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अब दिल से होही दिल के गोठ अपन बोली भाखा में

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  •  हल्बी गोंडी बोली में दक्ष होंगे गृहमंत्री विजय शर्मा
  • गोंडी बोलने वाले बस्तरिहा शिक्षक से लेंगे प्रशिक्षण
  • माओवाद से लड़ने लोगों के मर्म को समझने पहल

अर्जुन झा-

जगदलपुर अपने छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा भी अजब गजब अंदाज वाले हैं। कभी वे अपनी जान की परवाह न करते हुए सीधे नक्सलियों की मांद में घुस

जाते हैं, तो कभी धुर नक्सल प्रभावित किसी गांव में जाकर वहां के लोगों के साथ बैठ उनका दुख दर्द साझा करने लग जाते हैं और कभी नक्सलियों के समक्ष वार्ता की भी पेशकश रख देते हैं। उनका यह अजब गजब अंदाज सभी को भाने लगा है। अब तो शर्मा जी से जुड़ी एक और बड़ी ही निराली खबर सामने आई है कि वे गोंडी हल्बी बोली में पारंगत होने जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने बस्तर से ट्यूटर भी बुलवाए हैं। ऐसे में आपके मन में यह विचार उठ रहे होंगे कि शर्मा जी के निर्वाचन क्षेत्र कवर्धा में तो बैगा आदिवासी ज्यादा हैं, फिर भला उन्हें हल्बा गोंड़ आदिवासियों की बोली सीखने की क्या जरूरत? तो हम आपको बता दें कि विजय शर्मा गृहमंत्री के साथ साथ बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। बस्तर संभाग नक्सल समस्या से सर्वाधिक प्रभावित है और यहां हल्बा, गोंड़, भतरा आदिवासी ज्यादा हैं। दरअसल विजय शर्मा इन आदिवासियों के दिल की बात को उनकी ही बोली भाषा में दिल से समझना चाहते हैं।

आदिवासियों का दर्द समझने के लिए बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री व छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने गोंडी भाषा सीखने के लिए बस्तर से एक गोंडी भाषा सिखाने वाले शिक्षक को हायर किया है। यह शिक्षक राजधानी रायपुर में रहकर गृहमंत्री विजय शर्मा को गोंडी भाषा की बारीकियों से अवगत कराएंगे। प्रभारी मंत्री विजय शर्मा तब सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने गृहमंत्री का कार्यभार सम्हालते ही सीधे बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिलों के अंदरूनी इलाकों में अपने कदम रखे थे। नक्सली हमले के बाद सुरक्षा बलों के कैंप में पहुंचकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवानों की हौसला अफजाई की, उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ पूरी शिद्दत से खड़ी है। यही नहीं विजय शर्मा धुर नक्सलग्रस्त गांव में भी जा धमके और एक ग्रामीण की झोपड़ी के द्वार पर बैठकर उन्होंने गांव वालों के दुख दर्द को करीब से देखने, सुनने और समझने की कोशिश की थी। तब कुछ भाषागत कठिनाई उनके समक्ष आई थी। उस दौरान श्री शर्मा गांव के लोगों को अपना निजी मोबइल फोन नंबर देकर आए थे और कहा था कि किसी भी तरह की दिक्कत या समस्या आए तो मुझे फोन करना। श्री शर्मा के रायपुर लौटने के चंद घंटे बाद उस गांव के किसी युवक ने विजय शर्मा को फोन कर बिजली की समस्या से अवगत कराया था। तब श्री शर्मा ने तुरंत विद्युत कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर गांव की बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देश दिए थे। दो दिन बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने उस युवक को खुद फोन लगाकर बिजली बहाली होने या न होने बाबत जानकारी ली थी। गृहमंत्री विजय शर्मा की इस संवेदनशीलता ने पूरे गांव का दिल जीत लिया। अब श्री शर्मा पूरे बस्तर का दिल जीतने की कवायद में लग गए हैं और यह तभी संभव है जब आम बस्तरिहा बोली भाषा में बस्तर के लोगों का दिल टटोला जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विजय शर्मा गोंडी हल्बी बोली सीख रहे हैं। बस्तरवासियों के दर्द को समझने के लिए खालिस बस्तरिहा रंग में रंग जाने की जरूरत है और इसके लिए प्रभारी मंत्री विजय शर्मा गोंडी भाषा सीखने की कोशिश कर रहें हैं जिसे सीधे तौर पर उनका सराहनीय प्रयास ही कहा जाना चाहिए। ज्ञात हो कि बस्तर माओवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित है और इसमें आदिवासी ही पिस रहे हैं और आदिवासियों की बड़ी आबादी कोया जिसे गोंड भी कहा जाता है वह कुछ ज्यादा ही प्रताड़ित है। माओवादियों का शिकार कोया समुदाय के लोग हो रहे हैं। कोया समाज के नेता भी दो भागों में विभक्त हैं, जिनके अपने -अपने दावे प्रतिदावे हैं। लेकिन कोया आदिवासियों की भावनाओं को जमीनी स्तर पर समझने की कोशिश नहीं की जा रही है। सरल शब्दों में उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की जा रही है। जिससे सात दशकों से यह मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है।

