है । मालूम नहीं होता कि किस गोली पर हमारा नाम लिखा है लेकिन
फिर भी जाते हैं ऑपरेशन में इसलिए कि कल को हमारे बच्चे ये ना कहें कि पापा तो पुलिस में थे मम्मा लेकिन कुछ कर नहीं पाए,नक्सली तो अब शहरों में भी पहुँच गए हैं । इन “उच्च कोटि/इलीट क्लास” के सामाजिक कार्यकर्ता को लगता है कि पुलिस अशांति फैला रही तो बता दीजिए कि नक्सलियों ने पिछले तीन दशकों में कहाँ कहाँ शांति लायी है ? आप सोच से अच्छी तो हमारे प्रधान आरक्षक शहीद रमेश जुर्री की सोच थी -” साब जी ये नक्सली लोग बस अपना अस्तित्व बचाने में लगा है,भोला भाला गाँव वालों को पहले बहकाता है जल,जंगल,जमीन के नाम पर और जब कोई नहीं मानता या विरोध करता है तो उसको मुखबिर बोल कर जनताना अदालत में मार देता है,जनता डरके आगे विरोध नहीं करता.. हम लोगों का पहुँच नहीं है वहाँ तक इसलिए हमारे ऊपर भरोसा नहीं जनता को.. जहाँ जहाँ कैम्प खुलता है साब जी वहाँ का जनता क्यों हमारे साथ हो जाता जरा बताइए ?”
एक महोदया ने लिखा कि इस लड़ाई में दोनों तरफ सिर्फ आदिवासी ही मारे जाते हैं । महोदया के ज्ञान के लिए बता दूँ कि हालाँकि ये आदिवासी बहुल इलाका है लेकिन जो फ़ोर्स यहाँ लड़ती है वो सम्पूर्ण भारतवर्ष से आती है । सीआरपीएफ में यू पी,बिहार,झारखंड, तमिलनाडु, केरल,राजस्थान, नागालैंड,जम्मू हर जगह से लड़के नक्सलियों से लोहा लेने के लिए आते हैं । अभी जो जवान नक्सलियों की कैद में बैठा हुआ है फिर भी शेर की बेफिक्री के साथ दिख रहा है वो भी जम्मू का ही रहने वाला है । शहीद दीपक भारद्वाज भी आदिवासी नहीं था बल्कि उसकी तो जाति भी मुझे पता नहीं, आप खोजियेगा, हमारा काम बस नक्सली खोजना है । यहाँ फ़ोर्स का हर जवान
बस्तरिया बन जाता है, वो किसी जाति का नहीं रहता,किसी धर्म का नहीं रहता ,वो आदिवासी नहीं .. भारतवासी बन जाता है । सोसल मीडिया पर लिखना बहुत आसान है । ज़मीन पर उतरना बहुत मुश्किल । ऐसी सोच से नक्सलियों और उनके समर्थकों के हौसले बुलंद होते हैं । शहीदों की शान में गुस्ताखी होती है । गुस्ताखी होती है उस माँ की कोख पर जिसने इन शहीदों को जन्म दिया,उस विधवा बीवी पर जिसका सुहाग देश के लिए मिट गया, उस बहन पर जो कभी अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएगी ।
“बुद्धिजीवी” बनने के चक्कर में “बुद्धूजीवी” ना बने ।