वक्फ संशोधन कानून से देश के मुसलमानों का भला होगा : नदीम बडगुजर

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दल्ली राजहरा भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के नदीम बडगुजर ने केन्द्र की एन.डी.ए. सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम में किये गये संशोधन का स्वागत करते हुए कहा कि, यह कानून देश के गरीब मुसलमानों को न्याय देने वाला कानून है। वक्फ एक्ट में संशोधन एवं सुधार समय समय के अनुसार होते रहना चाहिये, वतर्मान में जो विसंगतिया थी उसे दूर किये जाने के लिये यह कानून लाया जा रहा है, जिसके लिए हम माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं एन.डी.ए. सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस कानून का स्वागत करते है। नदीम ने कहा कि वक्फ बोर्ड गरीब मुसलमानों के उत्थान एवं कल्याण के लिये बनाया गया है लेकिन वक्फ बोर्ड के एक्ट की शक्तियों का सिर्फ दुरूपयोग ही हो रहा है जिससे देश के संघराज्य एवं राज्य वक्फ बोडों अधिकार व शक्तियां प्रदान करने को प्राप्त असीमित अधिकार एवं शक्तियों की के कारण यह मजहबी जमींदारी, भ्रष्टाचार एवं भूमाफियाओ को संरक्षण दे रहा है। वतर्मांन में जो वक्फ

एक्ट है वो पूरी तरह से निरंकुश है और इससे आम मुसलमानों को कोई फायदा नही हो रहा है। संशोधित वक्फ कानून में जमींदारी की दादागिरी तथा भूमाफिया एवं अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसने वाला कानून है। वक्फ संपत्तीयों के मामलों में शासन को वाला कानून है। नदीम बडगुजर ने आगे कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 09 एवं 14 में बदलाव से बोर्ड और अधिक सशक्त एवं प्रभावशील होगा, वक्फ संपत्ती का पंजीयन सत्यापन से होगा जिससे वक्फ कानून 2013 के दुरूपयोग को रोका जा सकेंगा। कलेक्टर को वक्फ संपत्ति के मामले में शामिल किये जाने से वक्फ बोर्ड का कार्य और अधिक प्रभावशील होगा। नये संशोधन कानून से मुस्लिम समाज के गरीब, तलाकशुदा, विधवा के सामाजिक आर्िक एवं शैक्षणिक विकास के लिये वक्फ बोर्ड कार्य कर सकेगा। पूर्व में भी कॉग्रेस सरकार द्वारा वक्फ एक्ट में समय समय पर संशोधन हुआ है। वक्फ बोर्ड के पास 8.7 लाख करोड़ की संपत्ती, 9.4 लाख एकड़ के लगभंग जमीन है। इसका सदुपयोग होने से निः:संदेह देश के गरीब मुस्लिम समाज को सीधा फायदा होगा व उनकी शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

गंगालूर की कार्यवाही में विस्फोटक सहित 3 नक्सली गिरफ्तार

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जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत डीआरजी बीजापुर, बस्तर फाईटर एवं थाना गंगालूर की संयुक्त टीम ने बुरजी-पुसनार के जंगल से 3 नक्सलियों को विस्फोटक के साथ पकड़ा है। नक्सलियों के कब्जे से टिफिन बम, जिलेटिन स्टीक, नक्सली पर्चे, इलेक्ट्रिक फ्यूज वायर बरामद किए गए हैं।

पकड़े गए नक्सलियों के नाम जगती पूनेम ऊर्फ जकती, सुकारू पुनेम ऊर्फ सुखराम व गुट्टा पुनेम बताया गया है। ये नक्सली आइईडी लगाने, मार्ग अवरूद्ध करने, पाम्पलेट बैनर लगाने की घटनाओं में शामिल थे। नक्सलियों के विरूद्ध थाना गंगालूर में वैधानिक कार्यवाही उपरांत उन्हें न्यायिक रिमांड पर न्यायालय पेश किया गया है।

गंदगी के ढेर पर बैठा है बकावंड, जनपद सीईओ की बात नहीं सुन रहे हैं पंचायत सचिव, ग्रामीण परेशान

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  •  सचिव कहते हैं सफाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
  • बस्ती में मक्खी मच्छरों का लगातार बढ़ रहा है आतंक

अर्जुन झा

बकावंड विकासखंड मुख्यालय बकावंड कूड़ा घर बन गया है। चारों ओर कूड़ा करकट के ढेर नजर आ रहे हैं। सालभर से ऐसे हालात बने हुए हैं। बदबू, मच्छर और मक्खीयों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कचरे का उठाव एक साल से नहीं हुआ है। जनपद सीईओ कहते हैं पंचायत सचिव मेरी बात नहीं सुन रहा है और सचिव दलील दे रहे हैं कि सफाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे जाहिर होता है कि एक जनपद सीईओ साधारण से पंचायत सचिव पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। बात चाहे जो भी हो, मगर बदइंतजामी का खामियाजा तो ग्रामीणों को भोगना पड़ रहा है।

बिना साफ सफाई के स्थिति कैसी हो जाती है, अगर इसे महसूस करना है तोबकावंड में आपका स्वागत है। बकावंड में हर कदम पर गंदगी आपका स्वागत करेगी, फूल मालाओं से स्वागत और उसकी खुशबू की कल्पना बिल्कुल मत कीजिए, बदबू से नाक भौं सिकोड़ने की तैयारी के साथ आपको बकावंड आना होगा, वरना बहुत पछताएंगे यहां आकर। ग्रामीण बताते हैं कि ग्राम पंचायत गांव की साफ सफाई से पूरी तरह मुंह मोड़ चुकी है।ग्रामीण मरते हैं तो मरें अपनी बला से। ग्रामीणों का चैन से खाना पीना, उठना बैठना, सोना सब कुछ हराम हो गया है। दिनभर मक्खीयां परेशान करती हैं, तो सांझ ढलते ही मच्छर मोर्चा सम्हाल लेते हैं। मच्छर रातभर सोने नहीं देते। मलेरिया, डेंगू फैलने का बड़ा खतरा सबसे शिक्षित गांव बकावंड पर मंडरा रहा है। बकावंड आदिवासी बाहुल्य गांव है और यहां के पंचायत सचिव तथा जनपद सीईओ दोनों दिवासी समुदाय से हैं, लेकिन आदिवासी ही आदिवासियों की जान के दुश्मन बन गए हैं यहां। सफाई नही होने का कारण पूछने पर पंचायत सचिव ओंकार गागड़ा कहते हैं कि मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इसलिए ऐसी स्थिति बनी हुई है,

अगर मजदूर मिल जाएं तो तुरंत सफाई करवा देंगे। वहीं जनपद पंचायत के सीईओ एसएस मंडावी कहते हैं कि सचिव को कई बार बोल चुका हूं लेकिन वह ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सालभर से सचिव को मजदूर नहीं मिल रहे हैं? दूसरा सवाल यह कि जनपद मुख्यालय भी बकावंड में ही है, सीईओ भी इसी गंदगी के बीच से रोज गुजरते होंगे और एक पंचायत सचिव भला अपने सबसे बड़े अफसर का आदेश आखिर क्यों नहीं मान रहा है? खैर इन दोनों के बीच का मसला चाहे कुछ भी हो, मगर गंदगी और सफाई नहीं होने से डेंगू और मलेरिया में मच्छर का दंश तो आम आदमी ही भोग रहा है। अगर समय रहते सफाई नहीं हुई तो पूरे पंचायत क्षेत्र में महामारी फैल जाएगी। इसका जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग नहीं ग्राम पंचायत ही होगी।

विधायक गोयल ने किया छात्र दुर्घटना बीमा राशि का वितरण

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  •  मृत विद्यार्थियों के नाम पर किया गया पौधरोपण

लोहंडीगुड़ा चित्रकोट क्षेत्र के विधायक विनायक गोयल ने विकासखंड अंतर्गत संकुल केंद्र आंजर, मारडूम, तराईभाटा, मांदर, मटनार, अलनार व उसरीबेडा के कुल 10 बच्चों के आकस्मिक दुर्घटना में काल कवलित होने पर उनके परिजनों से घर जाकर व्यक्तिगत रूप से भेंट कर संवेदना व्यक्त की।

विकास खंड लोहंडीगुड़ा के विभिन्न संकुल अंतर्गत अध्ययनरत बच्चे जिनकी दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु हो गई है, उनके शोक संतप्त परिजनों के छात्र बीमा राशि एक एक लाख रुपए का चेक प्रदान किए गए। प्रत्येक मृतक परिवार में एक एक वृक्षारोपण किया गया। विधायक विनायक गोयल के साथ नरसिंह ठाकुर मंडल अध्यक्ष, रैतूराम जिला पंचायत सदस्य, बसंत कश्यप जनपद सदस्य, विनय मौर्य, डमरू भारद्वाज, विकेश रंगारी, चैनूसिंह, डोमूराम, तुलसीराम भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। विधायक श्री गोयल ने शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर आपके साथ सदैव सहयोग के लिए तत्पर रहूंगा। इस अवसर पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी तिवारी, खंड स्त्रोत समन्वयक पीलाराम सिन्हा, संबंधित संकुल शैक्षिक समन्वयक उपस्थित रहे।

लोगों में तिरंगे के प्रति प्रेम और देशभक्ति का जज्बा पैदा करने बाईक पर सवार होकर निकले मंत्री केदार कश्यप

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  • देखते बन रहा था युवाओं और ग्रामीणों का उत्साह
  • कई किमी तक बाईक चलाई मंत्री कश्यप ने

अर्जुन झा

जगदलपुर अपने जोशीले विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप को आज तिरंगा लहराते हुए बाईक की सवारी करते देख ग्रामीण खुशी से फुले नहीं समा रहे थे। मंत्री केदार कश्यप के जोश को देख ग्रामीण और युवा भी जोश से लबरेज हो उठे। कारवां बढ़ता गया और भीड़ इतनी हो गई कि एक नया इतिहास बन गया।

वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में रविवार को नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के फरसागुड़ा भानपुरी मंडल में युवा मोर्चा ने तिरंगा यात्रा निकाली। वन मंत्री केदार कश्यप स्वयं बाईक चलाते हुए तिरंगा रैली में शामिल हुए। तिरंगे झंडे वाली बाईक चलाते हुए मंत्री केदार कश्यप के साथ सैकड़ों युवा दोपहिया वाहनों पर सवार युवक और बुजुर्ग तिरंगा रैली के सहचर बने। सभी वाहनों में तिरंगा लहरा रहा था। महिला जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी भी स्कूटी और अन्य मोपेड पर सवार होकर चल रही थीं। आंखों पर काला चश्मा लगाए वन मंत्री केदार कश्यप भारत माता के जयकारे लगवाकर रैली में शामिल लोगों और रैली के रास्ते में मिलने वाले ग्रामीणों में उत्साह का संचार कर रहे थे। मंत्री केदार कश्यप को बाईक चलाते देख भानपुरी, फरसागुड़ा, आमाबाल, देवड़ा, सोनारपाल, तारापुर आदि गांवों के ग्रामीण आश्चर्य में पड़ गए थे। इसके साथ ही गांवों में खड़े ग्रामीण भी केदार कश्यप को तिरंगा लिए देख भारत माता की जय जयकार करने लगे। कई जगहों पर तिरंगा यात्रा पर फूल भी बरसाए गए। तिरंगा

यात्रा फरसागुडा स्थित भाजपा कार्यालय से मेन रोड होती हुई भानपुरी, सिवनी चौक से आमाबाल, देवड़ा, सोनारपाल, तारापुर होती हुई पार्टी कार्यालय पहुंच कर समाप्त हुई। इस दौरान ग्रामीणों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि ऎसी तिरंगा रैली तीन दिनों तक चलेगी। कार्यकर्ता रोज रैली निकाल कर इसमें ग्रामीणों को जोड़ें और हर घर में तिरंगा लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करें।तिरंगा यात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष रूपसिंग मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, शांति कश्यप, संतोष बघेल, विजय पांडे, खितेश्वरी मंडावी, प्रवीण सांखला, खितेश मौर्य, शेख असगर, तुलसू कश्यप, राम प्रसाद मौर्य, शीबू शाह, कीर्ति पाढ़ी, रमेश दीवान सहित सैकड़ों युवा शामिल हुए।

भाजपा ने आरंभ की तिरंगा यात्रा, देश की आन बान शान है तिरंगा: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव

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  •  तिरंगा यात्रा और हर घर तिरंगा अभियान का किरण देव ने किया शुभारंभ
  • तिरंगा चौक में बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर निकाली गई तिरंगा यात्रा

जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को तिरंगा यात्रा का शुभारंभ किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने नगर के तिरंगा चौराहे पर स्थित बाबा साहेब डा.अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सैकड़ों कार्यकर्ताओं व नागरिकों के साथ तिरंगा यात्रा निकाली।

गगनभेदी नारों व देशभक्ति गीतों के बीच पूर्ण भव्यता के साथ निकली तिरंगा यात्रा श्रीराम मंदिर में संपन्न हुई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि है और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारा गौरव, हमारी आन बान शान है। प्रत्येक नागरिक अपने घरों में तिरंगा लगाएं और टोली बना कर तिरंगा यात्रा निकालें। भारतीय जनता पार्टी स्वतंत्रता दिवस के पूर्व तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा आयोजित कर रही है। इसी तारतम्य में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने स्थानीय अंबेडकर वार्ड में तिरंगा यात्रा का शुभारंभ किया। मदन मोहन मालवीय वार्ड, रविन्द्र नाथ टैगोर वार्ड व बलीराम कश्यप वार्ड में सैकड़ों कार्यकर्ताओं व नागरिकों ने तिरंगा यात्रा निकाली। जगह जगह लोगों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। बलीराम कश्यप वार्ड स्थित श्रीराम मंदिर पहुंच कर तिरंगा यात्रा संपन्न हुई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने श्रीराम मंदिर में पूजा अर्चना की। अपने संबोधन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। घर घर तिरंगा लगाने आमजन से कहा जा रहा है। तिरंगा यात्रा राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। देश के प्रति समर्पण भाव व देशभक्ति की भावना से तिरंगा यात्रा व घर घर तिरंगा का आयोजन हो रहा है। जिसमें प्रत्येक नागरिक बढ़चढ़ कर सहभागी बनें।

महापौर सफीरा साहू ने आभार प्रदर्शन किया। तिरंगा यात्रा में प्रमुख रूप से पूर्व विधायक डा. सुभाऊ कश्यप, जिला प्रभारी जी वेंकट, विद्याशरण तिवारी, कमलचंद भंजदेव, योगेन्द्र पाण्डेय, श्रीनिवास मिश्रा, श्रीधर ओझा, नवीन विश्वकर्मा, रामाश्रय सिंह, वेदप्रकाश पाण्डेय, संजय पाण्डेय, रजनीश पाणिग्रही, आलोक अवस्थी, सुरेश गुप्ता, मनोहर तिवारी, आर्येन्द्र आर्य, संग्राम सिंह राणा, रंजीत पाण्डेय, अनिल शर्मा, यशवर्धन राव, निर्मल पाणिग्रही, भारती श्रीवास्तव, राजपाल कसेर, दिगंबर राव, त्रिवेणी रंधारी, ममता पोटाई, नीलम यादव, मोतीराम बघेल, बी जयराम, राजेश श्रीवास्तव, प्रकाश झा, नरेंद्र पाणिग्रही, विक्रम सिंह यादव, आशुतोष पाल, मनोरंजन राय, प्रकाश दुग्गड़, रिंकू पाण्डेय, रामहरि पाण्डेय, छबिलेश्वर जोशी, शैलेष श्रीवास्तव, सुनील दास, मनी विक्रम, गोविंद ईनाणी, हरीश पारेख, केतन महानंदी, रौशन सिसोदिया, योगेश पाणिग्रही, दंतेश्वर राव, योगेश मिश्रा आदि सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता व नागरिक शामिल रहे।

वक्फ संशोधन कानून से देश के मुसलमानों का भला होगा : इब्राहिम

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चिखलाकसा /दल्ली राजहरा -भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नगर पंचायत चिखलाकसा के उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम ने केन्द्र की एन.डी.ए. सरकार द्वारा वक्फ अधिनियम में किये गये संशोधन का स्वागत करते हुए कहा कि, यह कानून देश के गरीब मुसलमानों को न्याय देने वाला कानून है। वक्फ एक्ट में संशोधन एवं सुधार समय समय के अनुसार होते रहना चाहिये, वर्तमान में जो विसंगतिया थी उसे दूर किये जाने के लिये यह कानून लाया जा रहा है, जिसके लिए हम माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं एन.डी.ए. सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस कानून का स्वागत करते है। इब्राहिम ने कहा कि वक्फ बोर्ड गरीब मुसलमानों के उत्थान एवं कल्याण के लिये बनाया गया है लेकिन वक्फ बोर्ड के एक्ट की शक्तियों का सिर्फ दुरूपयोग ही हो रहा है जिससे देश के संघराज्य एवं राज्य वक्फ बोडों

अधिकार व शक्तियां प्रदान करनेको प्राप्त असीमित अधिकार एवं शक्तियों की के कारण यह मजहबी जमींदारी, भ्रष्टाचार एवं भूमाफियाओ को संरक्षण दे रहा है। वर्तमान में जो वक्फ एक्ट है वो पूरी तरह से निरंकुश है और इससे आम मुसलमानों को कोई फायदा नही हो रहा है। संशोधित वक्फ कानून में जमींदारी की दादागिरी तथा भूमाफिया एवं अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसने वाला कानून है। वक्फ संपत्तीयों के मामलों में शासन को

 

वाला कानून है। अब्दुल इब्राहिम ने आगे कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 09 एवं 14 में बदलाव से बोर्ड और अधिक सशक्त एवं प्रभावशील होगा, वक्फ संपत्ती का पंजीयन सत्यापन से होगा जिससे वक्फ कानून 2013 के दुरूपयोग को रोका जा सकेंगा। कलेक्टर को वक्फ संपत्ति के मामले में शामिल किये जाने से वक्फ बोर्ड का कार्य और अधिक प्रभावशील होगा। नये संशोधन कानून से मुस्लिम समाज के गरीब, तलाकशुदा, विधवा के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिये वक्फ बोर्ड कार्य कर सकेगा। पूर्व में भी काँग्रेस सरकार द्वारा वक्फ एक्ट में समय समय पर संशोधन हुआ है। वक्फ बोर्ड के पास 8.7 लाख करोड़ की संपत्ती, 9.4 लाख एकड़ के लगभग जमीन है। इसका सदुपयोग होने से निःसंदेह देश के गरीब मुस्लिम समाज को सीधा फायदा होगा व उनकी शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

डौंडी लोहारा विधान सभा के सरपंच तथा कार्यकर्ता ने की लाल निवेद्र सिंह टेकाम जी के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री जी से की सौजन्य मुलाकात

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डौंडीलोहारा :- ग्राम पंचायत सहगांव के प्रतिनिधि सरपंच सुंदर सिंह यामले उपसरपंच भूषण लाल देवांगन सचिव लच्छन लाल पटेल ने अपनी स्थानीय मांग को लेकर राजमहल के कुंवर लाल निवेंद्र सिंह टेकाम के नेतृत्व मे सौजन्य मुलाकात किए |

ज्ञात हो कि युवराज़ निवेन्द्र टेकाम जब से राजनीति में आये है तब से जमीनी स्तर पर लोगो की बातों को सुनकर सदैव उनकी समस्याओं का निदान करवाने में शासन प्रशासन स्तर पर उनके सभी कार्य का निराकारण करवाने के लिये प्रयासरत रहते है,

इससे पूरे डोण्डी लोहारा विधान सभा क्षेत्रो में खास करके वनचल क्षेत्रो में बाहोत ही समस्याओं का अंबार लगा रहता है लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से बढ़ती दूरियों के कारण अपनी समस्याओ अपनी बात को ऊपर शासन प्रशासन तक नही रख पाते , युवराज टेकाम की बढ़ती लोकप्रियता से और मिलन सार व्यक्तित्व के कारण आज उनके प्रखर वाकपटुता, मददगार करने की नरेतृत्व क्षमता से लोगो और जनताओ को काफी सरलता एवं सहज बनाती है

इस अवसर पर सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता हरीश बर्मन निखिल शर्मा व मनीष राजपूत उपस्थित थे

श्री टेकाम ने कहा की मेरे माता पिता सदैव आदिवासी वनाचल के लोगो तथा सभी वर्ग के नागरिक कार्यकर्ता सभी को परिवार समझ इस क्षेत्र को उचाइयों तक ले गए है वैसे ही पूरे क्षेत्र की जनता मेरा परिवार है और उनके लिए हर संभव उनके लिए मैं खड़ा रहूंगा और लड़ाई लड़नी पड़े उसके लिए भी मैं हमेशा अग्रशर रहूंगा

धर्माँतरण की वजह से संकट में आदिवासियों का अस्तित्व, सांसद महेश कश्यप और समाज के लोग हैं चिंतित

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  •  लगातार घटती जा रही है है जनजाति की आबादी
  •  धर्म, परंपराओं और संस्कृति का भी पराभव
    -अर्जुन झा-
    बकावंड आदिम जनजाति में शुमार आदिवासियों की आबादी लगातार घटती जा रही है। इसी के साथ आदिम संस्कृति, धर्म और परंपराओं का भी तेजी से पराभव होता जा रहा है। गांवों में देवगुड़ी व मातागुड़ी की की संख्या कम हो रही है और प्रार्थना घरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसे लेकर आदिवासी समाज के लोग तथा बस्तर के सांसद महेश कश्यप चिंतित हैं। आदिवासियों की घटती आबादी के मूल में जन्म दर या मृत्यु दर उतने बड़े कारक नहीं हैं, जितना बड़ा कारक धर्मान्तरण है।
    आदिवासियों की आबादी का क्षरण सिर्फ बस्तर संभाग में हो रहा है, ऎसी बात नहीं है, बल्कि रायगढ़, सरगुजा, जशपुर, कोरिया, बालोद, अंबागढ़ चौकी, मोहला, मानपुर, कवर्धा समेत तमाम आदिवासी बाहुल्य जिलों में भी तेजी से हो रहा है। चिंता वाली बात तो यह है कि विशेष संरक्षित पहाड़ी कोरवा, कमार और बैगा जनजाति की भी जनसंख्या लगातार घट रही है। कुछ तथाकथित शोधों और सर्वेक्षणों के हवाले से कहा जाता है कि आदिवासियों में मृत्यु दर ज्यादा है और जन्म दर कम, प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत बढ़ने के कारण आदिवासियों की संख्या घट रही है। मगर हमारे जमीनी सर्वेक्षण में जो तथ्य उभर कर आए हैं, वे बेहद चौकाने वाले हैं। मूल वजह जो सामने आई है, वह है धर्मान्तरण। बस्तर संभाग के सभी जिलों के साथ ही ऊपर लिखे तमाम जिलों में भी एक समुदाय विशेष का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। यह समुदाय चमत्कारों और प्रार्थना से हर मर्ज को दूर करने का आडंबर करके आदिवासियों को प्रभावित करने और उन्हें अपने धर्म में शामिल करने में लगातार कामयाब होता जा रहा है। आदिवासी तो भोले भाले होते ही हैं, वे जल्द ही ऐसे भ्रमजाल में उलझ जाते हैं। धर्म परिवर्तन कराने के बाद आदिवासियों को उनके मूल धर्म से पूरी तरह विमुख होने के लिए बाध्य कर दिया जाता है। उन्हें उनकी परंपराओं और प्राचीन संस्कारों से भी दूर कर दिया जाता है। जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत जिन देवी देवताओं की आदिवसी पूजा करते हैं, उन देवी देवताओं की प्रतिमाएं और तस्वीरें तक उनके घरों से हटवा दी जाती हैं, महिलाओं के बिंदी लगाने, मांग में सिंदूर भरने और चूड़ियां पहनने तक पर भी पाबंदी लगा दी जाती है। आदिवासी और अन्य हिंदू समाज में शवों का दाह संस्कार किया जाता है, मगर धर्मान्तरित आदिवासी के शव को दफनाना पड़ता है। इसे लेकर बस्तर में कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है।

गांव -गांव में प्रार्थना घर
बस्तर संभाग के अधिकतर गांवों में प्रार्थना घरों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। लोगों के देवगुड़ी और मातागुड़ी में जाकर पूजा करने का चलन कम होता जा रहा है। हर रविवार को इन प्रार्थना घरों में प्रार्थना के नाम पर चमत्कारों चंगाई सभा का नाटक चलता है। इसे देख और भी लोग इस समुदाय विशेष से जुड़ते चले जाते हैं। लोगों को भरोसा दिलाया जाता है कि प्रभु के चमत्कार से हर रोग दूर हो जाता है, हर बाधा टल जाती है। कई स्थानों पर सेवा की आड़ में भी धर्मान्तरण कराया जा रहा है।

धर्मान्तरण ही मुख्य वजह: महेश
गत दिवस बकावंड में विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भी आदिवासी समाज के प्रमुखों ने आदिवासियों की घटती आबादी पर चिंता जताई थी। बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप भी बकावंड आए थे। इस दौरान उन्होंने नई दुनिया से चर्चा में आदिवासी समुदाय की घटती जनसंख्या के लिए धर्मान्तरण को ही जिम्मेदार माना है। श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर संभाग में आदिवासी तेजी से धर्मान्तरित किए जा रहे है। पिछले कांग्रेस शासनकाल में इसे बढ़ावा मिलता रहा। धर्मान्तरण हमारे आदिवासी समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है। समाज की युवा पीढ़ी और बड़े बुजुर्गों को इस ओर ध्यान देना होगा, अन्यथा हम भी जल्द ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे। सांसद महेश कश्यप ने धर्मान्तरण पर रोक के लिए शासन स्तर पर भी पहल पर जोर दिया।

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